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Wednesday, 29 April 2026

720. मौत की परछाई - कर्नल रंजीत 1981

विदेशी षड्यंत्र और वैज्ञानिकों की हत्या
मौत की परछाई-  कर्नल रंजीत

कर्नल रंजीत के विचित्र संसार में आपका एक बार फिर स्वागत है। राजस्थान के संगरिया निवासी मित्र रतन चौधरी जी से प्राप्त कर्नल रंजीत के 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में यह 15 वां उपन्यास है‌ इस से पूर्व रतन चौधरी जी से प्राप्त चौदह उपनिवेश की समीक्षा पढे चुके हैं जिनके क्रमश: नाम हैं- ' दुल्हन की चीख, पीले बिच्छू, प्रेतात्मा की डायरी, उलटी लाशें, नकली चेहरे, ट्रेन एक्सीडेंट, हत्यारे की पत्नी, खूनी बदला, चण्डीमंदिर का रहस्य, जापानी पंखा, मेजर बलवंत बांगलादेश में, विजयदुर्ग का रहस्य, उलटी खोपड़ी, कातिल मेरा नाम'  और अब प्रस्तुत है पन्द्रहवें उपन्यास  'मौत की परछाई' की समीक्षा। 
मौत के साये
एयर इंडिया का विभान उड़ान भरने के लिए रनवे पर तैयार खड़ा था। अधिकांश यात्री अपनी-अपनी सीट पर बैठ चुके थे ।

Saturday, 25 April 2026

719. कातिल‌ मेरा नाम- कर्नल रंजीत

मुम्बई पुलिस का सीरियल किलर
कातिल‌ मेरा नाम- कर्नल रंजीत

नमस्ते पाठक‌ मित्रो,
एक बार हम फिर से उपस्थित है मेजर बलवंत शृंखला का एक रोचक और रहस्यमयी उपन्यास 'कातिल मेरा नाम' लेकर । कर्नल रंजीत की विशेष शैली में‌ लिखा गया यह उपन्यास 'मुम्बई पुलिस का सीरियल किलर' खोज पर आधारित है। एक ऐसे सिरफिरे कातिल की कहानी जो सिर्फ पुलिसवालों का ही कत्ल करता था, आखिर क्यों ?

रात के ग्यारह बज चुके थे। पुलिस इन्स्पेक्टर रामसिंह ड्यूटी खत्म करके घर जाने की तैयारी कर रहा था कि फोन की घंटी बजी। इन्स्पेक्टर ने रिसीवर उठाकर कहा :
"हलो, पुलिस स्टेशन बाईकला।"
जवाब में किसी औरत की आवाज ने कहा, "मैं जिम्मेदार पुलिस अफसर से बात करना चाहती हूं।"
"आप कौन बोल रही हैं ?"
"प्लीज, आप मेरी बात किसी अफसर से करा दीजिए।" औरत ने जवाब दिया।
"मैं स्टेशन इन्चार्ज इन्स्पेक्टर रामसिंह बोल रहा हूं। क्या मैं आपकी कोई सेवा कर सकता हूं ?"
"ओह, इन्स्पेक्टर साहब, थैंक्स गाड, कि आप मिल गये । क्या आप मशहूर डाकू राजन को गिरफ्तार करना' चाहेंगे जो दो महीने पहले जेल से फरार हो गया था और जिसकी गिरफ्तारी पर आपके विभाग ने दस हजार का इनाम रखा है ?"

Saturday, 18 April 2026

718. उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत- 1980

मूर्ति चोरी और ब्लैकमेल की रोचक कथा
उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत

एक बार फिर SVNLIBRARY पर प्रस्तुत है कर्नल रंजीत द्वारा लिखा गया एक ऐसा रोचक उपन्यास जो आपको सम्मोहित कर लेगा। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी जो अप‌नी मृत्यु के छह महीने बाद एक प्रश्न स्वयं से करता है- मरने के छः महीने बाद क्या वह फिर जीवित हो उठा था ?

