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Thursday, 9 January 2025

621. आपरेशन डम डम डिगा डिगा- संजीव जायसवाल 'संजय'

डाक्टर डिमांगो का कहर और प्रोफेसर का आविष्कार
आपरेशन डम डम डिगा गिडा- संजीव जायसवाल 'संजय'

विश्व विजय प्राइवेट लिमिटेड बुक्स दिल्ली द्वारा बाल साहित्य की रोचक किताबों का प्रकाशन सराहनीय प्रयास है।
प्रस्तुत लघु बाल उपन्यास प्रसिद्ध लेखक संजीव जायसवाल 'संजय' जी की एक्शन, रोमांच से परिपूर्ण विज्ञान गल्प है।
  यह कहानी है एक प्रोफेसर के आविष्कार और विश्व विजेता बनने के स्वप्न लेने वाले खतरनाक डाक्टर डिमांगो की।
        प्रोफेसर हेमंत राय की आंखों में आज एक विशेष चमक श्री. पिछले दो वर्षों से वे जिस महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए दिनरात जुटे हुए थे वह पूर्ण हो गया था. आज विज्ञान भवन में वे महत्वपूर्ण केन्द्रीय मंत्रियों, तीनों सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारियों और देश के प्रमुख वैज्ञानिकों के समक्ष अपने उस महत्वपूर्ण आविष्कार का प्रदर्शन करने जा रहे थे.

Thursday, 30 December 2021

497. सिहरन - शुभानंद

शी....कोई है।
सिहरन- शुभानंद, हाॅरर

कई साल अमेरिका में गुजारने के बाद आकाश भारत लौटता है। अपने बचपन के दोस्त अभिषेक के हालचाल लेने के बहाने वह अपने ननिहाल लखीमपुर पहुंचता है। अभिषेक के पुश्तैनी घर में रहते हुए उसे कुछ ऐसे अनुभव होते हैं जिनसे उसे किसी अज्ञात शक्ति के वास होने का अहसास होता है और फिर कुछ ऐसी घटनाओं का सिलसिला उस घर में शुरू होता है जिनकी उन्होंने कल्पना भी न की थी। (किंडल से)

सिहरन शुभानंद

Saturday, 11 September 2021

459. उनका आखिरी गाना- राॅइन रागा, रिझ्झम रागा

पेड़ों की दुनिया की यात्रा
उनका आखिरी गाना- राॅइन रागा, रिझ्झम रागा

'नई पीढी के फतांसी लेखकों में रागा बंधुओं का कोई सानी नहीं।- दीपक दुआ(प्रख्यात फिल्म निर्देशक)

    जब मैंने पहली बार रागा बंधुओं को फेसबुक पर उनके चर्चित उपन्यास 'पानी की दुनिया' के साथ देखा तो तभी से इनके उपन्यास पढने की इच्छा जागृत हो गयी। 'पानी की दुनिया' इनका एक चर्चित फतांसी उपन्यास है। 

उनका आखरी गाना- रागा बंधु
उनका आखिरी गाना- रागा बंधु
-   मैं अक्सर फेसबुक पर चर्चा सुनता रहता था कि जयपुर निवासी रागा बंधुओं (राॅइन रागा, रिझ्झम रागा) की कहानियाँ एक अलग दुनिया की यात्रा करवाती हैं। जयपुर एक दो चक्र भी लगे पर मेरी परिचित दुकानों पर संयोग से इनके उपन्यास नहीं मिले। एक दिन किंडल पर सर्च करते समय रागा बंधुओं का उपन्यास 'उनका आखिरी गाना' सामने आया तो उस पढ डाला। हालांकि इनके उपन्यास पहले किंडल पर उपलब्ध नहीं थे। और अब भी कुछ तकनीकी समस्या के साथ उपलब्ध हैं। 
  जैसा की सुना था रागा बंधुओं के उपन्यास फतांसी होते हैं, वहीं 'उनका आखिरी गाना' पढकर जाना यह फंतासी मात्र कोरी कल्पना ही नहीं मानवीय संवेदना का अनूठा चित्रण भी है।
      'उनका आखिरी गाना' मनुष्य के स्वार्थ, भौतिकता और वृक्षों पर आधारित एक रोचक लघु उपन्यास है। 

