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Saturday, 12 September 2026

742. आखिरी शिकार- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुनील लंदन में
आखिरी शिकार- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज- 38

सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के सुनील सीरीज के 'आखिरी शिकार' उपन्यास के साथ एक बार फिर हम उपस्थित हैं। प्रस्तुत उपन्यास अंतरराष्ट्रीय जासूसी पर आधारित एक स्पाई थ्रिलर उपन्यास है।
चीनी एजेंटों के चंगुल में फंसी दस स्पाई एजेंटों की एक भारतीय टीम जैसे-तैसे करके आजाद तो हो गयी लेकिन इसके लिये उनको भारी कीमत चुकानी पड़ी । टीम के सदस्यों का मानना था कि टॉर्चर से बचने हेतु उन्हीं की टीम का एक सदस्य चीनियों से जा मिला था और वही अब अपने राज को राज रखने के लिये एक-एक करके उनको खत्म करता जा रहा था । क्या सुनील गद्दार को अपने आखिरी शिकार तक पहुंचने से रोक पाया ?
उपन्यास की समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम दृश्य को देखते हैं और जानते हैं कैसे लंदन में सुनील अपने अभियान पर निकलता है।

आखिरी शिकार- सुरेन्द्र मोहन पाठक

टेलीफोन की घन्टी धनधना उठी।

Saturday, 15 August 2026

737. ट्रिपल क्राॅस- सुरेन्द्र मोहन पाठक

ब्लैकमेल, हमशक्ल और मर्डर मिस्ट्री
ट्रिपल क्राॅस- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज- 54

सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास 'ट्रिपल क्रॉस' सुनील श्रृंखला संख्या का 54 वां उपन्यास है । यह एक थ्रिलर मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है। उपन्यास में मर्डर मिस्ट्री गौण अन्य कथा प्रधान है और यही कथा उपन्यास को ज्यादा रोचक बनाती है।
ट्रिपल क्राॅस उपन्यास जैसा की अपने शीर्षक से ही अपनी कथा का आभास करवा रही है। अब देखना यह है की कौन, किसको और कैसे क्राॅस कर रहा है और किस माध्यम से और किसलिए ।

ट्रिपल क्राॅस- सुरेन्द्र मोहन पाठक

        सभ्य लोगों की असभ्य हरकतों की सनसनीखेज दास्तान जिसमें धोखा-दर-धोखा अहमतरीन किरदार की तरह शामिल था और जिसमें खिचड़ी में घी की तरह घुला-मिला हुआ था ब्लास्ट का स्पेशल कोरस्पोंडेंट सुनील कुमार चक्रवर्ती । एक सदाबहार मर्डर मिस्ट्री । (आवरण पृष्ठ से)

उपन्यास की समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ पर एक नजर डालते हैं और फिर समीक्षा को आगे बढाते हैं।

Tuesday, 4 August 2026

736. कमरा नम्बर 303- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

नशा के व्यापारी और मर्डर मिस्ट्री
कमरा नम्बर 303 - सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज 105 - मर्डर मिस्ट्री

एक अत्यन्त रोमांचक कथानक जिसका केन्द्र बिन्दु एक ऐसी रहस्यमयी युवती थी जो एक पार्टी में से एकाएक यूं गायब हुई जैसे वो कभी वहां थी ही नहीं, जिसके बारे में उसके मेजबान का दावा था कि वो उसे नहीं जानता था।
एक अत्यन्त रोचक मर्डर मिस्ट्री। आदि से अन्त तक एक ही बैठक में पठनीय । (आवरण पृष्ठ से)

कमरा नम्बर 303- सुरेन्द्र मोहन पाठक

एक लम्बे समय पश्चात सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का उपन्यास पढा है। जहां तक मुझे याद है (ब्लॉग अनुसार) मैंने अप्रेल 2022 में सुनील सीरीज का इक्कीसवां उपन्यास 'झूठी औरत' पढा था और उसके बाद अब अगस्त 2026 में सुनील सीरीज का उपन्यास 'कमरा नम्बर 303' पढा। हालांकि यह उपन्यास पूर्व में 01.11.2012 में पढी थी । इसके अतिरिक्त मेरे मित्र चेतराम, रमेश बरोड़(जुलाई 2007) और विकास पचार ने 21.06.2009 में इसे पढा था। तब उपन्यास पाठक भी थे और हम मित्र उपन्यास पढने के बाद उस पर दिनांक भी अंकित करते थे।

