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Monday, 22 December 2025

697. The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

शरारती टाॅम के साहसी कारनामें
The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

  आज प्रस्तुत है एक प्रसिद्ध बाल उपन्यास की समीक्षा । एक शरारती और बहादुर बच्चे की रोमांच से भरपूर कहानी । 

"टॉम !"
कोई उत्तर नहीं ।
"ओ टॉम ! आखिय हो क्या गया है इस लड़के को ? ओ टॉम !"
बूढ़ी पाली मौसी ने अपना चश्मा नाक पर नीचे गिराकर, उसके ऊपर से कमरे में चारों ओर नजर दौड़ाई । फिय उन्होंने चश्मे को माथे पर चढ़ाकर चारों ओर देखा । चश्मे के अन्दर से शायद ही कभी उन्होंने देखने की कोशिश की हो। और सच तो यह है कि वह चश्मा आंख की कमजोरी के कारण नहीं, फैशन के लिए लिया गया था। वे थोड़ी देश तक उलझन में पड़ी खड़ी रहीं, फिर ककंश स्वर में तो नहीं, किन्तु स्वर को इतना तेज बनाकर जरूर बोलीं कि कम से कम कमरे में रखे फर्नीचर उनकी बात सुन सकें, "आज अगर मैं तुझे पकड़ पाऊं तो मैं..."
किन्तु वे अपनी बात पूरी नहीं कर सकीं, क्योंकि उन्होंने झुककर बिस्तर के नीचे झाड़ पीटना शुरू कर दिया था। किन्तु झाड़ पीटकर वे बिस्तर के नीचे से एक बिल्ली के अतिरिक्त और कुछ नहीं निकाल सकीं ।
"ओफ्, ऐसा लड़का तो मैंने कहीं देखा ही नहीं !" दरवाजे पर जाकर उन्होंने बाग में फैले टमाटर के पौधों और 'जिम्पसन' के वृक्षों के बीच भी देखा मगर कहीं भी टॉम का पता न था। सो अब स्वर को काफी ऊंचा करके चिल्लाई, "ओ टॉम !"

Sunday, 12 January 2025

622. विशु जंगल में - सरोज कृष्ण

कहानी साहसी बालक निशा और विशु की
विशु जंगल में - सरोज कृष्ण

"निशा, आज तो जल्दी घर पहुंचना होगा," विशु ने स्कूल बस से उतरते ही निशा को बताया.
"क्यों ? कल डांट पड़ी थी क्या ?"
"नहीं, मगर मां कहती हैं कि बस से उतरते ही सीधे घर आया करो."
"हम सीधे ही तो घर जाते हैं, " निशा ने इतने भोलेपन से कहा कि विशु की हंसी छूट गई.
"हां, बस, नीम के पेड़ के नीचे जरा सा सुस्ता लेते हैं, "
विशु ने शरारत से कहा तो दोनों एक साथ खिलखिला पड़े. उन की सरल व मासूम हंसी बड़ी ही मनमोहक थी.
"ठीक है विशु, आज हम सचमुच जल्दी घर पहुंच जाएंगे. मां और आंटी को नाराज होने का अवसर ही नहीं देंगे."
"हां, ठीक है, चलो भाग कर चलते हैं."
निशा और विशु ने अपने स्कूल बैग को कंधों पर ठीक से चढ़ाया और एकदूसरे का हाथ पकड़ कर कदम से कदम मिला कर दौड़ने लगे.
कंधों पर भारी बैग, उस पर चिलचिलाती धूप, अभी आधी फरलांग की दूरी भी तय नहीं हो पाई थी कि वे पसीने से भीग गए और उन की सांस फूलने लगी.
निशा के कदमों की गति धीमी होती देख विशु ने उस का उत्साह बढाया, ''बस थोड़ा सा और चलो, नीम का पेड़ आने ही वाला है."

