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Thursday, 30 January 2025

629. जादुई जंगल - मिथिलेश गुप्ता

कहां से आये अश्वमानव
जादुई जंगल- मिथिलेश गुप्ता 

ये कहानी कई बरस पुरानी है।
जब शायद तुम्हारे परदादा के परदादा, तुम्हारी उम्र के रहे होंगे।
ये कहानी है उस जंगल की जो न सिर्फ जादुई था बल्कि कुछ अजीबोगरीब रहस्यों से भरा हुआ था।
कहते हैं उस जंगल की कहानी किसी परियों की कहानी से कम नहीं थी।
ये कहानी उन अश्वमानवों की हैं जिनपर कभी इस जंगल का भविष्य निर्भर था।
ये कहानी उन जादुई मेंढकों की भी है जिन की हुकूमत उस जंगल के कोने-कोने तक फैली हुई थी।
कहते हैं ये कहानी आज भी सिर्फ एक कहानी की तरह ही सुनाई जाती है, कुछ लोग इसे सत्य मानते हैं तो कुछ लोग एक कोरी कल्पना।
सच क्या है, ये मैं नहीं जानती, पर कहते हैं आज भी वो जादुई जंगल उसी स्थान पर बसा हुआ है जहाँ वो सालों से था।
कुछ चमत्कारी शक्तियाँ उस जंगल को इंसानी नज़रों से बचाये हुए हैं।
आइए, चलते है जादुई जंगल के इस सफर पर...

अश्वमानवों की वापसी - मिथिलेश गुप्ता
नमस्ते पाठक मित्रो,

Monday, 27 December 2021

493. बुल्लेलाल - अमरेज अर्शिक

एक कॉमिक उपन्यास
बुल्लेलाल - एक जिंदा कार- अमरेज अर्शिक

 
फतांसी साहित्य में लेखक के कहानी कहने को सामग्री बहुत होती है। वह किसी भी राह से कुछ भी कह सकता है। Flydreams Publication फतांसी लेखन में नये-नये लेखकों और कहानियों को सामने ला रहा है। मैंने इन दिनों फतांसी साहित्य में जो रचनाएँ पढी हैं इनमें से प्रस्तुत रचना मुझे सर्वाधिक अच्छी लगी। 
    एक समय की बात है, एक ज़िंदा कार थी 'बुल्लेलाल', जिसकी सारी दुनिया ही दुश्मन थी और एक था दोस्त 'रेहान', जो बुल्लेलाल को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक देता है। बुल्लेलाल को न तो डीज़ल-पेट्रोल की ज़रूरत थी और न ही ड्राइवर की। बाहर से दिखने में बिल्कुल किसी आम कार सरीखी पर शायद खुद में जादू की पुड़िया।        
    दोस्तों के लिए जान देने और दुश्मनों की जान लेने वाली बुल्लेलाल की चमत्कारी कहानी।दोस्तों के लिए जान की बाज़ी लगाते-लगाते कब बुल्लेलाल की जान मुश्किल में पड़ गयी, पता भी न लगा। पर अब बहुत देर हो गयी थी और रेहान के सामने एक ज़िम्मेदारी आ खड़ी हुई थी, इस ज़िंदा कार को दुश्मन के हाथों में जाने से बचाने की। आखिर क्या था इस ज़िंदा कार बुल्लेलाल का राज़, कोई विज्ञान या चमत्कार। कौन है उसके दुश्मन? क्या रेहान बचा पायेगा उस जिंदा कार को? 

