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Wednesday, 31 December 2025

700. रानी साहिबा- राम पुजारी

प्रेम के विभिन्न रंगों का गुलदस्ता
रानी साहिबा- राम पुजारी

उपन्यास लेखक के बाद राम पुजारी जी ने कहानी लेखन में हाथ आज आजमाया है और इसमें वह सफल होते भी नजर आ रहे हैं। एक उपन्यास लेखक के लिए अपनी बात को कम शब्दों में कहना कुछ मुश्किल अवश्य होता होगा लेकिन एक सफल लेखक वही है जो कथ्य को उसी अनुरूप आकार दे जैसी कथा की मांग है।
रानी साहिबा कथा संग्रह राम पुजारी जी की दस कहानियों को समेटे हुए है और सभी कहानियों की पृष्ठभूमि में प्यार की झलक स्पष्ट नजर आती है। सभी कहानियां लेखक के चरित्र की तरह है जिनमें बनावटीपन जरा भी नजर नहीं आता ।
     'रानी साहिबा' का प्रकाशन जनवरी 2024 में हुआ था और फरवरी में यह कथा संग्रह मेरे हाथ आया । इसकी पहली कहानी पढी जो अच्छी लगी । दूसरी कहानी पढने से पहले में अन्यत्र व्यस्त हो गया और कहानी पढने का समय न मिला जबकि राम पुजारी का निरंतर आग्रह था कि आप इसकी समीक्षा करें। पर कभी-कभी चाहकर भी समय नहीं निकल पाता और फिर 'रानी साहिबा' मेरी नजरों से यूं गायब हुये की ढूढे भी न मिले । इधर-उधर सब जगह तलाश किया पर....हाये री किस्मत...किसकी ?
फरवरी 2025 भी आया दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में राम पुजारी जी से मुलाकात भी हुयी, रानी साहिबा पर चर्चा भी चली और मेरा आश्वासन भी चला की शीघ्र ही रानी साहिबा को पढा जायेगा।

Saturday, 15 November 2025

681. रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्मा

मार्मिक कथा संग्रह 
 रानियां रोती नहीं- लक्ष्मी शर्मा 

बोधि प्रकाशन जयपुर द्वारा समय-समय पर पाठकों के लिए अल्प मूल्य में किताबों का संग्रह जारी किया जाता है । यह पुस्तक संस्कृति को बढावा देने में सराहनीय प्रयास है और ऐसे प्रयास होने भी चाहिए।
बोधि प्रकाशन द्वारा सन् 2010 में पहला सैट जारी किया गया था । प्रस्तुत पांचवां सैट सन् 2020 में आया था जिसमें कुल दस किताबें थी जिनका मूल्य मात्र सौ रुपये था। यह क्रम आगे भी जारी है।

पांचवें सैट की एक पुस्तक है 'रानियां नहीं रोती' और रचनाकार है लक्ष्मी शर्मा। इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ हैं।
इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'रानियां नहीं रोती' । यह शीर्षक प्रभावित करने में सक्षम है। पाठक के मन में सहज ही यह प्रश्न उठता है रानियां क्यों नहीं रोती ? 
रानियों की कहानियों को वर्तमान के साथ जोड़कर लेखिका महोदया ने स्त्री के दर्द को बहुत अच्छे से अभिव्यक्त किया है।

Friday, 21 October 2022

539. #हैशटैग - सुबोध भारतीय

शहरी जीवनी की कहानियाँ
#हैशटैग- सुबोध भारतीय
लेखक सुबोध भारतीय जी के साथ
सुबोध भारतीय जी को हम एक प्रकाशक के रूप में तो जानते हैं लेकिन एक कहानीकार के रूप में मेरा उनसे प्रथम साक्षात्कार है। 

   प्रस्तुत कहानी संग्रह '# हैशटैग' में कुल आठ कहानियाँ हैं जो शहरी परिवेश के विविध रूप पाठक के समक्ष प्रस्तुत करती हैं। जो रोचक हैं, मार्मिक हैं, हास्यजनक है और संवेदनशील है।

Monday, 25 October 2021

468. रस्टी के कारनामे- रस्कीन बाॅण्ड

नन्हें रस्टी की कुछ रोचक शरारतें
रस्टी के कारनामे- रस्कीन बाॅण्ड

रस्किन बॉण्ड का नाम बाल साहित्य में अद्वितीय स्थान रखता है। रस्किन बॉण्ड मूलतः अंग्रेजी के लेखक हैं। उनका साहित्य जितना अंग्रेजी में प्रसिद्ध है उतना ही लोकप्रिय हिंदी में भी है।
        रस्किन बॉण्ड का जितना साहित्य मैंने पढा है, उसमें मुख्य पात्र रस्टी नामक एक बच्चा होता है, या यूं‌ कह सकते हैं वह पात्र रस्किन बॉण्ड के बचपन का प्रतिनिधित्व करता है। 
      'रस्टी के कारनामे' रस्कीन बॉण्ड की कुछ चर्चित कहानियों का संकलन है। यह दो भागों में विभक्त है।
   प्रथम भाग 'केन काका' शीर्षक से है और द्वितीय भाग 'स्कूल से भागना' शीर्षक से है।
     प्रथम भाग में रस्टी, केन काका और दादी के जीवन के कुछ रोचक प्रसंग यहाँ दिये गये हैं। जिनमें मुख्य केन‌ काका के जीवन से संबंधित घटनाएं हैं। 

