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Wednesday, 21 August 2019

215. खेल खिलाड़ी का- विनय प्रभाकर

मेजर नाना पाटेकर का एक और कारनामा
खेल खिलाड़ी का- विनय प्रभाकर
नाना पाटेकर सीरीज

विनय प्रभाकर कृत नाना पाटेकर सीरिज का एक उपन्यास 'मौत आयेगी सात तालों में' पढा था वहीं से मैं नाना पाटेकर का प्रशंंसक हो गया था। नाना पाटेकर उपन्यास साहित्य का एक दबंग पात्र है। जो देशप्रेमी है और अपराधी भी।
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         लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में डकैती करने वाले कुछ प्रसिद्ध पात्र रहे हैं। सुरेन्द्र मोहन पाठक कृत विमल, अनिल मोहन जी का 'देवराज', अनिल सलूजा का 'बलराज गोगिया' और विनय प्रभाकर का 'नाना पाटेकर'। मुझे इनमें से नाना पाटेकर सबसे अलग लगता है। क्योंकि वह दबंग है,देशप्रेमी है, आर्मी का जवान रह चुका है, किसी से दबता नहीं और धुन का पक्का है।
अब बात करते है उपन्यास 'खेल खिलाड़ी का' के कथानक की।
पिछले घटनाक्रम में नब्बे करोड़ के सोने से नाम मात्र सोना लेकर मेजर फरार हो गया था।
नब्बे करोड़ के सोने में से सिर्फ दस-दस ग्राम के पांच बिस्कुट लेकर और जार्ज लुइस के सहयोग का आभार मानते हुए मेजर ने नदी में छलांग लगा दी। (पृष्ठ-10)
'खेल खिलाड़ी का' उपन्यास का कथानक इस घटना के बाद आरम्भ होता है। इस उपन्यास का पूर्व उपन्यास या कहानी अए किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है उक्त घटना का नाम मात्र चित्रण है।

      वहाँ से मेजर सोनीपत पहुंचा। सोनीपत स्टेशन पर ट्रेन रूकते ही मेजर यह सोचकर वहाँ उतर गया कि दिल्ली जाने की जगह यह छोटा शहर उसके ठहरने के लिए ज्यादा ठीक रहेगा।
(पृष्ठ-13)
          मेजर ने सोनीपत को एक सुरक्षा स्थान मान कर यहीं ठहरने का विचार किया लेकिन क्या पता था यहाँ भी मुसीबत उसका पीछा नहीं छोड़ने वाली। और अंततः मेजर एक चक्रव्यूह में फंस ही गया।

