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Monday, 22 December 2025

697. The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

शरारती टाॅम के साहसी कारनामें
The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

  आज प्रस्तुत है एक प्रसिद्ध बाल उपन्यास की समीक्षा । एक शरारती और बहादुर बच्चे की रोमांच से भरपूर कहानी । 

"टॉम !"
कोई उत्तर नहीं ।
"ओ टॉम ! आखिय हो क्या गया है इस लड़के को ? ओ टॉम !"
बूढ़ी पाली मौसी ने अपना चश्मा नाक पर नीचे गिराकर, उसके ऊपर से कमरे में चारों ओर नजर दौड़ाई । फिय उन्होंने चश्मे को माथे पर चढ़ाकर चारों ओर देखा । चश्मे के अन्दर से शायद ही कभी उन्होंने देखने की कोशिश की हो। और सच तो यह है कि वह चश्मा आंख की कमजोरी के कारण नहीं, फैशन के लिए लिया गया था। वे थोड़ी देश तक उलझन में पड़ी खड़ी रहीं, फिर ककंश स्वर में तो नहीं, किन्तु स्वर को इतना तेज बनाकर जरूर बोलीं कि कम से कम कमरे में रखे फर्नीचर उनकी बात सुन सकें, "आज अगर मैं तुझे पकड़ पाऊं तो मैं..."
किन्तु वे अपनी बात पूरी नहीं कर सकीं, क्योंकि उन्होंने झुककर बिस्तर के नीचे झाड़ पीटना शुरू कर दिया था। किन्तु झाड़ पीटकर वे बिस्तर के नीचे से एक बिल्ली के अतिरिक्त और कुछ नहीं निकाल सकीं ।
"ओफ्, ऐसा लड़का तो मैंने कहीं देखा ही नहीं !" दरवाजे पर जाकर उन्होंने बाग में फैले टमाटर के पौधों और 'जिम्पसन' के वृक्षों के बीच भी देखा मगर कहीं भी टॉम का पता न था। सो अब स्वर को काफी ऊंचा करके चिल्लाई, "ओ टॉम !"

Thursday, 30 January 2025

630. दस बाल पुस्तकें

बाल साहित्य और हम 
बाल साहित्य की दस किताबों पर समीक्षा

मेरे विद्यालय 'राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय- 6LC' मॆं पुस्तकालय अभी शिशु अवस्था में है । यहां लगभग एक हजार किताबें हैं। उनमें से अशिकतर किताबें बाल साहित्य या कम पृष्ठ की लघु रचनाएं हैं। 
इनमें से कुछ रचनाएं जो मुझे अच्छी लगी उनके विषय में हम यहां चर्चा करेंगे । इस माह मैंने बाल साहित्य पर ध्यान केन्द्रित किया है । और इस पोस्ट में मैंने बाल साहित्य की दस लघु रचनाओं को एक साथ समाहित किया है।

01. महाराजा रणजीत सिंह - प्रीतम‌ सिंह
   

पंजाब के इतिहास में महाराजा रणजीत का नाम बहुत ही मान- सम्मान से लिया जाता है। कहां जाता है उनका शासन एक आदर्श शासन रहा है और महाराजा रणजीत सिंह एक जनप्रिय शासक रहे हैं।
  प्रस्तुत रचना में एक नानी अपने बच्चों को बहुत ही रोचक ढंग से महाराजा रणजीत की कहानी सुनाती है। 
इस लघु रचना की बड़ी विशेषता है इसका प्रस्तुतीकरण, कहानी कहने की कला । रचनाकार ने पुस्तक को कहीं भी ज्यादा तथ्यात्मक, आंकड़े युक्त बनाने का प्रयास नहीं किया है। इसे एक कहानी के रूप में दर्शाया गया है और वह भी छोटे बच्चों के स्तर अनुसार ।
   ऐसे प्रयास बच्चों में महापुरुषों के विषय में जानकारी प्रदान करने में सफल भी होते हैं। और कुछ वाक्य बच्चों में प्रेरणा प्रदान करने वाले भी नजर आते हैं।
पुस्तक- महाराजा रणजीत सिंह
पृष्ठ-     32
अनुवाद- रमेश बक्षी
चित्रांकन- नीता गंगोपाध्याय
मूल्य- 35₹
प्रस्तुत संस्करण- 2022

 

2. धरती से सागर तक- विनीता सिंघल
बाल साहित्य के अंतर्गत पढें एक रोचक और ज्ञानवर्धक पुस्तक ।

