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Saturday, 9 September 2017

60. काली बिल्ली वाला - कैप्टन देवेश

कैप्टन देवेश द्वारा लिखित एक संस्पेंशपूर्ण उपन्यास है काली बिल्ली वाला।
एक ऐसे रहस्यमयी शख्स की कहानी है जो अपने दुश्मनों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर देता है।
  किसी मकान के पास आकर एक काली शेवरलेट गाङी तीन बार हार्न बजाती है, और थोङी देर बाद उस मकान में रहने वालों में से कोई न कोई आत्महत्या अवश्य कर लेता है।
- क्या रहस्य है काली शेवरलेट का?
- लोग क्यों आत्महत्या करते हैं?
- कौन है काली शेवरलेट को चलाने  वाला?
- क्या है उसका उद्देश्य है?
जब पुलिस विभाग के पास इस प्रकार आत्महत्या के केस आने लगे तो पुलिस के साम‌ने भी उक्त सवाल खङे हो गये।
पुलिस सुपरिडेंट दयाल, जासूस जाफरी, कैप्टन सईद आदि जब इस अनोखे प्रकरण की सत्यता पता करने निकले तो पता चला की इस सारे काण्ड के पीछे हाथ है काली बिल्ली वाले शख्स का, जो की काली शेवरलेट चलाता है।
उपन्यास की भाषा शैली अच्छी है,
लेखक ने एक-दो जगह साहित्यिक शब्दावली का प्रयोग भी किया है जो मन को छूने  वाला है।
- पश्चिम का आकाश मटमैला पङ चुका था। शाम के गाढे धुंधलकों ने धरती पर चारों तरफ अपनी बाँहें फैला दी।  बङा सा पीला चांद एक टीले पर उगी कैक्टस की झाङियों में दुबका था। (पृष्ठ-121)
- रात सङकों पर आवारागर्दी करते-करते थककर वापस जाने की तैयारियाँ कर रही थी। (पृष्ठ-114)
   कुछ अन्य रोचक संवाद भी देखिएगा।
' आई विल किल यू।'- बर्था हलक फाङ दहाङी।
" अंग्रेजी में दी गयी धमनियों की मैं बिलकुल परवाह नहीं करता मिस बर्था।"- कैप्टन हुदहुद इत्मीनान से बोला।
संपूर्ण उपन्यास को छोटे -छोटे ग्यारह खण्ङो में विभक्त किया गया है और सभी के अलग-अलग नाम है।
जैसे- आत्महत्या से पहले, सुनहरे बालों वाली लङकी, काला फोल्डर, तीसरा आदमी आदि।
   उपन्यास की कहानी एक लयबद्ध क्रम से चलती है, कहीं भी घटनाओं में हेर-फेर नहीं है। एक सीधे क्रम में लिखी गयी यह कहानी बहुत ही रोचक व सस्पेंशपूर्ण है।
  
    कैप्टन देवेश कौन है, कहां से है  और ये उपन्यास उन्होंने कब लिखा इसकी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं होती, पर उपन्यास बहुत ही रोचक है  जो पाठक को पढने के लिए बैचेन करता है।
उपन्यास की पृष्ठ संख्या कम होना भी उपन्यास की रोचकता ही बढता है लेख‌क ने अनावश्यक कुछ भी ‌नहीं लिखा।
इस उपन्यास को पढकर लेखक के अन्य उपन्यास पढ‌ने की भी इच्छा जागी है।
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उपन्यास- काली बिल्ली वाला
ज कैप्टन देवेश
प्रकाशन- पुष्पी प्रकाशन- इलाहाबाद
पृष्ठ- 138
मूल्य-