  कहानियाँ पढने की रुचि मुझे बचपन से ही थी । बचपन में बालहंस, चंपक, लोटपोट, मधु मुस्कान के अतिरिक्त नन्हें सम्राट भी हाथ लग जाती थी। बालपत्रिकाओं से काॅमिक्स और फिर किशोर पत्रिकाएं भी पढी हालांकि किशोर पत्रिकाएं कम ही आती थी जिनमें से कादम्बिनी प्रमुख थी । 

Saturday, 9 July 2022

525. रोज खून करो- एस. सी. बेदी

यह क्या कहानी हुयी?
रोज खून करो- एस. सी. बेदी

नवाब सलीम साहब के साहबजादे नवाब नजाकत खाँ का विवाह था। राजन- इकबाल और इकबाल के पिता को उस विवाह में पहुंचना था।
   और जब तीनों उस विवाह स्थल पर पहुंचे तो वहाँ पुलिस खड़ी थी।
और तब....
       राजन- इकबाल इंस्पेक्टर बलवीर के साथ एक लाश के पास खड़े थे। लाश एक सफेद चादर से ढकी हुयी थी।
जासूसी बाल साहित्य में एस. सी. बेदी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एस. सी. बेदी ही वह लेखक रहे हैं जिन्होंने बाल साहित्य में जासूसी उपन्यासों को एक सही स्थान दिलाया है।
    'रोज खून करो' भी एक जासूसी बाल उपन्यास है, जिसके नायक 'राजन- इकबाल' नाम के दो बालक हैं।
  उपन्यास का आरम्भ एक शादी वाले घर से होता है, जहाँ मोमबत्ती के माध्यम से एक हत्या की जाती है।  मृतक के पास से एक लड़की की तस्वीर मिलती है और उसी तस्वीर को आधार बना कर राजन- इकबाल आगे की कार्यवाही करते हैं।
    लेकिन उस लड़की की पुलिस निगरानी में कर्नल विनोद के सामने हत्या हो जाती है। लेकिन वह लड़की जाते-जाते एक और व्यक्ति के विषय में जानकारी दे जाती है जिसके हाथ पर मोमबती का निशान है। 

Wednesday, 6 July 2022

523. तेरा खंजर मेरी लाश - एस. सी. बेदी

लाशों का जंगल
तेरा खंजर मेरी लाश - एस. सी. बेदी

प्रथम दृश्य
"कहिये, क्या बात है?"- हरमेश तिवारी ने पूछा।
" हरपालपुर के जंगल में मैं एक युवती की लाश देखकर आ रहा हूँ।"

दृश्य द्वितीय
हवलदार चौंकता हुआ बोला-"यह तो उसी नौजवान की लाश है, जो कल थाने आया था।"
दृश्य तृतीय
तभी फोन की घण्टी बज उठी। रिसीवर उठाकर वह बोला -"हैल्लो, मैं राजन बोल रहा हूँ।"
"मैं‌ इंस्पेक्टर हरमेश हूँ। जंगल में फिर एक कत्ल हो गया है। जल्दी पहुंचो।"
 उक्त तीनों दृश्य एस.सी. बेदी द्वारा रचित उपन्यास 'तेरा खंजर मेरी लाश' के हैं। यह बाल सीक्रेट एजेंट 999 राजन इकबाल सीरीज का उपन्यास है।
उपन्यास का प्रथम पृष्ठ पढते ही पता चल जाता है की यह एक प्रसिद्ध लेखक के उपन्यास की पूर्णतः नकल है।
   बाल जासूसी साहित्य में एस. सी. बेदी सर्वश्रेष्ठ कथाकार माने जाते हैं।  हालांकि और भी कुछ लेखकों ने बाल साहित्य लेखन किया है लेकिन आज उन लेखकों और उनकी रचनाओं का कहीं कुछ पता नहीं चलता। एक लेखक थे रविन्द्र रवि उनकी कुछ रचनाएँ अवश्य उपलब्ध हैं, बाकी बाल साहित्य में अधिकांश Ghostलेखन ही हुआ है।

