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Monday, 14 August 2023

570. मौत सस्ती है - राज भारती

क्या विनोद खन्ना ने की थी एक हेरोइन की हत्या?
मौत सस्ती है- राज भारती

'सब झूठ है ।' आवेश में उसकी आवाज कांपने लगी 'पाल पहले ही कहता था कि ऐसा होगा वह जानता था कि उसको जीवित नहीं छोड़ा जायेगा। मैं जानती हूं कि तुम्हारे ही किसी आदमी उसकी जिन्दगी का सौदा कर डाला होगा।' - उसकी आंखों में अब आंसू झलक आये - 'वह पहले ही कहता था... तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिये।' 
विजय बोला - 'वह महज दुर्घटना ही है। मैं खुद बाथरूम के बाहर मौजूद था । बाथरूम में दरवाजे के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं है।'-  
कमल उसे घूरती रही, उसके होंठ अब भी कांप रहे थे । (मौत सस्ती है- राज भारती)

   अनिता एक प्रसिद्ध अभिनेत्री थी। उसका एक फिल्म अभिनेता से और एक खतरनाक अपराधी से अच्छा संपर्क था। लेकिन एक दिन अनिता अपने घर के स्वीमिंग पूल में मृत अवस्था में पायी गयी। आखिर उसकी हत्या किसने और क्यों की?
  पुलिस सुपरिडेटेंड रघुनाथ और जासूस विजय जब अभिनेत्री सुनीता के घर पहुँचे तो वहाँ का दृश्य अत्यंत वीभत्स था। अनीता के साथ-साथ घर के नौकरों का लाशें यहाँ-वहाँ पड़ी थी।
एक साथ इतने कत्ल।
इतना भयंकर हत्याकांड।
कितनी सस्ती नजर आ रही थी उसे मौत । कार में बैठा विजय वापस जाते समय वह यही सोच था।

Sunday, 18 June 2023

567. नवाब मर्डर केस - राज भारती

और इस तरह मारे गये छोटे नवाब जी
नवाब मर्डर केस- राज भारती

नवाब स्टील रौलिंग कम्पनी के मालिक के बड़े नवाब साहब के शाहबजादे छोटे नवाब फारुख शेख साहब जरा रंगीन मिजाज आदमी थॆ। अपनी कम्पनी की लड़कियों को बहला-फुसला कर अपने फार्म हाउस ले जाना, उनके साथ मनमर्जी या जबरदस्ती के साथ अपनी विषय पूर्ति करना उनका शौक था। काम मनमर्जि से हो गया तो ठीक नहीं तो छोटे नवाब साहब जबर्दस्ती कर ही लेते थे।
    इसी के कामों के चलते एक दिन अपने फार्म हाउस पर छोटे नवाब साहब मरे हुये पाये गये। उनकी पीठ पर किसी ने खंजर ठक दिया था।
अब विषय यह था कि छोटे नवाब साहब का कत्ल किसने किया और क्यों किया?
खैर, क्यों किया यह तो बहुत जल्दी पता चल गया था पत किसने किया यह पता उपन्यास के अंत में चलता है।

नवाब मर्डर केस- राज भारती

              नवाब स्टील कम्पनी की एक कर्मचारी आरती तलवार प्रसिद्ध वकील अभय वर्मा से मिलती है। और वकील अभय वर्मा को बताती है की रात नवाब स्टील कम्पनी के मालिक बड़े नवाब का पुत्र फारूख शेख उसे धोखे से फार्म हाउस ले गया और उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की, वासना का अंधा खेल खेलना चाहा पर वह किसी तरह वहाँ से बच कर निकल आयी।