इतवार का दिन था और हर इतवार की तरह आज भी अंशु अपने दादा जी के साथ समुद्र के किनारे सैर करने आया था। उसे दूर-दूर तक फैला नीला सागर और उसमें उठती ऊंची लहरें आकर्षित करती थीं। समुद्र की लहरें जब किनारे को छूकर वापस लौटतीं तो पीछे छोड़ जाती थीं ढेर सारे शंख और सीपियां, जिन्हें इकट्ठा करना अंशु को बहुत अच्छा लगता था। उसने शंख और सीपियों का ढेर-सा खजाना इकट्ठा कर लिया था ।
  नमस्ते पाठक मित्रो,
आज प्रस्तुत है बाल साहित्य के अंतर्गत NBT द्वारा प्रकाशित एक छोटी सी पुस्तिका । यह छोटी सी रचना छोटे बच्चों पर आधारित है और छोटे बच्चों के लिए ही है ।
इसमें  हम जानेंगे धरती से लेकर सागर तक और सागर से लेकर धरती की अथाह गहराइयों तक ।
कहानी है अंशु नामक एक छोटे बच्चे की जो अपने दादा के साथ समुद्र किनारे शंख और सिपियां एकत्र कर रहा है । अंशु एक जिज्ञासु बालक है औ उसके दादा उसकी हर बात को ध्यान से सुनते हैं और उसके प्रश्नों का ज्ञानवर्धक उत्तर भी देते हैं।
  
"अच्छा मान लीजिए दादा जी, अगर सब जगह समुद्र ही समुद्र होते तो...?"
"तो न हम होते, न तुम होते...।"
"वह क्यों ?"
"जीवन के लिए पांच तत्व जरूरी होते हैं वायु, अग्नि, जल, प्रकाश और पृथ्वी । अगर इनमें से एक भी तत्व का अभाव हो तो जीवन संभव नहीं।"

   अंशु अपने मम्मी- पापा और बहन गीतू के साथ अण्डमान निकोबार घूमने जाता है जहां उनकी मुलाकात डाक्टर मित्रा से होती है जो बच्चों को वहां के भूगोल की अच्छी जानकारी देते हैं।
दोनों बच्चे जिज्ञासु हैं और डाक्टर मित्रा उनके प्रश्नों के उत्तर देते हैं। यहां ज्वालामुखी, पृथ्वी निर्माण आदि पर रोचक जानकारी मिलती है।
  वहीं नाव की यात्रा के मध्य भी समुद्र, जलीय जीव आदि पर दोनों प्रश्नों के माध्यम से उत्तर प्राप्त करते हैं।
दोनों बच्चों का जिज्ञासु मन न सिर्फ पाठक को उत्तर देता है बल्कि उत्तर के साथ रोचक भी प्रदान करता है।
  यह रचना जहाँ छोटे बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक है वहीं वयस्कों को भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
   अगर आप अपने बच्चों को अच्छा साहित्य देना चाहते हैं, उनके ज्ञानवर्धक में सार्थक वृद्धि करना चाहते हैं तो यह रचना अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
पुस्तक में रंगीन चित्र, उच्च गुणवता के पृष्ठ इसको और अच्छा बनाते हैं।

  National Book Trust की किताबों में शाब्दिक गलतियाँ होती नहीं पर इसमें तीन जगह शाब्दिक त्रृटियां नजर आयी ।
किताब- धरती से सागर तक
पृष्ठ-      36+2
मूल्य-    70₹
चित्राकंन- बिनय सिन्हा

629. जादुई जंगल - मिथिलेश गुप्ता

कहां से आये अश्वमानव
जादुई जंगल- मिथिलेश गुप्ता 

ये कहानी कई बरस पुरानी है।
जब शायद तुम्हारे परदादा के परदादा, तुम्हारी उम्र के रहे होंगे।
ये कहानी है उस जंगल की जो न सिर्फ जादुई था बल्कि कुछ अजीबोगरीब रहस्यों से भरा हुआ था।
कहते हैं उस जंगल की कहानी किसी परियों की कहानी से कम नहीं थी।
ये कहानी उन अश्वमानवों की हैं जिनपर कभी इस जंगल का भविष्य निर्भर था।
ये कहानी उन जादुई मेंढकों की भी है जिन की हुकूमत उस जंगल के कोने-कोने तक फैली हुई थी।
कहते हैं ये कहानी आज भी सिर्फ एक कहानी की तरह ही सुनाई जाती है, कुछ लोग इसे सत्य मानते हैं तो कुछ लोग एक कोरी कल्पना।
सच क्या है, ये मैं नहीं जानती, पर कहते हैं आज भी वो जादुई जंगल उसी स्थान पर बसा हुआ है जहाँ वो सालों से था।
कुछ चमत्कारी शक्तियाँ उस जंगल को इंसानी नज़रों से बचाये हुए हैं।
आइए, चलते है जादुई जंगल के इस सफर पर...