Wednesday, 20 April 2022

514. झूठी औरत - सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

एक ब्लैकमेलर और एक झूठी औरत
सुनील सीरीज-21
झूठी औरत- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुनील किसी ‘डैमसेल को डिस्ट्रेस’ में ना देख पाने की अपनी लाचारी से मजबूर था। लेकिन इस बार उस ‘डैमसेल’ - झूठी ‘डैमसेल’ ने उसकी ऐसी चक्करघिन्नी बनाई कि वो खुद ही ‘डिस्ट्रेस’ में आ गया। कला नाम की एक ऐसी खूबसूरत औरत की कहानी कदम-कदम पर झूठ बोलने की कला में खूब पारंगत थी। (किंडल से)
'झूठी औरत' सुरेन्द्र मोहन पाठक जी द्वारा लिखित सुनील सीरीज का इक्कीसवां उपन्यास है। जो मूल रूप से एक अंग्रेजी उपन्यास का हिंदी रूपांतरण है।

Tuesday, 30 November 2021

479. डबल रोल- सुरेन्द्र मोहन पाठक

डबल रोल- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
सुनील सीरीज- 19 
डबल रोल- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
शम्भुदयाल एक दुस्साहस लुटेरा था, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर ना सिर्फ दिन-दहाड़े बैंक लूट डाला था, बल्कि तीन सिपाहियों को भी गोली से उड़ा डाला था। (Kindle से)
     मैंने इन दिनों सतत सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के सुनील सीरीज के कुछ उपन्यास पढे हैं। सुनील सीरीज के इन आरम्भिक उपन्यासों का सफर रोचक रहा है। कुछ उपन्यासों की कथा बहुत अच्छी लगी तो कुछ उपन्यास सामान्य स्तर के भी निकले। इन अच्छे और सामान्य उपन्यासों का विवरण समीक्षा के माध्यम से यहाँ प्रस्तुत करने का एक अल्प प्रयास भी किया है, हालांकि सभी पाठको का पढने और मनन का तरीका अलग-अलग होता है।
  सुनील सीरीज के ये उपन्यास मुझे कैसे लगे वह मेरा दृष्टिकोण है, आपका अलग हो सकता है।
अब चर्चा सुनील सीरीज के 19 वे उपन्यास 'डबल रोल' की। 

Sunday, 28 November 2021

478. काला मोती- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

सुनील का तृतीय अंतरराष्ट्रीय अभियान
काला मोती- सुरेन्द्र मोहन पाठक, 1968
सुनील सीरीज- 18
सेंट्रल पार्क में पायी गयी एक अचेत युवती जैसी एक मामूली खबर को सुनील ने सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए अखबार में छपवा दिया था लेकिन वो‌ नहीं जानता था कि ऐसा करके उसने एक युवती को कई पार्टियों के आकर्षण का केन्द्र बना दिया था।
अब हर पार्टी का केवल एक ही‌ मकसद था- युवती का खात्मा या उस पर कब्जा। 

  - कौन थी वह युवती?
-   वह से सेंट्रल पार्क में अचेत अवस्था में कैसे पायी गयी?
-  कुछ लोग उस का खात्मा क्यों करना चाहते थे?
- आखिर क्या रहस्य था उस युवती में?

सुरेन्द्र मोहन पाठक जी द्वारा रचित एक रहस्य कथा है 'काला मोती'। जिसे पढें और जानें उक्त प्रश्नों के उत्तर। 
     पठन की दृष्टि से 'किंडल' एक उपयोगी प्लेटफार्म है। किंडल के अथाह सागर म बहुत से मोती हैं। उन मोतियों में से मैंने सुरेन्द्र मोहन पाठक द्वारा लिखित 'काला मोती' चुना। 

Saturday, 27 November 2021

477. हत्या की रात- सुरेन्द्र मोहन पाठक

झेरी झील के किनारे हत्या
हत्या की रात- सुरेन्द्र मोहन पाठक, 1967
सुनील सीरीज- 16

महेश कुमार एक बड़े उद्योगपति का ऐय्याश और बिगडैल बेटा था। शहर से दूर स्थापित अपने एक काटेज में लड़कियों को बुलाना और उनके साथ अपनी मनमानी करना महेश कुमार का पसंदीदा शगल था। फिर एक रात महेश कुमार की गोली से बिंधी लाश उसी के काटेज में पाई गयी और अब पुलिस का मानना था कि ऐसी ही किसी लड़की ने जिस पर उसकी पेश नहीं चली थी उसकी ईह-लीला समाप्त कर डाली थी।  
हत्या की रात- पाठक, सुनील 16, svnlibrary
नमस्कार पाठक मित्रो,
    आज हम चर्चा करने जा रहे हैं सुरेन्द्र मोहन पाठज द्वारा लिखित सुनील सीरीज के सोलहवें उपन्यास 'हत्या की रात' की।
जैसा की शीर्षक से विदित होता है यह एक हत्या पर आधारित कथा है और वह हत्या होती है एक रात को।
किसकी हत्या?
किसने की हत्या ?
क्यों की हत्या?

