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Thursday, 1 December 2022

546. फंदा- अनिल सलूजा

बलराज गोगिया शृंखला का प्रथम उपन्यास
फंदा- अनिल सलूजा

"अभी नहीं बल्लू.... कुछ देर और, तब जाओ।”
मुस्करा पड़ा बलराज गोगिया- “लगता है अभी दिल नहीं भरा तेरा।"
“इतने अर्से बाद मिले हो, एक....एक दिन का हिसाब लूंगी।" बड़ी शोख अदा से बोली रजनी।
उसकी शोख अदा ने ही बलराज गोगिया के दिल में खलबली मचा दी, खुद उसका दिल एक बार फिर वही खेल खेलने को मचलने लगा ।
“ठीक है....।” -मुस्कराया बलराज गोगिया और रजनी के उभारों पर अपने हाथ फेरने लगा-“हम यह खेल दोबारा खेलेंगे, मगर, तुझे मेरे यहां आने का पता कैसे चला....?” और फिर
“रूक जा रजनी.... ।”-  दहाड़ उठा बलराज गोगिया ! लेकिन, रजनी ने रूकने का कोई उपक्रम नहीं किया-पूरी रफ्तार से वह गन्ने के खेत की तरफ भाग रही थी, जिसमें से कि पुलिस वाले बाहर निकल रहे थे-पहले तो बलराज का दिल किमा, शूट कर दे उस नागिन को, लेकिन फिर कुछ सोच कर उसने जीप के एक्सीलेटर पर पैर का दबाव बढ़ा दिया।
तोप से निकले गोले की तरह छूटी जीप । पीछे से पुलिस ने फायरिंग कर दी !
                      फन्दा - अनिल सलूजा
खून के सैलाब में लिपटी बलराज गोगिया की ऐसी गाथा जिसमें प्रतिशोध में डूबा गोगिया एक बार फांसी के फंदे से भी नीचे उतर आया। ग्रिल, एक्शन, सस्पेंस और एडवेंचर युक्त यह कहानी एक जलजला है, तूफान है।

Tuesday, 22 November 2022

544. सुलग उठे अंगारे- परशुराम शर्मा

कहानी वारसिला की राजकुमारी की

सुलग उठे अंगारे- परशुराम शर्मा

'जी.. मैं...मगर आप यहां कब तशरीफ ले आए सर?"
"मैं तुम लोगों को कभी भी अनजाने खतरे में नहीं छोड़ता और यदि मैं लापरवाह होता तो आज तुम अवश्य दूसरे लोक में पहुंच जाते। तुम्हारे डिनर पर मौत का पूरा सामान मौजूद था।"

यह सीक्रेट सर्विस के बास पवन का भर्राया स्वर था। पवन...!

वह इन्सान, जिससे सीक्रेट सर्विस के सभी एजेण्ट कांपते थे। पवन उस फरिश्ते के समान था, जो हर समय साए के समान अपने एजेण्टों को अनजान खतरों से बचाया करता था । मदन अक्सर राजेश पर पवन होने का सन्देह करता था, लेकिन अनेक अवसर ऐसे भी आए जबकि राजेश की मौजूदगी में पवन उसके सामने आ चुका था ।

वास्तव में खुद राजेश ही सीक्रेट सर्विस का चीफ पवन था, किन्तु अवसर आने पर 'फाइव टू' भी पवन का रोल अदा करना था। इस रहस्य को 'फाइव टू' के अलावा और कोई भी नहीं जानता था ।

मदन सोचने लगा-क्या राजेश की मृत्यु की सूचना बाॅस को मिल चुकी होगी ? यदि नहीं मिली तो वह किन शब्दों में सूचना दे। पवन के सामने ऐसी सूचना सुनाना अपने मुँह पर तमाचा मारना था, लेकिन तुरन्त ही उसे अपने विचारों पर हँसी आ गयी। (उपन्यास अंश)