Tuesday, 12 October 2021

461. बकरे की करामात- एस. सी. बेदी

राजन-इकबाल का कारनामा
बकरे की करामात- एस. सी. बेदी

नमस्कार पाठक मित्रो।
       लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में बहुत अजीब शीर्षक से उपन्यास भी प्रकाशित हुये हैं। और उम्मीद है आपने पढे भी होंगे। माननीय सुरेंद्र मोहन पाठक जी का उपन्यास 'बंदर की करामात' तो काफी चर्चित उपन्यास है। ऐसा ही एक उपन्यास एस. सी. बेदी जी ने लिखा था जिसका शीर्षक है- बकरे की करामात। 
    अब 'बंदर की करामात' और 'बकरे की  करामात' एक जैसे उपन्यास है या दोनों का कथानक अलग है। यह आप इस पोस्ट को पढकर जान जायेंगे।
   उपन्यास प्रसिद्ध जासूस 'राजन-इकबाल' पर आधारित है। राजन एक बार इकबाल को कलवाड़ की पहाड़ियों में‌ जाने को कहता है। इकबाल अपने साथ नफीस को ले जाता है।
      एस.सी. बेदी जी का एक खास पात्र है नफीस। नफीस को ज्यादातर उपन्यासों में हास्य और कम बुद्धि के पात्र के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है।
"आप भी कमाल करते हैं भाईजान।"-इकबाल मुस्कुराता हुआ बोला,-" अगर इसी तरह डरते रहे तो खाक जासूसी करेंगे। मैं तो आपको पक्का जासूस बनाना चाहता हूँ।"
"जासूसी गयी भाड़ में और तेल लेने भी। अपुन को अपनी जान प्यारी है। तुमको मरना है तो जाओ मरो।"

   इकबाल को यहाँ एक स्त्री मिलती है लेकिन‌ इस दौरान नफीस गायब  हो जाता है।
    इकबाल के हाथ यहाँ नेन्सी‌ लगती है और नफीस खो जाता है। राजन-इकबाल के हाथ नेन्सी एक प्रमुख गवाह है, लेकिन एक दिन वह भी रहस्यम तरीके से मृत पायी जाती है।
"समझ नहीं आया।"- इकबाल बोला," चादर पर खून के धब्बे थे और लाश पर एक भी घाव नहीं है।"

Tuesday, 3 December 2019

245. जंगल की कहानी- जेक लंडन

बक नामक कुत्ते की संघर्ष कथा
जंगल की कहानी- जेक लंडन


' जंगल की कहानी' जैक लंडन के उपन्यास ‘कॉल ऑफ दि वाइल्ड’ का सरल हिन्दी रूपान्तर है।

एक कुत्ता था। उसका नाम था बक। लम्बा-चौड़ा, बहादुर, और शानदार कुत्ता। देखने में इतना खूबसूरत कि बस देखते ही रहो। लेकिन अनजान आदमी उसके पास आने की हिम्मत भी नहीं कर सकता था।
बक उत्तरी अमरीका के कैलीफोर्निया प्रदेश की एक सुन्दर घाटी में बसे एक छोटे नगर में रहता था।

          यह कहानी इसी बक नामक कुत्ते की है। एक जज के परिवार में आराम की जिंदगी जीने वाले बक के जीवन में ऐसा परिवेश आता है की उसका पूरा जीवन ही बदल जाता है।
एक के बाद एक बदलती परिस्थितियाँ बक के जीवन को बदल देती है। कभी आराम की जिंदगी जीने वाला बक कठोर मेहनत भी करता है और उसे भरपेट खाना भी नहीं मिलता। और कभी कभी तो उसे मार भी खानी पड़ी।

