Showing posts with label इब्ने सफी. Show all posts
Showing posts with label इब्ने सफी. Show all posts

Sunday, 30 March 2025

639. धरती का शैतान- इब्ने शफी

आओ पढें एक नकली उपन्यास
कर्नल विनोद, कैप्टन हमीद और मूर्ख कासिम का  उपन्यास
धरती का शैतान- इब्ने सफी

कर्नल विनोद ।
एशिया का माना हुआ जासूस-  फादर ऑफ हार्ड स्टोन के नाम से विख्यात कर्नल विनोद इस समय होटल चाचा पाॅल के काउंटर पर खड़ा था । उसने अपनी कुहनी काउन्टर पर टेक रखी थी ओर टेलीफोन रिसीवर कान से लगा रखा था। दूसरे हाथ से उसने अपना दूसरा कान दबा रखा था क्योंकि हॉल में एक क्रिश्चियन डांसर मिस रूबी पूरे जोशो-खरोश से नाच रही थी और वहां बैठे लोग किस्म-किस्म की आवाजें निकालकर अपने दिल की लगी बुझाने की कोशिश कर रहे थे। हॉल का वातावरण पूरी तरह गुण्डागर्दी और अश्लीलता से भरा हुआ था। लोग शराब पी रहे थे। खा रहे थे और सुल्फे को सिगरेटों के कश चल रहे थे।
       फोन के दूसरी ओर से बोलने वाला यकायक रुक गया था । विनोद ऊंची आवाज में हैलो हैलो कहे जा रहा था, लेकिन उसने इसके बाद किसी  जवाब नहीं दिया। आखिर यह हुआ क्या ? साथ ही दूसरी ओर से बोलने वाले ने क्रैडिल पर फोन अभी रखा भी नहीं था ।
   आखिरकार कर्नल विनोद ने डायल पर नम्बर घुमाया और टेलीफोन आपरेटर से पूछा-
'हैलो...आपरेटर !!
'यस सर।' एक जनाना आवाज गूंजी।
'अभी किस नम्बर से बात हो रही थी ?'
'जो किसकी ?' (धरती का शैतान- इब्ने शफी  उपन्यास का प्रथम पृष्ठ)



  यह उपन्यास मित्र रतन चौधरी ने भेजा था और वह भी Xerox करके । लेकिन पढने का समय मिला भी लम्बे समय पश्चात यानि लगभग तीन-चार वर्षों बाद । और जब इब्ने शफी साहब का उपन्यास 'धरती का शैतान' पढना आरम्भ किया तो पहले तो यह भी समझ में नहीं आया की आखिर चल क्या रहा है ?

Wednesday, 22 February 2023

556. खून की बौछार- इब्ने सफी

क्या था कुएं का राज
खून की बौछार- इब्ने सफी
विनोद- हमीद शृंखला

   हिंदी रोमांच कथा साहित्य में इब्ने सफी साहब अपने समय के श्रेष्ठ कथाकार रहे हैं। एक युग उनके नाम रहा है।  रोमांच और रहस्य का मिश्रण उनके उपन्यासों को पढने के लिए पाठकवर्ग को विवश कर देता था।
   इब्ने सफी द्वारा लिखा गया 'खून की बौछार' भी एक रहस्य और रोमांच से परिपूर्ण कथानक है।
ठाकुर धरमपाल सिंह अपने एक अतिथि रमेश के साथ बाग में बैठे थे। अधेड़ावस्था के रमेश के साथ ठाकुर साहब की मुलाकात भी एक रहस्यमयी कहानी की तरह है। देश -विदेश भ्रमण के शौकीन रमेश कुमार ठाकुर साहब और उनकी पुत्री रंजना को विभिन्न किस्से सुना रहे थे।

अभी ये लोग बातें कर ही रहे थे कि सहसा सारे बाग में प्रकाश हो गया। रंजना ने पलट कर देखा और चीख मार कर उछल पड़ी ।
   पुराने अन्धे कुएं से अंगारों का फव्वारा सा छूट रहा था । चिंगारियाँ अधिकाधिक ऊंचाई तक जा रही थी । एक विचित्र प्रकार की झन्नाटेदार आवाज से सारा बाग गूंज रहा था । (उपन्यास अंश- खून की बौछार- इब्ने सफी)

