कहानी ब्लैकमेलिंग की
घर का दुश्मन- प्रेम प्रकाश- दिसंबर-1966
हिंदी अपराध साहित्य में बहुसंख्यक कहानियाँ बिखरी पड़ी हैं, इनमें से कभी-कभार कुछ नया और अच्छा पढने को मिल जाता है। ऐसा ही एक एक छोटा सा उपन्यास पढने को मिला, जिसकी छोटी और सामान्य सी कहानी अच्छी लगी। इस उपन्यास का नाम है- घर का दुश्मन ।
नकहत पब्लिकेशन -इलाहाबाद का नाम विशेष रूप से इब्ने सफी साहब से संबंधित है। और उनके उपन्यासों का हिंदी अनुवाद करने के लिए जाने जाते हैं प्रेम प्रकाश जी। स्वयं प्रेम प्रकाश जी ने भी उपन्यास लिखे हैं। प्रस्तुत उपन्यास 'घर का दुश्मन' इन्हीं का ही है। उपन्यास का कथानक- उपन्यास की कहानी ब्लैकमेलिंग पर आधारित है। एक संगठित गिरोह का बाॅस अपने आदमियों से सुनियोजित तरीके से अलग- अलग शहरों में लोगों को फंसा कर ब्लैकमेल कर रूपया लेता है।
घर का दुश्मन- प्रेम प्रकाश- दिसंबर-1966
हिंदी अपराध साहित्य में बहुसंख्यक कहानियाँ बिखरी पड़ी हैं, इनमें से कभी-कभार कुछ नया और अच्छा पढने को मिल जाता है। ऐसा ही एक एक छोटा सा उपन्यास पढने को मिला, जिसकी छोटी और सामान्य सी कहानी अच्छी लगी। इस उपन्यास का नाम है- घर का दुश्मन ।
नकहत पब्लिकेशन -इलाहाबाद का नाम विशेष रूप से इब्ने सफी साहब से संबंधित है। और उनके उपन्यासों का हिंदी अनुवाद करने के लिए जाने जाते हैं प्रेम प्रकाश जी। स्वयं प्रेम प्रकाश जी ने भी उपन्यास लिखे हैं। प्रस्तुत उपन्यास 'घर का दुश्मन' इन्हीं का ही है। उपन्यास का कथानक- उपन्यास की कहानी ब्लैकमेलिंग पर आधारित है। एक संगठित गिरोह का बाॅस अपने आदमियों से सुनियोजित तरीके से अलग- अलग शहरों में लोगों को फंसा कर ब्लैकमेल कर रूपया लेता है।