इनाम
यह बात आज से छः महीने पहले की है । अगस्त का महीना था। स्थानीय समाचारपत्न 'दि क्रानिकल' के फोटोग्राफर कमलकिशोर को, बम्बई में मैक्सिको के राष्ट्राध्यक्ष के आगमन पर खींचे गए फोटो के लिए समाचार-पत्र के मालिक ने पांच सौ रुपये इनाम दिया। उसने इनाम मिलने पर सोचा कि आज तो उसे अपनी पत्नी का उलाहना दूर कर ही देना चाहिए और उसे 'उन्यालो बन्दर' ले जाकर चीनी खाना खिला ही देना चाहिए जो उसे बहुत पसन्द था । उसकी पत्नी ज्योत्स्ना 'परेल' की टैक्सटाइल मिल के अकाउंट्स विभाग में नियुक्त थी। उसका विवाह हुए एक वर्ष हुआ था। यहू प्रेम-विवाह था। पति पत्नी के जीवन में पहले एक और समानता भी थी ज्योत्स्ना भी अकेली थी और कमल किशोर भी। उन दोनों का कोई सम्बन्धी नहीं था। विवाह से एक महीना पहले कमलकिशोर ने 'अन्धेरी' में 'मधुबन' नामक भवन की पहली मंजिल पर चालीस हजार रुपये में एक शानदार फ्लैट खरीदा था ।
कमलकिशोर ने ज्योत्स्ना को फोन किया कि वह आज अपने आफिस से पांच की बजाय चार बजे उठ आए और घर पहुंच जाए । उसने अपनी पत्नी को यह निर्देश इसलिए किया कि ज्योत्स्ना को जब भी बाहर जाना होता था तो बनाव-शृंगार में वह बहुत देर लगा देती थी । ज्योत्स्ना ने वचन दिया कि वह चार बजे आफिस से उठकर पांच बजे घर पहुंच जाएगी ।
(उलटी खोपड़ी- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)

Saturday, 11 April 2026

717. विजय दुर्ग का रहस्य- कर्नल रंजीत- 1983

राजमहल के षड्यंत्र की कहानी
विजय दुर्ग का रहस्य- कर्नल रंजीत

  लोकप्रिय कथा साहित्य में प्रतिशोध और रहस्यमयी- विचित्र कथाओं के लिए कर्नल रंजीत का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। उलझे कथानक, ज्यादा पात्र और शृंखलाबद्ध हत्याएं उ‌नके उपन्यासों की विशेषता रही है। 
मैं इन दिनों सतत् कर्नल रंजीत के उपन्यास पढ रहा हूँ और मनोरंजन की एक अलग ही दुनिया में विचरण कर रहा हूँ। मनोरंजन की इस अनोखी दुनिया में आप भी मेरे साथ-साथ घूम लीजिए- विजयदुर्ग का रहस्य उपन्यास में।

सस्पेंस, रोमांच, साहसपूर्ण घटनाओं के जादूगर कर्नल रंजीत का रोंगटे खड़े कर देने वाली अनूठी कहानी से पूर्ण चौंका देने वाला नया विशेषांक
विजयदुर्ग का रहस्य
उपन्यास के मुख्य आकर्षण
- पतंग के आकार के दिल दहलाने वाले जैट विमान।
- कांच की गोली से राजमहल में धमाका ।
- तालों में बंद लाश का गायब हो जाना ।
- मेजर बलवंत और सोनिया के बेजान शरीर हिलाने - डुलाने पर भी न हिले ।
- मंदिर में पूजा करती हुई महिला सहसा लापता ।
- प्रेम में असफलता और राज घराने की पुश्तैनी दुश्मनी कितना भयानक रूप धारण कर गई यह जानने के लिए पढ़िए 'विजयदुर्ग का रहस्य' ।(अंतिम आवरण पृष्ठ से)

Saturday, 4 April 2026

716. मेजर बलवंत बांगलादेश में- कर्नल रंजीत

मेजर की बांग्ला यात्रा और मुक्तिवाहिनी का संघर्ष
मेजर बलवंत बांगलादेश में‌- कर्नल रंजीत

बंगला देश में, मानवता को लज्जित करने वाले पाकिस्तानी तानाशाहों के घोर अत्याचारों तथा भीषण गोला-बारी के बीच, भारतीय जासूस मेजर बलवंत के अत्यन्त साहसिक कार्यों और हैरत में डाल देने वाले जासूसी के चमत्कारों से भरपूर उपन्यास
नमस्ते पाठक मित्रो,
   कर्नल रंजीत के उपन्यासों की समीक्षा में हम संगरिया (राजस्थान) निवासी मित्र रतन चौधरी जी से पढने के लिए प्राप्त हुये 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में आज हम पढ रहे हैं 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास की समीक्षा ।
     पूर्व में हम 'पीले बिच्छू' नामक उपन्यास पढ चुके हैं जिसमें मेजर बलवंत बांगला देश जाते हैं  और प्रस्तुत उपन्यास में भी वह बांगलादेश जाते हैं पर दोनों उपन्यासों की यात्रा में एक बड़ा अंतर है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। 
पहले हम 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास के प्रथम पृष्ठ का अवलोकन करते हैं। प्रथम अध्याय का नाम है- मनुष्य का भाग्य ।