Saturday, 18 December 2021

487. काले नाग- इब्ने सफी

कहानी क्वार्टर नम्बर 18 की
काले नाग- इब्ने सफी

जासूसी उपन्यास साहित्य में इब्ने सफी का विशिष्ट स्थान है‌। इब्ने सफी अपने समय के लोकप्रिय उपन्यासकार रहे हैं। वे मूलतः उर्दू के लेखक थे, उनके उपन्यास जितने उर्दू में चर्चित रहे हैं उतने ही अनुवादित होकर हिंदी में भी।
    इब्ने सफी जी का एक उपन्यास है 'काले नाग'। उपन्यास का शीर्षक रोचक है और इसी रोचकता के चलते यह पढा गया।
    कथा नायक इंस्पेक्टर विनोद है और उसके साथ है सार्जेंट हमीद। दोनों मिलकर 'काले नाग' रहस्य को सुलझाते हैं। 

सन् 1832 के दिसंबर माह की आठ तारीख थी।
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे, ठण्ड अपने यौवन पर थी।

  विनोद और हमीद इस ठण्डी रात में रूपनगर का सफर करते हैं। दोनों को क्वार्टर नम्बर 18 तक पहुंचना होता है। ज्वर से पीडित विनोद इस ठण्ड में भी अपने कर्तव्य से विमुख नहीं होता। बस उसे किसी भी हालत में क्वार्टर नम्बर 18 तक पहुंचना था।
फिर अचानक चौंक कर उसने कलाई घड़ी की‌ ओर देखा और बोला-
"जल्दी करो। हमें दस-पांच मिनट पहले ही पहुंचना चाहिये।"  

Sunday, 17 October 2021

465. आवाज का भेद- इब्ने सफी

कैप्टन विनोद- हमीद का कारनामा
आवाज का भेद- इब्ने सफी

   जासूसी उपन्यास साहित्य में इब्ने सफी युग रोचक उपन्यासों के लिए जाना जाता है। इब्ने सफी मूलतः उर्दू उपन्यासकार थे, इनके उपन्यासों का जितना विस्तृत बाजार उर्दू में था उस से कहीं ज्यादा हिंदी में था।
    इब्ने सफी के उपन्यास नकहत प्रकाशन के अन्तर्गत जासूसी दुनिया पत्रिका में प्रकाशित होते थे, जिनका अनुवाद प्रेम प्रकाश जी द्वारा किया जाता था। 

    'आवाद का भेद' इब्ने सफी जी का कैप्टन विनोद और हमीद सीरीज का एक रोचक उपन्यास है। उर्दू में कैप्टन फरीदी होता है हिंदी अनुवाद में फरीदी को विनोद कर दिया जाता है। हालांकि कुछ उपन्यासों में हिंदी में‌ भी 'कैप्टन फरीदी और हमीद' ही मिलते हैं। इनका एक और साथी है कासिम। कासिम एक हास्य पात्र है। उसका जासूसी में कोई योगदान नहीं होता।
        प्रस्तुत उपन्यास के आरम्भ में संपादकीय (संपादक- अब्बास हुसैनी) में‌ लिखा प्रस्तुत उपन्यास में कासिम का हास्यपूर्ण अंदाज खूब मिलेगा।
   कहानी का आरम्भ हमीद और कासिम से होता है। दोनों कुछ दिनों के लिए यात्रा पर निकले हैं। रास्ते में इनकी मुलाकात शाहिदा और उसके भाई नासिर तथा इनकी माँ से होती है। शाहिदा एक हँसमुख लड़की है।
  वह अपनी माँ से कहती है-
"यह भी मेरे बाप के बेटे हैं- आदम‌ की औलाद। मैं तो इनको हजारों सालों से जानती हूँ।" (पृष्ठ-19)
लेकिन वहाँ की कुछ घटनाएं हमीद को आश्चर्यजनक लगती हैं। जैसे हमीदा का बिल्ली की आवाद से हद से ज्यादा डरना।
       लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी हमीद इस आवाज के  रहस्य को नहीं समझ पाता। आगे सफर के दौरान हमीद और कासिम गायब हो जाते हैं। 

