Wednesday, 29 April 2026

720. मौत की परछाई - कर्नल रंजीत 1981

विदेशी षड्यंत्र और वैज्ञानिकों की हत्या
मौत की परछाई-  कर्नल रंजीत

कर्नल रंजीत के विचित्र संसार में आपका एक बार फिर स्वागत है। राजस्थान के संगरिया निवासी मित्र रतन चौधरी जी से प्राप्त कर्नल रंजीत के 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में यह 15 वां उपन्यास है‌ इस से पूर्व रतन चौधरी जी से प्राप्त चौदह उपनिवेश की समीक्षा पढे चुके हैं जिनके क्रमश: नाम हैं- ' दुल्हन की चीख, पीले बिच्छू, प्रेतात्मा की डायरी, उलटी लाशें, नकली चेहरे, ट्रेन एक्सीडेंट, हत्यारे की पत्नी, खूनी बदला, चण्डीमंदिर का रहस्य, जापानी पंखा, मेजर बलवंत बांगलादेश में, विजयदुर्ग का रहस्य, उलटी खोपड़ी, कातिल मेरा नाम'  और अब प्रस्तुत है पन्द्रहवें उपन्यास  'मौत की परछाई' की समीक्षा। 
मौत के साये
एयर इंडिया का विभान उड़ान भरने के लिए रनवे पर तैयार खड़ा था। अधिकांश यात्री अपनी-अपनी सीट पर बैठ चुके थे ।

Saturday, 25 April 2026

719. कातिल‌ मेरा नाम- कर्नल रंजीत

मुम्बई पुलिस का सीरियल किलर
कातिल‌ मेरा नाम- कर्नल रंजीत

नमस्ते पाठक‌ मित्रो,
एक बार हम फिर से उपस्थित है मेजर बलवंत शृंखला का एक रोचक और रहस्यमयी उपन्यास 'कातिल मेरा नाम' लेकर । कर्नल रंजीत की विशेष शैली में‌ लिखा गया यह उपन्यास 'मुम्बई पुलिस का सीरियल किलर' खोज पर आधारित है। एक ऐसे सिरफिरे कातिल की कहानी जो सिर्फ पुलिसवालों का ही कत्ल करता था, आखिर क्यों ?

रात के ग्यारह बज चुके थे। पुलिस इन्स्पेक्टर रामसिंह ड्यूटी खत्म करके घर जाने की तैयारी कर रहा था कि फोन की घंटी बजी। इन्स्पेक्टर ने रिसीवर उठाकर कहा :
"हलो, पुलिस स्टेशन बाईकला।"
जवाब में किसी औरत की आवाज ने कहा, "मैं जिम्मेदार पुलिस अफसर से बात करना चाहती हूं।"
"आप कौन बोल रही हैं ?"
"प्लीज, आप मेरी बात किसी अफसर से करा दीजिए।" औरत ने जवाब दिया।
"मैं स्टेशन इन्चार्ज इन्स्पेक्टर रामसिंह बोल रहा हूं। क्या मैं आपकी कोई सेवा कर सकता हूं ?"
"ओह, इन्स्पेक्टर साहब, थैंक्स गाड, कि आप मिल गये । क्या आप मशहूर डाकू राजन को गिरफ्तार करना' चाहेंगे जो दो महीने पहले जेल से फरार हो गया था और जिसकी गिरफ्तारी पर आपके विभाग ने दस हजार का इनाम रखा है ?"

Saturday, 18 April 2026

718. उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत- 1980

मूर्ति चोरी और ब्लैकमेल की रोचक कथा
उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत

एक बार फिर SVNLIBRARY पर प्रस्तुत है कर्नल रंजीत द्वारा लिखा गया एक ऐसा रोचक उपन्यास जो आपको सम्मोहित कर लेगा। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जो अप‌नी मृत्यु के छह महीने बाद एक प्रश्न स्वयं से करता है- मरने के छः महीने बाद क्या वह फिर जीवित हो उठा था ?

