Thursday, 27 November 2025
688. खूनी प्रेमिकाएं - आरिफ मारहर्वी
जासूस कैसर और इंस्पेक्टर इरफान का कारनामा
687. विषैला कत्ल- आरिफ मारहर्वी -
वह कब्र में जिंदा हो उठा
विषैला कत्ल- आरिफ मारहर्वी - दिसम्बर- 1972
इन दिनों आरिफ मारहर्वी साहब के जो जासूसी उपन्यास पढे हैं उनमें से मुझे यह सबसे ज्यादा रोचक लगा है। आरिफ साहब के उपन्यास लगभग 120-30 पृष्ठ के होते थे, और कहानी जासूसी थी। विषैला कत्ल भी एक जासूसी उपन्यास है जो जासूस कैसर पर आधारित है। कहानी तब रोचक हो उठती है जब एक शख्स एक महीने बाद कब्र में जीवित हो उठता है, और उसके बाद जो हंगामा होता....
अंधेरी रात की निस्तब्धता में कुत्ते के रुदन की आवाज दूर-दूर तक लहराती चली गई थी और वे दोनों इस प्रकार उछल पड़े जैसे कोई प्रेतात्मा उनके आस-पास ही मंडरा रही हो। उन दोनों के शरीर थर-थर काँपने लगे थे तथा कड़ाके की सर्दी होन्हें पर भी दोनों के माथों पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं।
'एक विशेष कब्र में से एक विशेष समय पर एक विशेष मुर्दे की खोपड़ी निकालकर बेगम सरफराज के पास पहुंचा देना ।'
Wednesday, 26 November 2025
686. आग का खेल- आरिफ मारहर्वी
एक हत्या - दो संदिग्ध
आग का खेल- आरिफ मारहर्वी
हिंदी जासूसी कथा साहित्य में आरिफ मारहर्वी का नाम काफी चर्चित रहा है। राजवंश नाम से भी इन्होंने उपन्यास और फिल्म लेखन भी किया है। आरिफ मारहर्वी साहब का एक छोटा सा उपन्यास 'आग का खेल' इन दिनों पढा । प्रस्तुत उपन्यास एक मर्डर मिस्ट्री है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इस उपन्यास में पात्रों की संख्या का कम होना, एक मृतक और दो संदिग्ध ।
हम उपन्यास के विषय में चर्चा करने से पहले उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढ लेते हैं ताकि कहानी को अच्छे से समझ सकें।
सहसा 'सेवा कुंज' की पूरी बिल्डिग गहरे अन्धेरे में डूब गयी ।
बिल्डिग के पूर्वी भाग में नौकरों के क्वार्टर थे। उन क्वार्टरों में भी गहरा अन्धेरा छा गया था। ऐसा प्रतीत होता था जैसे इस पूरी बिल्डिंग में मानव नाम की कोई वस्तु रहती ही न हो।
श्यामू कुछ देर तक आँखें फाड़-फाड़कर अन्धेरे में देखने का यत्न करता रहा। उसके कान भी किसी तरह की आहट पर लगे हुए थे। किन्तु जब काफी देर तक श्यामू को न कोई आहट सुनाई दी और न बिजली ही लौट आई तब श्यामू के दिल की धड़कनें तेज हो गईं।
685. भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी
विमान अपहरण काण्ड
भयानक भिखारी - आरिफ मारहर्वी
जासूसी उपन्यास - अगस्त -1971
एकाएक माइक पर स्वर गूंजने लगा-
'पेसेंजर्स प्लीज..! राखनपुर जाने वाला जहाज अपनी उड़ान के लिए तैयार है। आप लोग कृपया अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये । पेलेंजर्स प्लीज राखनपुर जाने वाला प्लेन अपनी उड़ान के लिए तैयार है। कृपया आप लोग अपनी-अपनी सीटें ले लीजिये ।'
सोजी ने काफी का अन्तिम घूंट भरा तथा कप काउंटर पर रखकर केन्टीन के द्वार की ओर बढ़ी। सहसा पीछे से किसी ने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया ।
सोजी भिन्नाकर घूमी उसके कन्धे पर हाथ रखकर सम्बोधित करने वालों से अत्यन्त तीव्र घृणा थी, परन्तु अपने सम्मुख एक बूढ़े को देखकर वह केवल होंठ हिलाकर रह गई। यदि उसके स्थान पर कोई दूसरा होता तो वह कंदाचित कोई घोर अपमान से भरी बात कह बैठती किन्तु उस बूढ़ की अवस्था बड़ी दयनीय थी।
सोजी ने कोमल स्वर में कहा-'आज्ञा करें!'