  इन प्रश्नों का उत्तर उपन्यास पढ कर ही जाना जा सकता है। हां, उपन्यास रोचक है। कहानी अच्छी है। 

Friday, 26 November 2021

476. खतरनाक ब्लैकमेलर- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

प्रेम,  ब्लैकमेल और हत्या की कहानी
खतरनाक ब्लैकमेलर- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज-14   

इन दिनों किंडल पर कुछ उपन्यास पढे जा रहे हैं। इसी क्रम में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का उपन्यास 'खतरनाक ब्लैकमेलर' भी पढा। यह सुनील सीरीज का चौदहवां उपन्यास है और सुनील का यह तीसरा ऐसा कारनामा है जिसमें ब्लैकमेल पर आधारित है। यह भी दिलचस्प है की इन चौदह उपन्यासों में से तीन ब्लैकमेल पर आधारित हैं और उनमें से दो की कहानी एक जैसे ही है।
    अब कुछ चर्चा उपन्यास कर कथानक पर।
राजनगर टेक्सटाइल मिल का मालिक - रत्न प्रकाश - एक सेल्ज कॉन्फ्रेंस के सिलसिले में विशालगढ गया और जब वहां से लौटा तो उसके साथ एक अनिद्य सुन्दरी थी जिसका परिचय उसने अपनी पत्नी के रूप में दिया । और अब उसकी सैक्रेटरी नीला का दावा था कि रत्न प्रकाश ने न केवल नीला को धोखा दिया था बल्कि वो खुद भी किसी धोखे का शिकार हो गया था। 

  अब सच क्या है झूठ क्या है यह तो खैर सुनील की खोजबीन और उपन्यास का समापन ही बतायेगा।
  ब्लैकमेलर शैतान होता है जिसे एक बार खून‌ पीने की आदत लग जाती है वह उस से छूटती नहीं है। यह भी एक ऐसे ही ब्लैकमेलर की कहानी है।
 

  रत्नप्रकाश की सेक्रेटरी नीला सुनील चक्रवर्ती से मदद मांगने जाती है।

“मैं चाहती हूं कि तुम सन्तोष के पंजे से रत्न प्रकाश को छुड़ाने में मेरी सहायता करो।” - नीला भर्राये स्वर में बोली - “सुनील, यह बात सुनने में बुरी लगती है लेकिन यह हकीकत है कि मैं अब भी रत्न प्रकाश से मुहब्बत करती हूंँ।  मैं उसकी हितचिन्तक हूं । रत्न प्रकाश न जाने किस दबाव में आकर सन्तोष के हाथों का खिलौना बना हुआ है। अगर शीघ्र ही कुछ किया नहीं गया तो वह औरत उसे बरबाद कर देगी । मैं चाहती हूं तुम किसी प्रकार सन्तोष के पिछले जीवन के बखिए उधेड़ डालो। तुम यह पता लगाओ कि सन्तोष का रत्न प्रकाश पर क्या दबाव है और क्यों उसने आनन-फानन सन्तोष से शादी की।
   नीला चाहती है कि सुनील इस सत्यता का पता लगाये की रत्नप्रकाश ने संतोष से शादी क्यों की? कहीं वह किसी ब्लैकमेलिंग का शिकार तो नहीं बन गया? 

Monday, 22 November 2021

474. Red Circle Society- सुरेन्द्र मोहन पाठक

वह सोसाइटी ही खराब थी
Red Circle Society- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज- 12
         रात के अंधेरे में सहायता तलाशता वो आगंतुक सुनील के फ्लैट में जैसे आसमान से टपका था । सुनील नहीं जानता था कि वो एक अजनबी की सहायता करने के चक्कर में एक ऐसी बड़ी और संगठित संस्था से दुश्मनी मोल ले चुका था जिसके अस्तित्व तक को कोई स्वीकार करने को तैयार नहीं था । संस्था के सदस्य राजनगर के सभ्य समाज के अभिन्न अंग थे और वे सब अब सुनील की जान के पीछे हाथ धो कर पड़े थे। 
    Red Circle Society सुनील सीरीज का 12 वां उपन्यास है जो सन् 1966 में प्रकाशित हुआ था।