Thursday, 3 November 2022

542. ब्लैकमेल- संतोष पाठक

तलाश ब्लैकमेलर और हत्यारे की
ब्लैकमेल- संतोष पाठक

'सुकन्या श्रीवास्तव!’ - मैंने सिगरेट का एक गहरा कश खींचा - पालीवाल प्रोडक्शन हाउस की मार्केटिंग हैड। एक ऐसी लड़की जो सात साल पहले मर्डर चार्ज में चार महीने की सजा भुगत चुकी थी। जो अपने बॉस के बेटे के साथ शादी करने जा रही थी। ऐसी लड़की को कोई ब्लैकमेल कर रहा था। और ऐसे ग्राउंड पर कर रहा था, जो शादी वाला मामला न आ फंसा होता तो सुकन्या एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल चुकी होती। पुलिस में कंप्लेन भी दर्ज करा देती तो कोई बड़ी बात नहीं होती। मगर अभी ब्लैकमेलर के हाथों की कठपुतली बनना उसकी मजबूरी थी। (किंडल से)
     उपन्यासकार संतोष पाठक वर्तमान में उपन्यास साहित्य का वह ज्वलंत सितारा है जिसका प्रकाश निरंतर फैल रहा है। जिस तरह से संतोष पाठक जी लेखन कर रहे हैं, उपन्यास प्रकाशित कर रहे हैं वह स्वयं में एक कीर्तिमान है।
   वर्तमान उपन्यास साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन छाया हुआ है। प्रस्तुत उपन्यास भी मर्डर मिस्ट्री रचना है,जिसका आधार चाहे 'ब्लैकमेल' दिखायी देता है, पर ऐसा है नहीं।
  कहानी है प्राइवेट डिटेक्टिव विक्रांत गोखले की। जिसके पास एक कन्या आती है अपना केस लेकर।
“मैं डॉक्टर हूं मैडम और आप पेशेंट हैं। मर्ज छिपायेंगी तो निदान कैसे कर पाऊंगा? उन हालात में क्या बीमारी बढ़ती नही चली जायेगी?”
“नहीं छिपाने की कोई मंशा नहीं है, वरना मैं यहां आती ही क्यों?”
“दैट्स गुड, बताइये प्रॉब्लम क्या है?”
“मुझे कोई ब्लैकमेल कर रहा है।”

Wednesday, 2 November 2022

541. यामी- आलोक सिंह खालौरी

प्यारा हमारा अमर रहेगा...
यामी- आलोक सिंह खालौरी
महत्वाकांक्षा जब एक सीमा से आगे बढ़ जाती है, तो वो एक जिद, एक जुनून का रूप ले लेती है। ऐसी ही एक महत्वाकांक्षा की कहानी है-ईसा से 500 वर्ष पूर्व एक तांत्रिक तुफैल और उसकी शिष्या कूटनी माया की, जिन्होंने ईश्वरीय सृष्टि के समांतर एक सृष्टि निर्मित करने की महत्वाकांक्षा पाल ली थी। उनकी इस महत्वाकांक्षा में जाने अंजाने ही सहायक बन गई भोली भाली गंधर्व कन्या यामी। यामी-जो अपने प्रेम की तलाश में गंधर्व लोक से पृथ्वी पर आई थी। विधि के विधान ने माया, तुफैल और यामी को समय से 2500 साल आगे सन 2022 में ला फेंका। सन 2022 – जहाँ चाहे अनचाहे दो अन्य व्यक्ति भी माया, तुफैल और यामी के इस द्वंद का मोहरा बन गए -एक युवा आई०पी०एस० और दूसरे इस किताब के लेखक आलोक सिंह खुद। फिर क्या हुआ 2022 में ? कौन जीता ये जंग ? माया या यामी ? क्या यामी अपनी मोहब्बत की तलाश कर पाई ? तुफैल और माया समांतर सृष्टि की स्थापना के अपने उद्देश्य में कहाँ तक सफल हुए ? ऐसे ही अनेक प्रश्नों का उत्तर है यामी। (किंडल से)
   आलोक सिंह खालौरी उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं। अपनी पाँच रचनाओं के दम पर पाठक वर्ग में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं।
   प्रस्तुत कहानी 'यामी' समय यात्रा पर आधारित है। एक युग से दूसरे युग में प्रवेश की कथा है। प्रेम और प्रकृति के समांतर सत्ता स्थापना की कथा है यामी।

