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Friday, 4 January 2019

163. काले कुएं- अजीत कौर

 मन को छू लेने वाली संवेदनशील कहानियां।

      'काले कुएं' अजीत कौर का कहानी संग्रह है। हालांकि इससे पहले अजीत कौर जी की कोई भी रचना नहीं पढी। एक बार विकास नैनवाल जी के ब्लॉग पर अजीत कौर जी के बारे में पढा तो इनकी रचनाएँ पढने की इच्छा जगी।
           मेरे पास अजीत कौर जी का कहानी संग्रह 'काले कुएं' उपलब्ध था, समय मिलते ही पढना आरम्भ किया तो एक के बाद एक रचना में उतरता चला गया। शब्द और भाव का एक ऐसा प्रवाह है जिसमें पाठक बहता चला जाता है।
इस संग्रह में कुल 09 कहानियाँ है। सभी कहानियाँ बेहतरीन और पठनीय है।  


1. मौत अलीबाबा की
2. ना मारो
3. सूरज, चिड़ियाँ और रब्ब
4. काले कुएं
5. आक के फूल
6. बाजीगरनी

7.सन्नाटे की चीख

8. शहर या घोंघा
9. चौरासी का नवम्बर

       प्रथम कहानी मौत अलीबाबा की हमारे सिस्टम या समाजें व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करती एक सशक्त कहानी है। इस भ्रष्टाचार के अंदर भी कुल लोगों का जमीर जिंदा है। यह कहानी वर्तमान भ्रष्टाचार की तह को खोलती नजर आती है।

         कहानी 'चौरासी का नवम्बर' जो इस संग्रह की अंतिम कहानी है लेकिन मुझे सर्वाधिक इसी कहानी ने प्रभावित किया है। कहानी का आधार दिल्ली में हुए सन् 1984 के दंगे है। उन दंगों से उपजी पीड़ा को इस कहानी के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है। कहानी पढने वक्त उस समय को लेखिका ने स्वयं के माध्यम से जीवंत कर दिया है। एक-एक दृश्य और घटना सजीव लगती है।
         नवंबर का महीना था। नवम्बर के शुरु के दिन थे वे। चौरासी का नवम्बर। (पृष्ठ-135)
         इस काले अतीत को जिसने भोगा है, वही इसे अच्छी तरह से समझ सकता है। लेखिका ने स्वयं इस यातना को सहा है इसलिए इनके शब्दों में चौरासी की वास्तविकता अभिव्यक्त हुयी है।
         टी.वी. पर, रेडियों पर बस मरने वाली मलिका के शब्द बार-बार बजाये जा रहे थे "मेरे खून की एक-एक बूँद..." खून-खून-खून....।(पृष्ठ-136)
           खून की ये बूंद यही नहीं बिखरी बल्कि यह पंजाब में भी बिखरी। या यूं कहें पंजाब में बिखरी खून की बूंदों का दिल्ली से गहरा संबंध है। कहानी 'ना मारो' की पृष्ठभूमि में चाहे पंजाब के काले अतीत का आतंकवाद रहा हो लेकिन कहानी में मानवीय संवेदना जिंदा है।
           वे कहते थे, मेरे भाई की हत्या आतंकवादियों ने की थी। मैं नहीं जानती। उसकी किसी से क्या दुश्मनी थी? पर हत्या तो कोई भी कर सकता  था। आतंकवादी भी और कोई दूसरा भी। (पृष्ठ-18)
            एक बहन का भाई चला गया, एक माँ का एकमात्र पुत्र चला गया।  लेकिन वह पीछे एक दर्द छोड़ गया। यह दर्द चाहे एक बहन का हो या माँ का लेकिन कहानी में उतर कर यह दर्द सभी का हो गया। माँ को अब अपने पुत्र का ही नहीं हर एक उस युवक का दर्द होता है जो 'मार दिये जाते हैं।'
               ये दोनों कहानियाँ बहुत ही संवेदनशील हैं।
   'सूरज, चिड़िया और रब्ब' मनुष्य के मनुष्य होने की कथा है। सच्चा मनुष्य वही है जो सभी के लिए जीता है। उसके लिए तो प्रत्येक जीव में ईश्वर का वास है।
   'काले कुएं' एक प्रतीकात्मक कहानी है। इस कहानी का शिल्प पक्ष बहुत मजबूत है। शब्दों का जो प्रयोग इस कहानी में लेखिका ने किया है वह प्रशंसनीय है।  चाहे कहानी में संवाद या कोई तय कथा नहीं है, मात्र प्रतीक हैं और भावनाएं हैं लेकिन प्रस्तुतीकरण बेहतरीन है।
   'आक के फूल' कहानी एक ऐसी औरत की कहानी है जिसके जीवन में अकेलापन है। निर्मल वर्मा की एक कहानी है 'परिंदे' जो अकेलेपन और विषाद की कथा है। 'आक के फूल' भी एक उसी तरह के भावों से लबरेज कथा है।
   यह कहानी है मनसुखानी और राज नामक दो स्त्रियों की। जो एक साथ एक कमरे में रहती है। जहां मनसुखानी के जीवन में अकेलापन और विषाद है वहीं राज के जीवन में आने वाली खुशियाँ उससे सहन नहीं होती।
  
कहानी 'शहर या घोंघा' अपनी जड़ों को तलाश करती एक स्त्री की कथा है। हम चाहे वक्त मे साथ कितना भी बदल जाये  लेकिन अपने अतीत विस्मृत करना मुश्किल है।

                'सन्नाटे की चीख' कहानी वर्तमान समाज का नग्न चित्रण है। अपने परिवार से ज्यादा जब व्यक्ति अपनी सफलता को महत्व देने लग जाता है तो उसका क्या हश्र होता है। यही इस कहानी में दर्शाया गया। कहानी की नायिका मिसेज मल्होत्रा, वही मिसेज मल्होत्रा जो कहानी 'आक के फूल' में हाॅस्टल वार्डन है। मिसेज मल्होत्रा हाॅस्टल वार्डन होने के साथ-साथ एक लेखिका भी है। जिसे सफलता नहीं मिली। इसी सफलता की प्राप्ति के लिए वह अपना परिवार तक तबाह कर लेती है।

        इस संग्रह की कहानियों की कई विशेषताएं हैं। प्रत्येक कहानी के पीछे एक और कहानी है वह कहानी मुख्य कहानी के आयाम को विस्तार देती नजर आती है। कहानी 'आक के फूल' की मनसुखानी के जीवन में कुछ ऐसा हुआ जिसके कारण वह पुरुष वर्ग से नफ़रत करती नजर आती है।
        कई कहानियाँ एक दूसरे से संबंध रखती हैं। कहानियों के पात्र चाहे एक दूसरी कहानी में पहुंच गये लेकिन कहानियों का भाव अलग-अलग है।
इस कहानी संग्रह के संवाद शैली की बात करें तो यह एक आकर्षण पैदा करती है, स्वयं को अपने में समाहित करती है।

           यह पुस्तक मुझे दरियागंज (दिल्ली) में प्रति रविवार को लगने वाले पुस्तक बाजार से मिली थी। यह एक बेहतरीन कहानी संग्रह है जो बहुत ही मार्मिक है।
      अगर आप कहानियाँ पढने में रुचि रखते हैं तो यह कहानी संग्रह अवश्य पढें।

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पुस्तक- काले कुएं (कहानी संग्रह)
लेखिका- अजीत कौर
प्रकाशक- किताबघर प्रकाशन
पृष्ठ-147
मूल्य- 120₹