Monday, 30 March 2026

715. जापानी पंखा- कर्नल रंजीत

हत्या का अनोखा जापानी ढंग
जापानी पंखा- कर्नल रंजीत 1974

कर्नल रंजीत के इस उपन्यास की समीक्षा से पूर्व हम संक्षिप्त चर्चा कर लेते हैं इनके रहस्यमयी हत्याओं के तरीकों पर, ध्यान दें संक्षिप्त चर्चा है।
कर्नल रंजीत के आपने उपन्यास/ समीक्षा पढी है तो आपको पता होगा की इनके हत्यारे पात्र जब भी किसी की हत्या करते हैं तो वह इतने अजीब और रहस्यमयी तरीके इस्तेमाल करते हैं जो सामान्य लेखक तो सोच भी नहीं सकता‌ । प्रस्तुत उपन्यास में तो हत्या का तरीका भी जापानी है। तो चलो आज इसी जापानी तरीके को देखते हैं इस उपन्यास में-

            मित्र की परेशानी
मेजर बलवंत दोपहर का खाना खाकर अखबार पढ़ रहा था का आज सुबह वह अखबार नहीं देख सका था कि टेलीफोन घंटी बज उठी। ऑपरेटर गर्ल ने मेजर के रिसीवर उठाने पर कहा, "मेजर साहब ! लांग डिस्टेंट कॉल, वाराणसी से। आधा मिनट इन्तजार कीजिए।" मेजर ने रिसीवर कान से लगाए रखा। वह सोच रहा था कि वाराणसी से उसे कौन फोन कर रहा था कि फोन पर धीमी-सी आवाज़ आई, "मेजर साहब ! मैं मिसेज विनोद बोल रही हूं। क्या आप दो-चार दिन के लिए वाराणसी आ सकते हैं ?" अब मेजर को याद आया कि उसका घनिष्ठ मित्र विनोद, जो कई केस सुलझाने में उसकी सहायता कर चुका था, तब्दील होकर वाराणसी जा चुका था ।
"क्यों अनीता, क्या बात है ? तुम मुझे वाराणसी क्यों बुला रही हो ?"

Sunday, 29 March 2026

714. चण्डी मंदिर का रहस्य- कर्नल रंजीत- 1990

एक देश की सत्ता पलटने की कहानी
चण्डी मंदिर का रहस्य- कर्नल रंजीत- 1990

एकान्त और रहस्यमय था चण्डी द्वीप। बहुत पुराना मंदिर था यहां। इसी में छिपे थे एटम का रहस्य चुराने वाले और वैज्ञानिकों के हत्यारे। ये विद्रोह कराने में सफल हो गए, पर एक दिन पकड़े गए। पढ़िए रोंगटे खड़े कर देने वाला धमाका।

चण्डीमंदिर का रहस्य - कर्नल रंजीत
एक बार फिर आपका स्वागत है #svnlibrary में जहां आप पढेंगे कर्नल रंजीत के एक विदेशी अभियान को। एक छोटे से देश में किस तरह मेजर बलवंत अपने साथियों के साथ देश को गुलाम बनाने वाले अपराधियों के खतरनाक षडयंत्र को खत्म करता है।
  समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ/ दृश्य को पढते हैं और फिर बात करेंगे उपन्यास के रोचक कथानक की ।

Thursday, 26 March 2026

713. खूनी बदला- कर्नल रंजीत -1980

एक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास
खूनी बदला- कर्नल रंजीत- 1980

जवानी की दहलीज पर पैर रखते ही रुक्मिणी देवी ऐसी भयंकर भूल कर बैठती है, जो समाज की निगाह में पाप है। वे चाहती हैं कि उनका पाप छिपा रहे और बेटी पर उस पाप की छाया भी न पड़े। जवान होकर बेटी भी वही पाप कर बैठती है। जीवन का यह रहस्य जैसे-जैसे, जिस-जिस पर प्रकट होता जाता है, एक मोटी औरत वैसे ही उन लोगों की हत्या करती जाती है। पाप बदले का रूप धारण कर लेता है।
बदला लेने वाली औरत कौन है, इसके लिए पढ़िए, रहस्य-रोमांच के चितेरे कर्नल रंजीत का नया उपन्यास - खूनी बदला