Sunday, 30 October 2022

540. कोई लौट आया- चन्द्रप्रकाश पाण्डेय

जातिवाद से उपजी एक हाॅरर कथा
आखिर क्यों?
कोई लौट आया- चन्द्रप्रकाश पाण्डेय

कुटकुट को नहीं पता था कि पुराने तालाब में ऐसी क्या तासीर है कि बच्चों के उधर से गुजरने पर प्रतिबन्ध है मगर इतना जरूर मालूम था कि एक-दो बार रात में उधर से अकेले जा रहे कुछ लोग बुत होकर गिर गये थे, आँखें उलट गयी थीं और मुँह से झाग निकलने लगा था। तालाब के बारे में प्रचलित कहानियाँ और घटनाएं याद करके उसके बदन में भय का संचार होने लगा। ठण्डी हवा से उसका जिस्म पहले ही सिहर रहा था, अब डर से भी सिहरने लगा।
वह ठहरा और मन ही मन हनुमान जी को याद करते हुए कल्पना किया कि वे उसके पीछे-पीछे कंधे पर गदा टिकाये हुए आ रहे हैं। इस ख्याल ने उसे बड़ी राहत दी और वह पुन: अपने हाव-भाव से निडरता दर्शाते हुए आगे बढ़ने लगा। (kindle)
   वर्तमान लोकप्रिय उपन्यास साहित्य की हाॅरर श्रेणी में चन्द्रप्रकाश पाण्डेय का नाम सबसे ऊपर है। अगर मैं अपनी बात करूं तो मुझे हाॅरर मूवीज और कहानी कभी पसंद नहीं आती लेकिन चन्द्रप्रकाश पाण्डेय जी की रचनाओं में जो आकर्षण होता है वह मुझे सम्मोहित कर लेता है। क्योंकि इनके उपन्यास अन्य हाॅरर रचनाओं की तरह मात्र घटनाएं ना होकर एक व्यवस्थित कहानी वाले होते हैं।‌
प्रस्तुत उपन्यास 'कोई लौट आया'  एक पैरानाॅर्मल कहानी है, और यह कहानी समाज की एक दूषित प्रथा जातिवाद पर भी प्रहार करती है।

Saturday, 15 October 2022

537. युगांतर - दिलशाद अली

युग बदला, पर नहीं बदला प्रेम और प्रतिशोध
युगांतर- दिलशाद अली

सुनते आए हैं कि मोहब्बत जब हद से बढ़ जाए, तो इबादत बन जाती है। बिल्कुल ऐसे ही, जैसे दर्द एक हद को पार करके दवा बन जाता है।
कुछ ऐसी ही मोहब्बत थी बाहर ग्रह से आई फूली सी नाजूक, परियों की सुंदर,  विद्युत सी चपल चंद्रिका की और पृथ्वी के साधारण से लड़के तारा की।
             सच्ची मोहब्बत हो और इम्तिहान ना ले, ऐसा संयोग विरला ही देखने में आता है।  तारा, और चंद्रिका की मोहब्बत भी सच्ची थी। न सिर्फ सच्ची थी, बल्कि इबादत
की सूरत भी अख्तियार कर चुकी थी।
             लिहाजा इम्तिहान की शक्ल में उनके हिस्से में युगों- युगों की जुदाई आई, और जुदाई भी ऐसी कि दोनों न सिर्फ एक दूसरे को, बल्कि खुद को भी भूल गए।
क्या हुआ जब याददाश्त खो चुके चंद्रिका और तारा का युगों बाद आमना-सामना हुआ ?
वृहद कालखंड में फैली एक लोमहर्षक विज्ञान फंतासी युक्त प्रेम कहानी।
(किंडल से)
लेखक दिलशाद अली जी के साथ, मेरठ 17.09.2022

उत्तर प्रदेश के हापुड़ शहर के युवा लेखक दिलशाद अली जी की द्वारा रचना 'युगांतर' शब्दगाथा प्रकाशन से प्रकाशित हुयी है।
   यह कहानी है प्रेम और प्रतिशोध की जो सदियों तक फैलाव लिये हुये है।

Wednesday, 28 September 2022

535. तरकीब - आलोक सिंह खालौरी

एक भ्रष्ट नेता की रोचक कथा
तरकीब- आलोक सिंह खालौरी
   एक अकेली लड़की बदला लेना चाहती है अपने उस सौतेले बाप से जिसने ना सिर्फ उसके बाप और माँ की हत्या की थी वरन उसके ऊपर भी जुल्म ढाया था और एक अरबपति बाप की इकलौती बेटी को दरबदर भटकने के लिए मजबूर कर दिया था। एक वकील, जिसे जीने के लिए कोई काम करने की जरूरत ही नहीं थी, मगर अपने बल बूते पर अपनी हैसियत बनाने का वो पुरजोर तमन्नाई था। एक साधारण से केस में हाथ डालने के बाद हालात जिस तेजी से करवट बदले, उसे पता ही नहीं चला। एक सांसद, माफिया, धन कुबेर व्यापारी, जिसकी ताकत का कोई ओर छोर नहीं। राजनीतिक पैंतरों में सिद्धहस्त सारे दाँव-पेंच अपनाकर सरकार को भी बैक फुट पर ले जाने वाला बाहुबली नेता, जिस पर पलटवार करने के लिए सरकार की ओर से नियुक्त एन. सी. बी. और आई. बी. की संयुक्त टीम के भी पसीने छूट जाते हैं। सांझा मंजिल के लिए अलग-अलग रास्तों पर चले जब कई मुसाफिर एक ही पड़ाव पर आकर मिले, तो उनके सामने एक ही चुनौती थी किस तरह उस माफिया का अंत हो सके। और फिर निकाली गई एक -तरकीब..
आलोक सिंह खालौरी जी के साथ, मेरठ- 17.09.2022