      बक को चोट से उतना दुःख नहीं हो रहा था, जितना इस अपमान से हो रहा था। अपनी चार साल की जिन्दगी में उसे याद नहीं आ रहा था, आज तक कभी किसी ने उसे इस तरह पीटने या उसपर हँसने की कोशिश की हो। वह फिर झुँझलाकर उठा और तीर की तरह उस आदमी की ओर बढ़ा। लेकिन इस बार भी वह उस आदमी का कुछ नहीं बिगाड़ सका और उसकी नाक डंडे के बार से झनझना उठी। उसके मुँह से खून निकलने लगा।

       पूरा उपन्यास सिर्फ बक पर ही आधारित है। बक के साथ-साथ उपन्यास के पात्र बदलते रहते हैं।
     बक के बाकी साथियों का संघर्ष भी उपन्यास में वर्णित है। कैसे बक एक-एक करके उसके दोस्त मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
कैसे बक अपने दल का नेता बनता है।
कैसे उसे संघर्ष का जीवन जीना पड़ा ।
आदि रोचक घटनाएं उपन्यास पढने पर ही पता चलेगी।
उपन्यास का घटनाक्रम काफी रोचक है। आगे की घटनाओं के प्रति उत्सुकता बनी रहती है।

अजय सिंह द्वारा लिखा गया 'कौओं का हमला' बाल उपन्यास भी एक कुत्ते की जीवन पर आधारित रोचक उपन्यास है, जो काफी समय पहले पढा था। इस उपन्यास को पढते वक्त उस उपन्यास की याद आ गयी। हालांकि दोनों की कहानी बिलकुल अलग है।


यह लघु उपन्यास बक नामक कुत्ते पर आधारित है। उसके जीवन में आये विभिन्न परिस्थितियों और घटनाओं का बहुत रोचक तरीके से वर्णन किया गया है।
अनुवाद के स्तर पर भी उपन्यास अच्छा है। प्रस्तुत उपन्यास पठनीय और रोचक है।

जंगल की कहानी- जेक लंडन
रूपान्तरकार : श्रीकान्त व्यास
ISBN : 978-81-7483-035-7
संस्करण : 2014 © शिक्षा भारती
JUNGLE KI KAHANI (Abridged Hindi Edition of Call of The Wild) by Jack London
शिक्षा भारती
मदरसा रोड, कश्मीरी गेट-दिल्ली-110006

Wednesday, 17 April 2019

184. कवि बौड़म डकैतों के चंगुल में- अरविन्द कुमार साहू

कवि फंस गये डकैतों के चंगुल में...
बाल उपन्यास, अरविन्द कुमार साहू


अरविन्द कुमार साहू द्वारा लिखित 'कवि बौड़म डकैतों के चंगुल में' एक बाल उपन्यास है। यह एक ऐसे कवि की कथा है जो अपनी बेतुकी कविताओं से सभी को परेशान करता है।


उन दिनों डकैतों के मामले में चम्बल घाटी अपने चरम पर थी और बकैतों के मामले में कवि बौड़म अपने चरम पर था
। (पृष्ठ-13)
             एक तरफ कवि की कविताओं से जनता परेशान है और दूसरी तरफ डकैत से। कवि जहाँ सिर्फ रुपये लेना जनाता है तो डाकू सिर्फ रुपये लूटना जानते हैं। एक बार डकैतों से कवि बौडम का अपहरण कर लिया। कवि सिर्फ रुपया लेना जानता था और डकैत कवि से रुपया लूटना चाहते थे।
अब कवि सफल हुआ या डकैत यही उपन्यास का मूल है। यहीं से उपन्यास में रोचकता पैदा होती है। जैसे -जैसे कथा आगे बढती है वैसे -वैसे हास्य रस पैदा होता जाता है और डकैत तथा कवि की हास्य वार्ता भी।

अब देखना यह है की क्या डाकू खूंखार सिंह कवि बौड़म से फिरौती की रकम‌ वसूल पाया और कवि बौडम ने अपनी बेतुकी कविताएँ सुना-सुना कर डाकुओं का क्या हाल किया।

