जब प्रेतों ने बोला गाँव पर हमला...
तांत्रिक का बदला- राजीव श्रेष्ठ, हाॅरर उपन्यास
पढने के क्रम में यह मेरी किंडल पर क्रमशः पांचवी हाॅरर रचना है। इस उपन्यास के विषय में कहूं तो यह बरसात के पश्चात चलने वाली शीतल हवा की तरह है।
इससे पूर्व में मनमोहन भाटिया जी का 'भूतिया हवेली', नितिन मिश्रा का 'रैना @ मिडनाइट', देवेन्द्र प्रसाद का 'खौफ...कदमों की आहट' और मिथिलेश गुप्ता का '11:59- दहशत का अगला पड़ाव' पढा ये चारों रचनाएँ सस्पेंश और हाॅरर से इतनी उलझी हुयी थी की दिमाग की नसें तक इनको पढकर सनसना रही थी। और फिर राजीव श्रेष्ठ का उपन्यास 'तांत्रिक का बदला' पढा तो इसने कुछ राहत प्रदान की।
यह कहानी है तांत्रिक प्रसून की, एक सभ्य तांत्रिक जिसके बारे में लोग कहते हैं कि - कितना अच्छा और सच्चा इंसान है, एकदम भगवान के जैसा। मुझे तो इसमें ही साक्षात भगवान नजर आता है।
प्रसून चाँऊ बाबा के पास एक मन्दिर में अस्थायी रूप से विश्राम कर रहा है लेकिन एक रात कुछ अजीब घटनाएं घटित होती है और न चाहते हुए भी प्रसून को उसमें शामिल होना पड़ता है।- प्रसून चुपचाप लेटा हुआ था, उसकी आँखों में नींद नहीं थी। जबकि वह गहरी नींद सो जाना चाहता था, बल्कि अब तो वह हमेशा के लिये सो जाना चाहता था। जाने क्यों जिन्दगी से यकायक ही उसका मोहभंग हो गया था, और वह इस जीवन से ऊब चुका था।
तांत्रिक का बदला- राजीव श्रेष्ठ, हाॅरर उपन्यास
पढने के क्रम में यह मेरी किंडल पर क्रमशः पांचवी हाॅरर रचना है। इस उपन्यास के विषय में कहूं तो यह बरसात के पश्चात चलने वाली शीतल हवा की तरह है।
इससे पूर्व में मनमोहन भाटिया जी का 'भूतिया हवेली', नितिन मिश्रा का 'रैना @ मिडनाइट', देवेन्द्र प्रसाद का 'खौफ...कदमों की आहट' और मिथिलेश गुप्ता का '11:59- दहशत का अगला पड़ाव' पढा ये चारों रचनाएँ सस्पेंश और हाॅरर से इतनी उलझी हुयी थी की दिमाग की नसें तक इनको पढकर सनसना रही थी। और फिर राजीव श्रेष्ठ का उपन्यास 'तांत्रिक का बदला' पढा तो इसने कुछ राहत प्रदान की।
यह कहानी है तांत्रिक प्रसून की, एक सभ्य तांत्रिक जिसके बारे में लोग कहते हैं कि - कितना अच्छा और सच्चा इंसान है, एकदम भगवान के जैसा। मुझे तो इसमें ही साक्षात भगवान नजर आता है।
प्रसून चाँऊ बाबा के पास एक मन्दिर में अस्थायी रूप से विश्राम कर रहा है लेकिन एक रात कुछ अजीब घटनाएं घटित होती है और न चाहते हुए भी प्रसून को उसमें शामिल होना पड़ता है।- प्रसून चुपचाप लेटा हुआ था, उसकी आँखों में नींद नहीं थी। जबकि वह गहरी नींद सो जाना चाहता था, बल्कि अब तो वह हमेशा के लिये सो जाना चाहता था। जाने क्यों जिन्दगी से यकायक ही उसका मोहभंग हो गया था, और वह इस जीवन से ऊब चुका था।