    आप इन दिनों @svnlibrary पर लगातार पढ रहे हैं कर्नल रंजीत के उपन्यासों की समीक्षा । मित्र रतन चौधरी से प्राप्त कर्नल रंजीत के उपन्यासों को पढा जा रहा है और उन्हीं से प्राप्त उपन्यास 'खूनी बदला' की समीक्षाएं यहां प्रस्तुत है।
  कर्नल रंजीत के उपन्यास मर्डर मिस्ट्री और प्रतिशोध युक्त होते हैं। प्रस्तुत उपन्यास भी इसी आधार पर रचित एक मनोरंजक उपन्यास है।

Saturday, 21 March 2026

712. हत्यारे की पत्नी- कर्नल रंजीत -1974

समान नाम के लोगों की हत्या का रहस्य
हत्यारे की पत्नी- कर्नल रंजीत -1974

यह 29 साल का रहस्य क्या है ? 
प्रत्येक आदमी दो बार कैसे मर रहा है ? 
हत्या करने वाला किस महान शक्ति का दास है ? 
और मरने वाले को कैसे पता चल जाता है कि उसकी मौत का दिन आ पहुंचा है ?
अपराध-जगत् की सबसे सनसनीखेज और आश्चर्यजनक घटना, जिसमें हत्या तो होती है पर हत्यारा कोई नहीं। मेजर बलवन्त के चारों तरफ एक मायाजाल-सा बुन जाता है। उसे अपराधी का नहीं प्रकृति और भाग्य के गूढ़तम रहस्य का पता लगाना है। वह रहस्य क्या है ? और मेजर बलवन्त उसका कैसे पता लगाता है ?
कर्नल रंजीत ने इस नवीनतम उपन्यास में एकदम अछूते विषय को छुआ है। विषय हजारों साल से उलझा हुआ है और उसे मेजर बलवन्त जैसा तीक्ष्णबुद्धि जासूस ही सुलझा सकता था ।

Monday, 2 March 2026

711. ट्रेन एक्सीडेंट- कर्नल रंजीत

 कहानी नकली दवाइयों की 
ट्रेन एक्सीडेंट- कर्नल रंजीत- 1983

इन दिनों मैं कर्नल रंजीत के उपन्यास ही पढ रहा हूँ। संगरिया (हनुमानगढ़, राजस्थान) निवासी मित्र श्री रतन चौधरी जी से कर्नल रंजीत के 15 उपन्यास लेकर आया था वर अब उन्हीं को पढने का क्रम जारी है।
 और इस क्रम में मेरा यह छठा उपन्यास है। इस से पूर्व में 'पीले बिच्छू, प्रेतात्मा की डायरी, उलटी लाशें, नकली चेहरे और जापानी पंखा' पढ चुका हूँ। 
अद्भुत कथाओं के लेखक कर्नल रंजीत का एक और रोमांच से भरपूर उपन्यास 'ट्रेन एक्सीडेंट' पढा। यह उपन्यास उनकी विशिष्ट शैली में लिखा गया है। जिसनें रहस्यमयी पात्र और उलझाव से भरपूर कहानी का आनंद मिलेगा । 

हिन्दी जासूसरी उपन्यासों के क्षेत्र में रिकार्ड कायम करने वाले कर्नल रंजीत का एक जबर्दस्त सनसनी खेज उपन्यास - ट्रेन एक्सीडेंट
इस उपन्यास में आप पढ़ेंगे -
- अपनी खुशबू से बेहोशी की नींद सुलाने वाली सुन्दरी के अद्भुत कारनामे
- गेरूए वस्त्र धारण किये साधु- बालकों का हत्याकांड
- कृष्ण की मूर्ति द्वारा जबर्दस्त बम विस्फोट
- मेजर बलवंत के घर में जबर्दस्त अग्निकांड
- वैज्ञानिकों की जीभ का काटा जाना और उनके कानों के पर्दों का फाड़ दिया जाना 
हैरानी से भरे हथकंडों की सस्पेंस भरी रोमांचक कहानी -ट्रेन एक्सीडेंट 

Friday, 20 February 2026

710. नकली चेहरे - कर्नल रंजीत

175 साल पुरानी प्रतिशोध कथा
नकली चेहरे - कर्नल रंजीत- 1974

मनुष्य जीवन बहुत ही अनोखा है। उसका जीवन किस पद्धति से संचालित होता है यह कहना कभी-कभी बहुत मुश्किल हो जाता है । मनुष्य कभी तो अपना सर्वस्व अपर्ण तक कर देता है और कभी कभी अपने प्रतिशोध में इतना डूब जाता है कि वह सदियों तक प्रतिशोध की अग्नि में जलता रहता है। 