बूढ़ा कुछेक क्षणों तक इस मुद्रा में हांफता रहा जैसे उसे दमे का रोग हो । उसके कंधे आगे को ढलके हुए थे और गर्दन इतनी झुकी हुई थी कि पोठ पर कूबड़-सा उभर आया था। गालों का माँस लटका हुआ था तथा घनी पलकें सफेद हो रही थीं।
उसके शरीर पर एक अति बहुमूल्य कपड़े का किन्तु अत्यन्त बेढंगा एवं ढीला-ढाला सिला हुआ सूट था। उसने बड़ी कठिनाई से अपनी गर्दन सोजी की ओर उठाई तथा हांफता हुआा बोला--
'आप' आप राखनपुर... राखनपुर के प्लेन में सवार होने जा रही हैं ?'
'जी हाँ!' सोजी ने ऊबे हुए स्वर में उत्तर दिया ।
'देखिये... देखिये म..म... मुझे भी उसी प्लेन में
यात्रा करनी है, मैं...मैं तेज नहीं चल सकता मुझे....मुझे सहारे की भी आवश्यकता है । मैं... मैं आपका बहुत बहुत आभारी होंगा अगर....अगर आप मेरा हाथ थाम लें ?'
सोजी का मन तो चाहा कि स्पष्ट रूप से नकार कर दे परन्तु बूढ़े के मुख पर बरसती हुई विवशता ने उसे ऐसा करने से रोका तथा अनिच्छापूर्वक हाथ बढ़ाकर बोली-
"आइये... ।"
"धन्यवाद...धन्यवाद।"
(भयानक भिखारी- आरिफ मारहर्वी, प्रथम पृष्ठ)नमस्ते पाठक मित्रो,
Tuesday, 25 November 2025
684. भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी
कैसर निखट्टू फंसा अपराधियों के जाल में
भेड़िये की तस्वीर- आरिफ मारहर्वी
Hindipulpfiction
जब तक इस देश की भूमि पर कैसर जीवित है, तुम लोगों का कोई भी मानवघाती षड्यन्त्र सफल नहीं हो सकता ।आरिफ मारहर्वी साहब का प्रसिद्ध पात्र कैसर देश के दुश्मनों का ललकारता और उनके खतरनाक इरादों को ध्वस्त करता है। जासूस कैसर निखट्टू का एक एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर'।
नमस्कार पाठक मित्रो,
आप #Svnlibrary पर पढ रहे हैं जासूसी उपन्यासकार आरिफ मारहर्वी साहब के एक्शन उपन्यास 'भेड़िये की तस्वीर' की समीक्षा ।जैसे ही जीप होटल के सामने आकर रुकी, दरबान ने अटेनशन होकर कैसर को सलाम मारा और कैसर बौखलाहट में जीप से उतरते-उतरते ठोकर खाकर गिरते-गिरते बचा। और फिर इस प्रकार फुर्ती से आगे बढ़कर उसने दरबान से हाथ मिलाया जैसे उसकी दरबान से वर्षों पुरानी जान-पहचान रही हो । तथा अब सहसा बहुत दिनों पश्चात भेंट हुई हो दरबान के बत्तीसों दाँत निकल पड़े ।
कैंसर दरबान से उसके बच्चों के कुशल समाचार पूछकर वेग पूर्वक होटल की ओर बढ़ा ही था कि उसे पीछे से झल्लाया हुआ स्वर सुनाई दिया ।
'अरे अरे!'