कवि बौड़म की एक कविता भी देख लीजिएगा ।
वह बकैत है, लेकिन चतुर व होशियार है
किसी भी परिस्थिति से निपटने से निपटने को तैयार है।
उसकी कविता ही उसकी उसका हथियार है
जो भी उससे पंगा लेगा, उसका बंटाधार है।

              उपन्यास एक हास्य कथा है लेकिन पढते समय ऐसा कम ही अहसास होता है की यह एक हास्य कथा है। कवि बौड़म की जो हास्य व अटपटी कविताएँ हैं वह भी कोई विशेष प्रभाव नहीं जमा पाती।
उपन्यास पढते वक्त मुझे 'बालहंस' पत्रिका के 'कवि आहत' बहुत याद आये। कवि आहत की कविताओं से लोग इतना परेशान होते थे की वे अपना सिर धुनने लगते थे, पर कवि आहत की तीन-चार पंक्तियों की कविताएँ वास्तव में रोचक होती थी। हालांकि कवि आहत और कवि बौड़म की तुलना मेरा उद्देश्य नहीं है। पर उपन्यास की नीरसता ने कवि आहत की याद दिला दी।
                आरम्भिक पृष्ठों से तो ऐसा लगता है जैसे उपन्यास को अनावश्यक विस्तार दिया गया हो। उपन्यास आरम्भ में सामान्य सी बातों को ज्यादा विस्तार देकर उपन्यास के पृष्ठ बढाने जैसी कोशिश लगती है।
यह एक बाल उपन्यास है तो हो सकता है बाल पाठकों को रूचिकर लगे। लेकिन अनावश्यक विस्तार वहाँ भी खटकेगा।

उपन्यास पात्र-
कवि बौड़म- उपन्यास नायक, एक कवि।
खूंखार सिंह- एक खतरनाक डाकू
जोहार सिंह- खूंखार सिंह का मुख्य साथी
सेंघमरवा- एक डाकू
चोरवा - एक डाकू

निष्कर्ष-
           यह एक बाल उपन्यास है। एक हास्य कवि कैसे डकैतों के चंगुल से स्वयं को आजाद करवाता है। दोनों के मध्य उत्पन्न हास्य पाठक को कुछ हद तक प्रभावित करता है।
बच्चों के लिए एक बार पठनीय रचना है।

उपन्यास- कवि बौड़म डकैतों के चंगुल में
लेखक-  अरविन्द कुमार साहू
प्रकाशक- सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ-
मूल्य- 80₹


Friday, 22 March 2019

181. मुखौटे का रहस्य- अनुराग कुमार सिंह

त्रिमूर्ति का साहसिक कारनामा

    मुझे बाल साहित्य पढने का खूब शौक है। अगर बाल साहित्य रोचक और साहसिक कार्य से भरा हो तो उसका आनंद तो अदभुत है। बच्चों के रोचक कारनामें मुझे आकृष्ट करते रहे हैं।
          अनुराग कुमार सिंह का एक बाल उपन्यास 'मुखौटे का रहस्य' पढने को मिला जो काफी रोचक है।
           मुखौटे का रहस्य कहानी है तीन साहसी बालकों की जो अपनी हिम्मत से एक खतरनाक गैंग से टकरा जाते हैं और उसे अपने साहस और दिमाग से धूल चटा देते हैं।

              सदियों पूर्व इस पृथ्वी पर राक्षस और देवता रहते थे। समय अनुसार देव शक्ति के आगे राक्षस हार गये लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो सदियों पूर्व खत्म हो गये इस रहस्य को खोजना चाहते हैं। ऐसे ही एक वैज्ञानिक है अनिल सहाय। अनिल सहाय के हाथ दुर्लभ, अदभुत किंतु जानलेवा 'मुखौटा' हाथ लगता है।

               जैसा की उपन्यास का शीर्षक है 'मुखौटे का रहस्य' उपन्यास में एक मुखौटा है वह जिसके भी हाथ लगा उसका कत्ल हो गया। लेकिन फिर भी लोग उस मुखौटे का मोह त्याग नहीं पाते।
- क्या है उस अदभुत मुखौटे में?
- क्यों लोग उस मुखौटे के लिए जान देने पर तुले हैं?
- किस को मिला वह मुखौटा?
- आखिर क्या रहस्य है मुखौटे का?


