रात में जागने वाले...
रैना @मिडनाइट- नितिन मिश्रा, हाॅरर उपन्यास
“अंधविश्वास ने आज भी हमारे देश, हमारे समाज के एक बहुत बड़े हिस्से को, इस कदर अँधा कर रखा है कि उन लोगों की नज़रों को एक इंसान और जानवर में फर्क नहीं दिखाई देता।”, रैना की आवाज़ क्रोध और उत्तेजना से काँप रही थी।
यह दृश्य है नितिन मिश्रा के उपन्यास 'रैना @ मिडनाइट' का। यह उपन्यास चार दोस्तों की कहानी है जो समाज में व्याप्त भूत-प्रेत के नाम पर फैले अंधविश्वास का खण्डन करने की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ उन्हे एक ऐसी जगह ले आती हैं जहाँ वे स्वयं नहीं समझ पाते की ये अंधविश्वास है या सत्य। और फिर एक के बाद ऐसी घटनाएं सामने आती हैं की पाठक हत्प्रभ रह जाता है।
लेखक महोदय ने जिस तरह से कहानी को बुना है वह बहुत गहरी और रोमांचक होती गयी है। दिमाग की नसों की सनसना देनी वाली यह कहानी अंत तक पाठक को स्वयं से चिपका कर रखती है और उसके बाद भी दिमाग में छायी रहती है।
रैना @मिडनाइट- नितिन मिश्रा, हाॅरर उपन्यास
“अंधविश्वास ने आज भी हमारे देश, हमारे समाज के एक बहुत बड़े हिस्से को, इस कदर अँधा कर रखा है कि उन लोगों की नज़रों को एक इंसान और जानवर में फर्क नहीं दिखाई देता।”, रैना की आवाज़ क्रोध और उत्तेजना से काँप रही थी।
यह दृश्य है नितिन मिश्रा के उपन्यास 'रैना @ मिडनाइट' का। यह उपन्यास चार दोस्तों की कहानी है जो समाज में व्याप्त भूत-प्रेत के नाम पर फैले अंधविश्वास का खण्डन करने की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ उन्हे एक ऐसी जगह ले आती हैं जहाँ वे स्वयं नहीं समझ पाते की ये अंधविश्वास है या सत्य। और फिर एक के बाद ऐसी घटनाएं सामने आती हैं की पाठक हत्प्रभ रह जाता है।
लेखक महोदय ने जिस तरह से कहानी को बुना है वह बहुत गहरी और रोमांचक होती गयी है। दिमाग की नसों की सनसना देनी वाली यह कहानी अंत तक पाठक को स्वयं से चिपका कर रखती है और उसके बाद भी दिमाग में छायी रहती है।