Monday, 19 October 2020

391. ख्वाबो की मंजिल- अशोक जोरासिया

 ख्वाबों‌ की कहानियाँ- अशोक जोरासिया, कहानी संग्रह

लेखक का प्रथम गुण है उसकी संवेदनशीलता।  वह समाज में जो देखता और अनुभव करता  है वह उसे शब्दों के द्वारा समाज के समक्ष प्रस्तुत करता है। कहानी संग्रह 'ख्वाबों की मंजिल' के माध्यम से लेखक अशोक जोरासिया जी ने समाज में देखे और समझे अनुभवों को यहाँ प्रस्तुत किया है।
    कहानियाँ चाहे छोटी हैं पर संवेदना के स्तर पर विस्तृत हैं।
इस संग्रह में कुल सत्रह कहानियाँ हैं जो विभिन्न परिवेश को व्यक्त करती हैं। 

Wednesday, 20 May 2020

318. वो प्यार, मोहब्बत की कहानी- निपुण गुप्ता

कुछ कहानियाँ, कुछ कविताएँ
वो प्यार, मोहब्बत की कहानी- निपुण गुप्ता

यह किताब महज एक किताब नहीं है, एक सफर है जिसे हर एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक बार जरूर तय करता है । कभी पहली नजर में, तो कभी सालों की गहरी दोस्ती के बाद, कभी किसी सुबह साथ हँसते हुए तो कभी किसी अकेली रात में उसको याद कर रोते हुए । कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, हर इंसान एक बार मोहब्बत जरुर करता है ।
यह सफर आपको जिन्दगी के अलग-अलग पहलुओं से लेकर गुजरेगा जिसमें कहीं आपको ईष्र्या मिलेगी तो कहीं जुदाई का दर्द, कहीं आपको सफलता की ओर बढ़ते कदम मिलेंगे तो कहीं राह से भटके विचार । इन सब परिस्थितियों में जो एक चीज आपको हर जगह दिखेगी वो है दो लोगों का प्यार ।
उफ्फ! यह मोहब्बत... (किताब से)   

317. #कहानीवाला- संदीप डोबरियाल

युवा उम्मीदों की कहानियाँ
#कहानीवाला- संदीप डोबरियाल


संदीप डोबरियाल नाम मेरे लिए पूर्णतः अपरिचित है। पहली बार किंडल पर इनका एक कहानी संग्रह दिखाई दिया सोचा यही पढ लिया जाये।
       इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ है जो युवावर्ग से संबंधित है। वे चाहे होस्टल, काॅलजे के हो या किसी कम्पनी में कार्यरत। आधुनिक सोच को परवाज देता यह कहानी संग्रह प्यार, मस्ती के साथ साथ कुछ सामाजिक समस्याओं को भी प्रस्तुत करता है। हालांकि कुछ कहानियाँ प्रतीकात्मक होने के कारण घटनाएं सी प्रतीत होती हैं, लेकिन संवेदना के स्तर पर कहीं कम नहीं है।

      ज़िंदगी उलझ गई है, पतंग की डोर की तरह। एक सिरा सुलझाऊँ, तो दूसरा उलझ जाता है। अब तो सुलझाने का मन भी नहीं करता। सच कहूँ तो हिम्मत भी नहीं बची है। (कहानी पतंगें से)
अधिकांश कहानियाँ डोर की तरह उलझे जीवन की कहानियाँ है। 

Monday, 18 May 2020

316. पुरानी डायरी- मनमोहन भाटिया

पुरानी डायरी की पुरानी कहानियाँ
पुरानी डायरी- मनमोहन भाटिया

किंडल पर मनमोहन भाटिया जी का कहानी संग्रह 'पुरानी डायरी' पढा। जैसा की शीर्षक से विदित होता है यह एक डायरी है और इसमें कुछ पुरानी यादें समेटी गयी हैं।
हालांकि यह कहानी संग्रह एक काल्पनिक डायरी के रूप में दर्ज है, लेकिन कहानी कोई भी हो वह कुछ न कुछ तो वास्तविकता के नजदीक होती है। यह एक लेखक पर निर्भर करता है कि वह कहानी को कितना वास्तविकता के नजदीक रखता है, कितना काल्पनिकता के और कितना कहानी को जीवंत रूप प्रदान करता है।
कहानी संग्रह को एक डायरी के रूप में उपस्थित करना वास्तव में एक चुनौती होता है, कारण डायरी व्यष्टि होती है और उसे समष्टि का रूप प्रदान करने में बहुत मुश्किल होती है।

अब कुछ चर्चा 'पुरानी डायरी' कहानी संग्रह पर डालते हैं और देखते हैं लेखक महोदय कहां तक सफल हुये हैं।
इस संग्रह में कुल ग्यारह कहानियाँ हैं। जो विभिन्न परिवेश से संबंधित है।