Thursday, 9 September 2021

457. हेरोइन- एस. सी. बेदी

एस.सी. बेदी का अंतिम उपन्यास
हेरोइन- एस.सी. बेदी
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में अगर किसी ने बाल साहित्य लिख कर ख्याति अर्जित की है तो वह एकमात्र न है -एस. सी. बेदी(सुभाषचन्द्र बेदी)
    ऐसा माना जाता है इन्होंने 1500 के लगभग बाल उपन्यास लिखे हैं। इनके प्रसिद्ध पात्र 'राजन-इकबाल' तो पाठक भूल नहीं सकते।
     बदलते दौर के साथ जब जासूसी उपन्यास साहित्य गर्द में चला गया तो एस.सी.बेदी जी भी लेखन से दूर हो गये। 
हेरोइन- एस.सी. बेदी, www.sahityadesh.blogspot.com
   एक लंबे समय पश्चात 'सूरज पॉकेट बुक्स' के संस्थापक शुभानंद जी ने 'राजन-इकबाल रिबोर्न सीरीज' आरम्भ की, जो पाठकों को एस. सी. बेदी की याद दिलाती थी। सूरज पॉकेट बुक्स के प्रयास से एक बार पुन: बेदी जी ने कलम उठाई और अपने प्रिय पात्रों पर लेखन आरम्भ किया। हालांकि इस द्वितीय पारी में वे कुल छह ही उपन्यास लिख पाये और दिनांक 31.10.2019 को इस दुनिया को अलविदा कह गये। इस समय उनका अंतिम उपन्यास 'हेरोइन' प्रकाशन की कतार में था।
'हेरोइन' वर्तमान समय में युवा वर्ग को अपनी चपेट में ले लेने वाले खतरनाक और जानलेवा नशे पर आधारित 'राजन-इकबाल' सीरीज का उपन्यास है। 

Friday, 2 October 2020

385. मुझे याद है- विमल मित्र

समय परिवर्तन की कथा
मुझे याद है- विमल मित्र/बिमल मित्र
समय परिवर्तनशील है। कब, कहां, कैसे बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता। आज जो उच्च शिखर पर है वह कल को धरातल पर आ सकता है और आज जो धरातल पर वह उच्च शिखर पर विराजमान हो सकता है। यह क्रम सतत चलता रहता है।
      इसी परिवर्तन को आधार विमल मित्र जी ने उपन्यास लिखा है- मुझे याद है। 

Monday, 27 July 2020

357. दस बजकर दस मिनट- अनिल गर्ग

जासूस अनुज का कारनामा
दस बजकर दस मिनट- अनिल गर्ग

दिल्ली निवासी अनिल गर्ग जी मर्डर मिस्ट्री लिखने में सिद्धहस्त नजर आते हैं। उनकी अभी तक की रचनाएं किंडल पर eBook के रूप में ही उपलब्ध हैं। मेरे द्वारा पढे जाने वाला यह इनका द्वितीय उपन्यास है इससे पूर्व इनका उपन्यास 'मुर्दे की जान खतरे में' में पढा था। दोनों उपन्यास ही मुझे रूचिकर लगे।
       अब चर्चा करते हैं 'दस बजकर दस मिनट' उपन्यास की। इस उपन्यास का आरम्भ एक मर्डर से होता है और यह भी संयोग था की जहाँ यह कत्ल होता है वहीं पर अपना उपन्यास नायक जासूस अनुज भी उपस्थित था। लेकिन अनुज ने कभी कल्पना भी न की थी अपने शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर इस कत्ल का संबंध उसके शहर से होगा और उसकी इंवेस्टीगेशन भी उसे करनी होगी। 

        दिल्ली का घनी आबादी वाला कृष्णानगर का इलाका। इसी इलाके में भल्ला ग्रुप के मालिक सुदर्शन भल्ला अपने भरे पूरे परिवार के साथ रहते थे। परिवार में सुदर्शन भल्ला की धर्म पत्नी विमला देवी, उनके तीन सुपुत्र और दो पुत्रियाँ और उनके दो बड़े लड़कों की पत्नियां उस कृष्णा नगर की कोठी में रहते हैं। सुदर्शन भल्ला का व्यापार देश ही नहीं विदेश तक फैला था। .........भल्ला साहब के बड़े लड़के का नाम था गुलशन भल्ला और उसकी पत्नी का नाम था वैशाली। उनके दूसरे लड़के का नाम था अखिल भल्ला और उसकी पत्नी का नाम था कंचन और तीसरा लड़का था मानव।
मानव की लाश दिल्ली से लगभग 1100 किलोमीटर दूर भरूच नाम के उस छोटे से शहर की रेल पटरियों पर पड़ी थी।