Thursday, 2 July 2020

340. मौत के फरिश्ते- राज भारती

 भारतीय मिलट्री सीक्रेट सर्विस के जासूस सागर का अभियान

मौत के फरिश्ते- राज भारती
#सागर_सीरीज

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में राज भारती जी ने बहुत सारे पात्रों पर लिखा है। बहुत सी शृंखला आरम्भ की थी। जैसे- अग्निपुत्र, विजय, कमलकांत, सागर आदि। इनमें से सागर सीरीज का एक उपन्यास 'मौत के फरिश्ते' पढने को मिला। यह एक साहसिक कारनामा है। सागर का दुश्मन देश में जाना, अभियान को सफल करना और फिर वहाँ से विकट परिस्थितियों में निकलना। यह सब घटनाएं काफी रोचक प्रतीत होती हैं।

    एक दिन जब सागर राजनगर के किसी होटल में बैठा रम का आस्वाद ले रहा था तो उसी समय जनरल त्रिमूर्ति ने सागर को याद किया।
बिना किसी भू‌मिका के सागर को सामने पा, जनरल त्रिमूर्ति ने कहा- "तुम्हें तिब्बत जाना होगा।"
सागर जानता था कुछ पूछने या बहस करने का मौका नहीं है। संक्षिप्त सा जवाब था- "यस सर। आई एम रैडी सर।"

Wednesday, 31 October 2018

150. अंतरिक्ष का खुदा- राज भारती

 वह बन बैठा चाँद का शैतान.....
अंतरिक्ष का खुदा- राज भारती, थ्रिलर उपन्यास, मध्यम स्तर।

वह खुद को अंतरिक्ष का खुदा मानता है।
वह चाँद की धरती पर अपना राज्य स्थापित करना चाहता था।
चाँद वासी उसे नक्षत्रों का खुदा कहते थे।
वह चन्द्र वासियों को मार रहा था।
वह पृथ्वी वासियों का दुश्मन था।
वह चन्द्रयान‌ को गायब/ नष्ट करता था।
वह ब्रह्माण्ड पर अपना विजयी परचम फहराना चाहता था।

कौन था वह?
वह कहां से आया था?

ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर तो सिर्फ राज भारती के उपन्यास 'अंतरिक्ष का खुदा' को पढ़कर ही मिल सकते हैं।


               लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में राज भारती एक ऐसे लेखक हैं जिन्होंने विभिन्न सीरिज लिखे हैं। हो सकता है यह अतिशयोक्ति हो पर राज भारती ने विभिन्न सीरिज और असंख्य उपन्यास लिखे हैं। (राज भारती द्वारा लिखे गये उपन्यासों की सही सख्या किसी को भी ज्ञात नहीं)
                      राज भारती द्वारा लिखा गया उपन्यास 'अंतरिक्ष का खुदा' विजय- सिंहगी सिरिज का उपन्यास है। इस उपन्यास का सारा घटनाक्रम चाँद की धरती पर घटित होता है।
              अमेरिका ने अपना अंतरिक्ष यान चाँद की धरती पर भेजा, जो पूर्णतः सफल रहा।
       चन्द्र विजय मानव की एक‌ महान विजय थी। इसलिए सारा विश्व हर्ष विभोर था। (पृष्ठ-06)
         इस अभियान से प्रेरित होकर अन्य देश भी इस लक्ष्य को हासिल करने को प्रेरित हुये। जिनमें एक भारत भी था। भारत के वैज्ञानिक बनर्जी जी ने व्यक्तिगत तौर पर एक घोषणा की "वह शीघ्र ही दो रॉकेटों के निर्माण में सफल हो जायेगा जो.. मानव को एक बार फिर चाँद की धरती पर उतारने में सफलता प्राप्त करेंगे।" (पृष्ठ- 09-10)
   