Saturday, 24 September 2022

534. दरिंदा- वेदप्रकाश शर्मा

आखिर क्यों बना विकास दरिंदा
दरिंदा- वेदप्रकाश शर्मा

एक तरफ सिंगही का शिष्य वतन था, दूसरी तरफ विजय और अलफांसे का शिष्य विकास। दोनों के टकराव की महागाथा है यह उपन्यास और यह उपन्यास भी यही है जिसमें बताया गया है कि विकास को दरिंदा क्यों जाने लगा।
 वेदप्रकाश शर्मा जी द्वारा रचित उपन्यास 'हिंसक' का द्वितीय भाग है 'दरिंदा। दोनों उपन्यासों की संयुक्त कथा ब्रह्माण्ड के अपराधी सिंगही से संबंधित है। सिंगही विश्व विजेता बनने के लिए एक वैज्ञानिक एडिसन के साथ मिलकर एक घातक योजना के साथ अपनी चाल चलता है और बना देता है एक हिंसक और एक दरिंदा।
  नमस्कार पाठक मित्रो,
     आज 'स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय' ब्लाग में प्रस्तुत है उपन्यास साहित्य के सितारे वेदप्रकाश शर्मा जी के एक्शन उपन्यास 'दरिंदा' की समीक्षा।

Wednesday, 14 September 2022

533. हिंसक - वेदप्रकाश शर्मा

 जब टकराये विकास और वतन
हिंसक - वेदप्रकाश शर्मा
हिंदी लोकप्रिय जासूसी कथा साहित्य में वेदप्रकाश शर्मा अपनी सशक्त लेखनी के दम पर पाठकों के सर्वप्रिय कथाकार रहे हैं। वेदप्रकाश शर्मा अपने पात्रों के द्वारा एक अलग काल्पनिक संसार की रचना करते हैं और पाठक उसी अद्भुत काल्पनिक संसार को उपन्यास के माध्यम से पढकर आनंदित होता है। कुछ पाठकों को चाहे इनके उपन्यास वास्तविकता के नजदीक नजर नहीं आते, यह सत्य भी है, पर यह भी सत्य है की वेदप्रकाश शर्मा जीके उपन्यास कल्पना की एक नयी उड़ान होते हैं। जो इस संसार में वर्तमान में संभव नहीं उसी असंभव को अपने उपन्यासों में संभव कर के दिखाते हैं। 
  प्रस्तुत उपन्यास 'हिंसक' जिसका द्वितीय भाग 'दरिंदा' है की यहाँ संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत है।
   'हिंसक' उपन्यास की कथावस्तु का आरम्भ एक भारतीय वैज्ञानिक  से होता है जो अमेरिका से भारत लौटता है लेकिन भ्रष्ट मानसिकता के सहयोगियों के चलते हुये वह गहरी मुसीबतों में फंस जाता है। 

Wednesday, 7 September 2022

532. मतवाल चंद - संतोष पाठक

संघर्ष अहम् और कर्तव्य का
मतवाल चंद- संतोष पाठक
 
ताकत के मद में ऐंठे एमपी प्रचंड सिंह राजपूत ने मतवाल चंद को पीटते वक्त सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह हरकत उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली थी, ऐसी भूल जो उसकी सल्तनत को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर के रख देगी।
किसी बाहुबली के साथ जंग लड़ना आसान काम नहीं था। वह भी तब जबकि मतवाल का थाना इंचार्ज प्रचंड सिंह के खिलाफ मारपीट का मामला तक दर्ज करने को तैयार नहीं था।
आखिरकार उसने आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया, एक ऐसी लड़ाई जिसके बारे में कोई नहीं जानता था कि उसका अंत कहां जाकर होने वाला था।
शह और मात का खेल चल निकला, कौन जीतेगा और कौन हारेगा इसका अंदाजा लगा पाना बेहद मुश्किल था।
अब देखना ये था कि क्या अकेला चना भांड फोड़ सकता था? (किंडल से)
वर्तमान यथार्थवादी समय में मनुष्य दुखी हो गया है। वह ज्वालामुखी की तरह अपने अंदर अथाह आग लिये बैठा है, बस इंतजार है उस ज्वालामुखी के फटने का। वहीं कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति का जीवन और भी मुश्किल है।‌ वहीं सत्ता और धन के नशे में चूर व्यक्ति कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तियों को हेय दृष्टि से देखते हैं। 'मतवाल चंद' कहानी एक ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी और सत्ता-धन के मद में डूब व्यक्ति के संघर्ष की कहानी है।

