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Friday, 21 August 2020

368. टोपाज- कंवल शर्मा

टोपाज का एक रोमांचक सफर
टोपाज- कंवल शर्मा

रवि पॉकेट बुक्स मेरठ से मैंने तीन उपन्यास मंगवाये थे। कंवल शर्मा जी का 'टोपाज', सुरेन्द्र चौधरी जी का 'प्रतिशोध' और जेम्स हेडली चेईज का अनुवादित 'शालीमार'(अनुवाद - हसन अलमास)।
      सर्वप्रथम हम 'टोपाज' पर चर्चा करते हैं वैसे भी मुझे कंवल शर्मा जी के उपन्यास का इंतजार रहता है।
टोपाज शीर्षक देखते ही मन में ख्याल आता है टोपाज नाम क्यों? 
          मेरे प्रस्तुत उपन्यास का नाम टोपाज है और इसके प्रकाश में आते ही मुझसे सबसे पहले यही सवाल हुआ कि ऐसा नाम रखने की वजह क्या है?
मेरा ईमानदाराना जवाब है कि कोई वजह नहीं।
(लेखकीय से, पृष्ठ-18)
       हालांकि ऐसी बात नहीं है, क्योंकि टोपाज तो आखिर टोपाज ही है। वैसे एक बात कहूँ‌ मुझे तो आज से पहले यही पता था की टोपाज नाम से एक सेविंग ब्लेड आता है।
तो अब चले टोपाज की यात्रा पर...
       अगर इंसान का बच्चा विपरीत हालात में जा फंसे तो उसे उनके आगे मजबूर होकर सरेण्डर नहीं कर देना चाहिये बल्कि कमर सीधी कर उन हालात का सामना करना चाहिये। (पृष्ठ-26)
ऐसा ही था वह- अट्ठाईस साल के लंबे गठीले और मजबूत बदन वाला नौजवान पीताम्बर सचदेवानी.......हरियाणा की करनाल जेल से हाल में रिहा हुआ था।
    और एक था पीताम्बर का दोस्त- जग्गी- जिसका असली नाम जगदेव खाकड़ा था और जिसे उसके असली नाम से शायद ही कोई जानता था.....वो कोई पच्चीस साल का नौजवान था जो अपने पैदा होनर से लेकर आज तक केवल एक पेशे, जयरामपेशे, में था। (पृष्ठ-29)
       और एक से दो और दो से चार का कारवां बनता गया।- "तुम्हारे पास एक टीम है जिसका हर मेम्बर अपनी किस्म के फन में‌ माहिर है।"बेनिवाल बोला-" तुम्हारे पास प्लान आउट करने की काबिलियत है, इनके पास उस प्लान पर अमल करते हुए उसे कामयाब कर दिखाने का जज्बा है।"(पृष्ठ-192)
और कामयाब करना था एक प्लान को और प्लान क्या था-  

Wednesday, 21 August 2019

220. एन्ट्रैप्ड- कंवल शर्मा

कैजाद पैलोंजी का दूसरा कारनामा।
एन्ट्रैप्ड-कंवल शर्मा
      रवि पॉकेट बुक्स से कंवल शर्मा का 25 जुलाई 2019 को प्रकाशित उपन्यास Entrappedped एक थ्रिलर उपन्यास है। यह कंवल जी द्वारा लिखित पांचवां उपन्यास है।
         कंवल शर्मा का द्वितीय उपन्यास था 'सेकण्ड चांस' जिसका मुख्य पात्र है, कैजाद पैलोंजी। प्रस्तुत उपन्यास कैजांद पैलोंजी का लेकर लिखा गया एक बेहतरीन उपन्यास है।
        सेकण्ड चांस में कैजाद पैलोंजी एक पत्रकार था तो वहीं इस उपन्यास में वह एक N.G.O. संचालक है। जिसका काम लोगों को कानूनी सलाह देना है। लेकिन किस्मत यहाँ भी कैजाद की अच्छी नहीं है। एक दिन बैठे-बैठाये, बिन बुलाये एक मुसीबत गले आ लगी। और मुसीबत भी ऐसी की खुद कैजाद की समझ में भी नहीं आया की आखिर यह हो क्या गया।