              यह कहानी है अरण्य नामक शहर की - अरण्य एक छोटा सा शहर था यहाँ शहर की आधुनिकता भी थी और गाँव की हरियाली भी। (पृष्ठ-12) यह शहर उस जगह पर स्थित है जहाँ से कभी पाताल लोक जाने का राक्षसों का रास्ता होता था। समय बदला, राक्षस तो न रहे पर उनकी शैतानी ताकतों को प्राप्त करने के लिए कुछ शैतान जाग उठे। लेकिन इन शैतानों का सामना करने के लिए कुछ देव शक्तियाँ 'गरूड़' आदि उपस्थित होती हैं और उनके साथ है त्रिमूर्ति।
तीव्र, सिया और चतुर्भुज की यह त्रिमूर्ति उन शैतानों से जा टकरायी।
तीव्र- उसकी उम्र अभी मात्र 16 वर्ष की थी और वो दसवीं कक्षा का छात्र था। उसका शरीर लंबा और छरहरा था पर नियमित योगाभ्यास के कारण सुडौल और स्वस्थ था। (पृष्ठ-09)
वहीं सिया कराटे में माहिर है तो चतुर्भुज पहलवान शरीर का है।
उपन्यास में जहाँ एक्शन है तो वहीं तीनों बच्चों के बीच का हास परिहास भी उपस्थित है।


           उपन्यास में आधुनिक टेक्नोलॉजी का जिस तरह से बच्चों ने इस्तेमाल किया है वहाँ लेखक महोदय प्रशंसा के पात्र है। इससे उपन्यास में कुछ नयी संभावनाएँ पैदा होती है जैसा की इस श्रृंखला का आगामी उपन्यास 'मंगल के हत्यारे' है तो उम्मीद है उसमें में टेक्नोलॉजी के कुछ रंग-ढंग पढने को मिलेंगे।

        अगर यह उपन्यास बच्चों के लिए है तो इसका मूल्य कुछ ज्यादा है। यह लेखक और प्रकाशक को देखना चाहिए की अगर वो इस उपन्यास को बच्चों तक पहुंचाना चाहते हैं तो इसका मूल्य भी उनके अनुरूप होना चाहिए।

निष्कर्ष-
               'मुखौटे का रहस्य' एक बाल उपन्यास है, जो तीन बालकों के साहसिक कार्य को वर्णित करती है। देव और राक्षस प्रवृत्ति के इस सदियों से चले आ रहे संघर्ष का आधुनिक रूप में वर्णन करता यह बाल उपन्यास आदि से अंत तक रोचक है।
उपन्यास पठनीय है।


उपन्यास- मुखौटे का रहस्य
लेखक- अनुराग कुमार सिंह
प्रकाशक- सूरज पॉकेट बुक्स- मुंबई
पृष्ठ - 162
मूल्य- 150₹

Tuesday, 21 August 2018

136. रोड़ किलर- शुभानंद

ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों का दुश्मन...
रोड़ किलर- शुभानंद, जासूसी बाल उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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             इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नियमों की अवहेलना कर देते हैं। वो ये नहीं देखते की इस अवहेलना से किसी को नुकसान भी हो सकता है। मात्र स्वयं को आगे रखने की यह कोशिश किसी की जान भी ले सकती है।
       अगर बात करें ट्रैफिक नियमों की तो भारत में बहुत से लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते और कुछ लोगों को नियमों का पता भी नहीं होता। जिनकों पता होता है वे भी जानबूझ कर नियमों की अनदेखी करते हैं। यह उपन्यास ऐसे ही नियमों के उल्लंघन करने वालों की कथा कहता है।