Thursday, 1 September 2022

531. गुनाह बेलज्जत - संतोष पाठक

वह अपराध कोई काम नहीं आया
गुनाह बेलज्जत - संतोष पाठक

- एक बड़ा बिजनेसमैन, जिसपर अपनी बीवी कि हत्या का इल्जाम था।
- एक बेरोजगार युवक जो अपनी गर्ल फ्रेंड के जरिये करोड़पति बनने के सपने देख रहा था।
- एक लड़की जो अपने मन कि भड़ास निकालने के लिए झूठ पर झूठ बोले जा रही थी।
- एक सब इंस्पेक्टर जो अपने एस.एच.ओ. की निगाहों में अव्वल दर्जे का गधा था।
- एक परिवार जिसमें कोई किसी का सगा नहीं था।
- ऐसे नकारा और बदनीयत लोगों का जब केस में दखल बना तो मामला सुलझने कि बजाय निरंतर उलझता ही चला गया।
'गुनाह बेलज्जत'
- एक ऐसी मर्डर मिस्ट्री जिसने पूरे पुलिस डिपार्टमेंट को हिलाकर रख दिया। 
            लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में श्रीमान संतोष पाठक जी वर्तमान में उपन्यास लेखन में तीव्र गति से लेखन करने वाले लेखक हैं। कभी - कभी तो पाठक एक उपन्यास पढ नहीं पाता और नया उपन्यास पाठकों के समक्ष आ जाता है और हर उपन्यास उतना ही रोचक और पठनीय होता है जितना की पूर्ववत उपन्यास। इन दिनों मैंने संतोष पाठक जी के दो उपन्यास पढे हैं और एक नया उपन्यास प्रकाशित भी हो गया।
        कहते हैं अपराध के मुख्य कारण 'जर, जोरु और जमीं' होते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त और बहुत से कारण अपराध के हो सकते हैं। 'बहुत से' कारणों में से एक कारण इस उपन्यास में उपस्थित है। यहाँ अपराधी ने अपराध तो किया लेकिन उसका 'गुनाह बेलज्जत' श्रेणी में आ गया।

Tuesday, 9 August 2022

530. जासूसी फंदा- नकाबपोश भेदी

एक साधारण सी मर्डर मिस्ट्री
जासूसी फंदा- नकाबपोश भेदी

       लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में एक समय ऐसा भी था जब Ghost writing का परचम फहराता था। हर एक प्रकाशन ने अपना-अपना छद्म लेखक (Ghost writer) मैदान में उतार रखा था। इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'भयंकर जासूस' में एक लेखक थे नकाबपोश भेदी। नाम से ही स्पष्ट होता है यह छद्म लेखक थे। नकाबपोश भेदी साहब जासूसी उपन्यास लेखन करते थे।
  इनका उपन्यास 'जासूसी फंदा' उपन्यास पढा जो की मर्डर मिस्ट्री आधारित रचना है। उपन्यास नायक हैं इंस्पेक्टर वर्मा।

Saturday, 6 August 2022

529. पीला तूफान - कुमार रहमान

नयी कहानी पुराना अंदाज
पीला तूफान - कुमार रहमान

एक शक्ल के तीन लोग, ऐसा कैसे हो सकता है! आखिर यह मामला क्या है, दो की मौत हो चुकी है और अब यह तीसरी...यह सब यहाँ इस शहर में क्या कर रहे हैं, आखिर क्या मकसद है इसका...सलीम खड़ा सोचता रहा।
    लोकप्रिय जासूसी उपन्यास साहित्य में एक नया नाम सामने आया है - कुमार रहमान। वैसे तो कुमार रहमान जी के उपन्यास Social Network पर काफी समय से दिखाई दे रहे हैं, लेकिन किसी प्रकाशन संस्थान से प्रकाशित होने वाला 'पीला तूफान' प्रथम उपन्यास है।
पीला तूफान एक थ्रिलर उपन्यास है जो आपको 'इब्ने सफी साहब' के समय की याद ताजा करा देगा।
     उपन्यास का आरम्भ एक शहर में आये पीले रंग के तूफान से होता है।
वह शाम अजीब थी। शाम होने पर आसमान सिंदूरी हो जाता है या फिर अक्सर लाल। उस शाम ऐसा नहीं हुआ था। बादलों से भरा आसमान पीला-पीला सा दिख रहा था। शुरू में लोगों ने कुछ खास ध्यान नहीं दिया...जब यह पीलापन बढ़ने लगा तो लोगों की जिज्ञासा खौफ में बदलती चली गयी।
     हर कोई आसमान की तरफ ही देख रहा था। लोग चलते-चलते रुककर ऊपर की तरफ देखने लगते। आसमान पर पीलापन बढ़ने लगा तो लोगों पर खौफ तारी हो गया। लोग छत की तलाश में तेजी से इधर-उधर पहुँचने की कोशिश करने लगे। 'बादलों का रंग इतना पीला कैसे हो सकता है भला?' हर किसी के मन में यही सवाल था।
  