        कहानी की बात करें तो यह गोवा से लेकर पाॅडिचेरी तक फैली हुयी एक अदभुत कथा है। कहानी का आरम्भ कैजाद पैलोंजी से होता है जिसके गले एक लाश पड़ती है। इंस्पेक्टर कामत कैजाद से सवाल करता है।
"क्या ये लड़की तुम्हारी क्लाइंट थी?"
"नहीं।"-मैंने कहा।
" क्या तुम इसे पहले से जानते थे?"
"नहीं।"
"तो जरूर ये यहाँ केवल मरने आई थी।"
"मुझे नहीं मालूम।"-मैंने मासूम स्वर में जवाब दिया।
(पृष्ठ-47)
       गोवा की एक नामी हस्ती फोरेंस जस्टिन। जो की एक मशहूर बिल्डर फाइनेंसर था और उसका पुत्र, एक दम नकारा पुत्र है विल्बर जस्टिन। अयाश किस्म का, बाप के कहने से बाहर का और धोखेबाज। बाप को छोडकर बेटा पाॅडिचेरी चला जाता है।
बेटा पहले बाप को धोखा देता था, फिर बाप की सेक्रेटरी को धोखा देता था और अब अपनी बीवी को भी धोखा देने में लगा था। (पृष्ठ-93)
       लड़की के रहस्यपूर्ण कत्ल की वारदात कैजाद पैलोंजी को पाॅडिचेरी ले जाती। और वहीं से कहानी में नये-नये मोड़ आने आरम्भ होते हैं। उपर से साधारण सी नजर आने वाली वारदात अपने अंदर बहुत रहस्य समेटे बैठी है।
इन रहस्यों से पर्दा हटाते वक्त कैजाद पलौंजी की जान भी मुसीबत में फंस जाती है।
      कैजाद के साथ घटती घटनाएं और बढते रहस्य कथानक को रोचक बनाने में सहयोग करते हैं। इंस्पेक्टर कामत हो या रेडिय्यार दोनों का किरदार अच्छा और पुलिस विभाग के अनुरूप है। वहीं जुबैर का किरदार नाममात्र ही आता है अगर उसको कुछ और बढाया जाता तो सार्थक लगता। बाकी पात्र उपन्यास में संतुलित हैं।

संवाद और भाषा शैली।
       कंवल शर्मा जी के उपन्यासों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, वह है उनके नीतिगथ कथन।‌ संवाद या कथन किसी भी कहानी को आगे बढाने के साथ-साथ जहाँ पात्र की विशेषताओं के वर्णन में सक्षम है वहीं कहानी का वातावरण भी तैयार होता है।
प्रस्तुत उपन्यास के कुछ रोचक कथन देखें।
- हम नंगे सिर घूमने वाली लड़की को शर्मिंदगी का वायस समझते हैं लेकिन उस लड़की को देखने बल्कि घूरने वाले लड़के को कभी कुछ नहीं कहते। (पृष्ठ-78)
- जिंदगी खूबसूरत रिश्तों से है और रिश्ते तभी कायम रहते हैं जब हम माफ करना और गलतियों को दरगुजर करना सीख जाते हैं। (पृष्ठ-79)
- जिसी को धोखा देना आसान है लेकिन फिर धोखे में बड़ी जान होती है क्यूंकी ये कभी नहीं मरता। ये घूमफिर कर वापिस खुद पर, धोखा देने वाले पर आ जाता है। (पृष्ठ-93)
- औरत अगर खूब भड़की हुई हो तो मर्दों के लिए अक्सर बर्दाश्त के बाहर होती है। (पृष्ठ-135)
- एक मरा हुआ इंसान अपने लिए इंसाफ मांगने खुद नहीं आ सकता....इसलिए जिंदा लोगों का फर्ज है कि मरने वाले को इंसाफ मिले।" (पृष्ठ-192)
- कुत्ता चाहे कैसी भी नस्ल का हो, कैसे भि ट्रेन्ड क्यूं न हो जाए, उसकी गर्दन से जंजीर नहीं निकालनी चाहिए।
(पृष्ठ-244)

      अगर उपन्यास के भाषा शैली की बात करें तो इसमें उर्दू के शब्दों की भरमार है। पता नहीं क्यों ऐसे शब्दों को महत्व दिया गया है जो प्रचलन में भी नहीं है। वहीं गोवा और पाॅडिचेरी के लोग ऐसी भारी भर‌कम उर्दू बोलते हैं। लगता तो नहीं।
एन्ट्रैप्ड एक ऐसा जाल है जिसमें नायक कैजाद पैलोंजी उलझ कर रह जाता है। जिस घटना से उसका कोई वास्ता नहीं, कोई संबंध नहीं उसमें वह ऐसा उलझता है की उसे कोई रास्ता नहीं मिलता। मौत से जूझते कैजाद पैलोंजी का यह कारनामा आदि से अंत तक रोचकता से भरपूर है। उपन्यास पठनीय और रोचक है। भरपूर मनोरंजन करने में पूर्णतः सक्षम।

और अंत में उपन्यास से काव्य पंक्तियाँ
          तू छोड़ दे कोशिशें इंसानों को पहचानने की।
          यहाँ जरूरत के हिसाब से सब नकाब बदलते हैं।


उपन्यास- एन्ट्रैप्ड  लेखक- कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 254
मूल्य- 100₹
प्रकाशन तिथि- 25.07.2019