शाम का वक्त था।
चौराहे पर रेड लाइट होने पर भी किसी से सब्र नहीं हो रहा था।
गिनती के कुछ वाहन ही स्टॉप लाइन के पीछे रुके थे। बाकी सभी ने धीरे-धीरे आगे बढना आरम्भ कर दिया।
हवा में सनसनाते हुए एक के बाद एक तीर उड़ते हुए आये और स्टॉप लाइन से आगे निकले लोगों के जिस्म में घुसते चले गये। (पृष्ठ-05)

                       वह एक ऐसा व्यक्ति था जो नियमों की अवहेलना करने वालों को मौत के घाट उतार देता था। उस के कारण लोगों में दहशत है। लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने से डरते हैं,  वह चाहे जो भी हो लेकिन उस के डर से लोगों ट्रैफिक नियमों का पालन करना आरम्भ कर दिया।
रोड़ किलर की करतूतों का शहर के लोगों पर कुछ असर जरूर पड़ा था।
काफी लोग सड़क पर ढंग से चलने लगे थे। (पृष्ठ-18)

- आखिर वह लोगों को क्यों मार रहा था?
- उसका ट्रैफिक नियमों से क्या संबंध था।?
- आखिर कौन था रोड़ किलर?
     
           यह एक छोटा सा उपन्यास है जो एक ऐसे युवक की कहानी है जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को मार देता है। यही से यह प्रश्न उठता ही वह कौन है और क्यों लोगों को मार रहा है। हालांकि यह रहस्य ज्यादा देर तक नहीं रहता,  एक दो पंक्तियों से ( रोड़ किलर जो गीत गुनगुनाता है) से आभास हो जाता है की वह लोगों को क्यों मार रहा है।
         लेकिन इस के बाद भी उपन्यास में यह रहस्य बना रहता है की उसके जीवन में जो घटना घटित हुयी तो कैसे जिसके कारण वह रोड़ किलर बना। उपन्यास के अंत में भी एक रोचक ट्विस्ट है, हालांकि यह ट्विस्ट पहले कई फिल्मों में प्रयुक्त हो चुका है।
       इस रोड़ किलर को खोजने के लिए राजन- इकबाल, शोभा-सलमा की चौकड़ी तैनात की जाती है और वह रोड़ किलर को खोजती है।
   
           उपन्यास अम्बाबाद शहर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। अगर देखा जाये तो यह अम्बाबाद शहर गुजरात का अहमदाबाद लगता है। क्योंकि उपन्यास में गुजराती खानपान और बोली प्रयुक्त होती है।
   
          एक अजीब/ सनकी/ सिरफिरे रोड़ किलर और जासूस चौकड़ी का यह उपन्यास रोमांच से भरपूर है।
             
निष्कर्ष-
            एक अलग विषय पर लिखा गया यह लघु उपन्यास बहुत ही रोचक है। पृष्ठ चाहे इसके  कम हैं लेकिन कथा उतनी ही रोचक है।
         उपन्यास रोचक और पठनीय है। पाठक का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है।
         
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उपन्यास- रोड़ किलर (बाल उपन्यास)
ISBN-
लेखक-    शुभानंद
प्रकाशक- सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ-    ‌‌‌‌‌    
मूल्य-       50₹

   विशेष-   यह राजन -इकबाल Reborn Series का चौथा उपन्यास है।
         

Wednesday, 8 August 2018

132. जैक द क्लाक राइडर- खुशी सैफी

  एक नये संसार का रोमांचक सफर...
जैक- द क्लाॅक राइडर- खुशी सैफी, फतांसी‌ लघु बाल उपन्यास, रोचक।
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हादसे अक्सर जिंदगियां बदल देते हैं और आज भी शायद ऐसा ही कुछ हो चुका था।(पृष्ठ-13)
प्रोफेसर कैन एक वैज्ञानिक हैं और वे अक्सर कुछ प्रयोग करते हैं, एक ऐसा ही प्रयोग उनकी जिंदगी को बदल देता है। एक दिन प्रोफेसर कैन रहस्यम तरीके से अपनी लैब में से गायब हो जाते हैं।