कर्नल रंजीत के उपन्यासों में प्रतिशोध जैसे विषय पर बहुत कुछ लिखा गया है। इ‌नके पात्र वर्षों- सदियों बाद तक प्रतिशोध की अग्नि में जलते रहते हैं और अवसर मिलते ही अपना प्रतिशोध पूरा करते नजर आते हैं। प्रस्तुत उपन्यास भी कुछ ऐसा है जहां एक व्यक्ति लगभग 175 वर्ष पश्चात अपना प्रतिशोध लेता है।
क्या यह संभव था ? 
अगर संभव था तो कैसे ? 
इसी संभव को जानने का प्रयास है कर्नल रंजीत का उपन्यास 'नकली चेहरे' जो सन् 1974 में प्रकाशित हुआ था । यह मूलतः एक मर्डर मिस्ट्री कहानी है।

Saturday, 14 February 2026

709. उलटी लाशें- कर्नल रंजीत- 1984

प्रतिशोध कथा
उलटी लाशें- कर्नल रंजीत- 1984

लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में कर्नल रंजीत अद्भुत रहस्यमयी कथाओं के लेखक के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। इनकी कहानी और पात्र दोनों ही गहरे होते हैं। अत्यंत उलझाव और ज्यादा पात्रों को एकत्र करना और फिर उन्हीं के मध्य रोचक संघर्ष दिखाने में कर्नल रंजीत अपना एक अलग कौशल रखते हैं। इनकी अधिकांश कहानियों में प्रतिशोध मुख्य बिंदु उभरकर सामने आता है । 
प्रस्तुत उपन्यास 'उलटी लाशें' भी एक प्रतिशोध से संबंधित के मर्डर मिस्ट्री रचना है। जहां हत्यारा कत्ल करने के पश्चात लाश को उलटा लटका देता है। 
वह ऐसा क्यों करता है ? 
National Highway-911

जहरीला धुआं
रात का अन्तिम पहर बीत रहा था।
अभी सूर्योदय होने में लगभग एक घंटा था। सारा बंगला खामोशी की चादर में लिपटा शान्त सोया पड़ा था। अचानक टेलीफोन की घंटी की आवाज बंगले में छाये सन्नाटे चीरकर गूंज उठी ।
सोनिया की नींद उचट गई। उसने लेटे-लेटे ही टेलीफोन पर एक नजर डाली। टेलीफोन की घंटी निरन्तर बजे चली जा रही थी।
उसने उटकर एक लम्बी अंगड़ाई ली और फिर हाथ बढ़ाकर रिसीवर उठा लिया।

708.प्रेतात्मा की डायरी - कर्नल रंजीत

अलौकिक शक्तियां और मर्डर मिस्ट्री
प्रेतात्मा की डायरी - कर्नल रंजीत

मनुष्य के जीवन में बहुत कुछ ऐसा घटित होता है जो उसकी कल्पनाओं से बाहर का होता है। भारत प्रसिद्ध जासूस मेजर बलवंत के जीवन में भी एक ऐसा केस आया था जिसकी कल्पना मेजर बलवंत ने कभी नहीं की थी। वैसे तो मेजर भूत-प्रेत पर यकीन नहीं करता लेकिन 'प्रेतात्मा की डायरी' में उसे कुछ अलग कल ताकतों का आभास होता है। मेरे विचार से कर्नल रंजीत का यह एकमात्र उपन्यास ही ऐसा होना चाहिए जिसमें अलौकिक शक्ति का वर्णन है अन्यथा कर्नल रंजीत भूत-प्रेत जैसी बातों का खण्डन करते नजर आते हैं।
  
रहस्यपूर्ण हत्याएं
सुबह से ही आकाश पर बादल छाए हुए थे। और शाम होते-होते मटियाले और भूरे बादलों ने काली घटाओं का रूप ले लिया था। शाम के सूरज के डूबते ही हवा में तेजी आ गई थी जिसके कारण हिमाचल प्रदेश के उस पर्वतीय भाग में सदियों के बीत जाने पर भी सर्दी बढ़ गई थी।
ऐसा लग रहा था जैसे सर्दी का मौसम फिर लौटकर आ गया हो।
रामनगर शहर से लगभग पांच मील दूर छोटा-सा गांव राजनगर रात की बांहों में लिपटा शान्त सोया पड़ा था। अचानक सर्दी बढ़ जाने के कारण लोग शाम से ही अपने-अपने घर में जा घुसे थे। जो धन सम्पन्न थे वे गर्म बिस्तरों में पड़े सर्दी मिटाने की कोशिश कर रहे थे। और जो निर्धन थे वे अलाव के पास बैठे सर्दी भगाने का असफल प्रयास कर रहे थे ।
हवा के तेज झोंकों से जब कमरा बर्फ की तरह ठंडा हो गया तो राजेश ने हाथ बढ़ाकर खिड़की बन्द कर दी और पर्दा गिरा दिया।
(प्रेतात्मा की डायरी- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)