492. ज्वाला- नृपेन्द्र शर्मा

वनवासी से राजमहल तक
ज्वाला- नृपेन्द्र शर्मा

      Flydreams Publication एक प्रयोगशील प्रकाशन संस्‍थान है। यहाँ से विभिन्न विषयों पर आधारित कृतियाँ प्रकाशित हो रही हैं। Flydreams Publication 'किताबें जरा हटकर' शीर्षक के अन्तर्गत कुछ फतांसी और बच्चों के लिए किताबें प्रकाशित कर रहा है। ऐसी ही एक किताब है नृपेन्द्र शर्मा जी द्वारा लिखित- ज्वाला। 

प्रेम की अग्नि में तप कर निखरने की कहानी है ज्वाला प्रतिशोध को भी मोहब्बत में बदल देने की कहानी है ज्वाला एक पल में दिल हार कर, जीवन भर साथ जीने की कहानी है ज्वाला प्रेम में साहस एवं वीरता की सारी सीमाओं के पार जाने की कहानी है ज्वाला। प्रेम, रहस्य, युद्ध, रोमांच, वीरता, शीतलता से भरपूर एक अद्भुत गाथा। (किंडल से)

    जैसा की उक्त कथन से विदित होता है, 'ज्वाला' में प्रेम, वीरता और युद्ध का मिश्रण है। लेकिन यह प्रेम और युद्ध किस में है, किसलिए है इसका पूर्ण रोमांच तो उपन्यास पढने पर लिया जा सकता है। 

Wednesday, 22 December 2021

490. काल‌ कलंक - साबिर खान पठान

औघड़ और आदमखोर मेंढक सेना
काल कलंक - साबिर खान पठान
#हाॅरर_उपन्यास

अतीत के परदे को संभलकर हटाना चाहिए क्योंकि कभी-कभी जिसे हम कालिख समझ रहे होते हैं, वो असल में एक दीवार होती है, वर्तमान और अतीत के बीच।
     वर्तमान में झांकता अतीत लगता तो अपना है, पर होता नहीं। मिट्टी और वक़्त की गहराइयों में दफन रहस्यों को बाहर लाना कभी-कभी प्रलय का कारण भी बन जाता है।
अक्सर भूकंप के साथ तबाही आती है, पर उस रोज असल तबाही भूकंप के बाद आई। धरती के झूलने से गांव तो तबाह हुआ, लेकिन अतीत का एक रास्ता भी खुल गया।
    एक अनदेखा रास्ता जो किसी प्राचीन मंदिर के तहखाने तक जाता था। आश्चर्य यह भी कि जिस भूकंप ने इंसानी घरौंदों को उजाड़ दिया, उससे मंदिर की मूर्ति का बाल भी बांका न हुआ। 
काल कलंक साबिर खान पाठन
अनजान तहखाने से आती रहस्यमयी टर्र-टर्र की आवाजों ने खोजकर्ता टेंसी और उसकी टीम को बरबस ही खींच लिया था।
यह सिर्फ एक शुरुआत थी रहस्य, खौफ और एक के बाद एक घटती अजीबोगरीब घटनाओं की।
क्या कुछ संबंध था इस जगह का टेंसी से या यह सिर्फ एक संजोग था!?
समय के चक्र से छूटती कालिख और उससे तबाह होती ज़िंदगियों की रहस्यमयी कहानी है काल कलंक

489. ऑर्किड विला - संजना आनंद

हाॅरर- मर्डर मिस्ट्री उपन्यास
ऑर्किड विला संजना आनंद
  Flydreams Publication कुछ अलग हटकर साहित्य प्रस्तुत करने में विश्वास रखता है। इसी क्रम में इस प्रकाशन से कुछ अच्छे उपन्यास आये हैं। और इसी विश्वास के चलते मैंने इस प्रकाशन की रचनाएँ पढी हैं। जिसमें से कुछ अच्छी लगी तो कुछ औसत।
    इसी क्रम में संजना आनंद जी का प्रथम उपन्यास 'आर्किड विला' पढा। अब यह उपन्यास मुझे कैसा लगा, यह आप इस समीक्षा के अंत तक समझ जायेंगे।
कहते हैं पुरानी, वीरान इमारतों में, कईं ऐसे राज़ दफन होते हैं, जो अतीत की कब्र से बाहर आने के लिए बेचैन रहते हैं। शायद ऑर्किड विला भी अपने अंदर ऐसे कुछ रहस्यों को समेटे हुए था। अगर ऐसा न होता, तो फिर क्यों अनिकेत को हर रात, ऑर्किड विला के बगीचे में एक खूबसूरत लड़की का साया-सा नज़र आता? मगर इससे पहले की अनिकेत उसके करीब पहुँच पाता, क्यों वह धुन्ध की चादर में कहीं खो जाती थी? आखिर क्या है ऑर्किड विला का सच? (किंडल से)