Friday, 24 July 2020

354. मास्टरमाईन्ड- हरचरण सिंह बावा

एक पुत्र की प्रतिशोध कहानी
मास्टर माइण्ड- हरचरण सिंह बावा

      लड़ाई के मुख्यतः तीन कार माने जाते हैं- जर, जोरू और जमीन। अगर लोकप्रिय जासूसी साहित्य में देखे तो अशिकांश घटनाएं इन तीन विषयों पर ही आधारित हैं। प्रस्तुत उपन्यास 'मास्टरमाइण्ड' भी जर अर्थात् धन पर आधारित है।
      जैसा की लेखक महोदय ने उपन्यास के अंतिम आवरण पृष्ठ पर लिखा है- सनसनी खेज, हैरत अंगेज कारनामों से भरपूर, रोंगटे खड़े़ कर देने वाली वाली डकैती जो इजिप्ट देश में एक पिरामिड में डाली गी।
       लेकिन पाठक मित्रो कहानी बस इतनी सी नहीं है, यह तो उपन्यास की भूमिका है वास्तविक कहानी तो कुछ और ही है।
उत्तरप्रदेश से मित्र प्रेम मौर्य जी ने उपन्यास 'मास्टरमाइण्ड' मुझे सप्रेम भेजा है, मैं उनका धन्यवाद करता हूँ। 
      अब चर्चा करते हैं, उपन्यास के विषय वस्तु पर। सर्वप्रथम स्पष्ट कर दूं यह एक लघु उपन्यास है जिसके लेखक हरचरण सिंह बावा हैं। मेरे द्वारा पढा गया इनका यह प्रथम उपन्यास है।
यह कहानी आरम्भ होती है चार दोस्तों से। जो बदमाश प्रवृत्ति के हैं। 
माउंट आबू, सिरोही
       होटल के एक कमरे में चार बचपन के यार, जिनका काम चोरी चकारी करना है, आज इकट्ठे हुए हैं। इन सब में जो मास्टर माइंड कहलाता है, उस का नाम आनंद है। उसी के कहने पर यह मिटिंग रखी है। 

Thursday, 16 July 2020

351. शाही शिकार- अभिषेक सिंघल

राजा की मौत प्रेम, रंजिश या हवस
शाही शिकार- अभिषेक सिंघल

समय बदला और समय के साथ बहुत कुछ बदल गया। परतंत्र भारत अब एक स्वतंत्र देश बन गया। राजतंत्र तो खैर कब का ही खत्म हो गया था लेकि स्वतंत्रता के पश्चात तो राजतंत्र के अवशेष भी खत्म होने पर थे।
        शाही शिकार एक ऐसे ही राजा की कहानी है जो राजतंत्र से लोकतंत्र का सफर देखता है। वह बदले वक्त के साथ बदलने की कोशिश करता है लेकिन अपनी आदतों से विमुक्त होना इतना आसान न था। 

      शाही शिकार कहानी है राजा विक्रम सिंह की। जो लोकतंत्र में स्वयं को उसी अनुरूप बना लेते हैं और जनता का प्रिय विधायक बन जाते हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ अपनी प्रेयसी को नहीं छोड़ पाते, सत्ता में स्वयं का बेटा चुनौती बनकर खड़ा है, दिखाने के चक्कर में आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है, महल होटल हो गया।
और एक दिन राजा विक्रमजीत सिंह अपने फार्म हाउस पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाये जाते हैं।
तब कथा में प्रवेश होता है थानेदार ऋषिपाल का। - थानेदार ऋषिपाल की यह पहली पोस्टिंग थी, सत्ताईस साल का नया जवान थानेदार जोश से भरा रहता था. जैसे ही उसने मुहर्रिर से विक्रमजीत को गोली लगने की खबर सुनी वैसे ही तुरंत वह जीप से सीधे विक्रमजीत के फार्म हाउस पहुंचता है।
- क्या विक्रमजीत सिंह ने आत्महत्या की थी?-
- क्या यह एक हत्या थी?
- विक्रमजीत सिंह को अपने पुत्र से राजनीति में चुनौती क्यों मिली?
      इस हत्या का कारण राजनीति था, हवस का परिणाम था या फिर कोई पुरानी रंजिश। यह तो खैर उपन्यास पढने पर ही पता चलता है।