अश्वमानवों की वापसी - मिथिलेश गुप्ता
नमस्ते पाठक मित्रो,

Wednesday, 29 January 2025

628. जगिया की वापसी - अन्नाराम 'सुदामा'

बाल शोषण की मार्मिक कहानी
जगिया की वापसी- अन्ना राम सुदामा

 बाल मजदूरी पर एक छोटे से बच्चे की एक मार्मिक कहानी है 'जगिया की वापसी' । कहानी पढते वक्त आप स्वयं को जगिया के दर्द के साथ जोड़ लेंगे। एक बच्चा किन कठिन परिस्थितियों में अपने परिवार के लिए काम करता है और कैसे लोग उसकी मासूमियत और परिश्रम का लाभ उठाते है ।

 राजस्थानी भाषा की सौंधी महक और परिवेश से सज्जित यह हिंदी में लिखित रचना आपको अवश्य पढनी चाहिए ।
'जगिया की वापसी'राजस्थान के एक क्षेत्र की है। जगिया एक गरीब परिवार का बालक है।‌ बाप शराबी है, बड़ा भाई बकरियाँ चराता है और मां किसी तरह घर को चलाती है। बीमार माँ के लिए दो वक्त की रोटी की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल कार्य है लेकिन फिर भी वह घर परिवार को संभालती है । जब ज्यादा काम होता है तो वह जगिया को भी काम पर साथ लगा लेती है और जगिया का स्कूल जाना बंद हो जाता है। और कभी कभी जगिया महीना भर स्कूल नहीं जा पाता ।

Sunday, 26 January 2025

627. क्ली टापू पर रोमांच- तुनका भौमिक एंडो

तीन साहसी बच्चों का रोमांचक कारनामा
क्ली टापू पर रोमांच- तुनका भौमिक एंडो

लीशा समय-चक्र से बाहर निकल आई थी। वह अपने खयालों में इतनी खोई थी कि अपने आसपास की चकाचौंध पर भी उसकी नजर नहीं गई। 15 साल की उम्र के हिसाब से लीशा की लंबाई ज्यादा थी। उसके काले बालों की चोटी बनी थी। उसने चमकीले रंग का जो स्पेस सूट पहन रखा था, वह उसके दुबले शरीर पर एकदम सही बैठ गया था। वह एक परिसर में दाखिल हुई, जहां मधुमक्खी के विशाल छत्ते की तरह मकान बने थे। परिसर में हजारों छोटे-छोटे अपार्टमेंट बने थे। वह अपने घर के दरवाजे की ओर बढ़ी। उसने दरवाजे पर अपनी हथेली रखी, दरवाजा खुल गया और वह अंदर दाखिल हुई। गोलाकार बैठक मद्धिम, नारंगी रोशनी से रोशन हो गई और लीशा का पसंदीदा संगीत बजने लगा। स्पेस सूट उतार कर लीशा ने सूती कुर्ती पहनी और आराम से कमरे में चहलकदमी करने लगी।
उसने दीवार पर लगा एक बटन दबाया और दीवार एक विशाल पर्दे में बदल गई। डिजिटल वालपेपर सक्रिय हो गया था। घर के दूसरे कमरों की तस्वीर पर्दे पर दिखने लगी। लीशा ने देखा कि घर एकदम खाली था। डिजिटल पर्दा बंद कर वह मैसेज डेस्क पर गई। उसके सामने तुरंत उसकी मां की तस्वीर आ गयी । (प्रथम पृष्ठ से)

'क्ली टापू पर रोमांच' भविष्य की कहानी है हमें आने वाले खतरे की प्रति सचेत भी करती है। अपने कलवर में चाहे यह लघु है पर इसका संदेश का दायरा विस्तृत है। आप कल्पना कीजिए उस भविष्य की जहां आधुनिक और अति आधुनिक संयंत्र, कम्प्यूटर-इंटरनेट, भव्य बिल्डिंग और युद्ध सामग्री तो हमारे पास होगी पर हम से हमारा पर्यावरण और  शुद्धता छीन ली जायेगी ।
आप कल्पना कीजिए एक ऐसे समय की जहाँ पक्षी अतीत की बात होंगे, जहां रोबोट तो होंगे, जहां टाइम ट्रेवल्स तो संभव होगा पर 'हम' सब तकनीक के अधीन होंगे।

Saturday, 25 January 2025

626. चमकदार गुफा- अरूप कुमार दत्त

नमक की तलाश में साहसी बालक
चमकदार गुफा- अरूप कुमार दत्त

चलो आज चलते हैं अरुणाचल प्रदेश के नोक्ते नामक कबीले के दो साहसी बच्चों के साथ एक रोचक और साहसी यात्रा पर...