Saturday, 10 May 2025
647. मौत के साये में- आरिफ मारहर्वी
कैसर हयात निखट्टू का कारनामा
मौत के साये में- आरिफ मारहर्वी
सर सिन्हा की आँखों में सहसा मौत नाचने लगी ।
आगे टेढ़ी-मेढ़ी और ढलवान सड़क थी। लगभग बारह मील तक तो सड़क की दाईं ओर ऊंची पहाड़ी चट्टानें और बाईं ओर खाईयाँ ही थीं। वैसे भाव नगर की सड़क पर अच्छा-खासा ट्रैफिक रहता था । राजकीय परिवहन की बसें चलती थीं प्राईवेट कारें और टैक्सियाँ भी गुजरती थीं, ट्रक भी आते जाते थे ।
सर सिन्हा ने अपनी समस्त शक्ति ब्रेकों पर लगा दी किंतु बेकार, कार की गति किसी तरह भी साठ और सत्तर मील प्रति घंटे से कम न हो सकी, इसके विपरीत कार की गति में बढ़ोतरी होती गई । सर सिन्हा की पूरी देह पसीने से तर हो गई और दिल की धड़कनें कनपटियों पर धमक पैदा करने लगीं। उनका मानसिक संतुलन अभी बिगड़ा न था अन्यथा पहला मोड़ काटते समय ही गाड़ी सीधी गार में चली जाती ।(मौत के साये में - आरिफ मारहर्वी, उपन्यास का प्रथम पृष्ठ)
आज हम बात कर रहे हैं आरिफ मारहर्वी साहब के उपन्यास 'मौत के साये' की जो अक्टूबर 1971 में 'जासूसी पंजा' पत्रिका में प्रकाशित हुआ था । यह C.I.D. ऑफिसर कैसर हयात निखट्टू का उपन्यास है, जो एक केस को हल करता है और उसके साथ देते हैं उसके साथी राना और सोजी ।
Saturday, 2 November 2024
605. किताब के खूनी- आरिफ मारहर्वी
जासूस कैसर निखट्टू का कारनामा
किताब के खूनी- आरिफ मारहर्वी
कैसर ने चारों हाथ पैर तानकर एक लम्बी अंगड़ाई ली और किताब पर नजरें जमा दीं, जो उसे अभी-अभी भेज पर पड़ी हुई दिखाई दी थीं । थोड़ी देर पहले ही कैसर बाहर से आया था। उसके चेहरे पर हल्की सी थकान थी। लेकिन किताब देखते ही सारी थकान गायब हो गई। उसने आँखों को दायरे की शक्ल में घुमाया और हाथ बढ़ाकर किताब उठा ली ।
किताब के ऊपरी पेज पर लिखा था- 'लेडी चेटर्लीज लवर ।'
ऐसी ही एक किताब सब इंस्पेक्टर इरफान को भी मिलती है।
अचानक इर्फान की निगाह सोफे के सामने वाली मेज पर चली गईं। एक मोटी सी किताब देखकर वह जरा सा श्रागे को झुका । उसने किताव के टाइटिल पेज पर निगाह डाली और फिर एकदम सीधा होकर बैठ गया ।
किताब के टाइटिल पेज पर लिखा था- 'लेडी चेटर्लीज लवर ।'
इस बदनाम किताब से वह भली भाँति परिचित था । लेकिन जब जासूस कैसर और सब इंस्पेक्टर इरफान ने उस किताब को खोल कर देगा तो दोनों के होश उड़ गये, वह कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
हिंदी रोमांच कथा साहित्य में आरिफ मारहर्वी साहब का नाम एक सशक्त लेखक के तौर पर जाना जाता है। जहाँ उन्होंने जासूसी साहित्य की रचना की वहीं सामाजिक उपन्यास लेखक भी किया है। आरिफ साहब को विशेष प्रसिद्धि 'राजवंश' नाम से मिली थी, राजवंश नाम से उन्होंने सामाजिक उपन्यास लिखे हैं।इसके अतिरिक्त आरिफ मारहर्वी साहब ने कुछ फिल्मों के लिए लेखक भी किया है। मिथुन चक्रवर्ती अभिनीत फिल्म सुरक्षा (1979) की कहानी आरिफ मारहर्वी साहब ने 'राजवंश' नाम से ही लिखी थी।
उपन्यास साहित्य में आरिफ मारहर्वी साहब ने सीक्रेट सर्विस के जासूस कैसर हयात 'निखट्टू' को लेकर उपन्यास लिखे हैं।
प्रस्तुत उपन्यास कैसर 'निखट्टू' सीरीज का एक जासूसी उपन्यास है।
जासूस कैसर और सब इंस्पेक्टर इरफान को फोन कर कोई अज्ञात महिला होटल पर मिलने के लिए बुलाती है।
'तो फिर कब मिल रहे हो ?'
'जब तुम कहो ।'
'आज ही ।'
'कब ?'
'ठीक साढ़े आठ बजे ।'
'कहाँ ?'