Saturday, 9 May 2020

312. मेरी प्रिय कहानियाँ- अमृतलाल नागर

ग्यारह कहानियों का संकलन
मेरी प्रिय कहानियाँ- अमृतलाल नागर

          हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार अमृतलाल नागर जी का एक कहानी संग्रह किंडल पर पढा। इन दिनों lockdown के चलते रूम पर ही हैं, तो किताबें एक अच्छे दोस्त की तरह साथ निभा रही हैं।
विभिन्न प्रकार की किताबें पढते-पढते कहानी संग्रह पढने का मन किया तो अमृतलाल नागर जी का कहानी संग्रह 'मेरी प्रिय कहानी' नाम से दिखाई दिया तो यही पढना आरम्भ किया।
         इस संग्रह में कुल ग्यारह कहानियाँ हैं और उसमें से अधिकांश कहानियाँ मुस्लिम परिवेश से संबंधित है।
          दो शब्द अमृतलाल नागर जी के लिए कहानी संग्रह से- अमृतलाल नागर हिन्दी के उन गिने-चुने मूर्धन्य लेखकों में हैं जिन्होंने जो कुछ लिखा है वह साहित्य की निधि बन गया है। सभी प्रचलित वादों में निर्लिप्त उनका कृतित्व और व्यक्तित्व कुछ अपनी ही प्रभा से ज्योतित है। उन्होंने जीवन में गहरे पैठकर कुछ मोती निकाले हैं और उन्हें अपनी रचनाओं में बिखेर दिया है। उपन्यासों की तरह उन्होंने कहानियाँ भी कम ही लिखी हैं परन्तु सभी कहानियाँ उनकी अपनी विशिष्ट जीवन-दृष्टि और सहज मानवीयता से ओतप्रोत होने के कारण साहित्य की मूल्यवान संपत्ति हैं।


         इस संग्रह की जो कहानी मुझे सबसे अच्छी लगी वह है 'एटम बम'। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा जापान पर बम गिराये जाने की घटना को आधार बना कर लिखी गयी यह कहानी मानवीय संवेदना को झकझोर जाती है।

Friday, 8 May 2020

311. रस्किन बाॅण्ड की कहानियाँ- रस्किन बाॅण्ड

रस्किन बॉण्ड की पांच सुपरहिट कहानियाँ

      बच्चों के प्रिय लेखक के नाम से प्रसिद्ध रस्किन बाॅण्ड का एक कहानी संग्रह kindle app पर पढा। इस संग्रहित में कुल पांच कहानियाँ है, जो उनके पूर्व के संग्रहों से ली गयी हैं।

       जावा से पलायन इस संग्रह की प्रथम कहानी है। यह कहानी जावा पर जापान के आक्रमण के समय की है। जब जावा पर जापान ने आक्रमण किया तो लेखक अपने पिता के साथ जावा से पलायन कर गया। यह कहानी पलायन और पलायन के दौरान आयी कठिनाईयों और उनसे संघर्ष करते साहसी लोगों की कहानी है। कैसे जावा से समुद्री विमान में सफर किया, कैसे विमान डूबने के पश्चात्‌ जान बचायी और कैसे एक छोटी नाव में ज्यादा लोग समुद्र में भटकते हुए किनारे तक पहुंचे।
यह कहानी एक प्रेरणा भी देती है कि मुसीबत में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

Monday, 4 May 2020

307. चार कहानियाँ- अमित खान

दो हाॅरर, दो प्रेम कथा

      किंडल पर अमित खान जी के दो कहानी संग्रह पढने को मिले। एक कहानी संग्रह में मात्र तीन कहानियाँ है और 'मखीचा महल का चौकीदार' में मात्र यही एक कहानी है। इन चार कहानियों में से दो हाॅरर कहानियाँ और दो प्रेम कहानियाँ हैं।
     सबसे पहले बात करते हैं कहानी संग्रह 'मेरे हसबैण्ड की प्रेमिका' की। इसमें शीर्षक कथा के अतिरिक्त दो और कहानी भी शामिल हैं, एक है 'रात का निमंत्रण' और दूसरी है 'द लास्ट डे'।

दोनों कहानी संग्रह के आवरण चित्र

अपनी तरफ से मैं यहाँ कुछ नहीं लिख रहा जो लेखक ने लिखा है वही आप पढ लीजिएगा।

Thursday, 23 April 2020

300. कीकर और कमेड़ी- दीक्षा चौधरी

मार्मिक कहानियों का संग्रह
कीकर और कमेड़ी- दीक्षा चौधरी

    किंडल पर कहानी संग्रह सिखाई दिया 'कीकर और कमेड़ी' मुझे शीर्षक बहुत रोचक लगा और विशेष कर जब शब्द और कथानक राजस्थान की पृष्ठभूमि से संबंधित हो तो मेरी पढने की इच्छा बलवती हो जाती है।
      अगर यही शीर्षक 'फाख्ता और बबूल' होता या कुुछ और होता तो शायद मैं इस किताब की तरफ देखता तक न। जब किताब को देखा तो इसे पढने का द्वितीय कारण भी उपस्थित हो गया। वह कारण था लेखिका का मेरे गृह जिले श्री गंगानगर से होना। वह भी श्रीगंगानगर और रायसिंहनगर के मध्य आने वाले एक गांव तताररसर का होना। वह गांव जिसके सड़क दोनों तरफ से घूमती हुयी उसे अपने आगोश में समाने का अर्द्ध जतन करती सी प्रतीत होती है‌