     पीला तूफान तो आकर गुजर गया। पर उस रात की सुबह एक और सनसनी के साथ सामने आयी।

Friday, 5 August 2022

528. C.I.A. का आतंक - वेदप्रकाश शर्मा

विजय का अमेरिकी अभियान
C.I.A. का आतंक - वेदप्रकाश शर्मा

"एक तरफ छात्रों को भड़काना, कुछ नेताओं को विभिन्न प्रकार के लाभ देकर जनता में वर्तमान सरकार के प्रति गलत विचारों का प्रचार करना, पत्रकारों तक को खरीदकर पत्रों द्वारा जनता में गलत भावनाएं भरना, युवा पीढ़ी को मादक वस्तुओं तथा यौवन के सेवन का चस्का डालकर उन्हें पथभ्रष्ट करना, यहां तक कि धर्म में आस्था रखने वाले वर्ग में किसी महापुरुष की हैसियत से अपने किसी सदस्य को उनके बीच पहुंचाना आदि अनेक तरीकों से भारत को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे है और दूसरी तरफ भारतीय सुरक्षा सीमाओं पर तैनात फौजों की युद्ध सामग्री को रास्ते में ही नष्ट करना और तीसरी तरफ पाकिस्तान की आधुनिक युद्ध सामग्री देकर उसे पुनः युद्ध के लिए प्रेरित व तैयार करना उनके मुख्य काम हैं।"
  C.I.A. अमेरिका की गुप्तचर संस्था है। अमेरिका की यह संस्था भारत में सक्रिय थी और उसका कार्य था भारतीय शासन व्यवस्था को अस्त-व्यस्त करना। इसके लिए वह हिप्पियों के वेश में कुछ असामाजिक तत्वों को भारत में भेजती रही है।
  एक दौर था जब हिप्पी लोग भारत में कथित शांति की खोज में आते थे और उस समय अमरीका पाकिस्तान के ज्यादा नजदीक था, वह भारत में आतंकी तत्वों को सक्रिय कर रहा था। उस समय को आधार बना कर वेदप्रकाश शर्मा जी ने 'सी.आई.ए. का आतंक' उपन्यास लिखा है। 

Wednesday, 3 August 2022

527. चीते का दुश्मन- वेदप्रकाश शर्मा

कौन बनेगा खजाने का मालिक
चीते का दुश्मन- वेदप्रकाश शर्मा

'बससे बड़ा जासूस' का द्वितीय भाग
लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में दैदीप्यमान सितारे वेदप्रकाश शर्मा जी के आरम्भिक उपन्यास लगभग पार्ट में ही होते थे।  वेद जी द्वारा लिखित 'सबसे बड़ा जासूस' उपन्यास का द्वितीय भाग है 'चीते का दुश्मन' अगर आपने प्रथम भाग 'सबसे बड़ा जासूस' उपन्यास/समीक्षा पढी है तो आपको याद होगा पूर्व में अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस गठन के लिए विश्व के जासूस रूस में एकत्र हुये। वहाँ सीक्रेट सर्विस के गठन के दौरान यह प्रश्न उठा की इस संस्था का प्रमुख कौन होगा? 
उत्तर आया जो 'सबसे बडा जासूस' होगा वही सीक्रेट सर्विस का प्रमुख बनेगा।
अब सबसे बड़ा जासूस कौन?
इस के लिए अभी चर्चा चल ही रही थी की चन्द्रमा का अपराधी टुम्बकटू वहाँ पहुंच कर समस्त जासूस वर्ग को चैलेंज करता है की जो उसे पकड़ लेगा वह सबसे बड़ा जासूस होगा।
तो सभी जासूस टुम्बकटू के पीछे लग जाते हैं और टुम्बकटू सबको चकमा देता रहता है, आखिर कब तक?
  टुम्बकटू का एक और दावा था, वह था उसके पास अथाह खजाना है। जो व्यक्ति उसे पकड़ लेगा वह उस खजाने का मालिक होगा लेकिन उस खजाने को प्राप्त करने के लिए उसे 'चीते का दुश्मन' बनना ही होगा, क्योंकि उस खजाने का रक्षक एक अद्भुत चीता है जो कि चन्द्रमा का निवासी है।

Monday, 1 August 2022

526. सबसे बडा़ जासूस - वेदप्रकाश शर्मा, भाग-01

आखिर कौन बनेगा - सबसे बड़ा जासूस?
 