        अमेरिका का अपोलो सीरिज और भारत का साइको सीरिज चन्द्रयान चन्द्रमा की धरती पर पहुंचते हैं। यह भारत और विश्व के लिए खुशी का समय था। लेकिन एक समस्या आ गयी।
        एक भयानक घटना हो गयी।
        जिसने सारे विश्व को चौंका दिया बल्कि विश्व के वैज्ञानिकों को भी भयभीत कर दिया।
(पृष्ठ-49) यह घटना थी ऐसी की चन्द्रयान के यात्री भी दहल उठे।
अचानक अंतरिक्ष में रोशनी की एक लंबी और विचित्र सी लकीर खिंचती चली गयी और अपोलो तरह से टकरा गयी। (पृष्ठ-50)  इस समस्या का कोई समाधान भी नजर नहीं आ रहा था। अंतरिक्ष यात्रियों ने तुरंत पृथ्वी पर अपना संदेश भेजा।
हमें किसी अज्ञात खतरे का आभास हो रहा है। पता नहीं किस प्रकार बिजली की एक तेज लकीर अंतरिक्ष में उत्पन्न हुयी और हमारे यान को चारों तरफ से घेर लिया। (पृष्ठ-50,51)
यह बिलकुल नये ढंग की विपत्ति थी जिसका हल न तो अंतरिक्ष यात्रियों‌ के पास था और न धरती के वैज्ञानिकों के पास। (पृष्ठ-55) और किसी को यह भी नहीं न पता की वह अज्ञात लकीर कहां से आती है और उसे कौन भेजता है। कौन है वह शैतान।
चाँद की वह शक्ति नहीं चाहती कि चाँद की पृथ्वी पर कोई अन्य व्यक्ति उतरे। (पृष्ठ-57) और वह शक्ति अज्ञात है।
भारतीय अंतरिक्ष यान भी इस चमकती लकीर की चपेट में आकर नष्ट हो गया।
साइको प्रथम अंतरिक्ष में नष्ट हो चुका था। इस बारे में कोई संदेह न रह गया था।  क्योंकि धरती की प्रयोगशालाओं में टेलिविज़न स्क्रीनों पर उसे नष्ट होते हुए स्पष्ट देखा गया था।(पृष्ठ-69)
आखिर क्या रहस्य था चाँद पर जहां से अंतरिक्ष यान नष्ट हो गया?
   इसी रहस्य को सुलझाने को निकल पड़े दो और अंतरिक्ष यान।  भारत से साइको और अमेरिका से अपोलो। भारत का जासूस विजय, अशरफ, प्रोफेसर बनर्जी और अमरीका से जासूस माइक अपने अंतरिक्ष यात्रियों के साथ।
   लेकिन चाँद की तो दुनिया ही अलग थी। वहाँ तो चन्द्रवासी लोगों की आबादी थी। जब अंतरिक्ष यात्रियों ने वहाँ लोगों को देखा तो हैरान रह गये।  "मैं तुम्हारी दशा समझ सकता हूँ पृथ्वी के वासियो। तुम मुझे यहाँ देखकर चकित हो लेकिन तुम नहीं जानते कि चाँद पर मैं पचास वर्ष पूर्व आया था।" (पृष्ठ-129) और यहाँ  चाँद पर एक मूल‌ जाति का निवास है। (पृष्ठ-130)
   "पृथ्वी के वैज्ञानिक.... वे  यह भी नहीं जानते कि पचास वर्ष पूर्व एक पृथ्वी का वासी चाँद पर पहुँच चुका है।" (पृष्ठ-130)
   लेकिन चाँद के वासी भी एक शैतान से परेशान हैं। वह शैतान जिसने चाँद के लोगों का जीना हराम कर रखा है।  "चाँद पर इतनी शक्ति किसी के पास नहीं है जो इस शैतान से टक्कर ले सके।" (पृष्ठ-157)
  