  
चलो अब चर्चा करते है इस कहानी संग्रह की। इस संग्रह में कुल सात छोटी बड़ी कहानियाँ है जो विभिन्न रंगों को परिभाषित करती नजर आती हैं।
       इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'मैं एक लेखक हूँ'। लेखक जो पात्रों का सृजनकर्ता होता है, लेखक संवदेनाओं और मानवीय भावों का वाहक होता है। क्या सच में लेखक ऐसे ही होते हैं। लेखक होना और संवेदनशील होना जब दो अलग-अलग पहलू बन जाये तब 'मैं एक लेखक हूँ' जैसे कहानी लिखी जाती है जो तथाकथित लेखकों को बेनकाब करती है।
ऐसी ही एक और कहानी है 'मैं जैकी हूँ'। यह कहानी भी दोहरे व्यक्तित्व का खेल खेलने वाले लोगों पर लिखी गयी एक सार्थक रचना है।
        "मुझे लगता है औरत कायनात की सबसे नायाब रचना है। मैं उसकी इस रचना के लिये हमेशा से शुक्रगुज़ार रहा हूँ और इसकी बहुत इज्ज़त भी करता हूँ… प्यार भी!"
ज्यादातर लोग शब्दो में ही औरत की इज्जत करते हैं और वास्तविक कुछ और होती है।

      कहानी संग्रह में दो बाते विशेष उभर कर सामने आती हैं। एक तो राजस्थान का वर्णन और दूसरा यौन संबंधों का चित्रण।
      अधिकांश पात्र कुछ यौन संबंधों की अधूरी प्यास या प्यार के चलते एक अजीब सी स्थिति के शिकार हैं‌। ऐसा लगता है उनके जीवन में जैसे रेगिस्तान उतर आया हो।
प्रेम की चाहत और एक समाज के डर से घिरी 'सीगल' कहानी की सलोनी भी यही कहती है -'जीवन न पहाड़ों सा है, न समन्दर सा। जीवन रेगिस्तान जैसा है; दोपहरों में तपते, आँधियों में बर्बाद होते रेगिस्तान जैसा।'
       राजस्थान निवासी होने के कारण लेखिका महोदया ने राजस्थान धरा को शब्दों के माध्यम से जिस तरह से व्यक्त किया है वह प्रशंसनीय है। एक और उदाहरण देखें कैसे राजस्थान की तेज धूप का वर्णन किया है- मई की दोपहर में रेगिस्तान भी किसी गुस्साए किशोर जैसा ही लगता है, मानो अपनी छुअन से ही दुनिया भस्म कर देना चाहता हो।
          वर्णन सिर्फ भौगोलिकता का ही नहीं वरण रिश्तों में आयी दरारों का भी है। मां-बाप अपने निजी कारणों से अलग हो जाते हैं और इसी स्थिति में बच्चे पर जो प्रभाव पड़ता है उसे कोई नहीं समझता। - माँ-बाप के बीच की खाई बच्चों का आसमान बन जाती है। उस आसमान में कभी वो आज़ाद महसूस करते हैं, कभी बेसहारा, तो कभी ख़ुद का एकदम शून्य होना। 

     'कीकर और कमेड़ी' इस संग्रह की वह कहानी है जिस पर इस कहानी संग्रह का नाम रखा गया। इस इंसान को जिसी न किसी का वह चाहे माता- पिता को पुत्र का हो, प्रेमी को प्रेमिका हो या फिर एक कीकर को कमेड़ी का। इस इंतजार और उसकी तड़प को वही महसूस कर सकता है।
इसी इंतजार जो कभी कीकर के नीचे बैठ कर बाबा करते थे,और इसी इंतजार को अब कथा नायक भुगत रहा है।
       क्या गया हुआ वापस लौट कर भी आता है। यह इंतजार बस इंतजार ही रहता है या कभी सफल भी होता है। इंतजार को व्यक्त करती एक और कहानी है 'लौटना एक मिथ है'।
         इस संग्रह की अंतिम कहानी है 'टिश्यू पेपर' जो मुझे बहुत हल्की सी कहानी लगी। प्रेम और फिर प्रेम की असफलता में डूबे व्यक्ति की कहानी है जो सिर्फ प्रेम ही चरित्र से भी डूबता नजर आता है।
      'ये भी जानती हूँ कि प्रेम में देह ज़रूरी नहीं' यह कथन है कहानी 'टिश्यू पेपर' हालांकि कहानियों में कहीं न कहीं प्रेम में देह नजर अवश्य आती है।
      इस संग्रह की सभी कहानियाँ मार्मिक है। मन को छू लेने वाली इन कगानियोतके लिए लेखिका महोदय को धन्यवाद।

        लेखिका महदोय की भाषा का पर अच्छी पकड़ है। कहानियों का जो वातावरण दर्शाया है जो सुक्तियां दी है वे अविस्मरणीय है।
उदाहरण देखें-
- बेशक़ हम सब अपने अपने जीवन के नायक ही होते हैं, बस महसूस होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
- सुख सा विश्वासघाती और कोई नहीं।
- उम्र तो कैसे भी काटी जा सकती है, लेकिन असल में जीवन जीने की यही एकमात्र शर्त है- अपने प्रति, अपनी इच्छाओं के प्रति वफ़ादार होना।
- जिसे टूटकर चाहो और वो न मिल सके तो इंसान पूरी उम्र हर किसी में उस एक को ही ढूँढता रहता है। 

