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Wednesday, 17 November 2021

473. ब्लू स्टार- प्रवीण कुमार झा

पंजाब और 1984 का आतंकवाद
ब्लू स्टार- प्रवीण झा

   
धर्म और योद्धाओं के राज्य पंजाब की भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट पहचान है। सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि साधन सम्पन्नता और व्यापारिक दृष्टि से भी पंजाब अग्रणी राज्य है।
   लेकिन एक ऐसा भी समय आया जब हँसते-खेलते पंजाब को मानों किसी की नजर लग गयी हो। जिंदा पंजाबी लोग आतंक के साये में सहमें-सहमें से रह‌ने लगे। सूर्य अस्त और पंजाबी मस्त वाली कहावत का अर्थ ही बदल गया। अब तो सूर्य अस्त होते ही लोग अपने घरों में सहमें से दुबक जाते थे।
     इस का सिर्फ एक ही कारण था - कथित संत जरनैल सिंह भिण्डरावाला।
- संत भिंडरावाले को कांग्रेस का बनाया भस्मासुर कहा जाता रहा है।
- कांग्रेस की मीडिया टीम ने भिंडरावाले को सिखों का नायक बना दिया।
   प्रवीण झा तथ्यों के साथ लेखन के लिए जाने जाते हैं। इनकी रचनाएँ चाहे आकार में छोटी होती हैं पर जानकारी से परिपूर्ण होती है। ऐसी ही रचना है 'ब्लू स्टार' जो 1984 में पंजाब फैले आतंकवाद - राजनीति को अनावरण करती है। लेकिन किसी एक पक्ष का आंकलन न कर मात्र तथ्यों को सामने रखता है।
    अब बात करते हैं पुस्तक 'ब्लू स्टार' की। यह रचना तात्कालिक घटनाक्रम‌ को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करती है।
   सन् 70 के दशक में केन्द्र में कांग्रेस का शासन था।श्रीमती इन्द्रा गाँधी प्रधानमंत्री थी। वहीं पंजाब में अकाली दल का प्रभाव था।  
      अकाली दल पर तीन लोगों का वर्चस्व था— मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, संत हरचंद सिंह लोंगोवाल और गुरचरण सिंह तोहरा। लेकिन, इन्हें तोड़ना कठिन था। ज्ञानी जैल सिंह और संजय गांधी ने योजना बनायी कि एक नया सिख नेता खड़ा करना होगा, जो इन तीनों पर भारी पड़े।

Friday, 12 November 2021

472. दास्तान ए पाकिस्तान- प्रवीण कुमार झा

जब डंडे की मार पड़ी, तब जाकर मुल्क रास्ते पर आया
दास्तान - ए- पाकिस्तान- प्रवीण कुमार झा

    पाकिस्तान के इतिहास पर लिखी गयी प्रस्तुत रचना आपको बहुत से नये तथ्यों से अवगत कराती है। यह बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गयी पुस्तक है। जो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं अन्य देशों की यात्रा भी करवाती है। 
     पाकिस्तान का इतिहास अक्सर विभाजन के इर्द-गिर्द भटक कर रह जाता है। जबकि यह एक देश के बनने की शुरुआत ही थी। 1947 के बाद पाकिस्तान का सफ़र कैसा रहा? किन-किन मील के पत्थरों से गुजरा? उन रास्तों में क्या-क्या मुश्किलें आयी? भारत में पढ़ाए जा रहे इतिहास, और पाकिस्तान में पढ़ाए जा रहे इतिहास में जो स्वाभाविक अंतर है, उस से अलग एक तीसरा बिंदु भी ढूँढा जा सकता है। वह बिंदु, जहाँ से शायद वह चीजें भी नज़र आए, जो इन दोनों देशों के रिश्तों के सामने धुंधली पड़ जाती है।
         यूँ तो मेरी इतिहास पढने में रूचि कम ही है। वैसे भी इतिहास को नीरस विषय कहा जाता है। अगर बात हो पाकिस्तान के इतिहास की तो, हम क्यों पढें? हम से तो अपने देश का भी इतिहास नहीं पढा जाता। 

