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Tuesday, 31 December 2024

616. जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ- जूल्स वर्न

पृथ्वी के केन्द्र की रोमांचक यात्रा
Journey to the center of the earth-
'चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो...'- आपने यह गीत तो जरूर सुना होगा, पर आज हम बात कर रहे हैं पृथ्वी के अंदर की। जहां चले हैं चाचा-भतीजा ।
जी हां, यह कहानी है चाचा-भतीजा की जो पृथ्वी के गर्भ की यात्रा पर निकले हैं, और इस यात्रा का नाम हैं - Journey to the center of the earth.
World Trade Park Jaipur-22.07.2021

और सांसों को थमा देने वाली पृथ्वी के केंद्र तक की साहसिक यात्रा प्रोफेसर वॉन हार्डविग और उनके भतीजे हैरी को एक रहस्यमयी पांडुलिपी का पता चलता है, जो हमेशा के लिये उनके जीवन को बदल देता है।
      उस पांडुलिपी के अध्ययन के पश्चात जब वे उसमे छिपी पहेली को सुलझा लेते है तब उन्हें पता चलता है यह पांडुलिपी सोलहवीं शताब्दी के एक आइसलैंडिक दार्शनिक द्वारा लिखा गया है। दार्शनिक, जिसने पृथ्वी के केंद्र तक जाने का एक गुप्त मार्ग खोजने का दावा किया था।
क्या वाकई में ऐसा कोई मार्ग था?

Saturday, 21 March 2020

279. खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन

जिम की साहसिक कथा......
खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
Treasure island का हिन्दी अनुवाद

बाल साहित्य की शृंखला में एक और कड़ी जुड़ गयी और वह कड़ी है राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन के उपन्यास खजाने की खोज की खोज की। यह बाल उपन्यास विद्यालय ले पुस्तकालय में है, अक्सर बच्चे इसे पढने के लिए ले जाते रहे हैं, बस एक मैं ही पुस्तकालय प्रभारी होकर इस उपन्यास को न पढ पाया था। कोरोना वायरस के चलते विद्यालय में बच्चों का अवकाश था तो यह उपन्यास उठा लिया। जब पढने बैठा तो इस रोचक कथानक में बहता चला गया।
एक छोटे से बच्चे की रोचक और साहस भरी दिलचस्प कहानी है। 

बहुत दिन पहले की बात है, मेरे पिता की एक सराय थी। अक्सर उसमें दूर-दूर के मुसाफिर आकर ठहरा करते थे। सराय का नाम था 'एडमिरल बेनवो'। एक दिन मुसफिर वहाँ आया। देखने से वह कोई जहाजी मालूम होता था।
इस बाल उपन्यास की कहानी यहीं से आरम्भ होती है। यह कहानी है जिम नामक एक साहसी युवक की और विल नामक जहाजी की। विल एक जहाजी और वह मुसीबतों के चलते एक सराय में आश्रय लेता है लेकिन मुसीबतें यहाँ भी उसका पीछा नहीं छोड़ती।
...आवाज सुनकर विल चौंक पड़ा, और उसे देखते ही उछलकर खड़ा हो गया और बोला, "कौन, ब्लैक डाॅग?"
"हां, मैं ब्लैक डाॅग ही हूँ। भला यहाँ तुमसे मिलने और कौन आ सकता है...."
(पृष्ठ-)
     इन खतरनाक लोगों के मध्य सराय के मालिक के पुत्र जिम के हाथ एक नक्शा लगता है। वह नक्शा है एक खजाने का। लेकिन जिम इतना सक्षम न था की वह इस खाजने को खोज ले।
      कप्तान स्लोमेट, जाॅन सिलवर, ट्रिनोली और डॉक्टर लिवेसे के संग जिम एक जहाज द्वारा खजाने की खोज में निकलता है। यहाँ से एक रोमांचक भरी और साहसी यात्रा आरम्भ होती है। "चलो, सीधे जहाज की ओर चलो। अब हमें यात्रा शुरू कर देनी चाहिए।" (पृष्ठ-30)
      यह यात्रा और उसके पश्चात एक टापू पर घटने वाली घटनाएं, खजाने की तलाश और खजाने के लिए जारी संघर्ष इस कथा को रोचक बना देता है।
नन्हें जिम के कारनामे उपन्यास की कथा में श्रीवृद्धि करते हैं। जिम और विल का चरित्र उपन्यास को बहुत रोचक बनाता है।
80 पृष्ठीय उपन्यास को लगभग सौ पृष्ठ तक बढाकर और भी रोचक बनाया जा सकता था, हालांकि उपन्यास अब भी रोचक है।
यह उपन्यास मुझे रोचक लगा। घटनाक्रम तीव्र है और घटनाएँ प्रभावशाली वह चाहे सराय की हो या टापू की। उपन्यास बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के लिए भी पठनीय है।

उपन्यास- खजाने की खोज
मूल उपन्यास- Treasure island
लेखक- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
अनुवादक-
प्रकाशक- उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
संस्करण-प्रथम, 2013
मूल्य- 110₹

Tuesday, 3 December 2019

245. जंगल की कहानी- जेक लंडन

बक नामक कुत्ते की संघर्ष कथा
जंगल की कहानी- जेक लंडन


' जंगल की कहानी' जैक लंडन के उपन्यास ‘कॉल ऑफ दि वाइल्ड’ का सरल हिन्दी रूपान्तर है।

एक कुत्ता था। उसका नाम था बक। लम्बा-चौड़ा, बहादुर, और शानदार कुत्ता। देखने में इतना खूबसूरत कि बस देखते ही रहो। लेकिन अनजान आदमी उसके पास आने की हिम्मत भी नहीं कर सकता था।
बक उत्तरी अमरीका के कैलीफोर्निया प्रदेश की एक सुन्दर घाटी में बसे एक छोटे नगर में रहता था।

          यह कहानी इसी बक नामक कुत्ते की है। एक जज के परिवार में आराम की जिंदगी जीने वाले बक के जीवन में ऐसा परिवेश आता है की उसका पूरा जीवन ही बदल जाता है।
एक के बाद एक बदलती परिस्थितियाँ बक के जीवन को बदल देती है। कभी आराम की जिंदगी जीने वाला बक कठोर मेहनत भी करता है और उसे भरपेट खाना भी नहीं मिलता। और कभी कभी तो उसे मार भी खानी पड़ी।