Monday, 15 May 2017

45. मौत आयेगी सात तालों में- विनय प्रभाकर

कुछ उपन्यास ऐसे होते हैं जो एक बार पढते ही वर्षों तक याद रहते हैं। उपन्यास की कहानी, पात्र और संवाद पाठक कभी नहीं भूलता। एक अच्छे लेखक की भी यही पहचान है की वो अपने पाठकों को एक ऐसी कहानी दे जिस के दम पर पाठक उस उपन्यासकार को याद रख सकें।    लेखक की प्रतिभा की पहचान भी तभी होती है जब उसकी रचना को पाठक वर्षों तक याद रखें।
      ऐसे ही एक प्रतिभावान लेखक हैं विनय प्रभाकर। उनका एक उपन्यास है, नाना पाटेकर सीरीज का - मौत आयेगी सात तालों में। एक ऐसा उपन्यास या कहें की एक ऐसा पात्र जो पाठक को भूलाये नहीं भूलता।
     मैंने इस उपन्यास को प्रथम समय सन् 2002 में पढा था और वह मेरे मस्तिष्क में एक याद बन कर रहा। और अब पुन: may 2017 को इस उपन्यास को पढा तब भी वही आनंद आया जो पहली बार पढने में आया था।
उपन्यास का मुख्य पात्र है मेजर नाना पाटेकर। वक्त का मारा एक सेना का मेजर, सेना का वह जांबाज आॅफिसर, जिसे वक्त की गर्दिश ने मुजरिम बना दिया। मेजर चाहे मुजरिम हो पर देश उसके लिए पहले है, वह ऐसा कोई भी काम नहीं करता जिससे देश को क्षति हो। अब तो वह कानून की नजर में एक अपराधी है। एक ऐसा अपराधी जिस पर कई हत्याओं का आरोप है। आतंकवादी, पुलिस और कुछ अन्य लोगों की हत्याओं के आरोप, जिसमें में से कई सच हैं तो कई झूठ।
प्रस्तुत उपन्यास के कथानक की बात करें तो इसकी कहानी प्रतिशोध और डकैती पर आधारित है। क्या नाना पाटेकर जैसा देशभक्त डकैती करेगा।
कहानी-
नाना पाटेकर के वृद्ध चाचा  प्रताप पाटेकर की हत्या उनकी जवान वीबी ऋचा अपने प्रेमी इंस्पेक्टर युसूफ खान के साथ मिलकर कर देती है और इंस्पेक्टर इस हत्या का आरोप मेजर नाना पाटेकर पर लगा देता है। नाना पाटेकर को सजा सुना दी जाती है। प्रतिशोध की आग में जलता मेजर एक दिन जेल से फरार हो जाता है।
     जाॅन, इकबाल, ऊदल और चंदू चारों ब्रिटिश कंसुलेट की इमारत के एक कर्मचारी के नाखून चुराना चाहते हैं। जी हाँ, नाखून, जिनकी कीमत लाखों में।
   दूसरी तरफ है एक चाण्डाल चौकङी। पण्डया, दामू, ढोलिया और धनू। यह चाण्डाल चौकङी छोटी-मोटी लूट कर अपना जीवन यापन करती है।
किस्मत इन सभी को एक साथ मिला देती है। तब प्लान बनता है अमेरिकन सेंटर नामक इमारत में मौजूद उपस्थित दो टन सोने को लूटने का।
  लेकिन इसके लिए पहले कुछ रुपयों की जरूरत थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए एक टीम बनाकर एक बीयर बार लूटने की कोशिश की जाती है। लेकिन वहाँ से भी जान बचाकर भागना पङता है। वह बीयर बार था एक गुण्डॆ असलम का। अब असलम को तलाश है उन लोगों की जिन्होंने उसके बीयर बार को लूटने की कोशिश की।
     युसूफ खान ब ऋचा को जब नाना पाटेकर के फरार होने की सूचना मिलती है तो वह नाना को मारने की सुपारी गैंगस्टर लक्ष्या भाई को दे देते हैं।
  इन सबसे अंजान नाना पाटेकर अपने लक्ष्य दो टन सोने को लूटने के प्लान पर कार्यरत हैं।
किसी तरहं असलम को भी इस लूट की खबर हो जाती है। वह भी चोर पर चोरी की ताक में बैठा है।
- क्या नाना पाटेकर अपने प्रतिशोध को पूरा कर पाया?
- क्या था लाखों रुपये के नाखूनों का रहस्य?
- नाना पाटेकर दो टन सोना लूट पाया?
-क्या हुआ जब असलम लक्ष्या भाई नाना पाटेकर से टकराये?
- भारत सरकार से चोरी-चोरी दो टन सोना अमेरिकन सेंटर में किसने जमा कर रखा था?
इन सब प्रश्नों के उत्तर तो विनय प्रभाकर द्वारा लिखे गये मौत आयेगी सात तालों में उपन्यास पढकर ही प्राप्त किया जा सकता है।
उपन्यास तेज रफ्तार है, कहीं भी बोरियत या उलझाव नहीं है।
प्रतिशोध और डकैती पर लिखा गया शानदार उपन्यास।
नाना पाटेकर सीरीज का यह अविस्मरणीय कारनामा वास्तव में पढने लायक है।
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उपन्यास- मौत आयेगी सात तालों में।
लेखक- विनय प्रभाकर
प्रकाशक- मनोज पॉकेट बुक्स- दिल्ली
पृष्ठ-270

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