Friday, 3 July 2020

345. सांपों‌ के शिकार- इब्ने सफी

 इमरान सीरीज का रोचक उपन्यास
सांपों‌ के शिकारी- इब्ने सफी
        हार्पर काॅलिंस ने इब्ने सफी के प्रसिद्ध पात्र 'इमरान' सीरिज के उपन्यास जे दो सैट प्रकाशित किये थे। जिसमें कुल सात उपन्यासों का संकलन था। यह प्रकाशन संस्थान का बहुत सराहनीय प्रयास था। उम्मीद है की अन्य प्रकाशन संस्थान इस कार्य को बढावा देंगे।
         दिल्ली के प्रसिद्ध 'रविवार पुस्तक बाजार' से ये सैट बहुत सस्ते में उपलब्ध हो गये थे। इस संकलन के उपन्यास समय-समय पढता रहा हूँ, दोनों में से एक-एक उपन्यास रह गया था जो 'मई-जून-2020'के ग्रीष्मकालीन अवकाश में पढे। दोनों उपन्यास रोचक हैं। वैसे भी इमरान सीरीज के हास्यप्रद उपन्यास काफी प्रसिद्ध रहे हैं।

          'सांपों के शिकारी' इमरान सीरीज का रहस्य-रोमांच से परिपूर्ण उपन्यास है। यह उपन्यास समाज में बैठे सफेदपोश लोग के काले धंधों से से समाज का विनाश कर रहे हैं। ये वो साँप आस्तिन के साँप हैं जो अपनों को ही खत्म कर देते हैं।
'कोबरा मैंशन' नामक साँपों की फर्म है जिसके पास हर तरह के साँप पाये जाते हैं। उपन्यास इसी फर्म और साँपों के इर्दगिर्द कुडली मार कर बैठा है। 

 

344. खौफ का सौदागर- इब्ने सफी

एक कहानी खौफ की
खौफ का सौदागर- इब्ने सफी

इब्ने सफी उपन्यास साहित्य में अपने जासूसी उपन्यासों के लिए लोकप्रिय साहित्य में हमेशा स्मरण रहेंगे। इनके छोटे कलेवर के परंतु रोचक उपन्यास पाठकों का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम होते थे।
        हालांकि ये उपन्यास मुख्यतः जासूस विशेष पर ही केन्द्रित होते थे, और खलनायक का प्रभाव ज्यादा होता था पर उपन्यास में प्रत्यक्ष भूमिका कम होती थी।  

       'खौफ का सौदागर' भी एक रहस्यम व्यक्ति की कहानी है जिसका एक क्षेत्र विशेष में 'खौफ' होता है और खौफ भी यहाँ तक की पुलिस को वहाँ एक बोर्ड तक लगवाना पड़ता है, कि यहाँ खतरा है।
रात के वक्त के वक्त वहाँ सन्नाटा छा जाता है और गलती से भी अगर कोई वहाँ चला गया तो वह रहस्यमयी शख्स कत्ल करने से भी नहीं चूकता।
"बाहर फैले हुए अंधेरे में एक खतरनाक आदमी की हुकूमत है और वह आदमी कभी-कभी यूं ही खेल-खेल में किसी न किसी को जरूर कत्ल कर देता है।"
- वह रहस्यमयी व्यक्ति कौन है?
- उसका खौफ क्यों है?
- वह कत्ल क्यों करता है? 

Thursday, 2 July 2020

341. काली करतूत- इब्ने सफी

दस कत्ल और बागोटा का रहस्य
काली करतूत- इब्ने सफी, जनवरी-1975

जासूस एक्स टू अली इमरान को जब होश आया तो वह एक अनजान औरत के साथ एक कार में था। और उस औरत का दावा था की वह अली इमरान की पत्नी है। और वह अली इमरान को उसके घर भी ले गयी।
    होटल का मालिक ठाकुर एक बदमाश व्यक्ति है। अली इमरान के घर से निकली वह औरत ठाकुर के होटल में आती है। और अली इमरान का एक शागिर्द सफदर जब उस औरत तक आशा नामक लड़की के माध्यम से पहुंच  बनाता है तो वह औरत अपने कमरे में मृत पायी जाती है।  और न तो होटल मालिक ठाकुर बचता है और न ही आशा।

Kali kartoot ibne safi

अली इमरान सोचता है-
एक व्यक्ति उससे लिफ्ट मांगता है। फिर वह व्यक्ति उसे धोखा देकर बेहोश कर देता है। होश आने पर एक लड़की उसके साथ होती है जो उसे अपना पति बताती है। जब वह अपने होटल में पहुंचती तो उसे मार डाला जाता है। फिर ठाकुर जैसे आदमी की हत्या ? ठाकुर के बारे में तो यह कहा जाता था कि उसका दूसरा नाम-मौत है ?
वह लड़की क्या चाहती थी ? 
 (उपन्यास अंश)
एक-एक कर सब मारे जाते हैं।
आखिर क्यों?