   "लो...चखो," दादी मां कैमलांग ने कहा।
चूल्हे पर उफनती हुई कड़ाही से उसने एक करछुल भर शोरबा निकाला। बड़ी अच्छी महक उठ रही थी। घेन्याक और छंगुन के मुंह में पानी आ आया। वे तो इसी इंतजार में बठ थे। दादी मां कैमलांग ने बांस की करछुल में फूंक मारकर शोरबे को ठंडा किया। फिर उसने थोड़ा-थोड़ा करके दोनों के खुले हुए ललचाए मुंह में डाल दिया।

625. पांच जासूस - शकुंतला वर्मा

नन्हें जासूसों की बड़ी कहानी
पांच जासूस - शकुंतला वर्मा

बच्चों ने मिलकर एक सोसाइटी बनाई - सीक्रेट सोसाइटी इसका उद्देश्य था ईर्ष्या-द्वेष से परे रहकर, बिना किसी भेदभाव के सबकी सहायता करना। इस सोसाइटी के एक सदस्य निखिल का अपहरण, बच्चे पकड़ने वाला एक गिरोह कर लेता है। क्यों ? सीक्रेट सोसाइटी के अन्य सदस्य क्या इस गिरोह के पंजे से निखिल को छुड़ा पाते हैं? आओ, इस रोमांचक अभियान में शामिल हों।

   जनवरी 2025 में बाल साहित्य को प्राथमिकता दी गयी है जो की काफी रोचक और पठनीय है। बाल साहित्य की काफी सामग्री मेरे पास उपलब्ध है लेकिन पढने का समय कम मिलता है। प्रस्तुत रचना 'पांच जासूस' लगभग दस सालों से मेरे पास उपलब्ध थी पर अब जाकर पढने का समय मिला है ।
    यह कहानी है सातवी-आठवी में पढने वाले कुछ साहसी बालकों की जो अपने साहस और बुद्धि से कठिन परिस्थितियों में हार नहीं मानते और सफलता प्राप्त करते हैं।

Friday, 24 January 2025

624. डाक बाबू का पार्सल- द्रोणवीर कोहली

संवेदना और रोमांच की प्यारी सी कहानी
डाक बाबू का पार्सल- द्रोणवीर कोहली
नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा 'नेहरू बाल पुस्तकालय' के अंतर्गत बच्चों के लिए बाल साहित्य का प्रकाशन किया जाता है और इसी में सन् 1994 में एक किताब प्रकाशित हुई 'डाक बाबू पार्सल' जिसकी आठवी आवृत्ति 2012 में हुयी । मेरे पास उपलब्ध संस्करण 2012 का है।
  यह एक डाक बाबू के माध्यम से रची गयी हास्य, रोमांच और संवेदना से परिपूर्ण लघु रचना है।
पहले हम 'डाक बाबू का पार्सल' का प्रथम पृष्ठ देखते हैं जो कहानी को स्पष्ट करने में सहायक होगा।

हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी में एक पहाड़ी कसबा है। नाम है उसका पनारसा ।

Tuesday, 21 January 2025

623. टोडा और टाहर - ई. आर. सी. दावेदार

मानवीय संवेदना और औद्योगीकरण की कहानी
टोडा और टाहर - ई. आर. सी. दावेदार

बाल साहित्य के अंतर्गत प्रस्तुत है एक अनुदित रचना जो एक बालक और उसके जानवर मित्र की रोचक कहानी है।

 
"कौन है वहां ?" करनोज ने कड़कती आवाज में पूछा। उसका कुत्ता कूच भी गुर्राया। दोनों के कान खड़े हो गए।
बालक करनोज अपने कुत्ते के साथ आसमान की ओर उभरी एक पहाड़ी चट्टान पर खड़ा था। उनके ठीक नीचे एक गहरी डरावनी खाई थी। वे इंतजार में ही थे कि फिर वही आवाज आयी। तड़प भरी चीख अब धीमी पड़ने लगी थी। करनोज को समझते देर नहीं लगी कि दो ऊंची चट्टानों के बीच स्थित जंगल की संकरी पट्टी से वह चीख उभरकर आयी थी। करनोज अपने कुत्ते के साथ उस पहाड़ी की तीखी ढलान पर तेजी से उसी दिशा में पूरी सावधानी के साथ दौड़ पड़ा। एक कदम भी गलत पड़ जाता तो सीधा फिसलकर वह खाई में जा गिरता। उन्होंने छोटे से सीलन भरे और अंधेरे जंगल में प्रवेश किया। करनोज अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा और अंधेरे में देखने की कोशिश करने लगा। मंद रोशनी में उसे जाल में फंसा हुआ एक नन्हा नीलगिरि टाहर दिखाई पड़ा। वह आखिरी बार हल्के से मिमियाया और छटपटाना बंद करके एकदम शांत होकर गिर पड़ा। करनोज ने सोचा, वह मर गया है। फंदे के तार से उसकी गर्दन अंदर तक कट गयी थी और वहां से खून बह रहा था।
(पुस्तक अंश)