Friday, 29 May 2020

323. शम्भाला- अनुराग अग्निहोत्री

तीन रोचक कथाएं, हाॅरर, मर्डर मिस्ट्री, सामान्य कहानी
शंभाला-  अनुराग अग्निहोत्री

चूंकि वो उस जलती चिता से निकल कर आई थी इसलिये उसके शरीर का ज्यादातर मांस जल चुका था और उसमें से मांस के जलने की बदबू अब भी आ रही थी.. चेहरे और हाँथ की खाल जलने के कारण गल गल के नीचे टपक रही थी, चेहरे पर आंख के नाम पर सिर्फ एक आंख थी और वो भी ऐसी लग रही थी कि अब नीचे गिरी की तब और दूसरी आंख की जगह पर सिर्फ एक गड्ढा नज़र आ रहा था... नाक के नाम पर सिर्फ दो छेद थे और होंठ भी चूंकि आग से जल चुके थे तो वहाँ से सिर्फ दांत दिख रहे थे और देखने में बड़े ही भयानक लग रहे थे।
यह दृश्य है उपन्यास 'शम्भाला' का जिसके लेखक है अनुराग अग्निहोत्री जी। यह दृश्य है 'शम्भाला' नामक एक चुड़ैल का। जब ठाकुर साहब ने यह सुना की शम्भाला लौट आयी है तो उनके मुँह से एक ही आवाज निकली-
"न न नहीं... वो वो लौटकर नहीं आ सकती, श शशम्भाला फिर से लौटकर नहीं आ सकती..न न नहीं आ सकती"
- कौन थी शम्भाला?
- ठाकुर साहब उससे इतना क्यों डरते थे?
- शम्भाला के लौट आने का क्या अर्थ था?
- और जब शम्भाला लौट आयी तो उसने क्या किया?
तो आपको ये सब जानने के लिए अनुराग अग्निहोत्री ही का लघु हाॅरर उपन्यास 'शम्भाला' पढना होगा।

Sunday, 10 May 2020

314. अपहरण- आकाशदीप सिंह

गांव से गायब होते बच्चे...
अपहरण-  आकाशदीप सिंह

         किंडल पर एक लघु जासूसी उपन्यास था -'अपहरण'। कम समय में पढा जा सकता था। मैं किंडल पर अक्सर छोटी रचनाएँ पढनी ज्यादा पसंद करता हूँ। क्योंकि किंडल पर बड़ी रचना पढने में वह आनंद नहीं आता जो वास्तव में लेखक ने लिखा है।
        लेखक आकाश दीप सिंह का उपन्यास 'अपहरण' मिला तो पढना आरम्भ किया। यह कहानी दो जासूस शर्मा जी और भोला राम पर आधारित है।
        गर्मी के दिन थे दोनों अपने घर पर उपस्थित थे।- ऐसी लू भरी गर्मी में, इस चीख पुकार के बीच, अगर यमराज भी शांति से किसी के प्राण हरने आये होते तो उनको हृदयाघात हो जाना निश्चित था।
        लेखक महोदय ने गर्मी का जो प्रभावित चित्रण किया है वह उनकी शाब्दिक प्रतिभा का कमाल है।
गुलाबपुर गांव के प्रधान सहित कुछ लोग इन दोनों से मिलने आते हैं।

        सर जी स्थिति बहुत ही विकट है । हमारी तो रातों की नींद हराम हो गयी है । सारा गांव रात भर जागता रहता है । न जाने कब किसका बच्चा गायब हो जाए " प्रधान जी बोलते बोलते रूआसे से हो गये।
          मुख्य कहानी यही है। एक गांव और उससे गायब होते बच्चे। और यही बड़ा प्रश्न था कि बच्चे गायब कौन कर रहा है? क्यों कर रहा है? प्रधान जी बता रहे थे और दोनों जासूस सुन रहे थे।