Tuesday, 17 December 2019

256. नीले परिन्दे- इब्ने सफी

दहशत के परिन्दे
नीले परिन्दे- इब्ने सफी

इमरान सीरिज-06

सन् 2019 का दिसंबर माह महान लेखक इब्ने सफी जी को समर्पित रहा। इस माह मैंने इब्ने सफी साहब के ग्यारह उपन्यास पढे जिसमें से आठ उपन्यास 'फरीदी-हमीद' सीरिज के और तीन उपन्यास 'इमरान' सीरिज के। निम्न लिंक पर आप अन्य उपन्यासों की समीक्षा भी पढ सकते हैं।
चट्टानों में आग
खौफनाक इमारत
नकली नाक
चालबाज बुढा
कुएं का राज
फरीदी और लियोनार्ड
तिजोरी का रहस्य
औरतफरोश का हत्यारा
जंगल में लाश
दिलेर मुजरिम
इब्ने सफी उपन्यास समीक्षा

अब चर्चा करते हैं‌ इब्ने सफी साहब के इमरान सीरिज के उपन्यास 'नीले परिन्दे' की।
सरदारगढ़ पहाड़ी इलाक़ा था। अब से पचास साल पहले यहाँ ख़ाक उड़ती रहती थी, लेकिन मिट्टी के तेल का भण्डार मिलने के बाद यहाँ अच्छा-ख़ासा शहर बस गया था।
       यह कहानी सरदारगढ की है। वहाँ के नवाबजादे जमील पर एक नीले परिन्दे ने आक्रमण किया यह घटना 'पेरिसियन नाइट क्लब' की है और अगले दिन जमील के चेहरे पर सफेद दाग उभर आये।

Monday, 16 December 2019

255. चट्टानों में आग- इब्ने सफी

कर्नल, ली यूका और इमरान की कथा
चट्टानों में आग- इब्ने सफी
इमरान सीरिज-02
www.sahityadesh.blogspot.in
दिसंबर में इब्ने सफी उर्फ इसरार अहमद साहब के उपन्यास पढने का क्रम चल रहा है। उनके आरम्भ के 'जासूसी दुनिया' के 'फरीदी-हमीद' सीरिज के उपन्यास पढे और अब इमरान सीरिज के कुछ उपन्यास इसी क्रम में पढे जा रहे हैं।
'चट्टानों में आग' इमरान सीरिज का उपन्यास पढा जो मुझे इब्ने सफी के अब तक पढे गये उपन्यासों में से सबसे अच्छा लगा। इब्ने सफी के फरीदी सीरिज के उपन्यासों में घटनाक्रम जहां ज्यादा उलझन वाला और खल पात्र के अजीबो गरीब हरकते होती हैं वैसा इस उपन्यास में कुछ भी नहीं था।

       अब कहानी पर चर्चा करते हैं। यह कहानी है रिटायर्ड कर्नल जरग़ाम की।- वह अधेड़ उम्र का, मज़बूत शरीर वाला रोबदार आदमी था। मूँछें घनी और नीचे की तरफ़ को थीं। बार-बार अपने कन्धों को इस तरह हिलाता था जैसे उसे डर हो कि उसका कोट कन्धों से लुढ़क कर नीचे आ जायेगा। यह उसकी बहुत पुरानी आदत थी। वह कम-से-कम हर दो मिनट के बाद अपने कन्धों को ज़रूर हिलाता था।