पोलो ग्राउंड- माउंट आबू

Friday, 15 March 2019

179. जिप्सी- कंवल शर्मा

एक घुमक्कड़ की खतरनाक यात्रा
जिप्सी-कंवल शर्मा, उपन्यास,
         
'जिप्सी' कंवल शर्मा का पांचवां मौलिक उपन्यास है। कंवल शर्मा ने अपने प्रथम उपन्यास 'वन शाॅट' से 'जिप्सी' तक का जो सफर किया है वह वास्तव में प्रशंसनीय है।
           कंवल जी के उपन्यासों में जो रोमांच होता है वह आदि से अंत तक यथावत बना रहता है।
‌‌‌‌         प्रस्तुत उपन्यास 'जिप्सी' एक थ्रिलर रचना है। थ्रिलर भी ऐसा है जो पाठक को अपने साथ बांधे रखता है।
‌ अगर उपन्यास के कथानक की बात करें तो यह एक रिटायर्ड नौसैनिक की कथा। वह रिटायर नौ सैनिक है, इसलिए यह को 'सैन्य-कथा' नहीं है।

        गगनदीप चौधरी नौसेना से रिटायर एक नौसैनिक था, जिसकी ट्रेजडी ये थी कि उसकी तकदीर का उसके साथ एक्स्ट्रा बैर था।

         गगनदीप के साथ तकदीर का बैर तो था ही साथ में उसका जीवन एक जिप्सी का भी था।‌ जिप्सी अर्थात जो एक जगह स्थायी न रहे, घूमता रहे। मैं फितरन एक खानाबदोश बूँद, एक जिप्सी हूँ, जिसका एक जगह टिककर बैठ जाना मुमकिन नहीं। (पृष्ठ-200)

        नौसेना से, ट्रक ड्राइवर और ट्रक ड्राइवर से एक नये सफर की ओर चला पड़ा गगनदीप चौधरी। बस यही नया सफर उसके जीवन में एक खतरनाक मोड़ ले आया। गगनदीप चौधरी की मुलाकात एक बैंड म्यूजिशियन हैरी से होती है। इस नये सफर पर उन्हें एक अनजान लड़की कार में लिफ्ट देती है।
"क्या पणजी जा रही हैं?"
............
"हाँ' लडकी स्वर समान्य था।
" हमें लिफ्ट की तलाश है।" हैरी ने बात आगे बढाई और बोला।

हैरी और गगन को लिप्ट तो मिली लेकिन साथ में एक ऐसी मुसीबत भी मिली जिसका उन्हें कोई अनुमान भी न था।


- अंधेरी रात में अचानक मिली वह लड़की कौन थी?
- क्या उसने झूठ बोला था, वह तीन घण्टे से ड्राईव कर रही है?
- क्या वह सिर्फ गगन से कार चलवाना चाहती थी?
- वह ड्राईव से फ्री होकर कार की पिछली सीट पर सोना चाहती थी या कोई और कारण था?
- क्या वह कार चोरी की थी?
ये सब प्रश्न गगन चौधरी और हैरी को परेशान करते हैं

         कुछ लोगों की जिंदगी ऐसी होती है की वे एक जगह स्थायी रूप से नहीं रह सकते, बस फितरत। ऐसी ही फितरत का मारा है गगनदीप चौधरी। एक नौकरी से मन भरा तो दूसरी, दूसरी से तीसरी। एक जगह से मन ऊब गया तो दूसरी जगह और दूसरी से तीसरी जगह।‌ ऐसे ही गगनदीप चौधरी को एक बैंड म्यूजिशियन हैरी‌ मिल गया और वह उसके साथ पणजी चल दिया। जहाँ मुसीबतें उसका पलक बिछा कर इंतजार कर रही थी। स्वयं गगनदीप चौधरी भी कम न था। ऐसा आदमी जो सब्र नहीं रखता, मुसीबत के आने का इंतजार नहीं करता बल्कि खुद उसे बुलाता है। (पृष्ठ-108)
          'जिप्सी' उपन्यास रोचक और दिलचस्प घटनाओं से भरपूर एक पठनीय उपन्यास है। यह एक थ्रिलर कारनामा है जिसमें घटनाएं महत्व रखती हैं। इन्हीं घटनाओं से मिलकर जो कथानक बना है वह अविस्मरणीय है। घटनाएं भी इतने जबरदस्त तरीके से घटित होती हैं की पाठक हैरान रह जाता है। उपन्यास में कसावट और तेज प्रवाह हथ जो सतत पठनीय है।

उपन्यास में एक दो जगह गगनदीप चौधरी स्वयं कहते हैं- मैं फितरन एक खानाबदोश हूँ। (पृष्ठ-200) और एक जगह इस जिंदगी से परेशान भी दिखते हैं- "मैं अपनी इस दर-दर करती बंजारों सी जिंदगी से आजाद हो सकता हूँ।" (पृष्ठ-110)
देखा जाये तो दोनों कथनों में विरोधाभास है।