कहानी संग्रह- कीकर और कमेड़ी
लेखिका- दीक्षा चौधरी
प्रकाशन- ebook on kindle

किंडल लिंक-  कीकर और कमेड़ी

Friday, 17 April 2020

294. खौफ- देवेन्द्र प्रसाद

नजदीक आ रही है खौफ के कदमों की आहट
खौफ- देवेन्द्र प्रसाद, हाॅरर कहानियाँ

इन दिनों किंडल पर हाॅरर कहानियाँ पढने का आनंद लिया जा रहा है। सम्पूर्ण देश में lockdown है, घर पर रहना है तो किताबें बहुत अच्छा साथ देती हैं।
        हालांकि मुझे हाॅरर रचनाएँ कम‌ पसंद हैं लेकिन अच्छी और तर्कसंगत हो तो पढी जा सकती है। इस क्षेत्र में नये प्रकाशक जैसलमेर से fly dreama publication का काम सराहनीय है। मैं क्रमशः fly dreamsकी यह तृतीय हाॅरर रचना पढ रहा हूँ। इससे पूर्व मनमोहन भाटिया जी की 'भूतिया हवेली' और नितिन‌ मिश्रा जी की 'रैना @ मिडनाइट' पढ चुका हूँ और इसके पश्चात सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित मिथिलेश गुप्ता जी की हाॅरर उपन्यास '11:59' पढूंगा‌।
       अब बात करे प्रस्तुत संग्रह की तो इसमें अधिकांश कहानियाँ पहाड़ी क्षेत्र की हैं शायद इसका कारण यह भी है की लेखक देवेन्द्र प्रसाद जी स्वयं उतराखण्ड के हैं, इसलिए कहानियों में उतराखण्ड और वहाँ के पहाडों का अच्छा चित्रण मिलता है।

    इंसानों की भीड़ भरी दुनिया में बसती हैं, कुछ ऐसी खौफनाक हकीकतें, जिनका सामना होने पर ज़िंदगी के मायने बदल जाते हैं। अमूमन, जब तक इंसान इन पारलौकिक शक्तियों से रूबरू नहीं होता, तब तक वह इन्हें नहीं मानता। जिन लोगों को इस प्रकार के डरावने अनुभव से गुज़रना पड़ता है, उनकी ज़िंदगी खौफ़ से भर जाती है।


इसी खौफ की कहानियाँ आपको इस किताब में पढने को मिलेगी।


Wednesday, 18 March 2020

277. सुकुल की बीवी- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

हिन्दी साहित्य के इतिहास में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का नाम वास्तव में सूर्य की तरह दैदीप्यमान है। छायावाद के चार स्तंभों में से एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहे हैं‌ निराला जी। साहित्य के अंदर कुछ प्रयोग इनके नाम भी दर्ज हैं। मूलतः कवि निराला जी पद्य में भी हाथ आजमाया है।
विद्यालय के पुस्तकालय में इनका एक कहानी संग्रह 'सुकुल की बीवी' उपलब्ध था, समय का सदुपयोग करते हुए वह संग्रह पढा। इस संग्रह में कुल चार कहानियाँ है चारो अलग-अलग रंग की हैं।

सुकुल की बीवी-
                     यह कहानी समाज सदभाव और निराला के विचारों की वाहक है। हिन्दु- मुस्लिम समाज में एकता स्थापित करने में सहायक कहानी है।
एक ऐसी महिला की कहानी जिसने हिन्दु- मुस्लिम दोनों समाजों के रंग देखे हैं और वह कैसे निराला की सहायता से अपना जीवन व्यवस्थित करती है।

श्रीमति गजानंद शास्त्रिणी-
                          यह कहानी आरम्भ में जहाँ अनमेल विवाह जैसे विषय को रेखांकित करती नजर आती है वहीं अंत में यह कहानी छायावाद का विरोध करती एक नारी की कहानी है जो विरोध से, या अवसर का फायदा उठाकर लोकप्रियता अर्जित जरती है।

कला की रूप रेखा-
                      यह कहानी यह स्पष्ट करती है की कला समाज/ जीवन से अलग नहीं है।

क्या देखा-
                 यह कहानी हीरा नामक महिला की है। उसके जीवन की कथा व्यथा है।

हालांकि चारों कहानियों विविध परिवेश की हैं पर मुझे कोई भी कहानी रुचिकर नहीं लगी। इस छोटे से संग्रह की कोई भी कहानी मेरी दृष्टि से प्रभावशाली नहीं या फिर मेरी समझ से बाहर की कहानियाँ है। क्योंकि अधिकांश कहानियाँ कला को व्यक्त करती हैं, कुछ उलझे में से चलती हैं।

कहानी संग्रह- सुकुल की बीवी
लेखक- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
प्रकाशक- भारती भण्डार, लीडर प्रेस, इलाहाबाद
पृष्ठ- 96

Monday, 30 September 2019

227. बाकी की बात- नंदिनी कुमार

छोटी छोटी पर रोचक कहानियाँ
बाकी की बात- नंदिनी कुमार, कहानी संग्रह

नन्दिनी कुमार का कहानी संग्रह 'बाकी की बात' पढा, यह एक रोचक कहानियों का दिलचस्प संग्रह है। आकार में चाहे ये कहानियाँ छोटी क्यों न हो लेकिन इनका प्रभाव खूब है। कहीं हास्य है तो कहीं रूदन, कहीं प्रेम है तो कहीं आक्रोश, ये सब इन कहानियों में पढने को मिलेगा। 
    इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'शर्मा जी' यह कहानी में हास्य रस होने के साथ-साथ स्त्री स्वतंत्रता की बात भी शामिल है। “शर्मा जी, शादी के एक साल बाद तो हम बाहर निकले हैं, चलो न कहीं घूम आएँ।” मिसेज शर्मा बिस्तर पर लेटती हुईं अपने पति से बोलीं।
यह कहानी यह यात्रा के दौरान घटित जुछ घटनाओं पर आधारित है।
      हास्यरस और मार्मिकता लिए एक और कहानी है 'दावत' शीर्षक से। - "लकड़ियों की ज़रूरत मरे हुए से ज़्यादा ज़िंदा लोगों को होती है।”
       जिम्मेदारी से भागते और औरत ले शरीर की चाह रखने चाले लोगों को बेनकाब करती एक सार्थक रचना है- चंदा।
साराह मेरी भी बेटी है, तुम शायद भूल रही हो।” “इस बात से मैंने कभी मना नहीं किया।
 “लेकिन तुम एक ज़िम्मेदार माँ नहीं हो, न दो साल पहले थी, न अब हो।”
कहने को ये शब्द बहुत सरल हैं लेकिन एक औरत ही समझ सकती है दर्द को। वह औरत जो अपने बच्चों का पालन पोषण भी करती है और पुरुष वर्ग उसे धिक्कार देता है।