488. शैवाल - क्षमा कुमारी

धरती का प्रथम मनुष्य और तिलिस्मी हवेली।
शैवाल- समुद्र का महायोद्धा - क्षमा कुमारी
  
हर सदी में एक बार, समुद्र के गर्भ से एक हवेली बाहर आती है, जिसे देखने वाला मंत्र-मुग्ध होकर उसके पीछे भागता है और डूब कर मर जाता है।
क्या ये कोई मरीचिका थी या सचमुच में ऐसी किसी समुद्री हवेली का अस्तित्व था?
क्या तन्मय उस जादुई हवेली से बच पाया या दूसरे लोगों की तरह उसकी भी बलि ले ली उस समुद्री हवेली ने? (किंडल से पुस्तक परिचय) 
       हिंदी में‌ फतांसी रचनाएँ बहुत कम है और जो है वह इस स्तर की नहीं है की उनको याद रखा जाये।‌ इस क्षेत्र में Flydreams Publication द्वारा बहुत अच्छा प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकाशन द्वारा कुछ अच्छी फतांसी रचनाएँ समाने आयी हैं। 
    'शैलाव -समुद्र का महायोद्धा' नवोदित लेखिका क्षमा कुमारी की द्वितीय रचना है। यह रचना मनुष्य जाति के आरम्भ की कहानी है। 

Saturday, 11 September 2021

458. जहरीली- हादी हसन

मैं तेरे प्यार में‌ पागल
जहरीली- हादी हसन

     अपने प्यार को पाने का उसके पास एक ही रास्ता था सायनाइड। ऐसा तेज जहर जिसका स्वाद कोई नहीं जानता। क्योंकि उसे चखने वाला बताने के लिए जिंदा ही नहीं रहा। लेकिन उसे मालूम था कि ऐसा  करते ही वह कानून का मुजरिम बन जायेगा। फिर भी उसने वह रास्ता अपनाया। प्यार में अंधा जो हो चुका था। इसलिए अपने इंस्पेक्टर दोस्त की आड़ में उसने वह चाल चली जो थी बड़ी-जहरीली। 
जहरीली - हादी हसन
जहरीली - हादी हसन
    लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में हासी हसन जी का स्वयं के नाम से प्रकाशित होना वाला यह प्रथम मौलिक उपन्यास है। हासी हसन जी उपन्यास साहित्य में एक लंबे समय से सन् 1973 से सक्रिय हैं पर अपने वास्तविक नाम से प्रकाशित होना का यह उनका प्रथम अवसर है। एक बेहतरीन लेखनी छद्म लेखन की भेंट चढती रही, लेकिन Flydreams ने इसअनमोल मोती को पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत लाने का प्रशंसनीय कार्य किया है 'जहरीली' उपन्यास के माध्यम से।
    
     मीनाक्षी, रानी लक्ष्मी चौक और चूनाभट्टी के बीच कहीं रहती है। वह अपने बूढे माँ-बाप का एकमात्र सहारा है। एक प्राइवेट फर्म में टाइपिस्ट की नौकरी करती है। उस रात वह नौकरी के बाद माँ की दवा लेकर लौट रही थी, तभी एक हादसा हो हुआ जिसमें वह चाकू से घायल हो गयी। (पृष्ठ-18) 
      संयोग से वहाँ पहुंचे मिस्टर संजय और मिस्टर नरेश डोगरा दोनों मीनाक्षी के रक्षक साबित होते हैं। और यहीं से तीनों अच्छे मित्र बनते हैं। लेकिन यहीं मित्रता उनके जीवन का अभिशाप बन जाती है। क्योंकि परिस्थितियाँ इस कदर करवट लेती हैं कि किसी को कुछ समझ में ही नहीं आता कि आखिर हो क्या रहा है। 