       उपन्यास में पृष्ठ संख्या 08-28 तक का एक लंबा लेखकिय है और मजे की बात तो ये है की उस लेखकिय का संबंध उपन्यास से तो बिलकुल भी नहीं है। लेखकिय पर तो 'पूर्व का सफर और पश्चिम का रास्ता' वाली उक्ति चरितार्थ होती है। अगर यह लेखकिय उपन्यास जगत से संबंधित होता तो बहुत अच्छा लगता।


मैं‌ फितरन एक खानाबदोश हूँ, एक जिप्सी हूँ, जिसका एक जगह टिककर बैठ जाना मुमकिन नहीं।
(पृष्ठ-200)
अब आगामी कारनामा क्या होगा यह पढना दिलचस्प होगा।

निष्कर्ष-
कंवल शर्मा का उपन्यास 'जिप्सी' एक जबरदस्त थ्रिलर उपन्यास है। उपन्यास नायक गगनदीप चौधरी के घुमक्कड़ जीवन की एक यादगार गाथा।
उपन्यास की कहानी रोचक और दिलचस्प है।

उपन्यास- जिप्सी
लेखक- कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स
पृष्ठ- 254
मूल्य- 100₹


Tuesday, 29 May 2018

115. देजा वू- कंवल शर्मा

जब तीन अजनबी एक तूफानी रात में‌ मिले...
देजा वू- कंवल शर्मा, थ्रिलर उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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कंवल शर्मा वर्तमान उपन्यास जगत के वह सितारे हैंं जिन्होंने अल्प समय में अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर ली। अपने पहले उपन्यास 'वन शाॅट' से चर्चा में आये कंवल शर्मा लगातार चर्चा बने रहे।
उनका प्रस्तुत उपन्यास 'देवा वू' भी अपनी एक अलग प्रकार की कहानी के लिए काफी चर्चित रहा। इसके चर्चित होने के भी दो कारण है एक तो उपन्यास का कथानक कुछ अलग होना दूसरा कहानी का अधिकांश पाठकों की समझ से बाहर होना। हालांकि लेखक का यह एक नया प्रयोग था लेकिन लेखक इसे फिल्म के स्तर पर ले गये। जहाँ फिल्म का प्रत्येक दृश्य दर्शक के समक्ष होता है वहीं उपन्यास में लेखक की जिम्मेदारी होती है की वह कुछ बातें पाठक के सामने स्पष्ट करें।

Sunday, 24 September 2017

65. टेक थ्री- कंवल शर्मा

कंवल शर्मा जेम्स हेडली चेइस के उपन्यासों का हिंदी अनुवाद करते-करते स्वयं भी लेखन क्षेत्र में आये। इनकी कहानी कहने की व भाषा- संवाद पर जबरदस्त व अनूठी पकङ के कारण पाठक इनसे प्रभावित होते है। प्रभावित भी इस स्तर पर की इनके उपन्यासों का इंतजार करते रहते हैं।
वन शाॅट, सैकण्ड चांस के बाद इनके तृतीय उपन्यास को भी पाठकों ने हाथो-हाथ लिया। इनके चौथे उपन्यास देवा जू का भी इंतजार है।
कंवल शर्मा के क्रमशः तीन उपन्यास वन शाॅट, सैकण्ड चांस, टेक थ्री अंकों की शृंखला से आये यह भी स्वयं में एक रोचक था, हालांकि लेखक के अनुसार उन्होंने उपन्यासों का नामकरण जानबूझकर नहीं किया यह सब कहानी की मांग के अनुसार स्वयं होता चला गया।

मात्र तीन उपन्यासों के दम पर कंवल शर्मा ने उपन्यास जगत में अपना जो स्थान स्थापित किया है, वह प्रशंसनीय है।

कहानी- उपन्यास का नायक एक बार मानसिक शांति की तलाश में सिक्किम जैसे बेहद खूबसूरत राज्य के शहर गंगटोक में घूमने जाता है।
होटल के जिस रूम में ठहरा वहाँ पर एक हादसा हुआ, हादसा यानि नायक के रूम में हत्या। और जिसका आरोप कथानायक पर आरोपित हुआ।
होटल मैनेजर, होटल के कर्मचारी, शहर का मेयर और यहाँ तक की पुलिस विभाग भी इस हत्या में कथानायक को आरोपी मानता है।
लेकिन जब कथा नायक अपनी बेगुनाही साबित करने उतरा तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब होते गये।
एक छोटे से शहर से जुङे अंतरराष्ट्रीय अपराधी तक सामने आ गये जिसे अपने तरीके से कथा नायक निपटता चला गया।
- कौन है कथा नायक?
- क्यों एक पर्यटक को वहाँ के लोग अपराधी बनाने पर तुले हुए थे?
- क्यों पुलिस विभाग सही जांच नहीं कर रहा था?.
- कौन था मृतक?
- कौन था असली कातिल?
- क्यों हुयी हत्या?
ऐसे एक नहीं अनेक प्रश्न है जो पाठक के मस्तिष्क में उठते हैं और उनके उत्तर तो सिर्फ कंवल शर्मा के बेहद तॆज रफ्तार उपन्यास 'टेक थ्री' में ही उपस्थित हैं।