   -  क्या जासूस मित्र इस रहस्य को सुलझा पाये?
   - कहां गायब हो गये चन्द्रयान?
   - पचास वर्ष पूर्व चाँद पर पहुंचने वाला व्यक्ति कौन था?
   - चाँद का शैतान कौन था?
    राज भारती का यह उपन्यास एक अलग विषय को प्रस्तुत करता एक जासूसी-थ्रिलर उपन्यास है।
उपन्यास की कहानी अलग विषय और पृष्ठभूमि पर आधारित है। जो पाठक के लिए रोचकता पैदा करती है। लेकिन उपन्यास में लेखक चाँद की धरती को प्रस्तुत तो करता है लेकिन पाठक को कहीं यह अहसास दिलाने में सफल नहीं हो पाता की घटनाक्रम चाँद पर घटित हो रहा है।
              उपन्यास पढते वक्त कुछ अलग अहसास नहीं होता। लेखक अगर कोशिश करता तो यह उपन्यास बहुत अच्छा बन सकता था। लेकिन अब यह मात्र एक एक्शन उपन्यास बन कर रह गया। अगर चाँद की भूमि का अच्छा वर्णन होता, वहाँ के लोगों के बारे में और जानकारी मिलती तो अच्छा था। चन्द्र वासियो और शैतान की लड़ाई का  भी ज्यादा वर्णन नहीं है। एक वह व्यक्ति जो चाँद पर पहुँच गया, वहाँ अपना अधिकार जमा लिया, वह शक्तिशाली तो रहा होगा लेकिन विजय-माइक के समक्ष वह एक मामूली सा गुण्डा नजर आता है जो अनावश्यक डायलाॅग बाजी करता रहता है।
                 उपन्यास का आरम्भ वैज्ञानिक/ तकनीकी जानकारी से संबंधित है तो उपन्यास का अंत एक्शन दृश्यों से भरपूर है।  अगर उपन्यास के अंत में विलन को खत्म करते वक्त कुछ तकनीक इस्तेमाल होती हो उपन्यास में रोचकता अवश्य बढती लेकिन लेखक उपन्यास के अंत में जासूस और खलनायक को आपस में ऐसे उलझते दिखाता है जैसे दोनों सड़क पर लड़ने वाले बदमाश हों।
        अगर इस उपन्यास पर अच्छी मेहनत की जाती तो यह एक अच्छा विज्ञान गल्प उपन्यास साबित हो सकता था।
             
                      
   निष्कर्ष-
                  उपन्यास मध्यम स्तर का है। उपन्यास अपने पृषठभूमि के आधार पर पठनीय है, लेकिन इस उपन्यास को जिस स्तर तक रोचक होना था उतना रोचक है नहीं।
           उपन्यास एक बार अच्छा मनोरंजन साबित हो सकता है।
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उपन्यास- अंतरिक्ष का खुदा
लेखक-    राज भारती
प्रकाशक- पवन पॉकेट बुक्स- दिल्ली
पृष्ठ-       203
उपन्यास लिंक-     अंतरिक्ष का खुदा- राज भारती        



Friday, 13 October 2017

68. नीली आँखों वाली लङकी- राज भारती

सीक्रेट एजेंट सागर का एक खूनी कारनामा।
नीली आँखों वाली लङकी, जासूसी उपन्यास, रोचक।

पवन पॉकेट बुक्स से प्रकाशित राज भारती का उपन्यास ' नीली आँखों वाली लङकी'  अपनी कौम की आजादी के लिए मुस्कुराते हुए अपनी जान देने वाली उन विरांगनाओं की कहानी जिन्होंने अपनी कौम व अपने मुल्क का भविष्य ही बदल दिया.....(मुख्य पृष्ठ से)
यह कहानी है सिलौन (वर्तमान श्री लंका) के दक्षिण में बसे एक स्वतंत्र टापू आइसलैण्ड की।
वहाँ का शासक था जुल्लू सरदार। शासक कम और अत्याचारी ज्यादा। कुछ स्वतंत्रता प्रेमी लोगों ने मिलकर शासक के विरुद्ध आवाज उठा दी। लेकिन जुल्लू सरदार ने सब स्वतंत्रता प्रेमियों को मरवा दिया।
   अपने अंत समय में जुल्लू सरदार ने जनता से लूटी अथाह दौलत वहाँ की किसी गुफा में छुपा दी।
इस रहस्य का पता कुछ ही लोगों को था, पर वह खजाना कहां है, पक्की जानकारी किसी के पास न थी, जो भी जानकारी थी, वह अधूरी और कोङवर्ड में थी।
    स्वतंत्रता प्रेमियों की विधवाओं ने एक संगठन ' सूरज के बेटे' बनाया वहीं एक अन्य क्रांतिकारियों का संगठन भी है जिसने एक आॅप्रेशन 'ब्लास्ट' के लिए चीनी सरकार से हाथ मिला लिया ।
इस छोटे से टापू पर अब तीन दल हैं लेकिन तीनों का एक मकसद समान है और वह है खजाने को ढूंढना।
सूरज के बेटे संगठन की प्रमुख पायला भारत सरकार की मदद लेती है और भारतीय सिक्रेट सर्विस का जासूस सागर उनकी मदद के लिए आइसलैंड आता है।
खजाने की खोज के लिए जब तीन संगठन आपस में टकराते हैं तो टापू पर तबाही का मंजर उठ खङा होता है।