Sunday, 5 September 2021

455. सिटी आॅफ इविल - दिलशाद अली

जहाँ मुर्दे जिंदा होते है
सिटी आफ इविल- दिलशाद अली

Flydreams Publication ने प्रकाशन कर क्षेत्र में एक टैग लाइन 'किताबें कुछ हटके' के साथ कदम रखा। और इस प्रकाशन की कुछ किताबें पढकर यह अनुभूत होता है कि यह टैग लाइन कितनी सार्थक है। वास्तव में इस प्रकाशन से आयी कुछ  किताबें मेरे विचार से हिंदी में पहली बार प्रकाशित हुयी हैं। कुछ अलग विषयों पर आधारित रोचक किताबें।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के युवा लेखक दिलशाद अली का प्रथम उपन्यास 'सिटी आफ इविल' है। यह एक अलग तरह की कहानी है। मेरे विचार से यह हिंदी में प्रथम प्रयास है।  

गुरू शिखर- माउंट आबू
गुरू शिखर- माउंट आबू

 पर।अब चर्चा करते हैं उपन्यास की।
'बखुंदा' एक पहाड़ी इलाके से घिरा हुआ,चारों तरफ बियाबान जंगल ही जंगल, भारत के नक्शे में आखिर में‌ मौजूद और ज्यादातर भाग समुंदर से घिरा हुआ था। वहाँ के लोग बेहद शांत,बाहरी चमक से अनजान, अपनी घुन में ही खुश रहने वाले थे। (पृष्ठ 14)
     उपन्यास की कहानी इसी रहस्यमयी जगह से संबंध रखती है। क्योंकि सन् 2020 में यहाँ की एक रहस्यमयी जगह पर अथाह खजाना मिलता है।
पांच साल बाद....

Monday, 18 May 2020

316. पुरानी डायरी- मनमोहन भाटिया

पुरानी डायरी की पुरानी कहानियाँ
पुरानी डायरी- मनमोहन भाटिया

किंडल पर मनमोहन भाटिया जी का कहानी संग्रह 'पुरानी डायरी' पढा। जैसा की शीर्षक से विदित होता है यह एक डायरी है और इसमें कुछ पुरानी यादें समेटी गयी हैं।
हालांकि यह कहानी संग्रह एक काल्पनिक डायरी के रूप में दर्ज है, लेकिन कहानी कोई भी हो वह कुछ न कुछ तो वास्तविकता के नजदीक होती है। यह एक लेखक पर निर्भर करता है कि वह कहानी को कितना वास्तविकता के नजदीक रखता है, कितना काल्पनिकता के और कितना कहानी को जीवंत रूप प्रदान करता है।
कहानी संग्रह को एक डायरी के रूप में उपस्थित करना वास्तव में एक चुनौती होता है, कारण डायरी व्यष्टि होती है और उसे समष्टि का रूप प्रदान करने में बहुत मुश्किल होती है।

अब कुछ चर्चा 'पुरानी डायरी' कहानी संग्रह पर डालते हैं और देखते हैं लेखक महोदय कहां तक सफल हुये हैं।
इस संग्रह में कुल ग्यारह कहानियाँ हैं। जो विभिन्न परिवेश से संबंधित है।


Tuesday, 12 May 2020

315. स्वयंसिद्धा- डाॅ. मंजरी शुक्ला

मार्मिक कहानियों का संग्रह
स्वयंसिद्धा- मंजरी शुक्ला

हमारे दैनिक जीवन में दिन प्रतिदिन कुछ न कुछ विशेष घटित होता रहता है। एक लेखक इसी दैनिक जीवन की घटनाओं को एक कहानी का रूप देता है। सामान्यतः वह घटनाएं चाहे हमें इतनी प्रभावित न करें या हम उस घटना के मात्र एक पक्ष को जानते हैं, लेकिन एक संवेदनशील कहानीकार उस घटना को एक जीवंत रूप देता है और फिर वही घटना इतनी प्रभावशाली हो जाती है कि हमारे मर्म को भावनाओं में बहा ले जाती है।
        मानवीय संवेदनाओं को छू लेने वाला एक कहानी संग्रह है 'स्वयंसिद्धा- एक टुकड़ा धूप'- डाॅक्टर मंजरी शुक्ला। मंजरी शुक्ला जी का नाम मेरे लिए नया था, लेकिन जब फेसबुक पर इस कहानी संग्रह की चर्चा सुनी तो पढने की इच्छित जागृत हुयी।