Friday, 29 October 2021

470. हत्यारे- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सात मौतें और बीस लाख के हीरे
हत्यारे- सुरेन्द्र मोहन पाठक
रहस्य के धागे, सुनील सीरीज का ग्यारहवां उपन्यास

    प्रस्तुत उपन्यास सुनील सीरीज का ग्यारहवां उपन्यास है जो बीस लाख की लूट पर आधारित एक थ्रिलर उपन्यास है। उपन्यास का कथानक तीव्र गति और रोचकता लिये हुये है। 
     यह कहानी है चार दोस्तों की जीवन, चौधरी, तिवारी और मोहन लाल नामक चार लूटेरों की। उन्हें एक सूचना मिली। - “सेठ गूजरमल के नौकर ने उसे विशालगढ़ में किसी को ट्रंक काल करके यह कहते सुना था कि वह आज रात की गाड़ी से बीस लाख रुपये का माल लेकर विशालगढ़ आ रहा था।”
       और इन चारों मित्रो ने उस बीस लाख की रकम को लूटने का एक फुलप्रूफ प्लान निर्मित किया।
      लेकिन जैसा की लूट के दौरान होता है, एक मित्र के हृदय में बेईमानी आ गयी। और उसने बीस लाख रूपये का वह माल गायब कर दिया।
     इन मित्रों की आपसी भाग दौड़ के दौरान एक दुर्घटना में संयोग से सुनील भी इन से टकरा जाता है। और वहीं सुनील को मिलता है सी. बी. आई. कैप्टन पिंगले जो सुनील से कहता है- “यह पुलिस केस है। हत्यारों की इस पार्टी में, जिनका एक सदस्य चौधरी अभी मारा गया है, किन्हीं विशिष्ट कारणों से सी बी आई के लोग भी दिलचस्पी ले रहे हैं,....।" 

Tuesday, 3 August 2021

450. आस्तीन के सांप- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

घर को लगा दी आग घर के चिरागों ने...
आस्तीन का सांप- सुरेन्द्र मोहन पाठक, 1966
सुनील सीरीज- 10
सेठ सुन्दरदास ने अत्यन्त दयाभाव दिखाकर अपने दूर के रिश्तेदारों को अपने घर में आश्रय दिया था । लेकिन फिर हालात ने कुछ ऐसा पलटा खाया कि सुन्दरदास ने खुद को पागलखाने में बंद पाया । काश कि वो जानता होता कि वो रिश्तेदार नहीं सांप पाल रहा था जिसको चाहे कितना ही दूध पिलाया जाये, उसकी जात नहीं बदलती, वो डंसे बिना नहीं मानता।
        उपर्युक्त कथानक है सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक जी के उपन्यास 'आस्तीन के सांप' का। यह सुनील सीरीज का दसवां उपन्यास है। जो एक ऐसे व्यक्ति की व्यथा-कथा है जिसे अपने ही लोगों ने धोखा दिया, उसकी जान के दुश्मन बन बैठे।
      कथा का आरम्भ होता है 'चटर्जी और मुखर्जी' नामक वकीलों की एक संस्था के सीनियर वकील चटर्जी से।
चटर्जी एण्ड मुखर्जी नाम की वकीलों की फर्म के सीनियर पार्टनर चटर्जी एक लगभग पचपन वर्ष के प्रौढ व्यक्ति थे और सुनील के अच्छे मित्रों में से थे ।
चटर्जी के पास शारदा नामक युवती आती है। उसी युवती के दुख निवारण के लिए चटर्जी सुनील को बुलाते हैं। 
    “सुनील ।” - दूसरी ओर चटर्जी का स्वभावगत गम्भीर स्वर सुनाई दिया - “थोड़ी देर के लिए मेरे आफिस में आ सकते हो ?”
“अभी ?” - सुनील ने पूछा।
“हां।”
“क्या बात है ?”
“यहां आओगे तो बताऊंगा।”
“अभी ?” - सुनील ने पूछा।
“हां।”
“क्या बात है ?”
“यहां आओगे तो बताऊंगा।” 

449. रिपोर्टर की हत्या- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

रिपोर्टर की हत्या- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
सुनील सीरीज-09, जून-1966

ब्लास्ट के होनहार पत्रकार राजेश को जब विशालगढ़ के एक प्रमुख उद्योगपति - जो कि नैशनल बैंक के डायरेक्टर और सिटी क्लब के प्रेसीडेंट होने के साथ साथ आगामी आम चुनावों में लोकसभा के उम्मीदवार भी थे - के एक लड़की के साथ शराब पीकर गाड़ी चलाने के अपराध में पकड़े जाने की एक्सक्लूसिव खबर मिली तो उसकी खुशी का कोई पारावार न रहा । काश कि वो जानता होता कि इस खबर को छपवाने की उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। 