Wednesday, 31 October 2018

149. वेयरवुल्फ- नितिन मिश्रा

खून का प्यासा मानव भेड़िया
वेयरवुल्फ- नितिन मिश्रा।
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एक शाॅर्ट फिल्म 'वेयरवुल्फ' के लिए फिल्म की टीम एक खतरनाक जंगल में अपनी फिल्म की शुटिंग करने के लिए पहुंची।
             अभी शुटिंग आरम्भ भी न हुयी और एक खतरनाक वेयरवुल्फ अर्थात् मानव भेडिया वास्तव में वहां आ पहुंचा।
             जो घटनाक्रम एक शाॅर्ट फिल्म में दर्शाना था वह खूनी खेल वहाँ वास्तव में खेला गया।
             क्या यह संयोग था या एक षड्यंत्र?
            
उपन्यास की कहानी वास्तव में दिल दहला देने वाली है। पाठक पृष्ठ दर पृष्ठ यही सोचता है की आखिर वास्तविकता क्या है। क्या यह षड्यंत्र है या फिर संयोग। अगर संयोग है तो बहुत भयानक संयोग है अगर षड्यंत्र है तो कौन है षड्यंत्र कर्ता।
            
                         उपन्यास का आरंभ होता है शांंतनु से। शांतनु ने अपने जीवन की सारी जमा पूंजी अपने आखरी दाँव, अपनी शाॅर्ट फिल्म 'वेयरवुल्फ' पर लगा दी। शांतनु अपनी टीम के साथ 'ब्लैक आॅर्किड वुड्स' नामक  जंगल में फिल्म की शुटिंग के लिए पहुंचा।
वेयरवुल्फ अर्थात् मानव भेड़िया पर आधारित थी यह शाॅर्ट फिल्म। लेकिन आपसी तकरार के चलते फिल्म के पात्र फिल्म में काम‌ करने के लिए मना कर देते हैं और शुटिंग स्थल से फिल्म को छोड़ कर निकलने की तैयारी करते हैं।
          इसी दौरान कहानी में‌ प्रवेश होता है मानव भेड़िये का।  सभी सदस्यों पर मानव भेड़िये के आक्रमण आरम्भ हो जाता है।  इस बार पेड़ के पीछे से निकलने वाली आकृति एक मानव भेड़िये यानी वेयरवुल्फ की थी। (पृष्ठ-24)
        

Tuesday, 21 August 2018

135. वो भयानक रात- मिथिलेश गुप्ता

एक भयानक रात जंगल में...
वो भयानक रात- मिथिलेश गुप्ता, हाॅरर लघु उपन्यास, रोचक-पठनीय।
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वह एक भयानक रात थी, अमावश की भयानक रात और ऐसी भयानक रात में एक परिवार जंगल में फंस गया।  उस परिवार कर साथ एक हादसा हुआ एक ऐसा हादसा जिसने पूरे परिवार को दहला दिया।
       उस हादसे बाद समय रुक गया....जी हां, समय वहीं ठहर गया।
क्या यह हादसा था या परिवार का वहम।
   
            लोकप्रिय उपन्यास जगत में सूरज पॉकेट बुक्स ने बहुत कम समय में अपनी पहचान स्थापित की है। परम्परागत जासूसी उपन्यासों के कागज के स्तर से मुक्त होकर अच्छे स्तरीय कागज पर उपन्यासों का प्रकाशन आरम्भ किया।
               सूरज पॉकेट बुक्स ने सभी श्रेणी के उपन्यासों का प्रकाशन किया है और इसी क्रम में मिथिलेश गुप्ता का उपन्यास है 'वो भयानक रात'। यह एक हाॅरर उपन्यास है।
                
