मूर्ति का रहस्य...
फोमांचू चिंगारयों के देश में - आबिद रिजवी
आदरणीय आबिद रिजवी साहब का उपन्यास 'फोमांचू चिंगारियों के देश में' पढा। यह उनका सन् 1975 में लिखा गया एक थ्रिलर उपन्यास है। यह उस दौर का उपन्यास है जब लेखक अपनी एक अलग दुनिया बनाता था जिसमें उसके पात्र आश्चर्यजनक कारनामें दिखाते थे। तब मनोरंजन के साधनों का अभाव था, उपन्यास मनोरंजन एक अच्छा माध्यम थे। तब एक नयी दुनिया में नये पात्रों के साथ पाठक जो आनंद उठाता था। आबिद रिजवी साहब ने समय के साथ उपन्यास लेखक की जगह जर्नल बुक्स लेखक में हाथ आजमाना आरम्भ किया और वे इस सफर में कामयाब भी रहे। लेकिन उपन्यास प्रेमियों की मांग पर पुराने उपन्यास कहीं न कहीं से खोज कर पाठकों के लिए उपलब्ध करवा ही देते हैं, वह भी PDF वर्जन में नि:शुल्क।
वर्तमान समय में जब अधिकांश लेखक इस क्षेत्र से दूर हो गये लेकिन वे अपने उपन्यास भी खो बैठे। इस समय में आबिद रिजवी साहब ने जो PDF का मार्ग अपनाया है वह चाहे उन्हें आर्थिक लाभ न दे, पर अपने पाठकों से निरंतर जुड़ने का मौका उपलब्ध करवाता है। अन्य लेखकों को भी PDF या online अन्य प्लेटफार्म मे माध्यम से अपने उपन्यास पाठकों को उपलब्ध करवाने चाहिए।
फोमांचू चिंगारयों के देश में - आबिद रिजवी
आदरणीय आबिद रिजवी साहब का उपन्यास 'फोमांचू चिंगारियों के देश में' पढा। यह उनका सन् 1975 में लिखा गया एक थ्रिलर उपन्यास है। यह उस दौर का उपन्यास है जब लेखक अपनी एक अलग दुनिया बनाता था जिसमें उसके पात्र आश्चर्यजनक कारनामें दिखाते थे। तब मनोरंजन के साधनों का अभाव था, उपन्यास मनोरंजन एक अच्छा माध्यम थे। तब एक नयी दुनिया में नये पात्रों के साथ पाठक जो आनंद उठाता था। आबिद रिजवी साहब ने समय के साथ उपन्यास लेखक की जगह जर्नल बुक्स लेखक में हाथ आजमाना आरम्भ किया और वे इस सफर में कामयाब भी रहे। लेकिन उपन्यास प्रेमियों की मांग पर पुराने उपन्यास कहीं न कहीं से खोज कर पाठकों के लिए उपलब्ध करवा ही देते हैं, वह भी PDF वर्जन में नि:शुल्क।
वर्तमान समय में जब अधिकांश लेखक इस क्षेत्र से दूर हो गये लेकिन वे अपने उपन्यास भी खो बैठे। इस समय में आबिद रिजवी साहब ने जो PDF का मार्ग अपनाया है वह चाहे उन्हें आर्थिक लाभ न दे, पर अपने पाठकों से निरंतर जुड़ने का मौका उपलब्ध करवाता है। अन्य लेखकों को भी PDF या online अन्य प्लेटफार्म मे माध्यम से अपने उपन्यास पाठकों को उपलब्ध करवाने चाहिए।