      बक को चोट से उतना दुःख नहीं हो रहा था, जितना इस अपमान से हो रहा था। अपनी चार साल की जिन्दगी में उसे याद नहीं आ रहा था, आज तक कभी किसी ने उसे इस तरह पीटने या उसपर हँसने की कोशिश की हो। वह फिर झुँझलाकर उठा और तीर की तरह उस आदमी की ओर बढ़ा। लेकिन इस बार भी वह उस आदमी का कुछ नहीं बिगाड़ सका और उसकी नाक डंडे के बार से झनझना उठी। उसके मुँह से खून निकलने लगा।

       पूरा उपन्यास सिर्फ बक पर ही आधारित है। बक के साथ-साथ उपन्यास के पात्र बदलते रहते हैं।
     बक के बाकी साथियों का संघर्ष भी उपन्यास में वर्णित है। कैसे बक एक-एक करके उसके दोस्त मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
कैसे बक अपने दल का नेता बनता है।
कैसे उसे संघर्ष का जीवन जीना पड़ा ।
आदि रोचक घटनाएं उपन्यास पढने पर ही पता चलेगी।
उपन्यास का घटनाक्रम काफी रोचक है। आगे की घटनाओं के प्रति उत्सुकता बनी रहती है।

अजय सिंह द्वारा लिखा गया 'कौओं का हमला' बाल उपन्यास भी एक कुत्ते की जीवन पर आधारित रोचक उपन्यास है, जो काफी समय पहले पढा था। इस उपन्यास को पढते वक्त उस उपन्यास की याद आ गयी। हालांकि दोनों की कहानी बिलकुल अलग है।


यह लघु उपन्यास बक नामक कुत्ते पर आधारित है। उसके जीवन में आये विभिन्न परिस्थितियों और घटनाओं का बहुत रोचक तरीके से वर्णन किया गया है।
अनुवाद के स्तर पर भी उपन्यास अच्छा है। प्रस्तुत उपन्यास पठनीय और रोचक है।

जंगल की कहानी- जेक लंडन
रूपान्तरकार : श्रीकान्त व्यास
ISBN : 978-81-7483-035-7
संस्करण : 2014 © शिक्षा भारती
JUNGLE KI KAHANI (Abridged Hindi Edition of Call of The Wild) by Jack London
शिक्षा भारती
मदरसा रोड, कश्मीरी गेट-दिल्ली-110006

Saturday, 18 August 2018

133. द टाइम मशीन- एच. जी. वेल्स

समय से परे की एक यात्रा।
द टाइम मशीन- एच. जी. वेल्स, फतांसी उपन्यास, मध्यम।
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     अगर इस दुनियां के अलावा किसी और दुनियां की कल्पना करते हो और उस दुनियां में जाने के इच्छुक हो तो यह भी अब संभव है। अगर आप अपना अतीत या भविष्य देखना चाहते हो तो यह भी संभव है। आप को कुछ नहीं करना बस एक मशीन, टाइम मशीन में‌ बैठ कर एक बटन दबायें और पहुंच जाये अपनी‌ मनपसंद दुनियां में।
     एच. जी. वेल्स का उपन्यास 'दी टाइम मशीन' एक ऐसे ही काल्पनिक लोक की यात्रा की सैर करवाता है।
इस उपन्यास में लेखक की कल्पना की उपज टाइम मशीन, उस पर सवार होकर समय का सोपान तय करता समय यात्री.... उस की रोमांचक यात्रा में अजीबोगरीब स्थितियों में मिलते और उस की कटु मधु स्मृतियों‌ का हिस्सा बनते तिलस्मी पात्र ...सब अभिभूत कर देने वाले हैं।