  उपन्यास का कथानक उस तेज बरसात की तरह है जो सब कुछ अपने साथ बहाकर ले जाती है। पाठक एक बार उपन्यास आरम्भ करता है तो तेज बहाव में बहता चला जाता है। क्योंकि कथानक ही इस प्रकार का है जिसमें पाठक तो क्या स्वयं कथा नायक तक उलझ कर रह जाता है।

कहानी कई प्रकार से रोचक है।
सबसे पहली तो यही पहेली है की उपन्यास का नायक जब एक शहर में घूमने के उद्देश्य से आया तो वहाँ उसके अचानक दुश्मन कैसे पैदा हो गये।
स्वयं नायक भी यही सोचता है-
"कौन है जिसने यहाँ शहर में आते ही मुझे कत्ल के केस में फंसा दिया?"
"मैं नहीं जानता।"
"तो कौन जानता है?"
'पता कर।"
"पता ही तो कर रहा हूँ....तेरे से।" (पृष्ठ -161)
किन लोगों ने एक आदमी की हत्या कर उसे उपन्यास नायक के कमरे में शिफ्ट कर दिया।
- उपन्यास में एक छोटी सी डकैती भी है।
बहुत सख्त  सिक्योरिटी होने के बाद भी एक कैसिनो की करोङों की रकम तबाह कर दी जाती है।
- उपन्यास में सिक्किम की सबसे मजबूत जेल की सुरक्षा व्यवस्था को भी भेद दिया जाता है।
उपन्यास में ऐसे कई रोचक प्रकरण है जो पाठक का जबरदस्त मनोरंजन करते हैं। कोई भी प्रकरण या घटना में अव्यवस्थित नहीं है। सभी व्यवस्थित व क्रमबद्ध हैं।

कंवल शर्मा अपनी विशेष भाषाशैली के लिए भी जाने जाते हैं जो की इस उपन्यास में भी उपस्थित है।
"बीस की उम्र में आदमी अपनी मर्जी से फैसले करता है, तीस की उम्र में अपनी अक्ल से लेकिन चालीस की उम्र आते-आते बंदा बहादुर अपने तजुर्बों से फैसले लेने लगता है।"- (पृष्ठ-207)

उपन्यास का घटनाक्रम सिक्किम के शहर गंगटोक में घटित होता है लेकिन लेखक वहाँ का जीवंत दृश्य उपस्थित न कर सकता। अधिकतर घटनाएं होटल, कैसिनो या किसी घर में ही घटित होती हैं। गंगटोक के खूबसूरत दृश्य से पाठक वंचित रह जाता है। हालांकि प्रारंभ में एक जगह वहाँ की खूबसूरती का चित्रण है।
इसके अतिरिक्त सिक्किम या गंगटोक के भौगोलिक वातावरण का चित्रण भी कहीं नजर नहीं आता।
- उपन्यास में नायक कभी कार पर होता है तो कभी कार छोङ कर भाग जाता है। अब पता नहीं क्यों पुलिस नायक की कार को हिरासत में क्यों नहीं लेती।
लेखक की एक विशेषता यह भी है की उपन्यास में समय-समय पर वर्तमान भारत की कुछ घटनाओं का जिक्र भी किया है, जिससे भविष्य में उपन्यास के समय का पता भी लगया जा सकेगा व यह भी तय होगा की कहानी किस समय की है।
जैसे- उपन्यास नें केस लेश इंडिया,स्वच्छ भारत अभियान आदि का नाम मात्र वर्णन आता है।
इसके लिए लेखक विशेष धन्यवाद के पात्र हैं।

"ऐसे गधे खुद तो कभी कूङा, कचरा पेटी में डालेंगे नहीं लेकिन निजाम के स्वच्छ भारत अभियान के फेल होने का डंका जरूर पीट लेंगे।"- (पृष्ठ-168)

अगर समग्र रूप से कहा जाये तो कंवल शर्मा का टेक थ्री एक तेज रफ्तार व पठनीय उपन्यास है। जो पाठक को अपने से अलग नहीं होने देता।
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उपन्यास- टेक थ्री
लेखक- कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ- 278
मूल्य-80₹
संपर्क-
लेखक- kanwal.k.sharma@gmail.com