'इम्पायर होटल कमरा नम्बर सोलह।'
जब दोनों अलग-अलग और एक समय वहाँ पहुंचे तो कमरा उन्हें खुला मिला, और वहाँ था सन्नाटा।
इन्स्पेक्टर इर्फान बैडरूम की ओर बढ़ गया। बैडरूम के अन्दर भी रोशनी थी। दरवाजा बन्द था। इर्फान ने दरवाजे के पास पहुँचकर दरवाजे पर धीरे से हाथ रखा। दरवाजा खुलता चला गया ।
इर्फान रिवाल्वर निकालकर फुर्ती से अन्दर चला गया ।
लेकिन बैड पर निगाह पड़ते ही उसके मस्तिष्क को एक जबर्दस्त झटका लगा। बैड पर एक लाश पड़ी थी, जिसका सिर, दोनों हाथों के पंजे और टखनों तक पैर गायब थे। लाश सीधी थी। उस पर कोई कपड़ा न था। बिस्तर पर और बिस्तर से नीचे ढेर सारा खून जमा हुआ था।
अब दोनों के मस्तिष्क में यही प्रश्न थे की यह लाश किसकी है? फोन पर यहाँ बुलाने वाली महिला कहां गायब है? और वह महिला कौन थी?
इस रहस्य का पता लगाने के लिए सीक्रेट सर्विस का जासूस कैसर 'निखट्टू' कोशिश करता है और अपने उद्देश्य में सफल होता।
कैसर के परिश्रम से अंत में वास्तविक अपराधी पकड़ा जाता है।
आरिफ मारहर्वी साहब द्वारा लिखित उपन्यास 'किताब के खूनी' कथास्तर पर अत्यंत कमजोर उपन्यास है। उपन्यास को आरम्भ में रोचक बनाने के लिए किताब और मानव अंगों का जिक्र किया गया है लेकिन जब उनके तर्क सामने आते हैं तो वह पूर्णतः गलत प्रतीत होते हैं।
अपराधी जब अपराध करता है तो वह अपराध छुपाने की कोशिश करता है न की उस अपराध के सबूत पुलिस विभाग को भेजने की कोशिश करता है।
वहीं अपराधी वर्ग कैसर को पकड़ना चाहता है और उसे पकड़ने का तरीका ऐसा है जैसे हाथ को उल्टा घूमाकर कान पकड़ना हो।
उपन्यास में अपराधी वर्ग तस्करी से जुड़ा हुआ है और वह कैसर को उलझाने के लिए अजीबोगरीब परिस्थितियाँ पैदा करता नजर आता है।
ऐसी अतार्किक बातों/घटनाओं के कारण उपन्यास बहुत ही कमजोर महसूस होता है।
उपन्यास में छोटे-छोटे कथन देकर पृष्ठों की बढोतरी की गयी है, मुझे ऐसा लगता है।
उदाहरण देखें-
एक समय था जब उपन्यासों में पात्र कर्नल, कैप्टन आदि होते थे। यहाँ भी कुछ पात्रों के ऐसे नाम हैं।
जैसे-
कैप्टन रहमान, लेफ्टिनेंट दीपक, मेजर राणा।
यह सब कैसर के अधीनस्थ हैं।
'उस इमारत की निगरानी पर केप्टिन रहमान और लेफ्टिनेन्ट दीपक को नियुक्त कर दिया जाए ।'
'ओ० के० सर ।'
'इसके बाद मेजर राना को इम्पायर होटल पहुंचना है।
पाठक मित्रो,
यह चर्चा थी आरिफ मारहर्वी जी के उपन्यास 'किताब के खूनी' की। जो की एक सामान्य से भी कम स्तर का उपन्यास है।
अगर आपने यह उपन्यास पढा है तो अपने विचार अवश्य शेयर करें।
धन्यवाद
उपन्यास- किताब के खूनी
लेखक- आरिफ मारहर्वी
प्रकाशक- स्टार पॉकेट बुक्स, दिल्ली
पृष्ठ- 124
प्रकाशन तिथि- may 1971
Thursday, 7 July 2022
524. बंद कमरे में खून- आरिफ मारहर्वी
बंद कमरे में खून- आरिफ माहरर्वी
सहसा बाजार में शोर मच गया। कई चीखें सुनाई दीं। लोग चीखते-चिल्लाते एक ओर को दौड़े। दुकानदार अपना अपना काम छोड़कर उसी शोर की ओर आकृष्ट हो गये। सड़क पर चलती स्त्रियाँ सुरक्षित स्थानों पर रुक गईं और भयभीत आँखों से उसी ओर देखने लगीं जहां आने जाने वालों की भीड़ इकट्ठी होती जा रही थी।