Sunday, 12 January 2025

622. विशु जंगल में - सरोज कृष्ण

कहानी साहसी बालक निशा और विशु की
विशु जंगल में - सरोज कृष्ण

"निशा, आज तो जल्दी घर पहुंचना होगा," विशु ने स्कूल बस से उतरते ही निशा को बताया.
"क्यों ? कल डांट पड़ी थी क्या ?"
"नहीं, मगर मां कहती हैं कि बस से उतरते ही सीधे घर आया करो."
"हम सीधे ही तो घर जाते हैं, " निशा ने इतने भोलेपन से कहा कि विशु की हंसी छूट गई.
"हां, बस, नीम के पेड़ के नीचे जरा सा सुस्ता लेते हैं, "
विशु ने शरारत से कहा तो दोनों एक साथ खिलखिला पड़े. उन की सरल व मासूम हंसी बड़ी ही मनमोहक थी.
"ठीक है विशु, आज हम सचमुच जल्दी घर पहुंच जाएंगे. मां और आंटी को नाराज होने का अवसर ही नहीं देंगे."
"हां, ठीक है, चलो भाग कर चलते हैं."
निशा और विशु ने अपने स्कूल बैग को कंधों पर ठीक से चढ़ाया और एकदूसरे का हाथ पकड़ कर कदम से कदम मिला कर दौड़ने लगे.
कंधों पर भारी बैग, उस पर चिलचिलाती धूप, अभी आधी फरलांग की दूरी भी तय नहीं हो पाई थी कि वे पसीने से भीग गए और उन की सांस फूलने लगी.
निशा के कदमों की गति धीमी होती देख विशु ने उस का उत्साह बढाया, ''बस थोड़ा सा और चलो, नीम का पेड़ आने ही वाला है."

  कहानियाँ पढने की रुचि मुझे बचपन से ही थी । बचपन में बालहंस, चंपक, लोटपोट, मधु मुस्कान के अतिरिक्त नन्हें सम्राट भी हाथ लग जाती थी। बालपत्रिकाओं से काॅमिक्स और फिर किशोर पत्रिकाएं भी पढी हालांकि किशोर पत्रिकाएं कम ही आती थी जिनमें से कादम्बिनी प्रमुख थी । 

Thursday, 9 January 2025

621. आपरेशन डम डम डिगा डिगा- संजीव जायसवाल 'संजय'

डाक्टर डिमांगो का कहर और प्रोफेसर का आविष्कार
आपरेशन डम डम डिगा गिडा- संजीव जायसवाल 'संजय'

विश्व विजय प्राइवेट लिमिटेड बुक्स दिल्ली द्वारा बाल साहित्य की रोचक किताबों का प्रकाशन सराहनीय प्रयास है।
प्रस्तुत लघु बाल उपन्यास प्रसिद्ध लेखक संजीव जायसवाल 'संजय' जी की एक्शन, रोमांच से परिपूर्ण विज्ञान गल्प है।
  यह कहानी है एक प्रोफेसर के आविष्कार और विश्व विजेता बनने के स्वप्न लेने वाले खतरनाक डाक्टर डिमांगो की।
        प्रोफेसर हेमंत राय की आंखों में आज एक विशेष चमक श्री. पिछले दो वर्षों से वे जिस महत्वपूर्ण आविष्कार के लिए दिनरात जुटे हुए थे वह पूर्ण हो गया था. आज विज्ञान भवन में वे महत्वपूर्ण केन्द्रीय मंत्रियों, तीनों सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारियों और देश के प्रमुख वैज्ञानिकों के समक्ष अपने उस महत्वपूर्ण आविष्कार का प्रदर्शन करने जा रहे थे.