64. सैकण्ड चांस- कंवल शर्मा

जिंदगी के सैकण्ड चांस की कहानी।

सैकण्ड चांस, थ्रिलर उपन्यास, पठनीय, उत्तम।
वन शाॅट के पश्चात रवि पॉकेट से प्रकाशित होने वाल यह प्रस्तुत उपन्यास सैकण्ड चांस कंवल शर्मा का द्वितीय मौलिक उपन्यास है।इनका प्रस्तुत उपन्यास सैकण्ड चांस भी एक जबरदस्त उपन्यास है। यह एक ऐसे युवक की कहानी है जिसे प्रथम बार जीवन में बहुत बुरी तरह से धोखा मिलता है लेकिन जिंदगी उसे सैकण्ड चांस भी देती है। अब पठनीय यह भी  है की वह युवक जिंदगी के सैकण्ड चांस में सफल हो पाया या फिर उसी तरह फिर फंस गया।
   जब कोई खूबसूरत बला किसी को दौलतमंद बनाने के रास्ते उसे एक मामूली फोन काॅल के बदले पांच लाख का आॅफर दे तो कौन आदमी भला मना करेगा। लेकिन फिर जब वही फोन काॅल किसी र ईस  जबर बिल्डर की इकलौती औलाद के अगवा किये जाने की साजिश का हिस्सा हो तो कोई मूढ, जङबुद्धि, अहमक या बेवकूफ ही इसमें हाथ डालेगा
   और कैजाद पैलोंजी- भूतपूर्व पत्रकार और मौजूदा एक्स-जेलबर्ड में सारी खूबियां थी। (लेखक की कलम से)
           कैजाद पैलोंजी जो की एक पत्रकार था लेकिन ईमानदरी के चलते एक जेल की सजा पा गया। जब जेल से छूट कर बाहर आया तो उसे एक आॅफर मिला। सिर्फ एक फोन काॅल करनी है और बदले में पांच करोङ रकम मिलेगी। अब कौन मूर्ख होगा जो पांच करोङ की दौलत को ठुकरा देगा।
बस यही एक फोन काॅल पत्रकार के गले की मुसीबत बन गयी। कैजांद पैलोंजी के गले एक लाश पङ गयी।
 
संवाद/ कथन
   उपन्यास के जबरदस्त संवाद के लिए लेखक कंवल शर्मा को विशेष धन्यवाद देना चाहुंगा की उन्होंने जितना अच्छा उपन्यास लिखा है, उसकी कहानी है उतने ही अच्छे उपन्यास के संवाद हैं।
जहां संवाद कहानी को रोचक बनाते हैं वहीं पात्र के विचारों को और स्वयं पात्र को भी परिभाषित करते हैं।
- वेबकूफी और अक्लमंदी में केवल एक ये महीन फर्क होता है कि अक्लमंदी की एक हद होती है। (पृष्ठ-36)
- रिश्ते टूटने में अक्सर ये सबसे बङी वजह होती है कि बाज दफा लोग टूटना पसंद करते हैं, झुकना नहीं।"- (पृष्ठ- 38)
- पैसे वाला जहां अपनी कमाई में‌ किसी को कोई हिस्सा देकर राजी नहीं, वहीं गरीब अपनी किस्मत को कोसने के अलावा अपने हाथ -पांव हिलाने को राजी नहीं । इस मुल्क में कोई संतुष्ट नहीं । यहाँ हर कोई परेशान है, हर कोई गर्म है। (पृष्ठ-40)
- शादीशुदा जिंदगी हवा में उङती उस पतंग की तरह होती है जिसे आसमान में और ऊंचा चढाने, उठाने के लिए उसकी डोर को अपनी ओर खींचना पङता है, उसे धक्का नहीं देना होता। (पृष्ठ-74)
- जब जहरीला सांप पकङना हो तो हाथ हमेशा अपने दुश्मन का इस्तेमाल करो। (पृष्ठ- 91)
- जीवन को दो ही शब्द नष्ट करते हैं- अहम और वहम। (पृष्ठ-123)
              सैकण्ड चांस उन उपन्यासों में से ही जिन्हें आपने एक बार पढना आरम्भ कर दिया तो क्लाइमैक्स पढकर ही आप किताब को बंद करोगे।
कहानी है हि इतनी जबर्दस्त की पाठक स्वयं को भूल जाता है।
      उपन्यासकार टाइगर का एक उपन्यास है आखिरी केस। यह उपन्यास पूर्णतः उसी उपन्यास पर आधारित है। पूरी कहानी वही है लेकिन लेखक ने इसमें कुछ अच्छे प्रयोग किये हैं जो इस उपन्यास को मूल उपन्यास से भी अच्छा बनाते हैं।
   बात करें इसके क्लाइमैक्स की तो इसका क्लाइमैक्स आखिरी केस उपन्यास से बहुत ही अलग है। जहां आखिरी केस वकील मोनिका पण्डित पर आधारित है और वही उस केस को हल करती है वहीं सैकण्ड चांस में वकील की पूरी भूमिका ही गायब है।
  अपने प्रयोग के तौर पर कंवल शर्मा कामयाब रहे हैं लेकिन लेखक कंवल शर्मा ने इस उपन्यास में कहीं भी टाइगर के उपन्यास आखिरी केस का वर्णन नहीं किया। यह नैतिक दृष्टि से पूर्णतः अनुचित है।
     हालांकि दोनों उपन्यास ही पठनीय है और रोचक हैं।
आखिरी केस उपन्यास की समीक्षा यहाँ उपलब्ध है।
आखिरी केस - टाइगर
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उपन्यास- सैकण्ड चांस
ISBN- 81-7789-494-3
लेखक- कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ-317
मूल्य- 80₹