दोनों ओर का ट्रैफिक रुक गया। ट्रैफिक कांस्टेबल सीटियाँ
बजाता हुआ इधर-उधर भाग रहा था। (उपन्यास का प्रथम दृश्य)
![]() |
| बंद कमरे में खून आरिफ माहरर्वी |
जहाँ इन्होंने जासूसी उपन्यास आरिफ माहरर्वी के नाम से लिखे हैं वहीं सामाजिक उपन्यास राजवंश के नाम से लिखे हैं। इन्होंने कुछ फिल्मों के लिए कथा लेखन का भी काम किया है,जैसे मिथुन चक्रवर्ती की 'गन मास्टर'।
सन् 1971 में दिल्ली से जासूसी पंजा सीरीज के अन्तर्गत इनका उपन्यास 'बंद कमरे में खून' प्रकाशित हुआ था।
Friday, 2 March 2018
100. आग का खेल- आरिफ मारहर्वी
आग का खेल- आरिफ मारहर्वी, मर्डर मिस्ट्री, औसत उपन्यास।
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आरिफ माहरवी अपने समय के चर्चित उपन्यासकार रहे हैं। मैंने इस उपन्यास से पहले उनका लिखा गया कोई भी उपन्यासोमनाथपढा।
आग का खेल उनका लिखा गया एक छोटा सा परंतु रोचक उपन्यास है।
सेठ सोमनाथ जो की शहर के एक प्रसिद्ध व्यवसायी है। एक रात उनके कमरे में आग लग जाती है और सेठ जी उस आग में जल कर मर जाते हैं।
CID के अफसर को यह मामला दिया जाता है और वे अपने विवेक से इस मर्डर मिस्ट्री को हल करते हैं। और अनंतः असली अपराधी को पकङ लेते हैं।
उपन्यास की यही एक छोटी सी कहानी है और शेष उपन्यास इस पर केन्द्रित है।
- सेठ सोमनाथ की हत्या क्यों की गयी?
- हत्यारा कैसे पकङा गया।
उपन्यास में बार-बार कई पात्रों पर शक होता है की ये पात्र हत्यारा हो सकता है। और कभी ये अभी लगता है कहीं कोई गहरी साजिश तो नहीं।
हत्या होने के पश्चात पाठक के मन में सर्वप्रथम यही प्रश्न उठता है की हत्यारा कौन है। यहाँ भी सेठ सोमनाथ की हत्या के पश्चात् यही प्रश्न पूरे उपन्यास में घूमता है।
और CID के होनहार सदस्य इरफान(उपन्यास में इर्फान लिखा है) और कैसर इस रहस्य को सुलझाते हैं।
उपन्यास में दृश्य भी ज्यादा नहीं है। चार-पांच जगह से ज्यादा के दृश्य नहीं है।
सेठ सोमनाथ का घर, सोहन लाल का घर , होटल, CID का ऑफिस इत्यादि।
उपन्यास के में एक लेखक दादर साहब के दृश्य को छोङकर कहीं भी ऐसा नहीं लगता के उपन्यास में कोई अनावश्यक विस्तार हो। और उपन्यास का यही दृश्य हास्य उत्पन्न करने वाला है।
"रोमांस तो लेखकों का भाग्य होता है बेगम...वह वास्तविक जीवन में नहीं तो उपन्यास के पन्नों में रोमांस लङाते हैं। बाल सफदे भी हो जायें तो भी ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे उपन्यास के हीरो हम ही हैं।" (पृष्ठ-24)
निष्कर्ष में कह सकते हैं की आरिफ मारहर्वी का उपन्यास आग का खेल एक औसत स्तर का उपन्यास है। उपन्यास छोटा सा है लेकिन किसी भी स्तर पर पाठक को निराश भी नहीं करता। कहानी एक बार तो पढने योग्य है।
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उपन्यास- आग का खेल
लेखक - आरिफ माहरवी
प्रकाशक- स्टार पॉकेट बुक्स, 4/5 B, आसफ रोङ, नई दिल्ली-01
वर्ष- नवंबर, 1971
पृष्ठ- 128
मूल्य-