Wednesday, 10 January 2018

92. शाॅक ट्रीटमेंट- जेम्स हेडली चेइज

इश्क में पागल एक आशिक की खूनी कथा
शाॅक ट्रीटमेंट, उपन्यास, मर्डर मिस्ट्री, उत्तम।
बद् दिमाग अपाहिज खाविंद की कमसीन, जवान और बेइंतहा खूबसूरत बीवी के नामुराद इश्क में अंधा मूढमति आशिक हो तो फिर कत्ल भला कैसे न हो?
        कुछ उपन्यास ऐसे होते हैं जिन्हें आप पढना आरम्भ करते हो तो अंतिम पृष्ठ पढे बिना छोङने का मन ही नहीं करता। ऐसा ही प्रस्तुत उपन्यास है जेम्स हेडली चेइज का शाॅक ट्रीटमेंट।
    आदि से अंत तक रोचक से भरपूर। हर कदम पर नया और नया रहस्य लिए।
गर आप आज तक अपनी जिंदगी में किसी औरत की फर्जी मुहब्बत के फेर में नहीं पङे हैं तो आपको अपने तजुर्बे के दम पर मैं यही राय दूंगा कि- किसी औरत और उसकी फर्जी मुहब्बत के चक्कर में ना ही पङें तो बेहतर है- वर्ना आपकी भी वही हालत मुमकिन है जो कि मेरी हुयी थी।
   आज जब मैं आपको यह अपनी कहानी बता रहा हूँ तो अब उन दिनों की यादें भी मुझमें कोफ्त पैदा करती हैं।
   यह कहानी है कैलिफोर्निया की पहाडियों में बसे एक छोटे से कस्बे के एक व्यक्ति टेरी रीगन की।
   टेरी रीगन के कस्बे में एक विकलांग व्यक्ति मिस्टर डेगाले  अपनी पत्नी गिल्डा के साथ रहने आता है।
विकलांग होने के कारण मिस्टर डेगाले कुछ शकी, क्रोधी और सनकी स्वभाव का हो जाता है। और उसका गुस्सा अपनी बेहद खूबसूरत और जवान पत्नी गिल्डा पर उतरता है।
   मिस्टर टेरी रीगन भी गिल्डा की खूबसूरती पर फिदा हो जाता है। गिल्डा और टेरी रीगन की मोहब्बत भी परवान चढने लगती है।
   अमीर डेगाले, खूबसूरत गिल्डा और गरीब टेरी रीगन। अजीब पात्र है तीनों।
   डेगाले की सनक से गिल्डा भी परेशान है और टेरी रीगन भी।
तब टेरी रीगन गिल्डा को पाने के लिए एक साजिश रचता है और साजिश के तहत डेगाले का कत्ल कर देता है।
अब पुलिस उस कत्ल को आत्महत्या मान कर केस को बंद कर देती है।
  पर पाठक मित्र उपन्यास अभी बाकी है। कहानी में टविस्ट तो अभी शुरु ही हुआ है। और इस घटनाक्रम के पश्चात तो कहानी में टविस्ट पर टविस्ट आते हैं।
- कभी डेगाले की मौत हत्या लगती है और कभी आत्महत्या।
- कभी डेगाले अमीर लगता है और कभी गरीब।
- कभी कातिल टेरी रीगन लगता है और कभी गिल्डा।
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- क्या डिल्डा कभी टेरी रीगन की हो पायी?
- असली कातिल कौन है?
- क्या रहस्य है इस मौत के पीछे।
ऐसे एक नहीं अनेक प्रश्नों के उत्तर इस दिलचस्प उपन्यास में ही मिलेंगे।
  उपन्यास है भी इतना रोचक की पाठक एक बार आरम्भ करेगा तो इस उपन्यास को पूरा पढकर ही खत्म करेगा।
       हालांकि इस प्रकार के चौंकाने वाले घटनाक्रम वाले उपन्यास वेदप्रकाश शर्मा जी ने भी खूब ‌लिखे हैं। पर वेदप्रकाश शर्मा जी के उपन्यास में अनावश्यक विस्तार और परस्पर वार्तालाप ज्यादा होता है। इस उपन्यास में कहीं भी अनावश्यक विस्तार नहीं है। इस उपन्यास में अभी भी इतना स्पेश बाकी है की कोई भी प्रतिभाशाली लेखक इस कहानी को एक नया रूप दे सकता है। और ऐसा एक छोटा सा प्रयास इस उपन्यास के पीछे कँवल शर्मा जी ने ' एक ही अंजाम' नामक कहानी में किया भी है।
इस उपन्यास के पीछे कँवल शर्मा की इसी उपन्यास पर आधारित एक कहानी है 'एक ही अंजाम' पर उपन्यास और कहानी का क्लाइमैक्स अलग-अलग है।
    यह उपन्यास नये लेखकों के लिए भी प्रेरणा के समान है।
   जेम्स हेडली चेइज का प्रस्तुत उपन्यास ' शाॅट ट्रीटमेंट' बहुत ही रोचक व पठनीय उपन्यास है। मेरी व्यक्तिगत राय से इस उपन्यास को अवश्य पढें।
धन्यवाद।
  इन्हीं दिनों सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित जेम्स हेडली चेइज का उपन्यास 'आखिरी दांव' (One Bright Summer Morning ) पढा जो की सबा खान जी द्वारा अनूदित था। वह भी बहुत रोचक था।
  
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उपन्यास - शाॅक ट्रीटमेंट (Shock Treatment)
लेखक- जेम्स हेडली चेइज
अनुवादक- कँवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ-
मूल्य- 60₹

Saturday, 30 December 2017

89. एक कैदी की करामात- अलेक्जेंडर ड्यूमा

एक ‌मासूम युवक की त्रासदी भरी कहानी।
बाल उपन्यास, रोचक- पठनीय
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             एलेक्जेंडर डयूमा का यह बाल उपन्यास बहुत ही रोचक है। 
यह एक एडमंड दांते नामक युवक की कहानी है जो एक पानी के जहाज पर काम करता है। यह एडमंड दांते नामक युवक बहुत ही सीधा है और हर किसी पर विश्वास कर लेता है इसी विश्वास के परिणाम स्वरूप उसे उस जुर्म की सजा हो जाती है जिसका उसे पता तक नहीं होता। 
  एडमंड को राजद्रोही माना जाता है, उसके पास से एक खत मिलता है।
     एक सिपाही ने जहाज से एडमंड के कमरे से मिला कागज मेयर के हाथ में रख दिया।........कागज देखते- देखते मेयर के माथे पर पसीना आ गया। (पृष्ठ-17)
   एडमंड दांते का बाप, उसकी मंगेतर और उसके जहाज का मालिक उसका इंतजार करते हैं लेकिन शहर का मेयर उसे एक टापू पर स्थित जेल में बंद करवा देता है।
        समुद्र के अंदर एक टापू है और उसी टापू पर एक जेल है। एडमंड दांते को उसी जेल में कैद रखा जाता है।
     उस जेल में एडमंड को  एक ऐसा व्यक्ति मिलता है जो उसे अमीर बना देता है। 
नन्हीं बहन प्रीती
नन्हीं बहन प्रीती
- एडमंड को जेल की सजा क्यों होती है?
- मेयर उस पत्र से क्यों घबरा जाता है?
- एडमंड जेल से बाहर कैसे निकला?
- एडमंड को जेल में मिला व्यक्ति कौन था?
- एडमंड अमीर कैसे बना?
- एडमंड ने अपने दुश्मनों से बदला कैसे लिया?
     जैसे एक नहीं अनेक प्रश्न है जो इस बाल उपन्यास को पढकर ही प्राप्त होंगे।