       राजनगर का एक बदनाम होटल है 'ज्यूल बाॅक्स' और ज्यूल बाक्स में एक डकैती के दौरान डकैत अलमारी में रखे कुछ महत्वपूर्ण कागज भी ले गये।

     ज्यूल बॉक्स का स्वामी राजपाल सुनील से मदद मांगने आता है- “तुम उन कागजों को मुझे वापिस दिलाने में मेरी सहायता कर सकते हो। सारा नगर जानता है कि तुम विलक्षण प्रतिभा के आदमी हो। केवल अपने मास्टर माइन्ड के दम से तुमने कई ऐसे केस सुलझाए हैं, जिन्हें पुलिस के जासूस सिर पटककर मर गये लेकिन सुलझा नहीं पाये। अगर तुम केवल इतना पता लगा दो कि डाकू कौन थे तो वे कागज मैं उनसे किसी भी कीमत पर वापिस खरीद लूंगा।”

Sunday, 1 August 2021

448. शैतान‌ की मौत - सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

शैतान की मौत- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक, 1966
सुनील-08 
आरती भंडारी की मां उसके लिये अपनी सारी सम्पत्ति एक ऐसे ट्रस्ट के रूप में छोड़ कर मरी थी जिसका कि उसके इक्कीस साल के होने पर उसके कंट्रोल में आने का प्रावधान था। फिर ज्यों ही ट्रस्ट का संचालन आरती के काबू में आया, उसमें से कुछ निश्चित रकम गायब होने लगी जिसके बारे में उसके पिता का खयाल था कि उसे कोई शैतान ब्लैकमेल कर रहा था। 
      लोकप्रिय साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन में सुरेन्द्र मोहन पाठक अद्वितीय प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने सुनील चक्रवर्ती नामक अपने एक पात्र के माध्यम से उपन्यास जगत में पदार्पण किया। सुनील के उपन्यास मर्डर मिस्ट्री पर आधारित होते हैं। सुनील 'ब्लास्ट' नामक समाचार पत्र में खोजी पत्रकार है। 
    यूथ क्लब का मालिक रमाकांत सुनील का घनिष्ठ मित्र है। सुनील अपने अन्वेषण के दौरान रमाकांत की मदद लेता रहता है।
    एक दिन रमाकांत अपने मित्र भंडारी के साथ सुनील से मिलता है।
“सुनील।” - परिचय कराता हुआ बोला - “इनसे मिलो, यह मिस्टर भंडारी हैं। मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। यह यूथ क्लब की स्थापना में इनका भारी सहयोग रहा है और मिस्टर भंडारी यह सुनील है जिसका मैंने आपसे जिक्र किया था ।” 
“बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर।” - भंडारी सुनील के हाथ को थाम कर बोला। 

447. मूर्ति की चोरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक

मूर्ति की चोरी- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज-07

दीवान नाहर सिंह को पुरानी ऐतिहासिक महत्त्व की चीजें एकत्र करने का शौक था । अपने इस अभूतपूर्व कलेक्शन की नुमायश के वास्ते वो अनेक सुरक्षा इंतजामों के बीच अक्सर बड़ी-बड़ी पार्टियां देता था।  लेकिन उसके तमाम इंतजाम धरे-के-धरे रह गए जब एक रोज ऐसी ही पार्टी के बाद एक बुद्ध की मूर्ति गायब पाई गयी।

मूर्ति की चोरी- पाठक svnlibrary.blogspot.com
  हम एक बार फिर उपस्थित हैं सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के सुनील सीरीज के सातवें उपन्यास 'मूर्ति की चोरी' के साथ। यह पाठक जी द्वारा लिखा गया सातवाँ उपन्यास है, जो चोरी और मर्डर पर आधारित है। उपन्यास का नायक 'ब्लास्ट' समाचार पत्र का खोजी पत्रकार सुनील चक्रवर्ती है, और साथ में सुनील का परम मित्र रमाकांत।
     राजनगर शहर का नाहर सिंह मूर्तियों का अच्छा संग्राहक तो था ही साथ ही साथ उसे मूर्तियों को मित्रों को दिखाने का शौक भी था। इसलिए वह अक्सर पार्टियाँ करता रहता था। और इसी तरह एक पार्टी में एक दुर्लभ बुद्ध की मूर्ति चोरी हो गयी।
- दीवान नाहरसिंह के विषय में उसने बहुत कुछ सुना था । वह लगभग पचपन वर्ष का लखपति आदमी था । प्रीमियर बिल्डिंग के नाम से जानी जाने वाली विशाल इमारत उसकी सम्पत्ति थी......
       नाहरसिंह को पुराने जमाने की ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं जमा करने का शौक था । अपने उसे शौक की खतिर उसने सारे विश्व का भ्रमण किया था और लाखों रुपए खर्च करके अपने घर में दुर्लभ वस्तुओं का एक म्यूजियम सा बना डाला था। 

