तलाश ब्लैकमेलर और हत्यारे की
ब्लैकमेल- संतोष पाठक
'सुकन्या श्रीवास्तव!’ - मैंने सिगरेट का एक गहरा कश खींचा - पालीवाल प्रोडक्शन हाउस की मार्केटिंग हैड। एक ऐसी लड़की जो सात साल पहले मर्डर चार्ज में चार महीने की सजा भुगत चुकी थी। जो अपने बॉस के बेटे के साथ शादी करने जा रही थी। ऐसी लड़की को कोई ब्लैकमेल कर रहा था। और ऐसे ग्राउंड पर कर रहा था, जो शादी वाला मामला न आ फंसा होता तो सुकन्या एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल चुकी होती। पुलिस में कंप्लेन भी दर्ज करा देती तो कोई बड़ी बात नहीं होती। मगर अभी ब्लैकमेलर के हाथों की कठपुतली बनना उसकी मजबूरी थी। (किंडल से) उपन्यासकार संतोष पाठक वर्तमान में उपन्यास साहित्य का वह ज्वलंत सितारा है जिसका प्रकाश निरंतर फैल रहा है। जिस तरह से संतोष पाठक जी लेखन कर रहे हैं, उपन्यास प्रकाशित कर रहे हैं वह स्वयं में एक कीर्तिमान है।
वर्तमान उपन्यास साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन छाया हुआ है। प्रस्तुत उपन्यास भी मर्डर मिस्ट्री रचना है,जिसका आधार चाहे 'ब्लैकमेल' दिखायी देता है, पर ऐसा है नहीं।
कहानी है प्राइवेट डिटेक्टिव विक्रांत गोखले की। जिसके पास एक कन्या आती है अपना केस लेकर।
“मैं डॉक्टर हूं मैडम और आप पेशेंट हैं। मर्ज छिपायेंगी तो निदान कैसे कर पाऊंगा? उन हालात में क्या बीमारी बढ़ती नही चली जायेगी?”
“नहीं छिपाने की कोई मंशा नहीं है, वरना मैं यहां आती ही क्यों?”
“दैट्स गुड, बताइये प्रॉब्लम क्या है?”
“मुझे कोई ब्लैकमेल कर रहा है।”
ब्लैकमेल- संतोष पाठक
'सुकन्या श्रीवास्तव!’ - मैंने सिगरेट का एक गहरा कश खींचा - पालीवाल प्रोडक्शन हाउस की मार्केटिंग हैड। एक ऐसी लड़की जो सात साल पहले मर्डर चार्ज में चार महीने की सजा भुगत चुकी थी। जो अपने बॉस के बेटे के साथ शादी करने जा रही थी। ऐसी लड़की को कोई ब्लैकमेल कर रहा था। और ऐसे ग्राउंड पर कर रहा था, जो शादी वाला मामला न आ फंसा होता तो सुकन्या एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल चुकी होती। पुलिस में कंप्लेन भी दर्ज करा देती तो कोई बड़ी बात नहीं होती। मगर अभी ब्लैकमेलर के हाथों की कठपुतली बनना उसकी मजबूरी थी। (किंडल से) उपन्यासकार संतोष पाठक वर्तमान में उपन्यास साहित्य का वह ज्वलंत सितारा है जिसका प्रकाश निरंतर फैल रहा है। जिस तरह से संतोष पाठक जी लेखन कर रहे हैं, उपन्यास प्रकाशित कर रहे हैं वह स्वयं में एक कीर्तिमान है।
वर्तमान उपन्यास साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन छाया हुआ है। प्रस्तुत उपन्यास भी मर्डर मिस्ट्री रचना है,जिसका आधार चाहे 'ब्लैकमेल' दिखायी देता है, पर ऐसा है नहीं।
कहानी है प्राइवेट डिटेक्टिव विक्रांत गोखले की। जिसके पास एक कन्या आती है अपना केस लेकर।
“मैं डॉक्टर हूं मैडम और आप पेशेंट हैं। मर्ज छिपायेंगी तो निदान कैसे कर पाऊंगा? उन हालात में क्या बीमारी बढ़ती नही चली जायेगी?”
“नहीं छिपाने की कोई मंशा नहीं है, वरना मैं यहां आती ही क्यों?”
“दैट्स गुड, बताइये प्रॉब्लम क्या है?”
“मुझे कोई ब्लैकमेल कर रहा है।”