प्रस्तुत उपन्यास की कहानी बहुत अच्छी है पर लेखक/संपादक की कमी से कहानी प्रभावशाली न बन सकी।

नीली आंखों वाली लङकी- राज भारती

नीली आँखों वाली लङकी कहानी है ममता और निशा की।
निशा एक जासूस है लेकिन उसकी शक्ल‌ ममता नामक एक लङकी से मिलती है।
सिंगापुर से लौटते वक्त निशा के चक्कर में कुछ लोग ममता का अपहरण कर लेते हैं।
राणा, देव और शालू ये तीनों कहानी के खलनायक हैं। राणा और देव जिस कम्पनी में काम करते हैं वहाँ से डायमंड भी चुराते हैं। जब निशा को इस बात का पता चलता है तो राणा और देव एक प्लान ‌के तहत  को निशा के अपहरण के‌ लिए शालू को  राजी कर लेते है लेकिन गलती से शालू ममता का अपहरण कर  लेती है।
एक तो डायमंड चोरी के राज खुल जाने का डर दूसरा निशा की जगह ममता का अपहरण ।
दोनों तरफ से फंस जाते है तीनों ।
उपन्यास का समापन बहुत ही रोचक व हैरतंगेज है।
- ममता का अपहरण व बार-बार उसका भागना और हर बार पकङा जाना।
- राणा का निशा के फ्लैट में चोरी से घुसना और फिर वहाँ सागर का आ जाना।
- राणा का दौलत के लिए पाशविक बन जाना।
आदि उपन्यास के रोचक अंग हैं
     उपन्यास में एक जगह जिस कमरे में ममता कैद है इसकी चाबी राणा ले गया और फिर शालू ने वह गेट चाबी से खोल दिया।
उपन्यास में एक-दो सामान्य से कमियाँ रह जाती हैं, लेकिन उपन्यास पठनीय है।
   अधिकतर उपन्यासों में ये तो है की शीर्षक कहानी पहले होती है और उपन्यास के पृष्ठ बढाने के लिए एक उपन्यास में एक लघु उपन्यास जोङ दिया जाता है। पर इस उपन्यास में शीर्षक नीली आँखों वाली लङकी उपन्यास बाद में दिया है और उससे पहले राजभारती का एक अन्य अनाम उपन्यास दे दिया।
दोनों कहानियों का आपस में कोई संबंध नहीं बस दोनों में सिक्रेट सर्विस का एजेंट सागर उपस्थित है। दोनों कहानियों को एक पंक्ति सागर आइसलैंड से सिंगापुर जा पहुंचा से जोङ दिया।
      दोनों कहानियाँ रोचक है और पठनीय है।
  
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उपन्यास- नीली आँखों वाली लङकी
लेखक- राज भारती
प्रकाशक- पवन पॉकेट बुक्स-दाईवाङा, नई सङक-दिल्ली
पृष्ठ- 304
मूल्य- 20
श्रृंखला- सागर सीरिज
लेखक का पता
राज भारती
B-197, वेस्ट पटेल नगर।
दिल्ली- 110006