तीन माह और तीस हत्याएं।
गोली तेरे नाम की, थ्रिलर उपन्यास, मध्यम स्तरीय।
केशव पण्डित को लेकर जितने हिंदी लोकप्रिय उपन्यास जगत में उपन्यास लिखे गये हैं उतने शायद ही किसी और पात्र को लेकर लिखे गयें हों।
लेकिन अफसोसजनक बात यह है की इस पात्र को लेकर अच्छे और सदाबहार उपन्यास किसी भी लेखक ने नहीं लिखे।
केशव पण्डित उपन्यास जगत में वह बहती गंगा थी जिसमें सभी प्रकाशकों ने अपने हाथ धोये।
जुर्म के बाद जुर्म....हत्या के बाद हत्या.....।
आतंक की कोख से सर उठाता नया जुर्म हर बार....खून की स्याही से लिखी जाने वाली एक ऐसी पेचीदा अनसुलझी दास्तान......जिसका न आदि था न अंत.....।
उपर्युक्त पंक्तियाँ उपन्यास के प्रथम कवर पृष्ठ के अंदर दी गयी है। हालांकि यह कोई अनसुलझी दास्तान नहीं है और इसका अंत भी है। बस प्रकाशन ने ऐसा ही लिख दिया।
रायगढ़ रियासत में तीन महिनों में तीस युवकों की हत्या कर दी गयी। सभी नौजवान लगभग बीस साल के हैं। उनकी लाशें नग्न अवस्था में पायी जाती हैं। उनके साथ बेरहमी से अत्याचार किया जाता है और उनका अंग विशेष काट दिया जाता है।
लेकिन अफसोसजनक बात यह है की इस पात्र को लेकर अच्छे और सदाबहार उपन्यास किसी भी लेखक ने नहीं लिखे।
केशव पण्डित उपन्यास जगत में वह बहती गंगा थी जिसमें सभी प्रकाशकों ने अपने हाथ धोये।
जुर्म के बाद जुर्म....हत्या के बाद हत्या.....।
आतंक की कोख से सर उठाता नया जुर्म हर बार....खून की स्याही से लिखी जाने वाली एक ऐसी पेचीदा अनसुलझी दास्तान......जिसका न आदि था न अंत.....।
उपर्युक्त पंक्तियाँ उपन्यास के प्रथम कवर पृष्ठ के अंदर दी गयी है। हालांकि यह कोई अनसुलझी दास्तान नहीं है और इसका अंत भी है। बस प्रकाशन ने ऐसा ही लिख दिया।
रायगढ़ रियासत में तीन महिनों में तीस युवकों की हत्या कर दी गयी। सभी नौजवान लगभग बीस साल के हैं। उनकी लाशें नग्न अवस्था में पायी जाती हैं। उनके साथ बेरहमी से अत्याचार किया जाता है और उनका अंग विशेष काट दिया जाता है।