254. खौफनाक इमारत- इब्ने सफी

किस्सा खूनी इमारत का
खौफनाक इमारत- इब्ने सफी
इमरान सीरीज-01

इब्ने सफी साहब द्वारा लिखित 'खौफनाक इमारत' इमरान सीरीज का पहला उपन्यास है।
        इमरान सूरत से ख़ब्ती नहीं लगता था। ख़ूबसूरत और दिलकश नौजवान था। उम्र सत्ताईस के लगभग रही होगी! सुघड़ और सफ़ाई-पसन्द था। तन्दुरुस्ती अच्छी और जिस्म कसरती था। अपने शहर की यूनिर्विसटी से एम.एस.सी. की डिग्री ले कर इंग्लैण्ड चला गया था और वहाँ से साइन्स में डॉक्टरेट ले कर वापस आया था। उसका बाप रहमान गुप्तचर विभाग में डायरेक्टर जनरल था। इंग्लैण्ड से वापसी पर उसके बाप ने कोशिश की थी कि उसे कोई अच्छा-सा ओहदा दिला दे, लेकिन इमरान ने परवा न की।
www.svnlibrary.blogspot.in
        इमरान भी गुप्तचर विभाग में आ गया।
यह कहानी है एक खौफनाक इमारत की। एक ऐसी इमारत जो बंद है, जिसके विषय में बहुत सी अफवाहे फैली हुयी हैं।
इस इमारत की बनावट पुराने ढंग की थी। चारों तरफ़ सुर्ख़ रंग की लखौरी ईंटों की ऊँची-ऊँची दीवारें थीं और सामने एक बहुत बड़ा फाटक था जो ग़ालिबन सदर दरवाज़े के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा होगा।
                  और एक समय आता है उस इमारत में एक के बाद एक कत्ल होने आरम्भ हो जाते हैं। इमारत और भी ज्यादा कुख्यात हो जाती है।- ‘यह इमारत पिछले पाँच बरसों से बन्द रही है। क्या ऐसी हालत में यहाँ एक लाश की मौजूदगी हैरत-अंगेज़ नहीं है।’

Saturday, 14 December 2019

253. नकली नाक- इब्ने सफी

अंतरराष्ट्रीय अपराधी जाबिर से फरीदी का मुकाबला।
नकली नाक- इब्ने सफी
एक उपन्यास दो शीर्षक से- 'नकली नाक' और 'नंगी लाश'

कल्पना और जानकारी के घोल से इब्ने सफ़ी ने अपने यादगार जासूसी उपन्यासों का लिबास तैयार किया। कई क़िस्से और किरदार तो चुनौती की तरह आये, मसलन जाबिर जो ‘चालबाज़ बूढ़ा’ के अन्त में फ़रीदी के हाथ से फिसल कर निकल भागा था। इसी जाबिर से ‘नक़ली नाक’ में हम दोबारा रू-ब-रू होते हैं। ‘नक़ली नाक’ बिला शक इब्ने सफ़ी के उन उपन्यासों में शामिल है जिसकी लोकप्रियता कभी कम नहीं होगी और वह आज भी आपको लुभायेगा। आज़मा कर देखिए। इन्स्पेक्टर फ़रीदी के पसन्दीदा मुहावरे में कहें तो न घोड़ा दूर, न मैदान। (ईबुक से)
'नकली नाक' इब्ने सफी साहब का जासूसी दुनिया सीरिज का आठवां उपन्यास है। यह उपन्यास एक कुख्यात अंतरराष्ट्रीय अपराधी जाबिर के कुकारनामों पर आधारित है। फरीदी को एक जाबिर के रामगढ में होने की सूचना मिलती है और वह हमीद के साथ रामगढ को निकल पड़ता है।
‘‘आख़िर आपको अचानक रामगढ़ की क्यों याद आ गयी?’’ हमीद बोला।
‘‘जाबिर...!’’
‘‘ओह... तो आप उसका पीछा नहीं छोड़ेंगे?’’
‘‘मैं क़सम खा चुका हूँ।’’
‘‘क्या आपको उसकी मौजूदगी की कोई पक्की ख़बर है?’’
‘‘नहीं...!’’
‘‘यानी...!’’
‘‘यहाँ कुछ क़िस्से ऐसे हुए हैं जिनकी बिना पर मैं सोचने पर मजबूर हुआ हूँ।’’


252. चालबाज बूढा- इब्ने सफी

जासूसी दुनिया अंक-07
चालबाज बूढा-  इब्ने सफी, उपन्यास

"गेट पर लाश"
"क्या मतलब?"
"मतलब यह की हमारे गेट पर एक लाश पड़ी हुई है।"
"गेट पर...?" फरीदी ने जल्दी उठते हुए कहा।
"अरे..." फरीदी बरामदे में पहुंच कर ठिठक गया। फिर तेजी से चलता हुआ गेट पर आया। लाश गेट से मिली हुयी बाहर की तरफ पड़ी थी। फरीदी ने जल्दी से गेट को खोला। यह एक नौजवान की लाश थी।
....