Thursday, 28 December 2017

86. आखिरी दांव- जेम्स हेडली चेइस

एक खतरनाक अपराधी का आखिरी दांव...
आखिरी दांव- जेम्स हेडली चेइज, थ्रिलर उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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        जेम्स हेडली चेइज जासूसी उपन्यास जगत के वह सितारे थे जिनकी चमक दूर दूर तक थी। यही कारण है की इनके उपन्यास जितने लोकप्रिय अंग्रेजी में थे, स्वयं के देश में थे, तात्कालिक समय में थे, उतने ही लोकप्रिय आज हैं, विभिन्न देशों‌ में भी और विभिन्न भाषाओं में हैं।
        प्रस्तुत उपन्यास आखिरी दांव मूलत: अंग्रेजी उपन्यास One Bright Summer Morning का हिंदी अनुवाद है और यह अनुवाद किया है प्रसिद्ध अनुवादक सब्बा खान जी ने।
    उपन्यास जितना रोचक है अनुवाद उतना ही शानदार है।
      वे चार थे। वे एक राह के राही बनकर सफर पर निकले थे। उन्हें अपनी तकदीर संवारनी थी। अपने-अपने  अंधेरों की सियाही को दौलत की रौशनी से चमकाना था और फिर दौलत हासिल करने की उस खतरनाक राह पर उन्होंने खेला एक बड़ा और आखिरी दांव।
यह कहानी है क्रेमर नामक एक ऐसे अपराधी की जिसने बहुत धन कमा कर अपराध जगत से किनारा कर लिया और आराम‌ की जिंदगी जीने लगा। ज़रायम की दुनिया से किनाराकशी करने के बाद क्रेमर सही मायनों में एक इज्जतदार सामाजिक व्यक्ति बन गया था। (पृष्ठ-27) लेकिन उसके दिमाग में अक्सर अपराध जगत से संबंधित कुछ न कुछ चलता रहता था। ज़रायम की दुनियां में वापस  कदम न रखने के अपने पक्के इरादे के बावजूद, क्रेमर अपने खाली समय में वक्तगुजारी के लिए अक्‍सर शानदार बैंक-डकैतियां किसी अपहरण की फुलप्रूफ स्कीम बनाते बैठा रहता था। (पृष्ठ-28)
                  
                    एक दिन किस्मत ने क्रेमर को ऐसी स्थिति में ला पटका की वह अर्श से फर्श पर आ गया। अपनी शाही जिंदगी को बनाये रखने के लिए अब उसके लिए जरूरी था की वह कुछ ऐसा करता जिससे उसके पास पुन: दौलत एकत्र हो जाये।
                    क्रेमर ने अपने एक पुराने अपराधी मित्र मो जेगेटी, चिटा क्रेन एव रिफ क्रेन नामक भाई-बहन के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान अपराधी जाल बुना जिसके बल पर उन्होंने विश्वास था की वो चार करोड़ डालर्स की रकम एकत्र कर लेंगे।
      ‌लेकिन पुलिस अधिकारी डेनिसन‌ जो लंबे समय से क्रेमर का इंतजार कर रहा था।  क्रेमर को थामने के लिए मैंने इक्कीस सालों तक इंतजार किया है।वह बड़ी मछली है, जो उस वक्त जाल से फिसल गयी थी और अब अगर वह वापस जुर्म की दुनियां में कदम रख रही है तो यह मेरी खुशकिस्मती है। (पृष्ठ-45)
    
        क्रेमर ने एक अभेद्य जाल बनाया और उस जाल में फंसा वान वाइलाई। वान वाइलाई शहर का एक प्रतिष्ठित अमीर आदमी था। वान वाइलाई की बेटी का अपहरण कर उससे चार करोड़ डॉलर की फिरौती मांगी गयी। लेकिन वान वाइलाई इतनी आसानी से रुपये देने वाला नहीं था। "अगर यह हरामखोर समझते हैं‌ कि मेरे चार करोङ डॉलर लेकर हवा हो जायेंगे, तो ये ख्वाबों में जी रहे हैं।" (पृष्ठ-122,23)
- क्या क्रेमर का प्लान कामयाब रहा?
- क्या क्रेमर को चार करोड़ डॉलर मिल पाये?
- आखिर क्रेमर और साथियों का प्लान क्या था?
- डेनिसन अपने उददेशे में सफल हो पाया?
- वान वाइलाई ने क्या धनराशि दे दी?
- बहन- भाई की जोड़ी ने आखिर क्या गुल खिलाया?

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उपन्यास में चार अपराधी हैं लेकिन चारों का स्वभाव बिलकुल अलग-अलग है। जहाँ क्रेमर और मो जगेटी अपराध जगत में दोबारा कदम रखते हैं वहीं चिटा और रिफ बहुत ही हरामी किस्म के इंसान हैं।
        क्रेमर का अपराध जगत में पुनः प्रवेश उसकी एक मजबूरी है लेकिन वह आज भी स्वयं को उतना ही सशक्त मानता है जितना पहले था लेकिन‌ मो जगेटी स्वयं को परिस्थितियों पर छोड़ देता है।
      अगर देखा जाये तो मो जगेटी का किरदार एक अपराधी का होते हुए भी एक कोमल ह्रदय व्यक्ति का है। वह अपनी माँ के सानिध्य से दूर नहीं जा सकता, वह विक्टर डरमोट की पता पर अत्याचार नहीं देख सकता और डरमोट के छोटे बच्चे से भी स्नेह रखता है।
   वहीं चिटा और रिट दोनों भाई बहन निकृष्ट मानसिकता के व्यक्ति हैं। वे किसी को भी मारते हुए नहीं हिचकते। उपन्यास में मो जगेटी से अनायास ही एक भावुकता का बंधन बन जाता है।
        उपन्यास में‌ समय- समय पर काफी मोड़ आते हैं‌ जो सहज ही पाठक को आकृष्ट करते हैं।
- मिस वाइलाई का अपहरण कर्ता रिफ क्रेन से प्यार हो जाना उपन्यास में एक रोचक प्रसंग है।
उपन्यास का समापन पृष्ठ दर पृष्ठ रोचक और घुमावदार है। कहा‌नी अंत में जाते-जाते काफी बदलती रहती है जिससे उपन्यास में रोचकता सहज और स्वाभाविक बनी रहती है।
                                 उपन्यास मनोरंजन है लेकिन उपन्यास में चिटा और रिफ का आगमन एक फिल्मी तरीके से होता है वह किस्सा उपन्यास में‌ अनावश्यक लगता है। एक ठिगने आदमी से लड़ाई और फिर उस ठिगने आदमी की उपन्यास में‌ कहीं कोई भूमिका भी नहीं है। दोनों कभी न जान पाये की वह ठिगना कौन था। (पृष्ठ-58) यह बात पाठक भी नहीं जान पाता।