         इस संग्रह की अपवाद स्वरूप एक दो कहानियों को अलग कर दे तो बाकी सब कहानियाँ इतनी मार्मिक है कि आँखें पढते-पढते नम हो जाती हैं। मैं स्वयं इस कहानी संग्रह को पढते वक्त हार्दिक रूप से टूट हुआ था, मनुष्य जीवन में कुछ न कुछ परेशानियां आ जाती हैं। कुछ लोग परेशानियों की वजह से और भी दृढ हो जाते हैं और कुछ मेरी तरह आंसु बहाकर मन को हल्का कर लेते हैं। ऐसे समय में पढा गया यह कहानी संग्रह मेरे आंसुओं में वृद्धि करने में सहायक रहा।

        चाँद को क्या मालूम... कि उसे कुछ ही घंटों बाद चाँदनी से जुदा होना पड़ेगा, या फिर वह नादान काली बदली भला कहाँ जानती है कि बहती हवा के साथ कितनी बूँदें बरसाकर, अपना आँचल खाली कर देने के बाद भी, वह मुस्कुराते हुए अपनी तन्हाई किसी पर ज़ाहिर नहीं कर पाएगी। मासूम रातों में टिमटिमाता दिया, अपने मद्धिम प्रकाश के साथ कब तक डटा खड़ा रहेगा, ये ना उसने जाना और ना ही कभी जानेगा। (चेहरा)
         उक्त कथन कहानी 'चेहरा' का है। लेकिन यह चांदनी किसी एक से जुदा नहीं होती....यहाँ अंधेरा किसी एक के जीवन में नहीं आता...यह तो हर एक के जीवन की कहानी है वह चाहे 'स्वयंसिद्धा' कहानी की नायिका हो या फिर 'अम्मा' कहानी की माँ हो वह चाहे 'पार्वती आंटी' कहानी का 'अंकित' हो या फिर कोई और। 


Friday, 17 April 2020

294. खौफ- देवेन्द्र प्रसाद

नजदीक आ रही है खौफ के कदमों की आहट
खौफ- देवेन्द्र प्रसाद, हाॅरर कहानियाँ

इन दिनों किंडल पर हाॅरर कहानियाँ पढने का आनंद लिया जा रहा है। सम्पूर्ण देश में lockdown है, घर पर रहना है तो किताबें बहुत अच्छा साथ देती हैं।
        हालांकि मुझे हाॅरर रचनाएँ कम‌ पसंद हैं लेकिन अच्छी और तर्कसंगत हो तो पढी जा सकती है। इस क्षेत्र में नये प्रकाशक जैसलमेर से fly dreama publication का काम सराहनीय है। मैं क्रमशः fly dreamsकी यह तृतीय हाॅरर रचना पढ रहा हूँ। इससे पूर्व मनमोहन भाटिया जी की 'भूतिया हवेली' और नितिन‌ मिश्रा जी की 'रैना @ मिडनाइट' पढ चुका हूँ और इसके पश्चात सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित मिथिलेश गुप्ता जी की हाॅरर उपन्यास '11:59' पढूंगा‌।
       अब बात करे प्रस्तुत संग्रह की तो इसमें अधिकांश कहानियाँ पहाड़ी क्षेत्र की हैं शायद इसका कारण यह भी है की लेखक देवेन्द्र प्रसाद जी स्वयं उतराखण्ड के हैं, इसलिए कहानियों में उतराखण्ड और वहाँ के पहाडों का अच्छा चित्रण मिलता है।