उक्त दृश्य है इब्ने सफी के 'फरीदी-हमीद' सीरीज के उपन्यास 'चालबाज बूढा' का।
शहर में एक के बाद एक कत्ल हो रहे थे और लाश प्रसिद्ध जासूस फरीदी के गेट पर पायी जाती थी।
अभी पहली लाश की पहेली सुलझ भी न पायी थी की एक और लाश फरीदी के गेट पर पायी गयी। फरीदी- हमीद के साथ-साथ पुलिस भी हैरान थी की यह लाश का क्या चक्कर है।
सिविल पुलिस के थकहार जाने के बाद यह मामला डिपार्टमेंट आॅफ इन्वेस्टिगेशन को सुंपुर्द कर दिया गया।
फरीदी इस केस का इंचार्ज बन तो गया। लेकिन अभी तक वह किसी रास्ते को चुन नहीं सका। 


251. बहरूपिया नवाब - इब्ने सफी

लौट आये नवाब......
बहरूपिया नवाब- इब्ने सफी, इमरान सीरीज
एक उपन्यास दो शीर्षक- 'बहरुपिया नवाब' और 'फांसी का फंदा'

कुछ घटनाएं हमारे आस पास ऐसी घटित होती हैं की हम उस घटना के कारण चकित रह जाते हैं। हम कल्पना भी नहीं कर सकते की ऐसा भी कुछ आश्चर्यजनक घटित हो सकता है। लेकिन जासूस के सामने भी एक ऐसी घटना आयी की वह हैरत रह गया।
         यह घटना है एक ऐसे व्यक्ति की जिसे मृत घोषित कर दिया गया और उसी लाश को दफन कर दिया गया लेकिन कुछ समय पश्चात वही व्यक्ति पुन: हाजिर हो गया।
यह व्यक्ति नवाब साजिद का चाचा नवाब हाशिम था।
- हाशिम को दोबारा सामने आये हुये तकरीबन एक हफ्ता गुजर चुका था। इस हैरत अंगेज वापसी की शोहरत न सिर्फ शहर, बल्कि पूरे प्रदेश में हो चुकी थी। यह अपनी तरह का एक ही हंगामा था। गुप्तचर विभाग वालों‌ की समझ में नहीं आता था और कि वे इस सिलसिले में क्या करें। फिलहाल उनके सामने सिर्फ एक ही सवाल था और वह यह कि अगर नवाब हाशिम यही शख्स है तो फिर वह आदमी कौन था जिसकी लाश दस साल पहले नवाब हाशिम के बेडरूम से बरामद हुयी थी।।"  (उपन्यास अंश)
- क्या रहस्य था नवाब का?
- मरने वाला शख्स कौन था?
- उपस्थित नवाब कौन था?
- कौन असली था कौन नकली?

इस रहस्य से पर्दा उठाने का काम करता है इमरान। जासूस इमरान- "मैं अली इमरान, एम.एस. सी., डी.एस.सी. हूँ। अफसर आॅन स्पेशल ड्यूटी फ्राम सेन्ट्रल इंटेलिजेंस ब्यूरो।" 

Thursday, 12 December 2019

250. फरीदी और लियोनार्ड- इब्ने सफी

इब्ने सफी का चतुर्थ उपन्यास
फरीदी और लियोनार्ड- इब्ने सफी

हार्पर काॅलिंस एक अच्छा किया है वह है इब्ने सफी के 16 उपन्यासों का पुनः प्रकाशन। जिसमें से आठ उपन्यास फरीदी सीरिज के हैं और आठ उपन्यास इमरान सीरिज के। इब्ने सफी के पाठकों के लिए यह एक बहुत अच्छी उपहार है।
दिल्ली के दरियागंज में लगने वाले पुस्तक मेले से मुझे हार्पर काॅलिंस द्वारा दो खण्डों में प्रकाशित ये उपन्यास दो सौ रुपये में मिल गये।
         आजकल इन्हीं उपन्यास को पढा जा रहा है हालांकि इन्हें मैं any book एप पर पढा रहा हूँ। फरीदी सीरिज का पांचवा उपन्यास 'फरीदी और लियोनार्ड' पढा।