अनुवादक-
           प्रस्तुत उपन्यास का अनुवाद चर्चित अनुवादक सब्बा खान जी ने किया है। इनका उपन्यास उपन्यास को सहज और सरल बना देता है। यह इनकी व्यक्तिगत विशेषता है।
         उपन्यास मात्र शब्दानुवाद ही नहीं है यह भावानुवाद भी है। कहीं कोई क्लिष्ट शब्द प्रयुक्त नहीं हैं। उपन्यास पढते वक्त कहीं भी यह महसूस नहीं होता है की हम‌ एक अनुवाद पढ रहे हैं।
      भाषा शैली  की कोमलता, सजीवता और धार प्रवाह उपन्यास को पठनीय बनाने में विशेष योगदान रखते हैं।
अनुवादक सब्बा खान जी धन्यवाद की पात्र हैं।
निष्कर्ष-
            उपन्यास की कहानी एक जुर्म की दुनियां से किनारा कर चुके अपराधी की पुन: जुर्म की दुनियां में आगमन की‌ कहानी है। कहानी अपने प्रथम पृष्ठ से ही रहस्य समेटे हुये है और ऐसे ही आगे बढती है।
    उपन्यास की भाषा शैली सब्बा खान जी के अनुवाद से बहुत अच्छी बनी है।
       उपन्यास रोचक और पठनीय है।
         
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उपन्यास-   आखिरी दांव
मूल नाम-   One Bright Summer Morning
लेखक-      जेम्स हेडली चेइज
अनुवादक-  सब्बा खान
प्रकाशक-   सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ-    219
मूल्य-  150₹
        



Thursday, 9 February 2017

20. जंगली घास- लू शुन

जंगली घास- लू शुन की गद्य कविताएँ

चीन के लेखक लू शुन के इस संग्रह में उनकी उन्नीस लघुकथाओं को स्थान दिया गया है।  लगभग लघुकथाएं प्रतिकात्मक है।
पुस्तक के अंतिम कवर पृष्ठ पर लिखे विचार पढ लीजिएगा-
इन प्रतीकात्मक कविताओं के विविध रंग हैं। इनमें स्वप्न का सृजन है जिनमें दु:स्वप्न भी शामिल है। यहाँ कुत्ते से वार्तालाप है, कीङों की भिनभिनाहट है और इंसानों की नजर से खुद को छिपाने की कोशिश करता आकाश है। समाज के ढोंग-पाखंङ, निष्क्रियता, हताश और ठहराव पर विक्षुब्ध टिप्पणी है जो मुखर नहीं है।
  कहानियाँ, जिन्हें गद्य कविता नाम दिया गया है। ये कहानियाँ प्रतीकात्मक होने के कारण पढनें में थोङी मुश्किल है, और पाठक के समझ से बाहर ही रहती है। पर फिर भी कुछ लघुकथाएं पाठक के मन को छू जाती है।
राहगीर एक ऐसी ही रचना है, जो पाठक को प्रभावित करती है। वहीं एक रचना है चतुर आदमी, मूर्ख और गुलाम जो बताती है की हमारी गुलामी के कारण हम स्वयं हम कैसे चतुर आदमी के शब्दजाल में उलझ कर रह जाते हैं। लू शुन की कुछ रचनाओं के बारे में इस पुस्तक की भूमिका में भी लिखा गया है।
सुंदर नरक जो गायब हो गया- कविता का संदर्भ गणतंत्र के छलावा साबित होने से है
ऐसा योद्धा- इसमें उन विद्वानों का वर्णन है जो बिना हथियार के योद्धा है, जो आतताइयों के भाले के आगे घुटने टेक देते हैं।
पतझङ की रात- यह भविष्य के प्रति आशावान और नये सपनों की वाहक रचना है।
इन प्रतीकात्मक रचनाओं में कुछ पंक्तियाँ बहुत ही सुंदर है जो रचनाओं की क्षमता को आगे बढाने में सक्षम है-
"मेरे घर के पिछवाङे की दीवार से उस पार आपको दो पेङ दिखायी देंगे। एक खजूर का पेङ है और दूसरा भी खजूर का पेङ है।"
"आखिर में वह बूढा हो जाता है और बूढापे के कारण शून्यता के पथ पर मर जाता है। सब के बावजूद वह कोई योद्धा नहीं है और शून्यता ही विजेता है।"
"बच्चा मरेगा, यह तो अवश्यंभावी है, जबकि वह धनवान होगा या अफसर बनेगा, ऐसा कहना झूठ भी हो सकता है। फिर भी झूठ की प्रशंसा की जाती है।"
"मेरा हृदय बहुत ही शांत है- प्रेम और घृणा, खुशी और उदासी, रंग और आवाज से शून्य।"
लू शुन की रचनाओं में व्यंग्य की शक्ति भी जबरदस्त है-
मैंने कुत्ते को डाँटते हुए कहा- "हट! चुपकर! नीच चाटुकार!"
उसने दाँत निपोरते हुए कहा-"अरे नहीं! इस मामले में भला आदमी के आगे मेरी क्या हैसियत है।"
इस संग्रह में शामिल रचनाएँ
1.पतझङ की रात 2.परझाई का अवकाश ग्रहण 3.भिखमंगे 4.बदला 5.आशा 6.बर्फ 7.पतंग 8.अच्छी कहानी 9. राहगीर 10. बुझी हुयी आग 11.कुत्ते ने पलट कर कहा 12.सुंदर नर्क जो गायब हो गया था। 13. राय जाहिर करने के बारे में 14.मौत के बाद 15.ऐसा योद्धा 16. चतुर आदमी, मूर्ख और गुलाम 17.चित्तिदार पत्ती 18. खून के धुंधले धब्बों के बीच 19. जागृति
पुस्तक- जंगली घास- लू शुन की गद्य कविताएँ ।
ISBN 81-87772-25-5
लेखक- लू शुन।
अनुवाद- दिगंबर
प्रकाशक- गार्गी प्रकाशन-दिल्ली ।
पृष्ठ-48.
मूल्य-30₹