Sunday, 27 August 2017

59. वन शाॅट - कंवल शर्मा

वन शाॅट- एक जासूस के बदले की कथा।

कंवल शर्मा अपने पहले उपन्यास वन शाॅट से ही चर्चा में आ गये थे। वन शाॅट की कहानी काफी रोचक व संस्पेंशपूर्ण है

कहानी-
         उपन्यास का नायक विनय रात्रा एक सरकारी जासूस है, जो अधिकतर देश से बाहर रहता है। विनय का इस दुनियां में उसके भाई रोहन रात्रा के अलावा और कोई भी रक्त संबंधी नहीं है।
  राजनगर निवासी रोहन रात्रा की एक रात नृशंस हत्या हो जाती है। अपने भाई की मौत का बदला लेने के लिए जब विनय रात्रा अपने सहयोगी मित्र राजेश के साथ राजनगर पहुंचता है तो उसका स्वागत उस पर एक हमले से होता है।
  राजनगर में पहले ही खतरनाक स्वागत के साथ ही कई और घटनाएं घटती हैं। विनय और राजेश जैसे- जैसे रोहन के हत्यारे की तलाश करते हैं तो उनके सामने कई मुसीबतें और कई रहस्यमयी बातें आती हैं।
- कभी रोहन रात्रा एक बदचलन, बेगैरत नजर आता है तो कभी वक्त का मारा इंसान।
- कभी उसकी कई प्रेमिकाएं सामने आती हैं तो कभी महिलाओं से धोखा खाया इंसान।
- कभी रोहन की मृत्यु हत्या नजर आती है तो कभी आत्महत्या ।
इस प्रकार की अनेक समस्याओं से जूझता हुआ जब विनय असली हत्यारे तक पहुंचता है तो पाठक भी अवाक रह जाता है।
- रोहन क्यों मारा गया?
- रोहन का हत्यारा कौन है?
- रोहन की हत्या या आत्महत्या का क्या चक्कर है?
- रोहन की प्रेमिकाओं का क्या किस्सा है?
- कौन था हत्यारा, क्यों हुयी रोहन की हत्या?
- मेयर का शहर पर कब्जा क्यों था?
- क्यों था सोये हुए लोगों का शहर?
ऐसे असंख्य प्रश्नों के उत्तर तो कंवल शर्मा का उपन्यास वन शाॅट ही दे सकता है।
संवाद-
     उपन्यास के संवाद की बात करें तो इस विषय में लेखक धन्यवाद के पात्र है की उनके संवाद बहुत अच्छे हैं और कहीं कहीं तो सूक्ति बन गये हैं।
जहां एक और संवाद कथा को आगे बढाने का काम करते हैं तो वहीं संवाद ही पाठक को कथा से बांधे भि रखते हैं।
लेकिन कंवल शर्मा की एक बङी गलती यह भी है की संवाद लंबे हैं और कहीं- कहीं तो हद से ज़्यादा लंबे हो गये।
कुछ अच्छे कथन और संवाद देखिए-

- पहला नियम- शांत रहो...और चीजों को समझने की कोशिश करो। (पृष्ठ 20)
- पांचवा नियम- ......पहला वार हमेशा स्टीक होना चाहिए। (पृष्ठ- 22)
परिस्थितियों के अनुसार व्यक्ति को कैसा व्यवहार करना चाहिए, इस प्रकार के कुल नौ नियम उपन्यास में है, लेकिन यह किसी मैनेजमेंट किताब का चैप्टर नहीं है।
- दौलत हमेशा ताकतवर होने का अहसास कराती है, लेकिन वही ताकत जब सर चढती है, तो दिमाग को भ्रष्ट कर देती है।"-(पृष्ठ 37)
- इश्क हाथ में थामें उस कांच के गिलास की तरह होता है, जिसे गर ढीला पकङा जाए, तो उसके छूट जाने का डर लेकिन उसे कस पकङा जाये तो उसके टूट जाने का खतरा। -(पृष्ठ -63)
- अक्लमंद काम करने से पहले सोचते हैं और बेवकूफ काम करने के बाद।- (पृष्ठ-190)
-“हम अपने दोस्त कभी नहीं खोते, हम उन्हें खोते है जिनके बारे में हमे ये मुगालता होता है कि वो हमारे दोस्त हैं” 
मेयर साहब - ये शहर हमारी जागीर है। यहाँ के लोग हमारे इशारे पर उठते-बैठते हैं।...ये उसकी दिल्ली नहीं है ये हमारा शहर है। ये राजनगर है, जिसके हम राजा हैं। -(पृष्ठ 213)