Sunday, 31 December 2023

595. चंपक 2023, दिसम्बर -द्वितीय

बाल पत्रिका चंपक
चंपक 2023, दिसम्बर -द्वितीय
लो जी, एक साल और खत्म हो गया। जिस वर्ष )2023) का उत्साह के साथ स्वागत किया था, वह साल अपने साथ बहुत सी यादें लेकर चला गया।
जब नया आयेगा तो तय है पुराना तो जायेगा ही। सन् 2023 चला गया और हम नववर्ष 2024 का स्वागत करते हैं।
       जब से मैंने यह ब्लॉग आरम्भ किया है तो उसमें सन् 2023 पहला वर्ष है जिसमें सब से कम किताबें पढी हैं और उस से भी कम किताबों पर अपने विचार लिखे हैं। इस साल कुल 40 किताबों पर अपनी समीक्षाएं लिखी हैं और लगभग पचास किताबें पढी हैं।
इस वर्ष (2024) में यह संख्या कैसी रहेगी,यह तो पता नहीं, फिर भी अच्छी किताबें पढने की कोशिश रहेगी।
       वर्ष 2023 का समापन बाल पत्रिका चंपक के साथ किया है। चंपक वह पत्रिका है जिसमें मेरी सब से पहले रचना 'जंगल में प्रजातंत्र' प्रकाशित हुयी थी।
अब बात करते हैं पत्रिका चंपक की। समय के साथ चंपक में बहुत परिवर्तन आये हैं। अब इसका आकार भी बदल गया है। प्रस्तुत अंक (दिसंबर- द्वितीय, 2023) क्रिसमिस पर आधारित है। इस अंक में कुल सात कहानियाँ है, जिसमें से तीन कहानियाँ क्रिसमस से संबंधित हैं। कुछ चित्रकथाएं और नियमित स्तम्भ भी है।

Monday, 25 October 2021

468. रस्टी के कारनामे- रस्कीन बाॅण्ड

नन्हें रस्टी की कुछ रोचक शरारतें
रस्टी के कारनामे- रस्कीन बाॅण्ड

रस्किन बॉण्ड का नाम बाल साहित्य में अद्वितीय स्थान रखता है। रस्किन बॉण्ड मूलतः अंग्रेजी के लेखक हैं। उनका साहित्य जितना अंग्रेजी में प्रसिद्ध है उतना ही लोकप्रिय हिंदी में भी है।
        रस्किन बॉण्ड का जितना साहित्य मैंने पढा है, उसमें मुख्य पात्र रस्टी नामक एक बच्चा होता है, या यूं‌ कह सकते हैं वह पात्र रस्किन बॉण्ड के बचपन का प्रतिनिधित्व करता है। 
      'रस्टी के कारनामे' रस्कीन बॉण्ड की कुछ चर्चित कहानियों का संकलन है। यह दो भागों में विभक्त है।
   प्रथम भाग 'केन काका' शीर्षक से है और द्वितीय भाग 'स्कूल से भागना' शीर्षक से है।
     प्रथम भाग में रस्टी, केन काका और दादी के जीवन के कुछ रोचक प्रसंग यहाँ दिये गये हैं। जिनमें मुख्य केन‌ काका के जीवन से संबंधित घटनाएं हैं। 

Monday, 31 August 2020

372. बिजली के खंभों जैसे लोग- सूर्यनाथ सिंह

एक रोचक बाल रचना
बिजली के खंभों जैसे लोग - सूर्यनाथ सिंह

वह जून का महिना था। अमेरिका में वसंत का मौसम था। शनिवार का दिन। शाम के सात बजे थे।...
अमेरिका के केनेडी स्पेस सेंटर के वैज्ञानिक लगातार सुपर कम्प्यूटर के परदे पर नजरें गडा़ए हुये थे। इक्कीस दिन तक चक्कर काटने के बाद डिस्कवरी अंतरिक्ष यान धरती पर उतरने वाला था..... 

     यह कहानी गुरु नामक एक छोटे से बच्चे की। जिनका नाम है एस. सुंदरस्वामी। डिस्कवरी के चालक दल की अगुआई भारतीय मूल के वैज्ञानिक एस. सुंदरस्वामी ने की थी।
       यह कहानी अंतरिक्ष विज्ञान पर आधारित है। अंतरिक्ष यान डिस्कवरी तो सकुशल लौट आया पर वह अपने साथ कुछ ऐसा लेकर लौटा जिसका किसी भी पता नहीं था। और उसी का परिणाम यह निकला की सुंदरस्वामी का बच्चा गुरू एक अतिआधुनिक तकनीक 'फ्लक्स' माध्यम से गायब हो गया।
         गुरु की आँखें खुली तो उसने खुद को चार-पांच लंबे चौडे़ए लोगों से घिरा पाया। उसने गर्दन उठाकर देखा। इतने लंबे आदमी उसने कभी नहीं देखे थे। कहीं किसी किताब में भी नहीं पढा। उनकी लंबाई बिजली के खंभों जितनी रही होगी। (पृष्ठ-16)
- गुरु गायब कैसे हुआ?
- 'फ्लक्स' तकनीक क्या है?
- गुरु को कैसे खोजा गया?
- अन्य ग्रह का पृथ्वी से क्या संबंध है?
- अन्य ग्रह के लोग पृथ्वी ग्रह के संपर्क में जैसे आये?
उक्त प्रश्नों को जानने के लिए यह बाल रचना पढनी होगी।