Monday, 14 May 2018

113. कौओं‌ का हमला- अजय सिंह

जब कौवों ने किया हमला...
कौओं का हमला- अजय सिंह, बाल उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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'आहट, क्राइम‌ पट्रोल, CID, अगले जन्म मोहे बिटिया ही किजो' जैसे चर्चित धारावाहिक लेखन से अपने पहचान स्थापित कर चुके लेखक अजय सिंह का एक बाल उपन्यास भी इन दिनों खूब चर्चा में हैं।
जहाँ एक तरफ टीवी सीरियल लेखन गंभीर किस्म‌ का है तो वहीं बाल उपन्यास उतना ही सरल और सहज है। लेखन में‌ कहीं भी अतिरिक्त बौद्धिकता नहीं झलकती । एक अच्छे लेखक की यही पहचान होती है की वह कहानी के साथ-साथ सरल भाषा शैली का प्रयोग करे। 'कौओं का हमला' तो है ही बाल उपन्यास तो इसकी भाषा शैली भी बच्चों के अनुकूल है।
लेखक ने विषय बहुत ही रोचक चुना है जो सहज ही पुस्तक पढने को प्रेरित करता है। पाठक के अंदर एक जिज्ञासा उत्पन्न होती है की आखिर कौओं‌ ने‌ किस पर और क्यों हमला किया।
उपन्यास की कहानी बहुत रोचक और धारा प्रवाह है। पाठक के हृदय में‌ निरंतर उत्कण्ठा बनी रहती है की आगे क्या होगा।

Saturday, 30 December 2017

89. एक कैदी की करामात- अलेक्जेंडर ड्यूमा

एक ‌मासूम युवक की त्रासदी भरी कहानी।
बाल उपन्यास, रोचक- पठनीय
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             एलेक्जेंडर डयूमा का यह बाल उपन्यास बहुत ही रोचक है। 
यह एक एडमंड दांते नामक युवक की कहानी है जो एक पानी के जहाज पर काम करता है। यह एडमंड दांते नामक युवक बहुत ही सीधा है और हर किसी पर विश्वास कर लेता है इसी विश्वास के परिणाम स्वरूप उसे उस जुर्म की सजा हो जाती है जिसका उसे पता तक नहीं होता। 
  एडमंड को राजद्रोही माना जाता है, उसके पास से एक खत मिलता है।
     एक सिपाही ने जहाज से एडमंड के कमरे से मिला कागज मेयर के हाथ में रख दिया।........कागज देखते- देखते मेयर के माथे पर पसीना आ गया। (पृष्ठ-17)
   एडमंड दांते का बाप, उसकी मंगेतर और उसके जहाज का मालिक उसका इंतजार करते हैं लेकिन शहर का मेयर उसे एक टापू पर स्थित जेल में बंद करवा देता है।
        समुद्र के अंदर एक टापू है और उसी टापू पर एक जेल है। एडमंड दांते को उसी जेल में कैद रखा जाता है।
     उस जेल में एडमंड को  एक ऐसा व्यक्ति मिलता है जो उसे अमीर बना देता है। 
नन्हीं बहन प्रीती
नन्हीं बहन प्रीती
- एडमंड को जेल की सजा क्यों होती है?
- मेयर उस पत्र से क्यों घबरा जाता है?
- एडमंड जेल से बाहर कैसे निकला?
- एडमंड को जेल में मिला व्यक्ति कौन था?
- एडमंड अमीर कैसे बना?
- एडमंड ने अपने दुश्मनों से बदला कैसे लिया?
     जैसे एक नहीं अनेक प्रश्न है जो इस बाल उपन्यास को पढकर ही प्राप्त होंगे।