लियोनार्ड बेहद घटिया क़िस्म का ब्लैकमेलर है, जो सिर्फ़ ब्लैकमेलिंग तक ही नहीं रुकता, बल्कि क़त्ल और दूसरे ओछे हथकण्डे अपनाने पर उतर आता है। क्या-क्या गुल खिलाता है और फिर कैसे फ़रीदी के हत्थे चढ़ता है–इसे जानने के लिए आइए, इस उपन्यास के हैरत-अंगेज़ सफ़र पर चलें। हमारा य़कीन है आप निराश न होंगे।
(ईबुक से)

www.sahityadesh.blogspot.in
पी०एल० जैक्सन ख़ुफ़िया पुलिस का सुप्रिन्टेंडेण्ट है। उसने एक दिन फरीदी
को बुलाकर कहा।
‘‘कल रात हस्पताल में मुझे इन्स्पेक्टर जनरल की तरफ़ से एक ख़बर मिली है, जो हम सब के लिए बहुत ही दिलचस्प है। तुमने यूरोप के मशहूर ब्लैक-मेलर लियोनार्ड का नाम ज़रूर सुना होगा। वह अपने कुछ साथियों के साथ हिन्दुस्तान आया है और उसने अपना हेडक्वार्टर हमारे ही शहर में बनाया है।’’

249. तिजोरी का रहस्य- इब्ने सफी

जासूसी दुनिया- अंक-04
तिजोरी का रहस्य- इब्ने सफी, #फरीदी- हमीद सीरीज
लोकप्रिय जासूसी साहित्य के लेखक इब्ने सफी जी का उपन्यास 'तिजोरी का रहस्य' पढा। यह एक लघु कलेवर का रोचक उपन्यास है।
      यह कहानी है एक शहर की जहाँ कुछ रहस्यमयी घटित होगा है। रहस्यमयी होने ले साथ-साथ वह घटना रोचक भी है।
घटना है शहर में तिजोरियों से संबंधित है। एक के बाद एक घटित यह वारदातें पुलिस के लिए हैरतजनक है।
      तीन दिन से शहर की पुलिस बुरी तरह से परेशान थी। सेठ अग्रवाल के यहाँ डाके के बाद से अब तक इसी तरह की दो और वारदातें हो चुकी थी।
शहर के मशहूर दौलतमंदों की तिजोरियां खोली जायें लेकिन कोई चीज गायब न हो और तिजोरियों को खोलने वाले साफ बच कर निकल जायें।
(उपन्यास अंश)
है ना अपने आप में यह रोचक घटना। चोर आते हैं, तिजोरी खोलते हैं, देखते हैं और बिना कुछ चुराये वापस चले जाते हैं।
यह घटनाएं सभी के लिए आश्चर्यजनक हैं।
- आखिर क्या रहस्य है तिजोरी का?
- कौन है इस वारदात के पीछे?
- आखिर क्या खोजा जा रहा है तिजोरियों में से?