Wednesday, 21 August 2019

217. कहानी तेरी मेरी- खुशी शैफी

खुशी की रंग बिरंगी दुनिया
कहानी तेरी मेरी- खुशी सैफी

खुशी सैफी द्वारा लिखित एक छोटा सा कहानी संग्रह पढा। इस संग्रह में कुल पांच कहानियाँ और पांचों कहानियाँ विविध रंग की है। कहानियों में कहीं कोई गम्भीर नहीं ये हल्की सी कहानियाँ सामान्य उस पाठक के लिए है जो मनोरंजन के साथ-साथ कुछ अच्छा भी पढना चाहता है। ये कहानियाँ हास्य के साथ-साथ वर्तमान समाज की कुछ विसंगतियों का भी चित्रण करती है।
www.svnlibrary.blogspot.in
     इस संग्रह की पहली कहानी है- '498A के शिकारी'। यह सलोनी नामक एक ऐसी लड़की की कहानी है जिसके लिए शादी एक व्यापार है। लेकिन कभी-कभी सलोनी जैसे चालाक व्यापारी भी मात खा जाते हैं। ऐसा ही इस कहानी में दर्शाया गया है।
'498A के शिकारी' में जो चित्रित है ऐसी घटनाएं कई बार समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल जाती है।
कहानी की एक पंक्ति मुझे अच्छी लगी।
बेटी का बाप कन्या दान करता है, ऊपर से दहेज़ का एक और बोझ डाल देना कहाँ का इंसाफ है” मिस्टर जोशी ने कहा।

Tuesday, 25 June 2019

209. स्वेटर- अशोक जमनानी

मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह- स्वेटर
स्वेटर- अशोक जमनानी, कहानी संग्रह

साहित्यकार अशोक जमनानी जी का कहानी संग्रह 'स्वेटर' पढने को मिला यह एक रोचक और मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह है।

      इस संग्रह में वे कहानियाँ हैं, जिन्हें आकाशवाणी भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में प्रसारित किया है। मेरे विचार से इसी कारण इस संग्रह की कहानियों में एक सरलता है।

        अशोक जमनामी का कहानी संग्रह स्वेटर कुछ रोचक और मर्म स्पर्शी कहानियों का संग्रह है। कहानियों की जो खुशबू है वह हल्की सी है जो आपके हृदय को एक शांति प्रदान करती है। कहानियों में कहीं भी जबरदस्त पैदा किया गया यथार्थवाद नहीं है, ओढी गयी गंभीरता नहीं है। जो कुछ भी इन कहानियों में व्यक्त है वह बहुत सहज और सरल है। वहीं लिखा गया है जो सामान्य समाज का एक अंग है।
      इस संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ है।
       इस संग्रह की प्रथम कहानी है 'स्वेटर' जो यह दर्शाने में कामयाब रही है की हम किसी घटना की वास्तविक जाने बिना अपने-अपने दृष्टिकोण से उसकी व्याख्या आरम्भ कर देते हैं।
जैसे अमोल ने स्वेटर पहना तो सभी ने अपने -अपने अनुमान लगाने आरम्भ कर दिये। यह कहानी हमारे दृष्टिकोण को एक नया आयाम देती है, हमारी पूर्वधारणाओं को त्यागने का संदेश भी देती है।

Monday, 27 May 2019

192. रोबोटोपिया- संदीप अग्रवाल

मनुष्य और रोबोट की अदभुत कहानियाँ
रोबोटोपिया- संदीप अग्रवाल

नये प्रकाशक fly Dreams के अंतर्गत लेखक संदीप अग्रवाल जी का कहानी संग्रह 'रोबोटोपिया' एक टैग लाइन 'निकट भविष्य की कहानियाँ' के शीर्षक के साथ प्रकाशित हुआ। कहानी संग्रह पढते वक्त आप स्वयं महसूस करेंगे की ये सब कहानियां भविष्य में सत्य साबित हो सकती हैं। 

     "सवाल यह नहीं है कि रोजिना के साथ बलात्कार किया जा सकता है या नहीं? सवाल यह है कि विक्रम ने जो किया वह बलात्कार था या नहीं? उसने रोजिना के साथ जो किया, वह उसकी मर्जी के खिलाफ था।.........और इसे बह सजा मिलनी चाहिए जो कानून ने एक रेपिस्ट के लिए मुकर्रर की है।" (किताब अंश)
ध्यान दें, रोजिना एक रोबोट है।
क्या एक रोबोट से बलात्कार संभव है?
क्या उसके लिए सजा दी जा सकती है?
मनुष्य और रोबोट के ऐसे संबधों को उजागर करती है 'रोबोटोपिया'। 