Sunday, 25 July 2021

444. हाॅगकाॅग में हंगामा- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुनील का प्रथम अंतरराष्ट्रीय अभियान
हाॅगकाॅग में हंगामा- सुरेन्द्र मोहन पाठक,1966
सुनील सीरीज-06

सेन्ट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन के सुपरिटेन्डेन्ट रामसिंह ने अपनी जेब से एक असाधारण लम्बाई का सिगार निकाला, दांत से ही उनका कोना काटा, सिगार को अपने मुंह के कोने में लगाकर उसने माचिस से सुलगाया और फिर एक बेहद लम्बा कश लेकर उसे होंठों से हटा लिया और अपने विशिष्ट ढंग से उसे अपने अंगूठे और पहली उंगली में नचाता हुआ सुनील से सम्बोधित हुआ - “आज तुमको मेरे साथ प्रतिरक्षा मन्त्रालय में चलना है।”
   यहाँ जाकर सुनील को पता चलता है की कुछ महत्वपूर्ण फाईल गायब हो गयी हैं। और विभाग का एक सामान्य सा कर्मचारी नरेश मारा गया है और उसकी जेब में कुछ गोपनीय कागज पाये गये हैं।
मिस्टर सुनील, नरेश देशद्रोही, नहीं हो सकता । वह चोरी नहीं कर सकता । वह तो अवश्य ही किसी बहुत बड़े कुचक्र का शिकार होकर जान दे बैठा है।” 
     सुनील को यह भी पता चलता है की उस कर्मचारी नरेश की पहुँच उन कागजों तक न थी।
- वह महत्वपूर्ण कागज/फाईल क्या थी?
- वह फाईल कैसे गायब हुयी?
- वह कागज किसने गायब किये?
- नरेश कैसे मारा गया?
- सुनील इस रहस्य जो कैसे सुलझाता है?
- आखिर प्रतिरक्षा विभाग सुनील की मदद क्यों लेता है?

443. ब्लैकमेलर की हत्या- सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुनील सीरीज का पांचवां उपन्यास
ब्लैकमेलर की हत्या- सुरेन्द्र मोहन पाठक, 1966
सुनील सीरीज-05

दीवानचन्द एक ऑटोमोबाइल कम्पनी का मैनेजर था जिसे अपनी काम के सिलसिले में अक्सर राजनगर से बाहर जाना पड़ता था। ऐसे ही एक टूर के बाद एक सुबह उसे चिट्ठी मिली जिसमें उस पर इल्जाम लगाया गया था कि अपने पिछले टूर के दौरान उसने एक मासूम लड़की की जिंदगी तबाह डाली थी और उसकी सारी कारगुजारियों का कच्चा चिट्ठा उसकी बीवी के सामने खोल देने की धमकी दी गयी थी। जबकि खुद दीवानचंद का दावा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया था। (उपन्यास अंश) 

  ब्लैकमेलर की हत्या सुरेन्द्र मोहन पाठक जी द्वारा लिखा जाने वाला और सुनील सीरीज का पांचवा उपन्यास है। उपन्यास का कथानक एक ब्लैकमेलर की हत्या और संबंधित है। शक तो संबंधित सभी लोगों पर जाता है पर हत्यारा तो कोई एक ही था। बस उसे हत्यारे की तलाश पर आधारित है यह उपन्यास। उपन्यास में हालांकि यह मूल कथानक है लेकिन कहानी सिर्फ इतनी ही नहीं है और भी बहुत कुछ उपन्यास में रोचक और पठनीय है। 

Saturday, 6 March 2021

421. धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक

एक मामूली बेऔकात 'धब्बा' जो कत्ल के हल की बुनियाद बना।
धब्बा- सुरेन्द्र मोहन पाठक, मर्डर मिस्ट्री
सुनील सीरीज -119
पाठक जी -    275