    इंसानों की भीड़ भरी दुनिया में बसती हैं, कुछ ऐसी खौफनाक हकीकतें, जिनका सामना होने पर ज़िंदगी के मायने बदल जाते हैं। अमूमन, जब तक इंसान इन पारलौकिक शक्तियों से रूबरू नहीं होता, तब तक वह इन्हें नहीं मानता। जिन लोगों को इस प्रकार के डरावने अनुभव से गुज़रना पड़ता है, उनकी ज़िंदगी खौफ़ से भर जाती है।


इसी खौफ की कहानियाँ आपको इस किताब में पढने को मिलेगी।


Wednesday, 15 April 2020

293. रैना@ मिडनाइट- नीतिन मिश्रा

रात में जागने वाले...
रैना @मिडनाइट- नितिन‌ मिश्रा, हाॅरर उपन्यास

“अंधविश्वास ने आज भी हमारे देश, हमारे समाज के एक बहुत बड़े हिस्से को, इस कदर अँधा कर रखा है कि उन लोगों की नज़रों को एक इंसान और जानवर में फर्क नहीं दिखाई देता।”, रैना की आवाज़ क्रोध और उत्तेजना से काँप रही थी।
       यह दृश्य है नितिन मिश्रा के उपन्यास 'रैना @ मिडनाइट' का। यह उपन्यास चार दोस्तों की कहानी है जो समाज में व्याप्त भूत-प्रेत के नाम पर फैले अंधविश्वास का खण्डन करने की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियाँ उन्हे एक ऐसी जगह ले आती हैं जहाँ वे स्वयं नहीं समझ पाते की ये अंधविश्वास है या सत्य। और फिर एक के बाद ऐसी घटनाएं सामने आती हैं की पाठक हत्प्रभ रह जाता है। 


        लेखक महोदय ने जिस तरह से कहानी को बुना है वह बहुत गहरी और रोमांचक होती गयी है। दिमाग की नसों की सनसना देनी वाली यह कहानी अंत तक पाठक को स्वयं से चिपका कर रखती है और उसके बाद भी दिमाग में छायी रहती है।


292. भूतिया हवेली- मनमोहन भाटिया

भूतों की कहानियाँ
भूतिया हवेली- मनमोहन भाटिया, हाॅरर कहानी संग्रह
प्रस्तुत संग्रह में कुल छह कहानियों है जो अलग-अलग परिवेश पर आधारित हैं।
    कहानियाँ आपको एक अलग दुनियां में ले जायेगी जहाँ भूतों का एक अलग संसार है। जहाँ खतरनाक बिल्लियां हैं, राजस्थान का तपता रेगिस्तान है और उसमें घटित भयजनक किस्से हैं, तो कहीं पहाड़ के भूत भी हैं। अच्छे भूत हैं तो बुरे भूत भी हैं, काली-भूरी भूतियां बिल्लियां भी है। कुल मिलाकर कह सकते हैं की इस हाॅरर संग्रह में आपको विभिन्न रंग देखने को मिलेंगे।
इस संग्रह में कुल छह कहानियाँ है।
     भूत इस संग्रह की प्रथम कहानी है जो एक रहस्यम तरीके से मृत लड़की पर आधारित है।
वहीं द्वितीय कहानी एक 'अच्छे भूत' की है पर यह कहानी न होकर मात्र एक घटना प्रतीत होती है। हां अगर पात्रों के दृष्टिकोण से देखा जाये तो सिहरन पैदा करने वाली स्थिति का वर्णन सही है। 

Monday, 27 May 2019

192. रोबोटोपिया- संदीप अग्रवाल

मनुष्य और रोबोट की अदभुत कहानियाँ
रोबोटोपिया- संदीप अग्रवाल

नये प्रकाशक fly Dreams के अंतर्गत लेखक संदीप अग्रवाल जी का कहानी संग्रह 'रोबोटोपिया' एक टैग लाइन 'निकट भविष्य की कहानियाँ' के शीर्षक के साथ प्रकाशित हुआ। कहानी संग्रह पढते वक्त आप स्वयं महसूस करेंगे की ये सब कहानियां भविष्य में सत्य साबित हो सकती हैं। 