इनाम
यह बात आज से छः महीने पहले की है । अगस्त का महीना था। स्थानीय समाचारपत्न 'दि क्रानिकल' के फोटोग्राफर कमलकिशोर को, बम्बई में मैक्सिको के राष्ट्राध्यक्ष के आगमन पर खींचे गए फोटो के लिए समाचार-पत्र के मालिक ने पांच सौ रुपये इनाम दिया। उसने इनाम मिलने पर सोचा कि आज तो उसे अपनी पत्नी का उलाहना दूर कर ही देना चाहिए और उसे 'उन्यालो बन्दर' ले जाकर चीनी खाना खिला ही देना चाहिए जो उसे बहुत पसन्द था । उसकी पत्नी ज्योत्स्ना 'परेल' की टैक्सटाइल मिल के अकाउंट्स विभाग में नियुक्त थी। उसका विवाह हुए एक वर्ष हुआ था। यहू प्रेम-विवाह था। पति पत्नी के जीवन में पहले एक और समानता भी थी ज्योत्स्ना भी अकेली थी और कमल किशोर भी। उन दोनों का कोई सम्बन्धी नहीं था। विवाह से एक महीना पहले कमलकिशोर ने 'अन्धेरी' में 'मधुबन' नामक भवन की पहली मंजिल पर चालीस हजार रुपये में एक शानदार फ्लैट खरीदा था ।
कमलकिशोर ने ज्योत्स्ना को फोन किया कि वह आज अपने आफिस से पांच की बजाय चार बजे उठ आए और घर पहुंच जाए । उसने अपनी पत्नी को यह निर्देश इसलिए किया कि ज्योत्स्ना को जब भी बाहर जाना होता था तो बनाव-शृंगार में वह बहुत देर लगा देती थी । ज्योत्स्ना ने वचन दिया कि वह चार बजे आफिस से उठकर पांच बजे घर पहुंच जाएगी ।
(उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)

Saturday, 11 April 2026

717. विजय दुर्ग का रहस्य- कर्नल रंजीत- 1983

राजमहल के षड्यंत्र की कहानी
विजय दुर्ग का रहस्य- कर्नल रंजीत

  लोकप्रिय कथा साहित्य में प्रतिशोध और रहस्यमयी- विचित्र कथाओं के लिए कर्नल रंजीत का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। उलझे कथानक, ज्यादा पात्र और शृंखलाबद्ध हत्याएं उ‌नके उपन्यासों की विशेषता रही है। 
मैं इन दिनों सतत् कर्नल रंजीत के उपन्यास पढ रहा हूँ और मनोरंजन की एक अलग ही दुनिया में विचरण कर रहा हूँ। मनोरंजन की इस अनोखी दुनिया में आप भी मेरे साथ-साथ घूम लीजिए- विजयदुर्ग का रहस्य उपन्यास में।

सस्पेंस, रोमांच, साहसपूर्ण घटनाओं के जादूगर कर्नल रंजीत का रोंगटे खड़े कर देने वाली अनूठी कहानी से पूर्ण चौंका देने वाला नया विशेषांक
विजयदुर्ग का रहस्य
उपन्यास के मुख्य आकर्षण
- पतंग के आकार के दिल दहलाने वाले जैट विमान।
- कांच की गोली से राजमहल में धमाका ।
- तालों में बंद लाश का गायब हो जाना ।
- मेजर बलवंत और सोनिया के बेजान शरीर हिलाने - डुलाने पर भी न हिले ।
- मंदिर में पूजा करती हुई महिला सहसा लापता ।
- प्रेम में असफलता और राज घराने की पुश्तैनी दुश्मनी कितना भयानक रूप धारण कर गई यह जानने के लिए पढ़िए 'विजयदुर्ग का रहस्य' ।(अंतिम आवरण पृष्ठ से)

Saturday, 4 April 2026

716. मेजर बलवंत बांगलादेश में- कर्नल रंजीत

मेजर की बांग्ला यात्रा और मुक्तिवाहिनी का संघर्ष
मेजर बलवंत बांगलादेश में‌- कर्नल रंजीत

बंगला देश में, मानवता को लज्जित करने वाले पाकिस्तानी तानाशाहों के घोर अत्याचारों तथा भीषण गोला-बारी के बीच, भारतीय जासूस मेजर बलवंत के अत्यन्त साहसिक कार्यों और हैरत में डाल देने वाले जासूसी के चमत्कारों से भरपूर उपन्यास
नमस्ते पाठक मित्रो,
   कर्नल रंजीत के उपन्यासों की समीक्षा में हम संगरिया (राजस्थान) निवासी मित्र रतन चौधरी जी से पढने के लिए प्राप्त हुये 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में आज हम पढ रहे हैं 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास की समीक्षा ।
     पूर्व में हम 'पीले बिच्छू' नामक उपन्यास पढ चुके हैं जिसमें मेजर बलवंत बांगला देश जाते हैं  और प्रस्तुत उपन्यास में भी वह बांगलादेश जाते हैं पर दोनों उपन्यासों की यात्रा में एक बड़ा अंतर है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। 
पहले हम 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास के प्रथम पृष्ठ का अवलोकन करते हैं। प्रथम अध्याय का नाम है- मनुष्य का भाग्य ।