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लेखक परिचय
विश्व साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर लू शुन की गद्य कविताओं का संकलन पहली बार 1928 में वाइल्ड ग्रास नाम से प्रकाशित हुआ था। इनका लेखन काल सितंबर 1924 से अप्रैल 1926 के बीच का है।

Saturday, 4 February 2017

18. विश्व साहित्य की दुर्लभ कहानियाँ

गार्गी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस  पुस्तक में आठ विदेशी कहानियाँ है। सभी कहानियाँ अपने कथ्य के कारण पढने योग्य है।
1.  गिरगिट- अन्तोन चेखोव
एक ऐसे पुलिस अफसर की कथा है जो पल-पल परिस्थिति के अनुसार रंग बदलता है।
यह बहुत ही रोचक, व्यंग्यात्मक कहानी है।
2.एक छोटे लङके और एक छोटी लङकी की कहानी।- मक्सिम गोर्की
   एक लङकी व एक लङका, सर्दी का मौसम। इसी विषय को आधार बना कर लिखी गयी एक अच्छी कहानी।
  ..यह एक आम रिवाज हो गया है कि साल में एक बार बङे दिन की कहानियों में कुछ एक छोटे लङकों और लङकियों को बर्फ पाले में जमा दिया जाता है।
लेकिन जहां तक मेरा संबंध है, इतने शुभ लक्ष्य के लिए भी किसी छोटे गरीब लङके या छोटी गरीब लङकी को बर्फ में जमाकर मारना मेरे बूते से बाहर है।
दो मासूम बच्चों को लेकर लिखी गयी बहुत ही मार्मिक कहानी है। पाठक को अंदर तक छू जायेगी।
3.नव वर्ष की बलि- लू शुन
यह एक ऐसी औरत की कथा है जो दो बार विवाह के नाम छली गयी है। दूसरी बार तो वह अपने पुत्र को गवा बैठी।
यह एक बहुत ही मार्मिक कथा। अपने पुत्र वियोग में वह एक पत्थर की मूर्त बन कर रह जाती है। न हँसती है न रोती है।
लू शुन की गद्य कविताएँ पढने के लिए यहाँ क्लिक करें।
4. मटका -लुईजी पिरांदल्लो
यह एक हास्यास्पद कथा है। एक मिट्टी के मटके को पुन: तैयार करते वक्त कैसे एक व्यक्ति मटके में बंद होकर रह जाता है।
5.दो बाप - कारेल चापके
यह कहानी एक बाप-बेटी के प्रेम पर आधारित है। बेटी बीमार है और एक दिन मृत्यु को प्राप्त करती है। बाप को पता है की ये उसकी जायज औलाद नहीं, लेकिन दोनों में प्रेम का संबंध बहुत मजबूत है।
वह मर गयी। उसके पिता को शोक हुआ- उसकी मृत्यु पर - वैसा शोक उस छोटे से शहर में पहले कभी नहीं देखा गया। पिछले कुछ दिनों से वह बराबर उसके बिस्तर से चिपका बैठा रहा करता था।
6. सात पैसे -जिगमोन्द मोरित्ज
  प्रस्तुत कहानी एक गरीब औरत की है जिसे सात पैसे चाहिये रोजमरा की जरूरत के लिए। एक-एक उसे अपने घर से छ: पैसे तो मिल जाते हैं, लेकिन अब एक पैसे की जरूरत है।
शाम के समय यह आवश्यकता एक भिखारी पूरी कर देता है। क्या वह भिखारी से पैसे?, वह सोचती है।
हर परिस्थिति में खुश रहने वाली यह औरत सात पैसे मिलने पर बहुत हँसती है।  बेटा देखता है माँ हँसती है, हँस रही है, हँस रही है। यही हँसी उसकी अंतिम हँसी होती है।
एक औरत जो गरीब है, पर गरीबी में भी हँसती है।
7. तोक्या- फूमिको हयाशि
एक चाय की पत्ति बेचने वाली औरत की कहानी। जिसका पति युद्ध से अभी तक घर नहीं लौटा।
8. मास्टर जी- जोसेफ श्कवोरेस्की
यह इस संग्रह की अंतिम कहानी है। एक शिष्य के माध्यम से कथा को कहा गया है।
एक शिष्य अपने यहूदी शिक्षक से जर्मन भाषा सीखने जाता है और दोनों में गुरु- शिष्य का पवित्र बंधन होता है। परिस्थितियाँ बदलती हैं और इनके शहर पर हिटलर का अधिकार हो जाता है और यहूदियों के विरुद्ध कानून जारी होते हैं। यहूदियों को मजबूर किया जाता है की वे अपने सीने पर पीला सितारा लगायें।
लोग एक दूसरे की मदद करने को तैयार हैं पर कानून के आगे बेबस।
इसी कानून के तहत एक दिन समस्त यहूदियों को रेल में भरकर गैस चैंबरों में भेज दिया जाता है, मरने के लिए।
अगर आपने ऐन फ्रेंक की डायरी पढी है तो आपको हिटलर के इस पाशविक अत्याचार का पता होगा।
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पुस्तक- एक छोटे लङके और एक छोटी लङकी की कहानी।
चयनकर्ता- वीणा भाटिया
प्रकाशन- गार्गी प्रकाशन- दिल्ली
मूल्य- 40₹
पृष्ठ-80
प्रथम संस्करण- जनवरी, 2017