विकसित होती प्रौद्योगिकी एक दिन इस स्तर पर आ जायेगी की‌ मनुष्य और रोबोट में अंतर खत्म हो जायेगा। मनुष्य और रोबोट का यह मिलन भविष्य में सही होगा या गलत यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन‌ दोनों के मिलन को लेकर जो कहानियाँ रची गयी है वह आप वर्तमान में भी पढ सकते हैं।
यहाँ कुछ कहानियों की चर्चा करेंगे बाकी कहानियाँ आप 'रोबोटोपिया' कहानी संग्रह में‌ पढे यकीनन ये कहानियाँ आपको पसंद आयेगी।
इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ है। हम कुछ कहानियों पर यथासंभव चर्चा करते हैं।
 

Sunday, 26 May 2019

190. छोटू- अरुण गौड़

कुछ संवेदनशील कहानियाँ
छोटू- अरुण गौड़

फ्लाईड्रिम्स पब्लिकेशन पटना द्वारा प्रकाशित 'छोटू' अरुण गौड़ जी का एक 'छोटा' सा कहानी संग्रह है। कहानी संग्रह चाहे छोटा है लेकिन कहानियों की संवेदना का फलक विस्तृत है।

इस संग्रह में कुल चार कहानियाँ है और चारों कहानियाँ ही बच्चों से संबंधित है। कहानियों के पात्र चाहे बच्चे हैं लेकिन कहानियों में व्याप्त भाव सभी सहृदय को प्रभावित करने में सक्षम है।

1. गुलामी का पट्टा
              इस संग्रह की प्रथम कहानी, एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण मजदूरी करने को विवश हो जाता है।
        कथा का मुख्य पात्र किशन बिहार के एक गाँव में एक चौधरी के खेत पर काम करता है। चौधरी मजदूरों का शोषण करता है और उन्हें बंधुआ मजदूर की तरह रखता है।
ज्वर पीडित किशन के मन में इस बंधन से मुक्त होने की इच्छा है।
    किशन अपनी मुक्ति के लिए क्या प्रयास करता है, वह जैसे आजाद होता है। यह सब रोचक है। एक छोटे से बच्चा का शोषण और उसकी कोमल भावनाओं को खत्म करने वाला चौधरी। फिर भी किशन के मन में स्वतंत्रता की उमंग है। 

Tuesday, 22 January 2019

167. सत्यानाशी- प्रतिमा जायसवाल

कुछ प्रेम कथा, कुछ समाज कथा।

सत्यानाशी- प्रतिमा जायसवाल, कहानी संग्रह

          दिल्ली विश्व मेला 2019 के दौरान कुछ नये लेखकों की पुस्तकें भी खरीदी थी, जिनमें से एक प्रतिमा जायसवाल जी का कहानी संग्रह है 'सत्यानाशी'।
वेदप्रकाश कंबोज जी का जासूसी उपन्यास 'दांव खेल, पासे पलट गये', राम पुजारी जी का 'अधूरा इंसाफ...एक और दामिनी' तथा द्वय लेखक सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' व मनीष खण्डेलवाल का उपन्यास 'रावायण- लीला आॅफ रावण' आदि उसी समय की खरीदी गयी रचनाएँ हैं।
               प्रतिमा जायसवाल, सिद्धार्थ अरोड़ा 'सहर' और पुजारी जी की ये प्रथम रचनाएं हैं। वेदप्रकाश कंबोज जी तो सन् 1957 ई. से निरंतर लेखन कर रहे हैं।

             'सत्यानाशी' लघु- गुरु कुल बारह कहानियों का संग्रह है, सभी कहानियाँ कथ्य के स्तर पर अलग हैं। जहां इनका कथ्य और परिवेश अलग है वहीं इनमें एक बात सामान्य है वह है इनकी मार्मिकता और संवेदना। कहानियाँ पढते वक्त ऐसा लगता है जैसे ये कहानियाँ अपने आस पास के वातावरण की हो।
संग्रह की कहानियां
1. सत्यानाशी
2. कब्रिस्तान- श्मशान
3. राजनीति
4. आशिका का आशियाना
5. दिमागी अपाहिज
6. बाजार
7. कृष्णा- अर्जुन
8. चौधराइन का इस्तीफा
9. फिर मिलेंगे
10. संस्कारी सुहागरात
11. स्टेज
12. शेरा दे दिलरे दी जन्नत


"वो मुझसे जब भी मिलती थी, मेरे साथ कुछ अच्छा ही होता था, फिर भी ना जानें सब उन्हें 'सत्यानाशी' क्यों कहते थे।" (पृष्ठ-01)
            'सत्यानाशी'  इस संग्रह की प्रथम कहानी है और इसी पर इस संग्रह का नाम भी है। कहानी भारतीय समाज में‌ प्रचलित अंधविश्वास गहरी चोट करती एक सार्थक रचना है। हम लड़कियों की प्रतिभा की परख न कर लड़कों को महत्व देते हैं। लेखिका ने इस कहानी में जो छाप छोड़ी है वह प्रशंसनीय है।
कहानी बाजार भी रिश्तों पर आधारित एक अच्छी कहानी है।
      कहानी राजनीति चाहे शीर्षक से राजनैतिक लगती हो लेकिन यह एक पारिवारिक कथा है। परिस्थितियाँ बदलते ही कैसे लोग बदलते हैं यह इसी कहानी में स्पष्ट होता है। हालांकि कहानी का अंत थोड़ा फिल्मी लगता है। लेकिन कहानी एक पंक्ति भारतीय राजनीति की निकृष्टता जाहिर करती है। "इस लड़के में दम है, कैलाश जी.... ये बेरोजगार लड़के़ दंगों और आंदोलनों में बड़े काम आते हैं।" (पृष्ठ-31)


