नैतिकता हीन राजनीति की कथा
दो प्रेत- ओमप्रकाश शर्मा जनप्रिय लेखक
जगन- बंदूक सिंह सीरीज
दो प्रेत- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा

किताबें मेरी दृष्टि में...
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दो प्रेत- जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा |
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आखिरी शिकार- सुरेन्द्र मोहन पाठक |
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जंगल का कानून- वेदप्रकाश काम्बोज |
हर कोई जानता था कि वो एक ऐसा रास्ता था जिसके सिरे पर निश्चित मौत खड़ी थी, फिर भी शहर में ऐसे लोगों की कमी नहीं थी जो निश्चित मौत से खौफजदा होने की जगह उस एक तरफा रास्ते पर खुशी-खुशी कदम रखते थे।
ऐसे ही दीवानों की वजह से उन लोगों का व्यापार चलता था जो कि नारकॉटिक्स ट्रेड का कन्ट्रोल हासिल करने के लिये एक दूसरे के खून के प्यासे थे।
सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा रचित उपन्यास 'मौत आई दबे पांव' एक बेहतरीन और रोमांचक हिंदी थ्रिलर उपन्यास है। यह एक मर्डर मिस्ट्री कथानक है जो आदि से अंत तक रोचक है।
मौत आई दबे पांव- सुरेन्द्र मोहन पाठक
दिल के उम्रदराज मरीज वी० एम० अधिकारी की मौत निश्चित थी, महज वक्त की बात थी और ऐन वैसे ही दबे पांव आयी थी, जैसे कि उस का आना अपेक्षित था। फिर भी वो खामोश मौत एक भीषण हाहाकार की बुनियाद बनी।(आवरण पृष्ठ से)
नमस्ते पाठक मित्रो,
अगस्त 2026 में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के पांच उपन्यास पढने के लिए उपलब्ध हैं, जिन्हें पढाऔर पढना जारी है। इन पांच उपन्यासों की समीक्षा ब्लॉग पर प्रकाशित हो रही है।
इसी क्रम में आज हम पढेंगे थ्रिलर उपन्यास 'मौत आई दबे पांव' की समीक्षा । पर समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ को देखते हैं।
सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास 'ट्रिपल क्रॉस' सुनील श्रृंखला संख्या का 54 वां उपन्यास है । यह एक थ्रिलर मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है। उपन्यास में मर्डर मिस्ट्री गौण अन्य कथा प्रधान है और यही कथा उपन्यास को ज्यादा रोचक बनाती है।
ट्रिपल क्राॅस उपन्यास जैसा की अपने शीर्षक से ही अपनी कथा का आभास करवा रही है। अब देखना यह है की कौन, किसको और कैसे क्राॅस कर रहा है और किस माध्यम से और किसलिए ।
उपन्यास की समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ पर एक नजर डालते हैं और फिर समीक्षा को आगे बढाते हैं।
एक अत्यन्त रोमांचक कथानक जिसका केन्द्र बिन्दु एक ऐसी रहस्यमयी युवती थी जो एक पार्टी में से एकाएक यूं गायब हुई जैसे वो कभी वहां थी ही नहीं, जिसके बारे में उसके मेजबान का दावा था कि वो उसे नहीं जानता था।
एक अत्यन्त रोचक मर्डर मिस्ट्री। आदि से अन्त तक एक ही बैठक में पठनीय । (आवरण पृष्ठ से)
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कमरा नम्बर 303- सुरेन्द्र मोहन पाठक |
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मौत की पहली रात- शौकत जैदी |
मौसम भयानक होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 'मौत की पहली रात' पन्द्रह जनवरी को प्रारम्भ होने वाली है। मेरा जीवन खतरे में है खराब मौसम में बाहर निकलना भी असम्भव प्रतीत होता है अब तो कोई फरिशता आकर ही मदद कर सकता है ।'
मौसम विभाग
हिंदी साहित्य में यदि सामाजिक यथार्थ को सबसे प्रभावशाली ढंग से चित्रित करने वाले उपन्यासों की चर्चा की जाए तो प्रेमचंद का ‘निर्मला’ अग्रणी कृतियों में गिना जाएगा। यह उपन्यास केवल एक युवती की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उस समाज का दर्पण है जहाँ दहेज, अनमेल विवाह, संदेह और रूढ़ सामाजिक मान्यताएँ एक स्त्री का जीवन नष्ट कर देती हैं। प्रेमचंद ने इस कृति के माध्यम से तत्कालीन भारतीय समाज की उन कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया है, जिनकी पीड़ा आज भी कहीं न कहीं दिखाई देती है।
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| निर्मला- प्रेमचंद |
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पूनम का चांद- सुरेश साहिल |
मराठी दलित साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर दया पवार की आत्मकथात्मक कृति ‘अछूत’ भारतीय समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव, गरीबी, अपमान और संघर्ष की ऐसी मार्मिक कथा है, जो केवल एक व्यक्ति की जीवन-गाथा नहीं रह जाती, बल्कि पूरे दलित समाज के सामूहिक अनुभव का दस्तावेज़ बन जाती है। यह रचना पाठक को भावुक ही नहीं करती, बल्कि उसे सामाजिक यथार्थ से सीधा सामना करने के लिए विवश भी करती है।
ओमप्रकाश वाल्मीकि जी की आत्मकथा 'जूठन' बहुत समय पहले पढी थी और उसके बाद दलित साहित्य में दया पवार जी की आत्मकथा 'अछूत' पढने का अकसर मिला है। 
अछूत - दया पवार- दलित आत्मकथा
जब कभी भी वह अकेला होता है, उससे अक्सर मेरी मुलाक़ात हो जाती है। जब से मैंने होश सँभाला है, तब से मैं उसे अच्छी तरह पहचानता हूँ। जितना अपनी परछाईं से परिचय हो, उतना परिचित है वह। पर कभी-कभी अँधेरा छा जाने पर या बदली छा जाने पर जैसे स्वयं की परछाई लुप्त हो जाती है, वैसे ही वह भी लुप्त हो जाता है। पिछले कई वर्षों से उसे भीड़ से बड़ा लगाव रहा है। हमेशा किसी के साथ या सभा-सम्मेलनों में दिखाई देता है।(प्रथम पृष्ठ से चंद पंक्तियां)
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रेत का संगीत - वेदप्रकाश काम्बोज |