सबसे बड़ा जासूस - वेदप्रकाश
 शर्मा
अंतरराष्ट्रीय समस्याओं से निपटने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस बनाने का विचार विश्वमंच पर आया, इसके लिए विश्व के श्रेष्ठ जासूस एकत्र हुये और फिर यह मंच स्वयं में एक समस्या बन गया। क्योंकि वहाँ उपस्थित जासूस वर्ग में सभी स्वयं को मानते थे 'सबसे बड़ा जासूस'।
  जासूसी साहित्य में वेदप्रकाश शर्मा का नाम अद्वितीय है। उन जैसा लेखन अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने विजय के साथ स्वयं का मौलिक पात्र 'विकास' सर्जित कर उपन्यास साहित्य में जो 'एंग्रीयंग मैन' वाले उपन्यास रचे हैं वह पाठकवर्ग में एक समय विशेष में अति चर्चित रहे हैं। 
   विकास एक युवा जासूस है, जो अधिकाश मसले ताकत से सुलझाने में विश्वास रखता है लेकिन वहीं विजय दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करता है। विजय-विकास के अनोखे कारनामे पाठकों बहुत रोचक लगते हैं। एक समय था जब उपन्यास साहित्य में अंतरराष्ट्रीय जासूस वर्ग के एक्शन युक्त कारनामें दिखाये जाते थे।

Saturday, 9 July 2022

525. रोज खून करो- एस. सी. बेदी

यह क्या कहानी हुयी?
रोज खून करो- एस. सी. बेदी

नवाब सलीम साहब के साहबजादे नवाब नजाकत खाँ का विवाह था। राजन- इकबाल और इकबाल के पिता को उस विवाह में पहुंचना था।
   और जब तीनों उस विवाह स्थल पर पहुंचे तो वहाँ पुलिस खड़ी थी।
और तब....
       राजन- इकबाल इंस्पेक्टर बलवीर के साथ एक लाश के पास खड़े थे। लाश एक सफेद चादर से ढकी हुयी थी।
जासूसी बाल साहित्य में एस. सी. बेदी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। एस. सी. बेदी ही वह लेखक रहे हैं जिन्होंने बाल साहित्य में जासूसी उपन्यासों को एक सही स्थान दिलाया है।
    'रोज खून करो' भी एक जासूसी बाल उपन्यास है, जिसके नायक 'राजन- इकबाल' नाम के दो बालक हैं।
  उपन्यास का आरम्भ एक शादी वाले घर से होता है, जहाँ मोमबत्ती के माध्यम से एक हत्या की जाती है।  मृतक के पास से एक लड़की की तस्वीर मिलती है और उसी तस्वीर को आधार बना कर राजन- इकबाल आगे की कार्यवाही करते हैं।
    लेकिन उस लड़की की पुलिस निगरानी में कर्नल विनोद के सामने हत्या हो जाती है। लेकिन वह लड़की जाते-जाते एक और व्यक्ति के विषय में जानकारी दे जाती है जिसके हाथ पर मोमबती का निशान है। 