Tuesday, 31 January 2017

17. पहला अध्यापक- चिंगीज आइत्मातोव

एक सच्चे कम्युनिस्ट की कहानी।
पहला अध्यापक- चिंगीज आइत्मातोव
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सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना...
हङताल करना...
लाल झण्डा लहराना...
क्रांतिकारी भाषण देना...
क्या यही निशानी है एक कम्युनिस्ट की?
पर इनसे अलग हटकर भी एक कम्युनिस्ट है, सच्चा कम्युनिस्ट, अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान वह है- दूइशेन।
चिंगीज आइत्मातोव के उपन्यास 'पहला अध्यापक' का नायक है दूइशेन।
एक सच्चा कम्युनिस्ट है - दूइशेन।
लेलिन का अनुयायी है- दूइशेन।
"अरे आप दूइशेन को नहीं जानते । बङा कानून-कायदे का आदमी है। अपना काम पूरा करने के बाद ही वह किसी दूसरी चीज में दिलचस्पी लेता है।"
            इस लघु उपन्यास की कहानी कई स्तरों से होकर गुजरती है।
एक है दूइशेन, जिसके बारे में यह कहानी है। दूसरी है आल्तीनाई सुलैमानोव्ना, जो कहानी को कहती है। तीसरा वह शख्स जिसे आल्तीनाई यह कहानी बताती है, और चौथा है पाठक जो इस मार्मिक कहानी में डूब जाता है।
कहानी का आरम्भ होता है रूस के एक छोटे से गाँव कुरकुरेव से।
सन् 1923 ईस्वी।
"हमारी बस्ती में एक अपरिचित सा युवक आया, जिसने फौजियों का ग्रेटकोट पहन रखा था"
यह युवक था दूइशेन जो इस गाँव के लोगों को शिक्षित करना चाहता था, ताकि लोग शोषण के विरुद्ध खङे हो सके, ताकि लोग सोवियत संघ के विकास में सहयोगी बन सकें, ताकि लोग अच्छा जीवन जी सकें।
पर लोगों को शिक्षा से कोई मतलब न था।
सातिमकूल ने आँखें सिकोङते हुए कहा, -"बताओ तो, हमें इसकी, इस स्कूल की जरूरत ही क्या है?"
"हम किसान हैं, मेहनत करके जिंदगी बसर करते हैं, हमारी कुदाल हमें रोटी देती है।हमारे बच्चे भी इसी तरह जिंदगी बसर करेंगे। उन्हें पढने-लिखने की कोई जरूरत नहीं ।"
      लेकिन दुइशेन के अथह प्रयासों से स्कूल बना, जिसे लोग 'दूइशेन का स्कूल' कहने लगे।  स्कूल के बच्चों में एक अथान बच्ची है आल्तीनाई । अपने चाचा-चाची के पास रहती है, और चाची के दुर्व्यवहार को सहन करती है।
  इस कम्युनिस्ट को दुख है तो बस इस बात की वह कभी लेनिन से मिल नह सका।
"मास्टर जी, आपने कभी लेनिन से हाथ मिलाया था?"
"नहीं बच्चों, मैंने लेनिन को कभी नहीं देखा।"- और अपराधियों की भांति ठण्डी साँस भरी।
एक तरफ है अशिक्षित लोग और उनकी कुप्रथाएं। इसी अशिक्षा के चलते चाची आल्तीनाई का सौदा किसे खानाबदोश व्यक्ति के हाथ कर देती है।
जब दूइशेन ने विरोध किया तो
"उसकी आवाज चीख सी बनकर टूट गयी। उन्होंने दूइशेन का बाजू तोङ दिया। हाथ को छाती के साथ लगाये, दूइशेन पीछे हट गया, पर वे मतवाले, सिरफिरे साँङों की भाँति दहाङते हुए नि:सहाय दूइशेन पर टूट पङे।"
"मारो, मारो, सिर पर मारो, जान से मार डालो!"
        लेकिन दूइशेन के होते यह कहां संभव। वह तो आल्तीनाई के उज्ज्वल भविष्य के सपने देखता है।
लेकिन दूइशेन खानाबदोश व्यक्ति के चुगल से बचाकर आल्तीनाई को मास्को के विद्यालय में शिक्षार्थ भेज देता है।
वही आल्तीनाई शिक्षा प्राप्त कर एक विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र पढाती है, विभागाध्यक्ष है। जिसका नाम आज सम्मान से लिया जाता है।
तक ही वह शोषित बन कर जीता है। ऐसा ही एक पात्र है जो परिस्थितियाँ बदलते ही शोषक के खिलाफ खङा हो जाता है।
"चालीस साल तक शायद उसने कभी सिर नहीं उठाया होगा। अब, जैसे कि बाँध टूट गया- " हत्यारे, तूने मेरा खून पिया है, मेरी जिंदगी बरबाद की है! मैं तुझे ऐसे नहीं जाने दूंगी"
उसने उस पर पत्थर दे मारा जिससे उसकी फर की टोपी नीचे गिर गयी ।
वक्त बदला, परिस्थितियाँ बदली और दूइशेन भी बदला, आल्तीनाई भी बदली।
आज कुरकुरेव गाँव में एक विद्यालय का उद्घाटन है। जिसमें आल्तीनाई आमंत्रित है। पर इस का वास्तविक हकदार तो दूइशेन है जिसने इस अशिक्षित गाँव के बच्चों को शिक्षा दी। वही तो सच्चा अध्यापक, वही तो इस गाँव का पहला अध्यापक है। जिसने इस गाँव को शिक्षित किया।
लोग आज दूइशेन के प्रयास, मेहनत को भूल गये। बस उन्हें नहीं भूली तो आल्तीनाई । वह तो टीले पर खङे पोपलर के उन पेङों को निहार रही है, जिन्हें बचपन में उनके अध्यापक ने लगाया था।
"हर प्राणी का अपना वसंत और अपनी पतझङ होती है।"
  प्रस्तुत उपन्यास एक सच्चे कम्युनिस्ट की कहानी बताता है, जो सर्वस्व समर्पण कर सच्चे दिल से अपने कर्तव्य को समर्पित है। जिसके अथक कठिन परिश्रम से गाँव में शिक्षा की ज्योति जलती है।
लोग चाहे उसके समर्पण को भूल गये पर उसके शिष्य आज भी उसे सच्चे दिल से याद करते हैं।
  एक अच्छा उपन्यास, अवश्य पढें।
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उपन्यास- पहला अध्यापक (Duishen)
लेखक- चिंगीज आइत्मातोव
अनुवाद- भीष्म साहनी
पृष्ठ-105.
मूल्य-35₹
हिंदी प्रकाशन -गार्गी प्रकाशन दिल्ली ।
Email- gargiprakashan15gmail@gmail.com
Phone- 9810104481
प्रथम प्रकाशन- सन् 1963 में रादुगा प्रकाशन, मास्को द्वारा सोवियत संघ से प्रकाशित।
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चिंगीज आइत्मातोव के उपन्यास 'पहला अध्यापक' में जिन घटनाओं का जिक्र किया गया है, वे इस शताब्दी के तीसरे दशक में, मध्य एशिया में सोवियत सत्ता के स्थापनाकाल में घटी थी।
(उपन्यास के अंतिम कवर पृष्ठ से)