Saturday, 7 February 2026

707. पीले बिच्छू- कर्नल रंजीत

मेजर बलवंत बांग्लादेश में
पीले बिच्छू- कर्नल रंजीत

राजस्थान के हनुमानगढ जिले के उपखंड संगरिया के मित्र हैं श्री रतन लाल चौधरी । दिसम्बर 2025 में रतन भाई के यहाँ जाना हुआ और उनसे मैं 15 उपन्यास कर्नल रंजीत के लेकर आया । फरवरी 2026 से उन्हीं उपन्यासों को पढा जा रहा है। और समयानुसार उनकी समीक्षा यहाँ प्रस्तुत की जा रही है। 
इन 15 उपन्यासों में से एक उपन्यास है पीले बिच्छू ।
हम समीक्षा की शुरुआत उपन्यास के प्रथम पृष्ठ के दृश्य से करते हैं।

आदेश भी, निवेदन भी
मेजर बलवन्त एक खूबसूरत और खुशबूदार फूल सोनिया के बालों में लगा रहा था। तभी उसने बंगले के अहाते में एक मोटर साइकल की आवाज सुनी । मेजर बलवन्त ने वह फूल जल्दी से सोनिया के बालों में लगा दिया और एक ओर हट गया। मोटर साइकल बरामदे में आकर रुक गई। आफिस के सदर दरवाजे के बाहर फर्श पर भारी बूटों की आवाज पैदा हुई और कुछ पल के बाद एक लम्बे कद का नौजवान, जिसने सुर्ख और खाकी पगड़ी बांध रखी थी, दरवाजे में दिखाई दिया ।
वह दोनों एड़ियां जोड़कर खड़ा हो गया, जिसका अर्थ था कि वह अन्दर आने की अनुमति मांग रहा था ।
मेजर बलवन्त ने उसके विशेष अभिवादन का उत्तर उसीके विशेष अंदाज़ में दिया और सिर के इशारे से अन्दर आने का इशारा किया । वह नौजवान मेजर की मेज़ तक आया। उसने सोनिया को देखकर उसका अभिवादन किया। मेजर यह देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि वह एक शिष्ट नौजवान था। नौजवान ने अपने कंधे पर लटके हुए थैले में से एक लम्बा लिफाफा निकालकर मेज पर रख दिया। उस लिफाफे पर सील-मुहर लगी हुई थी ।
मेजर बलवन्त ने उस लिफाफे पर नजर डाली। उस पर उभरे हुए काले अक्षरों में लिखा था- 'देश-सेवा के लिए' । एक कोने में लाल रोशनाई से तीन शब्द लिखे हुए थे- 'गुप्त तथा गोपनीय' । 
लिफाफे की बाईं ओर एक छपा हुआ पता था :
'देश सेवक मंडल, बम्बई शाखा
शिवाजी पार्क, बम्बई'

नमस्ते पाठक मित्रो,
कर्नल रंजीत के उपन्यास 'पीले बिच्छू' की समीक्षा में आपका हार्दिक स्वागत है। 