श्रीप्रकाश सिकंद नाम के एक स्वर्गवासी व्यक्ति की वसीयत का केस बड़ा दिलचस्प हो गया है। बीस करोड़ के विरसे का मामला है ...।(पृष्ठ-137)
       मैं जब भी कहीं सफर में होता हूँ तो मेरे थैले में दो-चार उपन्यास अवश्य होते हैं। जहाँ एक तरफ सफर में उपन्यास पढ लिये जाते हैं, वहीं लोगों तक यह संदेश भी जाता है कि उपन्यास संस्कृति अभी जिंदा है।
    इस बार विद्यालय से अवकाश लेकर घर (माउंट आबू से बगीचा-श्री गंगानगर) आया तो कोचीवैली-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस ट्रेन में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का उपन्यास 'धब्बा' पढा। 

धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
धब्बा- सुरेन्द्र मोहन‌ पाठक
प्रकाश खेमका 'सरकता आँचल' नाम से एक पत्रिका चलाता था। पत्रिका क्या थी वह पत्रिका की ओट में, पत्रिका के माध्यम से फ्रेण्डशिप क्लब चलाता था।
"वो आम मैगजीन नहीं है। सच पूछो तो मैगजीन‌ की शक्ल में फ्रेण्डशिप क्लब है। अनजान, एडवेंचरस लोगों में कम्यूनिकेशन का जरिया है। हर वर्ग के हर उम्र के लोगबाग कम्पैनियनशिप के लिए, दोस्ती के लिए...मैगजीन में विज्ञापन छपवाते हैं।(पृष्ठ-33)
     लेकिन एक बार एक विज्ञापन उसके गले की फांस बन गया और उसी फांस को निकलवाने के लिए वह रमाकांत के माध्यम से यूथ क्लब में 'ब्लास्ट' के पत्रकार सुनील से मिला।

Friday, 4 December 2020

400. होटल में खून- सुरेन्द्र मोहन पाठक

 तलाश एक कातिल की
होटल में खून- सुरेन्द्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज-03


लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी को सर्वश्रेष्ठ मर्डर मिस्ट्री लेखक का पद प्राप्त है। उन्होंने सुनील और सुधीर सीरीज के मर्डर मिस्ट्री उपन्यास लिखे हैं।
      होटल में खून पाठक जी द्वारा लिखा गया सुनील सीरीज का एक मर्डर मिस्ट्री उपन्यास है। सुनील चक्रवर्ती 'ब्लास्ट' नामक समाचार पत्र का एक खोजी पत्रकार है। जो पत्रकारिता के माध्यम से कुछ पुलिस केस भी हल करता है।
     अब चर्चा करते हैं प्रस्तुत उपन्यास 'होटल में खून' की। जैसा की शीर्षक से ही स्पष्ट होता है कि एक होटल में खून होता है और उसी के अन्वेषण पर कथा का क्रमिक विकास होता है।
   ढलती हुई रात के साथ होटल ‘ज्यूल बाक्स’ की रंगीनियां भी बढती जा रही थी । होटल का आर्केस्ट्रा वातावरण में पाश्चात्य संगीत की उत्तेजक धुनें प्रवाहित कर रहा था । जवान जोड़े एक दूसरे की बांहों में बांहें फंसाये संगीत की लय पर थिरक रहे थे । जो लोग नृत्य में रूचि नहीं रखते थे, वे डांस हाल के चारों ओर लगी मेजों पर बैठे अपने प्रिय पेय पदार्थों की चुस्कियां ले रहे थे। (उपन्यास अंश)
    ऐसी चर्चा है की इस होटल में गुप्त रूप से अवैध जुआघर संचालित होता है।- सुनील को विश्वस्त सूत्रों से मालूम हुआ था कि ज्यूल बाक्स का मालिक माइक गुप्त रूप से एक जुआघर का संचालन कर रहा था।
     इसी होटल में सुनील की आँखों‌ के सामने एक कत्ल होता है लेकिन लेकिन सुनील के अतिरिक्त कोई और उस कत्ल की गवाही देने को तैयार नहीं। जब सुनील इस कत्ल के अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करता है तो वह स्वयं एक खून के अपराध में मुजरिम बना दिया जाता है। 

- होटल ज्यूल बाॅक्स में जुआघर चल रहा था?
- क्या सुनील उस जुआघर का पता लगा पाया?
- होटल में किसका खून हुआ?
- होटल में खून किसने और क्यों किया?
- क्या असली अपराधी पकड़ा गया?
- सुनील पर किसके कत्ल का आरोप लगा?

