कत्ल की कहानी...
खूनी गद्दार- आनंद सागर
डायरेक्टर नीलकान्त भरूचा की फिल्म 'आग और आँसू' के क्लाइमैक्स सीन की शूटिंग में चौथी बार भी 'कट' की आवाज आने पर स्टुडियो में उपस्थित सभी व्यक्ति परेशानी अनुभव करने लगे थे।
प्रस्तुत दृश्य है अप्रैल 1966 में जासूसी चक्कर पत्रिका में प्रकाशित आनंद सागर जी के उपन्यास 'खूनी गद्दार'। आनंद सागर जी उपन्यास साहित्य में जासूसी उपन्यासकार के रूप चर्चित रहे हैं। उपन्यास का कथानक आरम्भ होता है एक फिल्म की शूटिंग से जहाँ अभिनेता दीपक की तबीयत बिगड़ने से मृत्यु हो जाती है। अभिनेता दीपक अपने मित्र खलनायक प्रकाश के साथ शूटिंग कर रहा था।
भरूचा रंगीन मियां को एक तरफ ले जाकर बोला-तुमने सुना रंगीन...दीपक को पायजन दिया गया।"
"हाँ, हाँ, सुना। तभी तो डाक्टर कहता है कि पुलिस को बुला लो।" (पृष्ठ-07)
वहीं अभिनेत्री नैना के पिता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवायी की उसकी पुत्री नैना गायब है और उसे प्रकाश पर शक है। मेरा संदेह प्रकाश बत्रा नामक विलेन पर है जिसने अपनी दुश्मनी निकालने को मेरी बेटी का कहीं भगवा दिया है और या मार डाला है। (पृष्ठ-20)
- दीपक की मौत के पीछे क्या रहस्य था?
- अभिनेत्री नैना कहां गायब हुयी?
- प्रकाश बत्रा की दोनों घटनाओं में क्या भूमिका थी?
- इन दोनो घटनाओं की सत्यता क्या थी?
इसी सत्यता का पता लगाने के लिए मैदान में आये जासूस जासूस कंचन और ठक्कर और इंस्पेक्टर फैयाज।