Friday, 6 February 2026

706. दुल्हन की चीख- कर्नल रंजीत - 1973

 प्रतिशोध की कथा
दुल्हन की चीख- कर्नल रंजीत 1973

विचित्र प्रतिशोध का रहस्योद्घाटन करने वाला एक सशक्त जासूसी उपन्यास...
मेजर बलवन्त सुबह सवेरे फोन पर किसीसे बात कर रहा था। थोड़ी देर पहले टेलीफोन की घंटी बजी थी। मेजर बाथरूम में था। वह तौलिया लपेटकर शयनकक्ष में फोन सुनने आया था । दूसरी ओर से उसने जो आवाज सुनी, वह बड़ी विचित्र थी। कोई अपने होंठों पर टिशू पेपर अर्थात् बारीक कागज लगाकर उससे बात कर रहा था ताकि उसकी आवाज पहचानी न जा सके। मेजर ने इस बात का अनुमान दूसरी ओर से बोलने वाले की पहली बात से ही लगा लिया था। मेजर के कान में जो आवाज पड़ रही थी उसमें थरथरी थी, लेकिन शब्द स्पष्ट थे ।
"मेजर साहब, आप बहुत बड़े जासूस माने जाते हैं। हम आपको एक चैलेंज दे रहे हैं।" थरथराती हुई आवाज आई, "आज शाम को शहर का कोई न कोई बैंक लूट लिया जाएगा - ठीक उस समय जब लोग बैंक में आ-जा रहे होंगे। आप तो जानते ही हैं कि बम्बई के कुछ बैंक शाम के चार बजे से शाम के सात बजे तक पुनः अपना कारोबार करने लगते हैं। आपमें हिम्मत हो तो आज शाम को यह डाका रोककर दिखाइए !"
"क्या मैं पूछ सकता हूं कि मुझे यह चैलेंज क्यों दिया जा रहा है ? बैंक पर डाके की सूचना पुलिस को देनी चाहिए थी, मुझे नहीं। मैं ऐसे चैलेंज स्वीकार नहीं करता। अभी कोई घटना हुई नहीं । किसी ने मुझे उस घटना की खोजबीन करने के लिए कुछ कहा नहीं
।(दुल्हन‌ की चीख- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)
नमस्ते पाठक मित्रो,
    एक बार हम फिर उपस्थिति हैं कर्नल रंजीत के रोचक उपन्यासों की एक शृंखला के साथ और इस शृंखला में हमारे पास हैं कर्नल रंजीत के 15 उपन्यास । हम गत वर्ष 2025 में कर्नल रंजीत के लगभग 20 उपन्यासों की समीक्षा प्रस्तुत की थी और इस बार 2026 में हम फरवरी माह से एक बार फिर उसी शृंखला को आरम्भ कर रहे हैं। इस में हमारे पास हनुमानगढ़ के संगरिया तहसील के निवासी रतन चौधरी साहब से हमें पन्द्रह उपन्यास प्राप्त हुये हैं। इन पन्द्रह की समीक्षा आपको लगातार प्राप्त होती रहेगी। कोशिश रहेगी एक माह में पांच उपन्यासों की समीक्षा की और इसके अतिरिक्त मेरे पास जो कर्नल रंजीत के शेष उपलब्ध उपन्यास हैं उनकी समीक्षा का प्रयास रहेगा। 
भाई रतन चौधरी से प्राप्त उपन्यास हैं - दुल्हन की चीख, पीले बिच्छू, प्रेतात्मा की डायरी, उलटी लाशे, नकली चेहरे, ट्रेन एक्सीडेंट, हत्यारे की पत्नी, खूनी बदला,चण्डी मंदिर का रहस्य, उलटी खोपड़ी, जापानी पंखा, कातिल मेरा नाम, मौत की परछाई, मेजर बलवंत बंगलादेश में, विजय दुर्ग का रहस्य, खूनी रिश्ते  इत्यादि ।
  चलो अब आरम्भ करते हैं उपन्यास 'दुल्हन की चीख' की समीक्षा । सर्वप्रथम तो हम बता दें यह एक प्रतिरोधात्मक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है।

Tuesday, 18 November 2025

683. आग का समंदर- कर्नल रंजीत

इस शहर में लोग आत्मदाह कर रहे थे 
आग का समंदर - कर्नल रंजीत

उस शहर में हर कोई जल रहा था । सरे आम लोग स्वयं पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा रहे थे और प्रशासन चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। मौत का यह खेल तब तक जारी था तब मेजर बलवंत ने इसकी तह में जाकर रहस्य को उजागर नहीं कर दिया।

कर्नल रंजीत की कलम से निकला मेजर बलवंत सीरीज का एक ज्वलंत उपन्यास 'आग का समंदर' ।

आकाश पर छाई घटाओं ने उस अंधेरी रात के अधकार को और अधिक बढ़ा दिया था। हल्की-हल्की बूंदाबांदी शुरू हो चुकी बी। मौसम हर पल और अधिक खराब होता चला जा रहा था।
       इण्टरनेशनल एयरपोर्ट पर मौसम खराब होने के कारण कई उडाने स्थगित कर दी गई थी। और जो विमान एयरपोर्ट पर लेड कर रहे थे वे भी बहुत ही सावधानी से उतर रहे थे।
एयरपोर्ट के लांज में एक टेबल के गिर्द बैटे पांचों नौजवानों की नजरें थोड़ी-थोड़ी देर के बाद अपनी कलाई पर बंधी घड़ियों की ओर उठ जाती थीं, और फिर वे एक लम्बी सांस छोड़कर नई सिगरेट सुलगाने लगते थे।

