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Monday, 31 July 2017

56. तड़पन- फखरे आमल खान

फखरे आलम खान का प्रथम कहानी संग्रह है- तड़पन।
तड़पन- फखरे आलम खान
तड़पन श्री फखरे आलम खान का प्रथम कहानी संग्रह है। इस संग्रह की सभी कहानियां हालांकि बच्चों के लिए है लेकिन सभी प्रेरणादायक है जो सभी पाठक वर्ग को प्रभावित करती हैं।
    इस संग्रह की कहानियों में विविध रंग देखने को मिलेंगे और सभी कहानियों की एक विशेषता है, वह है सभी कहानियाँ बहुत मार्मिक हैं, पाठक की आँखों में आँसू टपक ही जाते हैं।
   इस कहानियों की एक विशेषता ये भी है की सभी कहानियाँ हमारे परिवॆश से जुङी हुयी हैं। कोई भी कहानी पाठक से विलग नहीं है। 
" इस पुस्तक में आज के बदलते सामाजिक परिवेश व संस्कृति को दृष्टिगत रखा गया है। लेखक द्वारा इसमें एक नहीं, क ई ऐसी घटनाओं को संकलित कर अपने शब्दों में आप तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया गया है।"-   ओ. एस. तोमर (संपादक)
संग्रह की कहानियाँ
1. भगवान को चि्टठी
2. मानवता ही धर्म है
3. धर्म मानवता नहीं
4. भ्रूण हत्या
5. कलियुगी पिता
6. हलाल की कमाई
7. माता-पिता ईश्वर तुल्य
8. सूखा पत्ता
9. मानवता सबसे बङा धन
10. परोपकार का फल
11. जेल यात्रा
12. सर्वप्रिय राष्ट्र धर्म
13. कौन ब्राह्मण कौन शुद्र
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पुस्तक- तड़पन(कहानी संग्रह)
लेखक- फखरे आलम खान
प्रकाशन- टाइम्स पब्लिकेशन- मेरठ
संस्करण- 2006 (प्रथम)
पृष्ठ-
मूल्य- 25₹
लेखक पता-
-770/10, जैदी  सोसायटी, मेरठ- 250001(UP)

55. शातिर हसीना- फखरे आलम खान


कहानी एक खतरनाक हसीना की।
शातिर हसीना- फखरे आलम खान

डाॅ. फखरे आलम खान पेशे से वकील है। शौकिया लेखन भी कर लेते हैं। इनके कई कहानी संग्रह, उपन्यास व अन्य दूसरी विधाओं में भी रचनाएँ प्रकाशित हैं।
  डाॅ. फखरे आलम खान( एडवोकेट) द्वारा प्रेषित उपन्यास  शातिर हसीना पढने को मिला।
क्या कोई उपन्यास ऐसा भी हो सकता है, इस उपन्यास को पढकर एक बात पता चली की प्रकाशन बिना संशोधन कुछ भी छाप देता हैै।
कहानी-
उपन्यास की कहानी एक ऐसी औरत की है जिसका पुत्र जेल में एक झूठे अपराध के मामले में बंद है। और वह औरत अपने दुश्मनों बदला चाहती है। अपने घर को छोङ कर अपने आशिक के साथ निकल जाती है। अपने असीम सौन्दर्य के दम पर वह शातिर हसीना नये नये प्रेमी बदलती रहती है और एक बङी अपराधी बन जाती है।
अंत में हद से ज्यादा नाटकीय मोङ आते हैं और शातिर हसीना अपने पुत्र से मिलना चाहती है।
उपन्यास का अंत दुखांत है।
कमियाँ-
- उपन्यास का लेखन तरीका किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं लगता। उपन्यास में पात्र बस राम-राम (अभिवादन) ही बोलते हैं बाकी सब लेखक ही बोलता है।
- एक बात मेरी समझ में नहीं आयी। शातिर हसीना जब पहली बार लेखक से मिलती है तब अभिवादन के पश्चात लेखक कहता है आपके शब्दों में दर्द छुपा है आपके जीवन में दर्द ही दर्द है।
भाई एक अभिवादन मात्र से इतना कुछ कैसे पता चल गया।
- शातिर हसीना एक लेखक को अपनी आत्मकथा सुनाती है  है।
- छोटी- छोटी गलतियों को छोङ दे तो बङी-बङी गलतियों की भी उपन्यास में भरमार है।
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उपन्यास- शातिर हसीना
लेखक- फखरे आलम‌खान
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ-
मूल्य- 40₹