Friday, 27 January 2017

16. मरुस्थल- मोरिस सिमाश्को

मोरिस सिमाश्को के उपन्यास मरुस्थल की समीक्षा

कमिसार सवीत्स्की सोच में डूबा हुआ जुगनुओं से जगमगाते रेगिस्तान को ताक रहा था। लाल सेना का यह खास फौजी दस्ता आठ दिन-रातों तक रेतीले मैदानों और चलते-फिरते बालू को लाँघता हुआ शत्रुओं के गिरोह का पीछा करता रहा था। आज रात को उस गिरोह के बचे-बचाये लोग एक पुरानी गढी में जा छिपे थे। खास दस्ते ने पौ फटने के समय जब गढी पर हमला किया तो बहुत ठण्डी अफगानी हवा तन्न को सुन्न किये दे रही थी। गढी में दाखिला होने पर उन्हें केवल चले हुए कारतूसों की खाली नलियाँ और कुछ लाशें दिखाई दीं। हत्यारे शमुर्दखान की लाश इसमें नहीं थी। सफेद गार्ड का बासमाच(जमींदार) अपने सहायक, राजनीतिक पुलिस के अफसर दूदनिकोव के साथ गायब हो गया था। हर टिले, हर सूखी झाङी को खोजा गया पर कहीं भी कोई सुराग नहीं मिला। मरुस्थली हवा के सम गति से बहनेवाले झोंकों ने बहुत जल्द ही खाली कारतूसों और लाशों को ढँक दिया.....

सन् 1917 के समय को आधार बना कर मोरिस सिमाश्को द्वारा काल मरुस्थल पर लिखा गया उपन्यास 'मरुस्थल' बहुत रोचक है।
उपन्यास में एक तरफ है चारी हसन जैसा एक सीधा-साधा नौजवान और दूसरी तरफ है शमुर्दखान जैसा अत्याचारी
और है चारों तरफ फैला विस्तार मरुस्थल ।
  चारी हसन जैसा मासूम नौजवान आखिर क्यों विद्रोह पर उतर आता है।
"अल्लाह ने सभी सभी कुछ हमारी जिंदगी के लिए बनाया है। धरती, पानी और हवा तो सभी जानवरों के लिए जरूरी है। वह आदमी सबसे बङा गुनाह करता है, जो दूसरे से खुदा की ये नेमतें छीनना चाहता।"
यही बात चारी हसन को एक बगावत के लिए मजबूर कर देती है।
काले मरुस्थल के बीच बसा है एक छोटा सा गाँव। जहाँ के किसान लोग बङी मुश्किल से अपना जीवन-यापन करते हैं। इसी गाँव का एक अमीर आदमी इल्यासखान लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों के पानी पर अपना कब्जा जमा लेता है, लोगों की जमीन हथिया लेता है और उनको मजदूर बनाकर रखता है।
  इसी  चाल का शिकार होता है चारी का परिवार और किशोरावस्था में ही चारी इल्यासखान की भेङे चराने लग जाता है। अपना पानी व जमीन गवा देने के बाद तक भी चारी का परिवार इल्यासखान का मजदूर बन कर अपना जीवन यापन करता है। लेकिन इल्यासखान के शैतान पुत्र चारी हसन के पूरे परिवार को मौत के घाट उतार देते हैं।
"इस व्यक्ति के हाथ-पैर बँधे हुए थे। चारी ने चमङे के फीते काटे और लाश को सीधा किया। उसके बूढे बाप हसन की फोङ डाली गयी लहुलुहान आँखें नीले आकाश को ताकती दिखायी दी।"
बस यहीं से नौजवान चारी के दिल में बदले की बदले की आग पैदा हो गयी। मरुस्थल का नियम है खून का बदला खून।
रूसी सेना के लाल जवान मरुस्थल मे शत्रु लोगों के सर्वनाश को निकले हैं।  तब उनसे टकराता है तुर्कमानी नौजवान चारी हसन और रूसी सेना उसे अपने सैनिक दस्ते में शामिल कर लेती हैं।
  चारों  तरफ शमुर्दखान का आतंक है। वह लाल सेना पर हमला भी करता है, पर स्वयं लाल सेना से बच कर भाग जाता है।
लेकिन कब तक भागता.............।
शैतान का अंत तय है।
विशेष- उपन्यास में काले मरुस्थल का जीवंत वर्णन किया गया है। एक-एक दृश्य पाठक के हृदय में उतरता जाता है। मरुस्थल के सामान्य नियमों का वर्णन भी इस लघु उपन्यास में मिलता है।
उपन्यास में वर्णन है मरुस्थल में गरीबी  से जूझते लोगों का और उन पर अत्याचार करते शैतान अत्याचारी लूटेरों का।
अगर पाठक रूसी सेना, मरुस्थल के शत्रुओं, वहाँ के लोगों के जीवन की झलक देखना चाहता है तो यह एक अच्छा उपन्यास है।
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उपन्यास के कुल पाँच अध्याय है।
इसका हिंदी में प्रथम प्रकाशन सन् 2017जनवरी में हुआ है।
उपन्यास- मरुस्थल (Marusthal)   
लेखक- मोरिस शिमाश्को(Moris Simashco)
पृष्ठ- 128.
मूल्य- 40₹
)
प्रकाशन- गार्गी प्रकाशन-दिल्ली।
Email- gargiprakashan15@gmail.com
  
लेखक परिचय
मारिस सिमाश्को का जन्म 1924 में हुआ था। सन् 1940 में वे सैनिक बन शत्रु से जूझते रहे।
कजाखस्तान के अल्मा-अता विश्वविद्यालय से पत्राचार से पत्रकारिता की द्वारा पढाई की और पत्रकारिता के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर  चर्चित रहे।