                  वो भयानक रात की घटना है 11 जनवरी 2004 की जब रिटायर्ड आर्मी मेजर संग्राम सिंह अपनी पत्नी अर्चना, पुत्र राहुल और पुत्रवधु गीता के साथ एक पार्टी से घर लौट रहे थे।  रास्ते में एक भयानक जंगल था और रात का समय था।
  अमावश की एक मनहूस काली रात
   चारों तरफ घनघोर अंधेरा।
एक सुनसान सड़क और सड़क के दोनों तरफ फैला हुआ एक घना जंगल।
सड़क पर तेजी से दौड़ती हुयी एक कार। (पृष्ठ-09)
   उस भयानक जंगल में कार का एक्सीडेंट हो गया।  यह भी एक रहस्य था की आखिर एक्सीडेंट किस के साथ हुआ।
"....सड़क पर तो कोई भी नहीं दिखाई दे रहा है, न ही आसपास कोई परछाई। फिर तुम टकराए किस चीज से....मतलब कार किस चीज से टकराई थी?"- संग्राम सिंह ने राहुल को अजीब तरह से घूरते हुए कहा।
" पता नहीं पापा ऐसा लगा कोई था सड़क पर....लेकिन‌ मुझे कोई दिखाई नहीं दिया लगता है ऐसा लगा जैसे कोई अचानक से कार के सामने आया हो....।"(पृष्ठ-13)
- आखिर इस परिवार के साथ जंगल‌ में क्या हादसा पेश आया?
- आखिर कार का एक्सीडेंट किस के साथ हुआ?
- क्या यह परिवार जंगल से सुरक्षित लौट पाया?
- क्या रहस्य था इस अमावस्य की काली रात का?
            मिथिलेश गुप्ता का यह उपन्यास आकार में चाहे छोटा हो लेकिन कथ्य में बहुत शानदार है। कहानी आरम्भ से अंत रहस्य के आवरण में‌ लिपटी रहती है। उपन्यास में हर पल यह रहस्य बना रहता है की इस परिवार के साथ आगे क्या होगा।
    
                 संग्राम सिंह का परिवार जब जब जंगल में कार एक्सीडेंट के पश्चात एक अदृश्य जाल में फंस जाता है। यहीं से उपन्यास में जबरदस्त मोड आरम्भ हो जाता है। राहुल जब एक्सीडेंट वाली जगह से लौट कर आता है तो वह गुमसुम सा रहता है।
       संग्राम सिंह जब राहुल को ढूंढकर लाता है तो कार के पास से अर्चना और गीता को गायब पाता है। उपन्यास में इस प्रकार के घटनाक्रम उपन्यास को बहुत रोचक बनाते हैं।
       उपन्यास में शाब्दिक/मुद्रण गलतियाँ हैं, हालांकि यह कोई ज्यादा नहीं है।
    उपन्यास का अंतिम दृश्य जो की लेखक ने मेरे विचार से फिल्मी रूप से लिख दिया, क्योंकि वहाँ कुछ स्पष्ट नहीं किया। मिल में दृश्य पाठक ले समक्ष होता है तो वहाँ दृश्य को समझाने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन उपन्यास में दृश्य को शब्दों से जीवित करना पड़ता है।
"पापा"
"आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे?"
अचानक संग्राम सिंह राहुल की तरफ एकदम से पलटा।
उसका चेहरा देख कर राहुल सकते में गया। (पृष्ठ-47)
       अब राहुल क्यों चौंका?
        बाकी परिवार केे सदस्य क्यों नहीं चौंके?
अगर लेखक यहाँ कुछ कोशिश करता तो यह दृश्य और भी अच्छा बनता व सार्थक बनता।
    
       उपन्यास की कहानी अच्छी व रोचक है। लेखक का प्रयास वास्तव में सराहनीय है।
          
निष्कर्ष-
           हाॅरर उपन्यास बहुत अच्छा व दिलचस्प है। कहानी में पृष्ठ दर पृष्ठ रहस्य पढता चला जाता है। पाठक प्रतिपल यही सोचता है की आगे क्या होगा।  यह रहस्य अंत तक यथावत रहता है।
उपन्यास जबरदस्त, रोचक और पठनीय है।
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उपन्यास- वो भयानक रात
लेखक- मिथिलेश गुप्ता
ISBN- 978-1-944820-21-3
प्रथम संस्करण- Set. 2015
द्वितीय संस्करण- Feb. 2017
प्रकाशक- सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 52
मूल्य-80₹
लेखक ब्लॉग
www.mihileshgupta152.blogspot.in