यह सब रहस्य समाहित है इब्ने सफी जी के उपन्यास 'तिजोरी का रहस्य' में। 

248. औरतफरोश का हत्यारा इब्ने सफी

जासूसी दुनिया अंक-03
औरत फरोश का हत्यारा- इब्ने सफी

इब्ने सफी साहब का लिखा हुआ इंस्पेक्टर फरीदी सीरिज का द्वितीय उपन्यास है 'औरतफरोश का हत्यारा'.
यह एक मर्डर मिस्ट्री आधारित रोचक उपन्यास है।
www.sahityadesh.blogspot.in
इंस्पेक्टर फरीदी और सार्जेंट हमीद एक दिन मनोरंजन के लिए निकले।
दोनों ने ‘गुलिस्ताँ होटल’ पहुँच कर टिकट ख़रीदे और हॉल में दाख़िल हो गये। सारा हॉल क़ुमक़ुमों से जगमगा रहा था और संगीत की लहरें फ़िज़ा में फैल रही थीं।
            यहाँ उन्हे शहनाज मिली, लेड़ी सीता राम मिली- लेडी सीताराम सत्ताईस-अट्ठाईस साल की औरत थी। उसके होंट बहुत ज़्यादा पतले थे जिन पर बहुत गहरे रंग की लिपस्टिक लगायी गयी थी, ऐसा मालूम होता था जैसे उसने अपने होंट भींच रखे हों। माथे पर पड़ी हुई लकीरें ख़राब नहीं मालूम होती थीं। और अपराधी राम सिंह भी मिला। ‘‘उसका नाम राम सिंह है और यह ख़तरनाक आदमी है।’’
इसी दौरान वहाँ एक वारदात हो गयी।

होटल का मैनेजर ऊपर गैलरी में खड़ा चीख़-चीख़ कर कह रहा था।
‘‘भाइयो और बहनो... मुझे अफ़सोस है कि आज प्रोग्राम इससे आगे
न बढ़ सकेगा।’’
‘‘क्यों? किसलिए?’’ बहुत-सी ग़ुस्सैल आवाज़ें एक साथ सुनाई दीं।
‘‘यहाँ एक आदमी ने अभी-अभी ख़ुदकुशी कर ली है।’’


Wednesday, 11 December 2019

247. जंगल में लाश - इब्ने सफी

इब्ने सफी का द्वितीय उपन्यास
जंगल में लाश- इब्ने सफी

इंस्पेक्टर सुधीर को कोतवाली में एक खबर मिली।
एक आदमी धर्मपुर के जंगलों में एक लाश देखकर खबर देने आया है।
उस अजनबी ने बताया- मैंने सड़क के किनारे एक औरत की लाश देखी उसका ब्लाउज खून से तर था। उफ, मेरे खुदा...कितना भयानक मंजर था...मैं उसे जिंदगी भर न भूला सकूंगा।"(पृष्ठ- 12)
जंगल में लाश- इब्ने सफी
इंस्पेक्टर सुधीर अपने सहकर्मियों के साथ जब वहाँ पहुंचा तो वहाँ कुछ भी न था।
"मैंने वह लाश यही देखी थी...मगर...मगर..."
"मगर-मगर क्या कर रहे हो...यहाँ तो कुछ भी नहीं हैं।"

            वहाँ से वह अजनबी गायब हो गया और पुलिस बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर वापस पहुंची। इस अजीबोगरीब घटनाक्रम की खोजबीन के लिए इंस्पेक्टर जासूस फरीदी और सार्जेंट हमीद को मैदान में आना पड़ा। लेकिन एक लाश से आरम्भ हुआ यह खूनी खेल यही खत्म नहीं हुआ एक के बाद कत्ल होते चले गये।
उपन्यास का एक पृष्ठ

जब जंगल में एक के बाद एक लाशें मिलने लगती हैं तो किसी को अन्दाज़ा नहीं होता कि मामला कहाँ अटका है। असली मुजरिम कौन है और इन हत्याओं की असली वजह क्या है? जानने के लिये पढ़िये इब्ने सफ़ी की दूसरी हैरतअंगेज़़ कहानी ‘जंगल में लाश’। (ईबुक से)

Tuesday, 10 December 2019

246. दिलेर मुजरिम- इब्ने सफी

इब्ने सफी का प्रथम उपन्यास
दिलेर मुजरिम- इब्ने सफी

जासूसी दुनिया- अंक-01

कहते हैं कि जिन दिनों अंग्रेज़ी में जासूसी उपन्यासों की जानीमानी लेखिका अगाथा क्रिस्टी का डंका बज रहा था, किसी ने उनसे पूछा कि इतनी बड़ी तादाद में अपने उपन्यासों की बिक्री और अपार लोकप्रियता को देख कर उन्हें कैसा लगता है। अगाथा क्रिस्टी ने जवाब दिया कि इस मैदान में वे अकेली नहीं हैं, दूर हिन्दुस्तान में एक और उपन्यासकार है जो हरदिल अज़ीज़ी और किताबों की बिक्री में उनसे कम नहीं है। यह उपन्यासकार था- इब्ने सफी। ( उपन्यास से)
sahityadesh.blogspot. in