     आशिक का आशियाना
 एक एक मार्मिक रचना है। यह कहानी है माया और रोमित की। दोनों की परिस्थितियाँ उन्हें एक ऐसे मोड़ पर ले आती है जहाँ उनका मिलना और मिलकर विलग होना तय है। "हम दोनों बचपन से आशियाने के लिए तरसे हैं।" (पृष्ठ-66)
लेकिन यह आशियाना इतनी आसानी से मिलना भी संभव नहीं।

      'दिमागी अपाहिज' कहानी हमारे समाज में व्याप्त जातिवाद को परिभाषित करती एक अच्छी कहानी है। "हिम्मत देखों उस कमीने की...छोटी जाति का होकर बैंड-बाजे का शौक करेगा।" (पृष्ठ-67)। यह परिस्थिति बहुत बार समाचार पत्रों में पढने को मिलती है। समाज को इंगित करती एक और कहानी है 'क्रबिस्तान- श्मशान'।

        कृष्णा-अर्जुन इस संग्रह की एक प्रेम कथा है। इस संग्रह में और भी कई प्रेम कहानियां है लेकिन यह कहानी अन्य सभी कहानियों से बिलकुल अलग। यह कहानी 'थर्ड जेंडर' पर आधारित है और बहुत कुछ कहने में सक्षम है।
"वैसे अर्जुन तुझे नहीं लगता कि तुम दोनों नदी के दो किनारे हो, जो एक-दूसरे को देख तो सकते हैं लेकिन‌ कभी मिल नहीं सकते....।" (पृष्ठ-74)
       यह कृष्णा और अर्जुन की प्रेम कथा। कृष्णा एक थर्ड़-जेंडर' है जिसे अर्जुन प्यार करता है लेकिन पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियाँ उसके प्यार को मान्यता नहीं देती। "कृष्णा-अर्जुन अगर साथ मिल गए, तो महाभारत होगा और हमें योद्धा बनकर अपनों के खिलाफ युद्ध लड़ना पड़ेगा।" (पृष्ठ-75)
क्या कृष्णा-अर्जुन समाज से जीत पाये?

        'चौधराइन का इस्तीफा' एक छोटी सी रचना है। एक अपराध बोध से ग्रस्त व्यक्ति के जीवन को परिभाषित करती अच्छी कहानी है। ऐसी ही दो और छोटी-छोटी कहानियाँ है 'फिर मिलेंगे' और 'संस्कारी सुहागरात'। दोनों अलग- अलग स्वभाव की कहानियाँ है।
इस संग्रह की अधिकाश कहानियाँ प्रेम परक हैं। प्यार है और प्यार के साथ धोखा है‌। प्यार के दोनों रंग इस कहानी संग्रह में उपस्थित हैं।

             कहानी 'स्टेज' भी समय ले साथ बदलते संबंधों की कहानी। जीवन के स्टेज पर विभिन्न पर प्रकार के कलाकार मिलते हैं। लेकिन उनकी वास्तविकता क्या होती है यह हमें नहीं पता। जैसे स्टेज पर एक कलाकार विभिन्न भूमिका अदा करता है, वैसे ही वास्तविकता जीवन में भी वह कई भूमिकाएं अदा करने लग जाता है।
             संग्रह की अंतिम कहानी 'शेरा दे दिलरे दी जन्नत' एक अलग तरह की रोचक कहानी है। कहानी सिर्फ मनोरंजन है, जैसे खुशवंत सिंह की कहानियाँ होती। मनोरंजन, हल्का सा सस्पेंश और ढेर आनंद इसी कहानी में मिलेगा वह भी हैप्पी एंडिग के साथ। अब 'हैप्पी एंडिंग' किस का कहानी का या कहानी संग्रह का। यह तो भाई आप इस कहानी संग्रह को पढकर ही जान पायेंगे।
         कहानी संग्रह को पढ ही लीजिएगा 'Best Seller' जैसे तथाकथित शोर से दूर एक अच्छा व रोचक कहानी संग्रह है।

निष्कर्ष-
          इस संग्रह की सभी कहानियाँ मन को छू लेने वाली संवेदनशील कहानियाँ है। अधिकांश कहानियाँ आपकी आँखों को नम करने में सक्षम है।
लेखिका का यह प्रथम कहानी संग्रह है यह कहानी संग्रह पढकर ही पता चलता है, कुछ कहानियों में अनावश्यक विस्तार और कुछ में सुखद समापन लाने के लिए कहानियाँ एक स्तर से उपर नहीं उठ सकी। उम्मीद और विश्वास है लेखिका महोदया का आगामी कथा संग्रह एक परिपक्व कथा संग्रह होगा।
एक अच्छे प्रयास के लिए प्रतिमा जी को हार्दिक धन्यवाद।
पाठक वर्ग को यह कहानी संग्रह अच्छा लगेगा यह मेरा विश्वास है। पठनीय कहानियाँ है, आप भी पढें।
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पुस्तक- सत्यानाशी
लेखिका- प्रतिमा जायसवाल
प्रकाशक- nation press
मूल्य- 149₹
पृष्ठ- 118
संपर्क- nationpress.com

प्रतिमा जायसवाल जी के साथ।