Thursday, 30 July 2020

360. साईकिल- बाल पत्रिका

बच्चों का संसार
साईकिल- बाल पत्रिका

साईकल बच्चों की द्वि मासिक बाल पत्रिका है। यह बच्चों के लिए काफी उपयोगी है। मुझे साईकिल पत्रिका का 'जून-जुलाई 2020' अंक पढने‌ को मिला।
       इस पत्रिका में बच्चों के लिए कहानियाँ, कविताएं और अन्य बाल उपयोगी सामग्री उपलब्ध है।
      इस अंक की मुझे विशेष कहानी लगी वह है प्रभात जी द्वारा लिखित कहानी 'घर' यह मनुष्य के मानवेतर संबंधों पर आधारित बहुत ही मार्मिक रचना है। इसके अतिरिक्त मुझे कहानी 'समानता' रोचक लगी, यह एक सनकी राजा की हास्य कथा है।
         मिनाक्षी नटराजन का यात्रा वृतांत 'भारत का सफर' ज्ञानवर्धक आलेख है। वहीं सुभद्रा सेनगुप्त का 'कांचीपुरम के पल्लव' छठी शताब्दी के पल्लव वंश की अच्छी जानकारी प्रदान करता है।
        इस अंक में कहानियों के अतिरिक्त कविताएँ, आलेख, बाल पहेलियाँ जैसे विविध सामग्री भी उपलब्ध है।
साईकिल पत्रिका एक अच्छा प्रयास है लेकिन प्रस्तुत अंक शामिल रचनाएँ बाल साहित्य की श्रेणी की होती हुए भी मुझे बच्चों के लिए उपयोगी नहीं लगी। अधिकांश रचनाएँ (कहानी, कविता) रोचक नहीं है, इनमें बाल रस होने की जगह बौद्धिकता हावी है।
        अगर पत्रिका बच्चों के लिए है रचनाएँ भी उन्हीं के मानसिक स्तर की होनी चाहिए।
        अधिकांश रचनाएँ बहुत छोटी हैं लेकिन पृष्ठ पर चित्र बड़े और शब्द छोटे हैं। अधिकांश पृष्ठ तो मात्र चित्रों से भरे गये हैं। हालांकि यह चित्र वाला प्रयोग भी अच्छा है।
इस पत्रिका को हम अगर कागज के स्तर पर देखे तो यह वास्तव में बहुत अच्छे कागज मुद्रित है, लेकिन कहानी के स्तर पर अभी प्रकाशक/संपादक महोदय को बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। बच्चों को रोचक और हास्यप्रद कहानियाँ अच्छी लगती हैं लेकिन ये कहानियाँ कुछ अलग श्रेणी की हैं।
पत्रिका- साईकिल
आवृत्ति- द्वि मासिक
प्रकाशक-
पृष्ठ- 68
संपर्क
                पत्रिका एक पृृष्ठ

Saturday, 21 March 2020

279. खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन

जिम की साहसिक कथा......
खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
Treasure island का हिन्दी अनुवाद

बाल साहित्य की शृंखला में एक और कड़ी जुड़ गयी और वह कड़ी है राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन के उपन्यास खजाने की खोज की खोज की। यह बाल उपन्यास विद्यालय ले पुस्तकालय में है, अक्सर बच्चे इसे पढने के लिए ले जाते रहे हैं, बस एक मैं ही पुस्तकालय प्रभारी होकर इस उपन्यास को न पढ पाया था। कोरोना वायरस के चलते विद्यालय में बच्चों का अवकाश था तो यह उपन्यास उठा लिया। जब पढने बैठा तो इस रोचक कथानक में बहता चला गया।
एक छोटे से बच्चे की रोचक और साहस भरी दिलचस्प कहानी है। 