रोचक दृश्य -
उपन्यास क ई रोचक दृश्य है जो पाठक के लबों पर कभी मुस्कान तो कभी गुस्सा ला सकते हैं।
जैसे विनय और मेयर की मुलाकात।
एक अन्य दृश्य में विनय व राजेश द्वारा अपने पीछे लगे जुम्मन को चक्कर देने के लिए व्यर्थ घूमना बङा रोचक लगा।
लेखक के शब्दों में ही देख लीजिएगा।
और जुम्मन अपनी गाङी में उनके पीछे लगा इस बात पर सर धुन रहा था कि यूं एक जगह से दूसरी जगह बिना मतलब गाङी दौङाते रहने की आखिरकार वजह क्या है?

कमियां-
उपन्यास में कुछ कमियां भी हैं जो उपन्यास/पाठक को नजर तो आती हैं लेकिन वे उपन्यास की कहानी को प्रभावित नहीं करती।
- अनावश्यक कथा-
उपन्यास के प्रारंभ में कहानी के नायक विनय रात्रा की भूमिका में लगभग पचास पृष्ठ भर दिये गये और उन पचास पृष्ठों में जो कहानी है उसका मूल कथानक से  संबंध नहीं।
- लंबे संवाद-
उपन्यास के संवाद लंबे ही नहीं अति लंबे हैं। पता नहीं लेखक ने ऐसा क्यों किया है। किसी- किसी पात्र से तो संवाद बीस- पच्चीस पृष्ठ भी खींच दिये।
तब तो हद ही हो गयी जब छोटे-छोटे पात्र से अनावश्यक वार्तालाप दिखा कर भी दस पृष्ठ खर्च करने में लेखक हिचकिचाया नहीं।
शाब्दिक गलतियां-
उपन्यास में एक दो जगह शाब्दिक गलतियां है लेकिन वह कोई विशेष नहीं है।
- सेल फोन वापसी अपनी कोट की ऊपरली जेब में डाल लिया। -(पृष्ठ 84)
- जुम्मन का गाल उपङ गया।-(पृष्ठ-252)
ऊपरली और उपङना में ग्रामयत्व दोष है।
- विनय ने आगे बढकर उसको अपनी बाहों में ले लिया और उनके सर को अपने कंधे पर रख उनकी कमर को सहलाने लगा।
यहाँ कमर सहलाने की बजाय थपथपाने लगा शब्द ज्यादा उचित था।
- इंस्पेक्टर ताशी ने जब लाश बरामद की तो रोहन रात्रा की जेब से मोबाइल क्यों नहीं निकाला।
- राजनगर प्रवेश पर विनय पर हमला होता है, आखिर हमलावर को विनय आगमन  खबर कैसे लगी?
लेखन ने कई जगह उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल किया है जो की वर्तमान में प्रासंगिक भी नहीं है।
जैसे प्रधानमंत्री को वजीरे आजम लिखना।
लेखक पर एक बङा आरोप लगा और वह है  भाषा शैली को लेकर। इनकी भाषा शैली पर मिस्ट्री राइटर सुरेन्द्र मोहन पाठक का प्रभाव स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। हालांकि एक ही लेखक को पढते रहने से ऐसा होना स्वाभाविक है, लेकिन अगर लेखक ने ऐसा जानबूझकर किया है तो मेरे विचार से लेखन ने अपनी प्रतिभा का हनन किया है। हालांकि यह लेखक का प्रथम उपन्यास इसलिए  मात्र एक उपन्यास पढकर किसी के प्रति गलत धारना नहीं बनानी चाहिए।
लेखक ने उपन्यास को खूब लंबा खींच दिया लेकिन प्रकाशन महोदय ने छोटे शब्दों का प्रयोग कर लगभग चार पृष्ठों के उपन्यास को 318 पृष्ठों में समेट दिया।
      
अगर समग्र दृष्टिकोण से देखा जाये और नाम मात्र की गलतियों को नजर अंदाज किया जाये तो उपन्यास बहुत रोचक है। उपन्यास की रोचकता का अंदाज इसी बात से भी लगाया जा सकता है की लंबे- लंबे संवाद भी पाठक को निराश नहीं करेंगे।
  उपन्यास का समापन भी पाठक को चौंकाने वाला है।
उपन्यास पढने योग्य है पाठक को निराश नहीं करेगा।

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उपन्यास - वन शाॅट ( मर्डर मिस्ट्री)
ISBN 81-7789-484-6
लेखक - कंवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ- 318
मूल्य- 80₹

संपर्क-
कंवल शर्मा
Email- kanwal.k.sharma@gmail.com