Friday, 22 May 2020

320. नास्तिकों‌ के देश में- प्रवीण कुमार झा

हाॅलैण्ड की दिलचस्प यात्रा
नास्तिकों के देश में, नीदरलैण्ड- प्रवीण कुमार झा

      प्रवीण कुमार झा पेशे से चिकित्सक हैं। लेकिन इसके साथ-साथ वे यायावर भी हैं। समय समय पर घूमते रहते हैं। हालांकि उनका घूमना कुछ उद्देश्यवश होता है लेकिन इस उद्देश्य के साथ-साथ वे अपनी मनमौजी प्रवृत्ति के चलते कुछ रोचक घटनाओं को भी देख जाते हैं और पाठकों के समक्ष प्रस्तुत कर देते हैं।- दरअसल मैं इस यात्रा में एक शोध की वजह से आया था। मैं गिरमिटिया इतिहास के कुछ अंश तलाश रहा था, जो यहीं कहीं बिखरे पड़े थे।
लेखक प्रवीण झा शहरों और देशों के विचित्र पहलूओं में रुचि रखते हैं। आईसलैंड के भूतों के बाद यह अगला सफर नीदरलैंड के नास्तिकों की तफ़्तीश में है। इस सफर में वह नास्तिकों, गंजेड़ियों और नशेड़ियों से गुजरते वेश्याओं और डच संस्कृति की विचित्रता पर आधी नींद में लिखते नजर आते हैं। किताब का ढाँचा उनकी चिर-परिचित खिलंदड़ शैली में है, और विवरण में सूक्ष्म भाव पिरोए गए हैं। यह एक यात्रा-संस्मरण न होकर एक मन में चल रहा भाष्य है। भिन्न संस्कृतियों के साम्य और द्वंद्व का चित्रण है। इसी कड़ी में उनका सफर एक खोई भारतीयता का सतही शोध भी करता नजर आता है।

Sunday, 1 September 2019

222. भूतों के देश में - प्रवीण झा

भूतों के देख में आईसलैण्ड- प्रवीण कुमार झा, यात्रा वृतांत

विश्व के नक्शे पर एक छोटा सा देश है आइसलैंड।
इसी आइसलैण्ड की यात्रा का वर्णन है उक्त छोटी सी किताब। यह किताब kindle पर online प्रकाशित हुयी है। इसकी भूमिका में भी कुछ भी वर्णित नहीं है या यू कहें की भूमिका, लेखकिय कुछ भी नहीं लिखा गया। विभिन्न स्त्रोतों और किताब पढने के बाद इस पर कुछ मेरे विचार प्रस्तुत हैं।
आइसलैण्ड के लोग भूतों पर ज्यादा विश्वास करते हैं। लेखक को भी भूतों में दिलचस्पी है। जब से सुना, आईसलैंड में प्रेत बसते हैं, इच्छा थी कि इन विदेशी प्रेतों से भी एक बार रू-ब-रू हो लूँ।  (किताब से)
    एक दिन लेखक भी भूतों के देश आइसलैण्ड जा पहुंचा। वहाँ लोगों से भूतों के विषय पर चर्चा की। कुछ ऐसे स्थान भी देखे जहाँ भूतों का निवास माना जाता है।

      यह साठ पृष्ठ की एक छोटी सी रचना है। लेखक ने आइसलैंड के लोगों के भूत- प्रेत आदि के प्रति विश्वास का वर्णन किताब में किया है। उसके साथ-साथ वहाँ के बर्फीले तूफान का वर्णन भी है। प्रस्तुत पुस्तक में कहीं कहीं तो भूतों का वर्णन न होकर बर्फ का चित्रण ही है।
    कुछ जगह आश्चर्यजनक तथ्य या घटनाएं भी वर्णित है लेकिन उनके पीछे का कहीं कोई कारण स्पष्ट वर्णित नहीं है।
किताब छोटी सी है पढना चाहो तो पढ सकते हैं। मध्यम स्तर की है। कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंचाती, बस घटनाओं का वर्णन है।
इस किताब का शीर्षक मुझे रोचक लगा इसलिए पढ ली।
किताब में से कुछ रोचक पंक्तियाँ
- आईसलैंड के दस प्रतिशत लोग कोई न कोई किताब लिख चुके हैं। यह मुझे पंजाब की याद दिलाता हैं, जहाँ कहते हैं कि हर दसवें घर से एक ‘म्यूज़िक सी.डी.’ निकली है।
- यहाँ क्राइम-फिक्शन का इतना शौक है कि आईसलैंड की प्रधानमंत्री भी पहले ‘क्राईम-फिक्शन’ ही लिखती थीं।
- अनुमान है कि आईसलैंड में हर हफ्ते लगभग 500 बार भूकंप आते हैं।
- प्राईवेट अस्पताल हैं ही नहीं। छह सरकारी अस्पताल और कुछ सरकारी क्लिनिक हैं।

      यह एक छोटी सी रचना है। आप चाहे तो इसे
भूतों में दिलचस्पी के नाते पढ सकते हैं, या फिर आइसलैण्ड के बारे में थोड़ा बहुत जानना चाहते हैं तो पढ सकते हैं। हालांकि किताब लघु आकार की है इसलिए ज्यादा उम्मीद न रखे की इससे बहुत कुछ जानने को मिलेगा। बस इतना है की छोटा आकार है और रोचक है। कम समय में पढ सकते हैं। कुछ घटनाओं का अधूरा सा वर्णन भी आपको परेशान कर सकता है।
आइसलैण्ड नक्शे में














किताब - भूतों के देश में आइसलैण्ड
लेखक- प्रवीण कुमार झा
पृष्ठ- 60
प्रथम संस्करण- मार्च 2018