Sunday, 16 November 2025

682. रात के अंधेरे में - कर्नल रंजीत

कहानी एक गर्वीली हत्यारिन की 
रात के अंधेरे में - कर्नल रंजीत

" बताओ अप्सरा की बेटी कौन है ?" मेजर ने पूछा।
"मैं यह कभी नहीं बताऊंगी।" मिसेज निगाम्बो ने कहा।
मेजर कुछ और कहना ही चाहता था कि कानों के पर्दे फाड़ डालने वाली चीख सुनाई दी।
और अभिनेता वेद प्रकाश की बांहों में आ गिरी।
"बे सिर पैर की औरत ?"
"हां, बेसिर-पैर की। वह खुली आस्तीनों वाला सुर्ख गाउन पहने थी। दोनों हाथों पर दस्ताने। दस्तानों पर खून। गाउन के कॉलर खड़े हुए, लेकिन खड़े कॉलरों -के बीच न गर्दन, न चेहरा, न सिर।"

एक से एक बढ़कर अविश्वसनीय किन्तु सत्य घटनाओं से भरपूर जासूसी उपन्यास ।

कर्नल रंजीत की अद्भुत रहस्यमयी लेखनी का नवीनतम चमत्कार - रात के अंधेरे में ।

लोकप्रिय कथा साहित्य में कर्नल रंजीत का नाम अदभुत कथा‌नक के लिए याद किया जाता है। इनके उपन्यासों के कथानक और पात्र दोनों ही विचित्र होते हैं। ऐसा ही विचित्रता से भरा हुआ एक उपन्यास है 'रात के अंधेरे में' । यह श्री लंका की पृष्ठभूमि पर आधारित रहस्य और रोमांचक से भरपूर उपन्यास पठनीय है।

Monday, 29 September 2025

670. भयानक बौने- कर्नल रंजीत

विश्व पर छाया बौनों का आतंक
भयानक बौने- कर्नल रंजीत

चार और खूंख्वार जीव उस गढ़े में से निकले । उनकी शक्लें बौनों जैसी थीं । उनकी आंखें क्रोध से अंगारा बन गईं । चारों तेज़ी से उछले और दो बलदेव के सीने से और दो उसकी गर्दन से चिपट गए-जोंकों की तरह ! देखते ही देखते उसके सारे कपड़े खून से तर हो गए। वह आकाश की ओर देखने लगा । उसकी आंखें खुली की खुली रह गई थीं । उसपर अचानक विषैले खूंख्वार बौनों ने आक्रमण कर दिया था । एक सनसनीभरा उपन्यास, जिसमें मानवता के शत्रुओं का भयानक षड्यंत्र विफल हो जाता है ।

       कर्नल रंजीत अपने अनोखे कथानक और रहस्यमयी पात्रों के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं। उनके उपन्यासों के कथानक मर्डर मिस्ट्री होते हुये भी बहुत अलग होते हैं और पात्र भी बहुत अजीब ।
   एक ऐसे ही अलग कथा पर आधारित उनका उपन्यास मिला है- भयानक बौने। प्रस्तुत उपन्यास ऐसे भयानक और जानलेवा चूहों पर आधारित है जो एक तरफ जहां लोगों की जान ले रहे हैं वहीं वह खाद्यान्न भी खत्म कर रहे हैं ।
ऐसे खतरनाक और जानलेवा चूहे कहां से आये ?

669. काली आंधी- कर्नल रंजीत

 मौत की आंधी और खतरनाक लूटेरे

668. देख लिया तेरा कानून- कर्नल रंजीत

ग्यारह हत्याओं की मिस्ट्री
देख लिया तेरा कानून- कर्नल रंजीत

ऐसे सफेदपोश लोगों की अजब-जब कहानी, जो शराफत, इन्सानियत, समाज सेवा का खूबसूरत चोला पहने हुए थे; लेकिन थे वे सिर तक अपराध में डूबे हुए, ढोंगी, मक्कार और घिनौने चेहरे ।
मुखौटेघारी ऐसे लोग, जो कहने को तो कानून के रखवाले थे; लेकिन वास्तव में थे कानून के भयानक दुश्मन ।
एक नौजवान जिसे अगले दिन फांसी दी जाने वाली थी जेल से फरार !
कड़ी सुरक्षा के बीच हथियारों और गोला-बारूद की चोरी, फांसी के फंदों में लटकाकर हत्याएं करने का अनोखा सनसनीखेज तरीका !
चीखते-पुकारते-कराहते बेगुनाह लोगों पर भी अत्याचार, और भी ढेरों रहस्य छिपे पड़े हैं कर्नल रंजीत के इस नये दमदार धमाके में

  देख लिया तेरा कानून

भयानक सपना
"नहीं -ऽ ऽ ऽ ई ऽऽ ई..!"
एक हृदयवेधी चीख रात के सन्नाटे को चीरती हुई नैनी सेण्ट्रल जेल के वार्ड नम्बर तीन की छत और दीवारों से टकराकर गूंज उठी ।