Wednesday, 6 July 2022

522. हेरिटेज होस्टल हत्याकाण्ड- आनंद चौधरी

बंद कमरे में खून
हेरिटेज होस्टल हत्याकाण्ड- आनंद चौधरी

हेरिटेज हॉस्टल के अन्दर से बंद एक कमरे में जिस अजीबोग़रीब तरीके से शीतल राजपूत की हत्या हुई थी , उस तरीके से हत्या कर पाना किसी आदमजात के लिये कतई मुमकिन नहीं था। वो हत्या कोई प्रेतलीला ही हो सकती थी।
    नमस्कार पाठक मित्रो,
   आपके समक्ष प्रस्तुत आनंद चौधरी के द्वितीय उपन्यास 'हेरिटेज होस्टल हत्याकांड' की समीक्षा। बिहार के निवासी आनंद चौधरी जी का सन् 2008 में उपन्यास आया था 'साजन मेरे शातिर' और अब सन् 2022 में एक लम्बे अंतराल पश्चात इनका उपन्यास 'हेरिटेज होस्टल हत्याकांड' प्रकाशित हुआ है। दोनों उपन्यास मर्डर मिस्ट्री हैं, लेकिन द्वितीय उपन्यास का कथानक एक अलग ही विषय के साथ प्रस्तुत किया गया है। और वह विषय है हाॅरर मर्डर मिस्ट्री। 
     प्रस्तुत उपन्यास की कहानी का आरम्भ एक होस्टल में रहस्यमय तरीके से हुये वीभत्स हत्याकांड से होता है। होस्टल गर्ल शीतल राजपूत की बंद कमरे में वीभत्स ढंग से हत्या होती है, हत्यारा एक-एक अंग को काट-काट कर अलग रख देता है और सारे रक्त को चाट जाता है। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि कमरा अंदर से बंद है, कहीं कोई खिड़की तक खुली नहीं है। कोई सबूत, कोई  आखिर हत्यारा कमरे में से बाहर कैसे निकला और उसने इतने नृशंस ढंग से हत्या क्यों की।
      पुलिस अभी तक ये साबित नहीं कर पाई है कि इस केस से सबंधित सारी घटनायें कोई पिशाच-लीला थी, या किसी इंसान का काला कारनामा।

Sunday, 3 July 2022

521. तथास्तु - शगुन शर्मा

कत्ल की रोचक कहानी
तथास्तु- शगुन शर्मा

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में वेदप्रकाश शर्मा जी एक सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं। उनके उपन्यासों की संख्या चाहे कम हो पर उनके पाठकों की संख्या विशाल है। और इस विशाल पाठक वर्ग को वेद जी जैसे लेखक की तलाश रहती है। जब वेदप्रकाश शर्मा जी के पुत्र शगुन शर्मा का नाम उपन्यासकार के रूप में सामने आया और उनके आरम्भ के उपन्यास पढे तो बहुत रोचक लगे।
   एक लम्बे समय पश्चात शगुन शर्मा जी का उपन्यास 'तथास्तु' पढा। 
     उपन्यास 'तथास्तु' एक थ्रिलर मर्डर मिस्ट्री है। जो रहस्य और रोमांच का मिश्रण लिये हुये है। उपन्यास का आरम्भ पाठक जो वेदप्रकाश शर्मा जी के लेखन की याद दिलाता है।
    उपन्यास का आरम्भ प्लेबैक सिंगर रागिनी माधवन से होता है। रागिनी का पूरा नाम रागिनी माधवन था। वह यौवनावस्था के नाजुक दौर को पहुंची किसी ताजा खिले गुलाब सी सुंदर युवती थी। उसकी आवाज में जैसे जादू और आँखों में हद दर्जे का आकर्षण था। बला के हसीन चेहरे पर शैशव का अल्हड़पन तथा गजब का आत्मविश्वास था। 

Monday, 13 June 2022

520. सावधान, आगे थाना है - राकेश पाठक

भ्रष्ट पुलिस और राजनीति की कहानी
सावधान आगे थाना है- राकेश पाठक
पुलिस स्टेशन का बोर्ड देखकर माँ रुक गयी और उखड़ी सांसों को दुरुस्त करने लगी।
“भगवान का शुक्र है बेटी कि हम उन गुण्डों से पीछा छुड़ाकर यहां तक पहुंच गयी हैं। अगर हम उनके हत्थे चढ़ गयी होती तो वो हमारा सामान और गहने तो लूटते ही, साथ ही तेरी इज्जत से भी खेलते। ये भी हो सकता था कि कानून के डर से वो हम दोनों को जान से मार कर हमारी लाशों को ठिकाने लगा देते। वो देखो, सामने थाना है। अब डरने की कोई जरूरत नहीं है। अब हम सेफ हैं।" 
“हम सेफ नहीं हैं, मम्मी !"
"क्या मतलब?" 
"चलो, जल्दी से वापिस चलो।” 
“दिमाग खराब हुआ है क्या तेरा ? वापिस गये तो वो गुण्डे मिल जायेंगे।" 
“भले ही मिल जायें। लेकिन वो इतने बुरे नहीं होंगे, मगर हम थाने के सामने से गुजरी और पुलिस वालों के हत्थे चढ गयी तो हमारा वो हाल होगा, जो कि गुण्डे भी नहीं करेंगे।"
 क्या वर्तमान समय में पुलिस व्यवस्था इतनी भ्रष्ट हो गयी है?