ऐसे अनेक प्रश्नों के उत्तर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी द्वारा रचित उपन्यास 'होटल में खून' पढने पर मिलेंगे।

Tuesday, 1 December 2020

399. बदसूरत चेहरे- सुरेन्द्र मोहन पाठक

 कुबड़ों की दहशत
बदसूरत चेहरे- सुरेन्द्र मोहन पाठक, उपन्यास 
सुनील सीरीज-04

इस माह मेरे द्वारा पढे जाने वाला यह पांचवा उपन्यास है। और सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का इस माह पढे जाने वाला यह चौथा उपन्यास है। और प्रस्तुत उपन्यास 'बदसूरत चेहरे' के साथ 'स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय' ब्लॉग पर मेरे द्वारा पढी गयी चार सौ रचनाओं पर समीक्षक पूर्ण हो जायेगी।

जहां गत वर्ष 2019 मैं मैंने सौ रचनाएँ पढी और उन पर समीक्षाएं प्रस्तुत की वहीं इस वर्ष 2020 में यह लक्ष्य 150 रचनाओं का है। जिस से मैं मात्र 10 कदम दूर हूँ। यह लक्ष्य दिसंबर 2020 तक पूर्ण जायेगा।
   मेरे ब्लॉग के पाठकों का हार्दिक धन्यवाद मेरी समीक्षाओं को पढते हैं और उन पर अपने विचार व्यक्त करते हैं। हालांकि कुछ रचनाएँ पढने के बाद भी समयाभाव के कारण समीक्षा से वंचित रह जाती हैं।
   अब चर्चा करते हैं सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के उपन्यास 'बदसूरत चेहरे' पर।
      शहर में इन दिनों कुछ रहस्यमय घटनाएं घटित होती हैं। एक रहस्यमय कत्ल और उस कत्ल के पश्चात शहर का कोई धनाढ्य व्यक्ति गायब हो जाता है।
     पुलिस और प्रशासन घटनाओं से बहुत परेशान है और आमजन दहशत में है। लेकिन संयोग से एक कुबड़ा और एक लाश घटना का साक्षी 'ब्लास्ट' का रिपोर्टर सुनील चक्रवर्ती बन गया।
- यह रहस्यमयी कत्ल क्या थे?
- शहर से धनाढ्य व्यक्ति क्यों गायब हो जाते थे?
- कुबड़े व्यक्ति का रहस्य क्या था?
- क्या सुनील इस रहस्य को जान पाया?

    इन दहशत भरी घटनाओं‌ को जानने के लिए सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का सुनील सीरीज का उपन्यास 'बदसूरत चेहरे' पढें।
   

सुनील का मित्र है जुगल किशोर जिसे सब बंदर ही कहते हैं। लड़कियों और पार्टियों का शौकीन है जुगल किशोर।

Wednesday, 11 November 2020

397. साँप की बेटी- कर्नल रंजीत

कर्नल रंजीत की अजमेर यात्रा
साँप की बेटी- कर्नल रंजीत

धरती के सीने में छिपी एक रहस्यमयी बस्ती और उसमें होने वाले गैरकानूनी कारनामों के बाद भयानक हत्याओं और खौफनाक घटनाओं से भरपूर कर्नल रंजीत का सनसनीखेज जासूसी उपन्यास- 'सांप की बेटी' । इसे पढ़ना आरम्भ करते ही आप घटनाओं के रहस्यमय ताने-बाने में खो जाएंगे और उपन्यास को पूरा किए बिना चैन नहीं लेंगे। (उपन्यास आवरण पृष्ठ से)
    हिंदी लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में कर्नल रंजीत का नाम शिखर पर रहा है। हालांकि यह भी एक रहस्य है कि कर्नल रंजीत नाम‌ के पीछे कौन था? लेकिन कर्नल रंजीत द्वारा सृजित पात्र मेजर बलवंत उपन्यास साहित्य में अत्यंत प्रसिद्ध रहा है। कभी हिंदी पॉकेट में चर्चित यह पात्र मनोज पॉकेट बुक्स के पास आ गया।
 मेजर बलवंत ने लॉ की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी और विधि-विशेषज्ञ बनने की खुशी में उसने अपने सहकर्मियों को शिकार का निमन्त्रण दिया था। मेजर बलवंत अपने सहयोगी सोनिया, विनोद मल्होत्रा और अशोक के साथ राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद के जंगलों में शिकार खेलने आया था। लेकिन मौजमस्ती और शिकार का आनंद तब खत्म हो गया जब उन्हें जंगल में एक लाश मिली। उस लाश के पास एक बुजुर्ग व्यक्ति भी बेहोश अवस्था में मिला था।