जब डंडे की मार पड़ी, तब जाकर मुल्क रास्ते पर आया
दास्तान - ए- पाकिस्तान- प्रवीण कुमार झा
पाकिस्तान के इतिहास पर लिखी गयी प्रस्तुत रचना आपको बहुत से नये तथ्यों से अवगत कराती है। यह बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गयी पुस्तक है। जो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं अन्य देशों की यात्रा भी करवाती है। पाकिस्तान का इतिहास अक्सर विभाजन के इर्द-गिर्द भटक कर रह जाता है। जबकि यह एक देश के बनने की शुरुआत ही थी। 1947 के बाद पाकिस्तान का सफ़र कैसा रहा? किन-किन मील के पत्थरों से गुजरा? उन रास्तों में क्या-क्या मुश्किलें आयी? भारत में पढ़ाए जा रहे इतिहास, और पाकिस्तान में पढ़ाए जा रहे इतिहास में जो स्वाभाविक अंतर है, उस से अलग एक तीसरा बिंदु भी ढूँढा जा सकता है। वह बिंदु, जहाँ से शायद वह चीजें भी नज़र आए, जो इन दोनों देशों के रिश्तों के सामने धुंधली पड़ जाती है।
यूँ तो मेरी इतिहास पढने में रूचि कम ही है। वैसे भी इतिहास को नीरस विषय कहा जाता है। अगर बात हो पाकिस्तान के इतिहास की तो, हम क्यों पढें? हम से तो अपने देश का भी इतिहास नहीं पढा जाता।
दास्तान - ए- पाकिस्तान- प्रवीण कुमार झा
पाकिस्तान के इतिहास पर लिखी गयी प्रस्तुत रचना आपको बहुत से नये तथ्यों से अवगत कराती है। यह बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गयी पुस्तक है। जो सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं अन्य देशों की यात्रा भी करवाती है। पाकिस्तान का इतिहास अक्सर विभाजन के इर्द-गिर्द भटक कर रह जाता है। जबकि यह एक देश के बनने की शुरुआत ही थी। 1947 के बाद पाकिस्तान का सफ़र कैसा रहा? किन-किन मील के पत्थरों से गुजरा? उन रास्तों में क्या-क्या मुश्किलें आयी? भारत में पढ़ाए जा रहे इतिहास, और पाकिस्तान में पढ़ाए जा रहे इतिहास में जो स्वाभाविक अंतर है, उस से अलग एक तीसरा बिंदु भी ढूँढा जा सकता है। वह बिंदु, जहाँ से शायद वह चीजें भी नज़र आए, जो इन दोनों देशों के रिश्तों के सामने धुंधली पड़ जाती है।
यूँ तो मेरी इतिहास पढने में रूचि कम ही है। वैसे भी इतिहास को नीरस विषय कहा जाता है। अगर बात हो पाकिस्तान के इतिहास की तो, हम क्यों पढें? हम से तो अपने देश का भी इतिहास नहीं पढा जाता।