बहुत दिन पहले की बात है, मेरे पिता की एक सराय थी। अक्सर उसमें दूर-दूर के मुसाफिर आकर ठहरा करते थे। सराय का नाम था 'एडमिरल बेनवो'। एक दिन मुसफिर वहाँ आया। देखने से वह कोई जहाजी मालूम होता था।
इस बाल उपन्यास की कहानी यहीं से आरम्भ होती है। यह कहानी है जिम नामक एक साहसी युवक की और विल नामक जहाजी की। विल एक जहाजी और वह मुसीबतों के चलते एक सराय में आश्रय लेता है लेकिन मुसीबतें यहाँ भी उसका पीछा नहीं छोड़ती।
...आवाज सुनकर विल चौंक पड़ा, और उसे देखते ही उछलकर खड़ा हो गया और बोला, "कौन, ब्लैक डाॅग?"
"हां, मैं ब्लैक डाॅग ही हूँ। भला यहाँ तुमसे मिलने और कौन आ सकता है...."
(पृष्ठ-)
     इन खतरनाक लोगों के मध्य सराय के मालिक के पुत्र जिम के हाथ एक नक्शा लगता है। वह नक्शा है एक खजाने का। लेकिन जिम इतना सक्षम न था की वह इस खाजने को खोज ले।
      कप्तान स्लोमेट, जाॅन सिलवर, ट्रिनोली और डॉक्टर लिवेसे के संग जिम एक जहाज द्वारा खजाने की खोज में निकलता है। यहाँ से एक रोमांचक भरी और साहसी यात्रा आरम्भ होती है। "चलो, सीधे जहाज की ओर चलो। अब हमें यात्रा शुरू कर देनी चाहिए।" (पृष्ठ-30)
      यह यात्रा और उसके पश्चात एक टापू पर घटने वाली घटनाएं, खजाने की तलाश और खजाने के लिए जारी संघर्ष इस कथा को रोचक बना देता है।
नन्हें जिम के कारनामे उपन्यास की कथा में श्रीवृद्धि करते हैं। जिम और विल का चरित्र उपन्यास को बहुत रोचक बनाता है।
80 पृष्ठीय उपन्यास को लगभग सौ पृष्ठ तक बढाकर और भी रोचक बनाया जा सकता था, हालांकि उपन्यास अब भी रोचक है।
यह उपन्यास मुझे रोचक लगा। घटनाक्रम तीव्र है और घटनाएँ प्रभावशाली वह चाहे सराय की हो या टापू की। उपन्यास बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के लिए भी पठनीय है।

उपन्यास- खजाने की खोज
मूल उपन्यास- Treasure island
लेखक- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
अनुवादक-
प्रकाशक- उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
संस्करण-प्रथम, 2013
मूल्य- 110₹

Sunday, 23 February 2020

269. अन्नु और स्वामी विवेकानन्द- राम पुजारी

अन्नु और स्वामी विवेकानन्द- राम पुजारी

भौतिक युग में हम सात्विकता से दूर होते जा रहे हैं। हम उस वृक्ष की तरह होते जा रहे हैं जिसकी धीरे-धीरे मूल काट दी जाये। इंटरनेट युग के बच्चे अपनी संस्कृति और सभ्यता से विलग होते जा रहे हैं, उन्हें फिल्मों, डिजिटल दुनिया की जानकारी तो है लेकिन अपने देश के युग नायकों को भुल रही है।
     स्वामी विवेकानन्द जिन्हेें युवाओं का प्रेरणा पुरूष कहा जाता है। यह छोटी सी किताब विवेकानन्द जी को बहुत ही सहज और सरल तरीके से प्रस्तुत करती है ताकी किशोरावस्था के बच्चे युग नायक स्वामी विवेकानन्द जी को समझ सके। सिर्फ समझ ही नहीं बल्कि उनकी प्रेरणा से आगे भी बढ सके।
इस लघु जीवनी में हालांकि विवेकानन्द जी के संपूर्ण जीवन को समेटना संभव नहीं है लेकिन लेखक महोदय ने जो आवश्यक और उपयोगी प्रसंग इस किताब में प्रस्तुत किये हैं वे सब बच्चों के संस्कार और विवेकानन्द जी को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
     अन्नु एक छोटी सी बच्ची है जो अन्तरिक्ष जगत की जानकारी तो रखती है लेकिन वह विवेकानन्द जी को नहीं जानती, तब उसके चाचा उसे बहुत ही सरल तरीके से उसे विवेकानन्द जी का परिचय देते हैं।
     विवेकानन्द साहित्य मुझे बहुत प्रभावित करता है इसलिए मैं समयानुसार विवेकानन्द जी के साहित्य को पढता रहता हूँ और मेरी इच्छा होती है की छोटे बच्चे भी विवेकानन्द जी को जाने और इस दृष्टि से यह पुस्तक बहुत उपयोगी है।
    लेखक का यह प्रयास बहुत अच्छा है। बच्चों के लिए ऐसी प्रेरणादायक किताबें आनी चाहिए ताकी बच्चें सरलता से भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अध्ययन कर भारतीय युुुग पुुुुरुषोंं को जान सके।

कुछ रोचक पंक्तियाँ
- गुरु वो होता है जो हमारे अज्ञान के अंधकार को दूर करता है। हमें सभी मार्ग बताता है। (पृष्ठ-25)
-भय का सामना करने से भय स्वयं खत्म हो जाएगा।
(पृष्ठ-31)
पुस्तक- अन्नु और स्वामी विवेकानन्द
लेखक- राम पुजारी
प्रकाशक- निखिल पब्लिशर्स और डिस्ट्रीब्युटर्स, उत्तर प्रदेश
पृष्ठ- 48

मूल्य- 50₹

माउंट आबू स्थित 'चंपा गुफा' जहां विवेकानन्द जी ने शिकागो धर्म सम्मेलन में जाने से कुछ समय पूर्व ध्यान किया था।