     "सवाल यह नहीं है कि रोजिना के साथ बलात्कार किया जा सकता है या नहीं? सवाल यह है कि विक्रम ने जो किया वह बलात्कार था या नहीं? उसने रोजिना के साथ जो किया, वह उसकी मर्जी के खिलाफ था।.........और इसे बह सजा मिलनी चाहिए जो कानून ने एक रेपिस्ट के लिए मुकर्रर की है।" (किताब अंश)
ध्यान दें, रोजिना एक रोबोट है।
क्या एक रोबोट से बलात्कार संभव है?
क्या उसके लिए सजा दी जा सकती है?
मनुष्य और रोबोट के ऐसे संबधों को उजागर करती है 'रोबोटोपिया'। 


विकसित होती प्रौद्योगिकी एक दिन इस स्तर पर आ जायेगी की‌ मनुष्य और रोबोट में अंतर खत्म हो जायेगा। मनुष्य और रोबोट का यह मिलन भविष्य में सही होगा या गलत यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन‌ दोनों के मिलन को लेकर जो कहानियाँ रची गयी है वह आप वर्तमान में भी पढ सकते हैं।
यहाँ कुछ कहानियों की चर्चा करेंगे बाकी कहानियाँ आप 'रोबोटोपिया' कहानी संग्रह में‌ पढे यकीनन ये कहानियाँ आपको पसंद आयेगी।
इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ है। हम कुछ कहानियों पर यथासंभव चर्चा करते हैं।
 

Sunday, 26 May 2019

191. कुआं- ब्रजेश कुमार

एक दहशत की घटना- कुआं
       वह कुआं एक श्राप था, ऐसी मान्यता थी कि एक राजा ने वो कुआं तब बनवाया था, जब वो ये फैसला लेने को तैयार हुआ कि सजाए मौत से बढकर किसी को कोई सजा दी जा सकती है।
कुआं...जो एक रहस्य था....कहते हैं वो कुआं क्रूरता का एक सूचक था। एक ऐसा कुआं, जहाँ मौत भी दुहाई मांगती थी। शायद वो एक प्रतीक था हैवानियत का। जहाँ कैदियों सजा के नाम पर मौत से भी बढकर सजा दी जाती थी। ऐसा भी माना जाता था है कि आजतक वहाँ से कोई बचकर कभी नहीं निकला। समय के साथ-साथ उसके आसपास बना बीहड़ और वो कुआं रहस्यमयी और हैवानियत का घर बनता गया। कहा जाता है, ये उन कैदियों की आत्माएं हैं, जिन्हें उस कुएं में फेंका गया था और जिन्हें मौत तो मिली मुक्ति नहीं।


दो दोस्त अजय और सतीश अपने गाँव जाते हैं। रास्ते में एक कुआं है। अजय उस कुएं पर चला जाता है और वहीं से कुछ खौफनाक घटनाओं का आरम्भ हो जाता है।
एक दोस्त के शरीर में प्रविष्ट शैतानी आत्मा अपना प्रतिशोध लेना चाहती है।
- कुएं का राज क्या था?
- आत्मा किससे प्रतिशोध लेना चाहती थी?
- कौन था असली गुनहगार?
- अजय और सतीश का क्या हुआ?

आदि प्रश्नों के लिए 'कुआं' नामक किताब पढनी होगी। जो की हाॅरर श्रेणी की कथा है।



देखा जाये तो 'कुआं' कोई कहानी नहीं है, यह मात्र एक घटना का विवरण मात्र है। जैसे अखबार/ मौखिक किसी से कोई हम घटना पढते/ सुनते हैं। कुआं उसी तरह की एक घटना प्रधान कथा मात्र है। इस कथा का आरम्भ अवश्य होता है लेकिन कोई अंत नहीं कहा जा सकता।

    कथा का आरम्भ बहुत रोचक तरीके से होता है लेकिन अंत नहीं। एक अधूरापन सा छोड़ कर कहानी 'अतार्किक' रूप से खत्म हो जाती है और पाठक ठगा सा रह जाता है।
लेखक/प्रकाशक चाहते तो इस कहानी को एक क्लाईमैक्स तक ले जा सकते थे।

किताब में शाब्दिक गलतियाँ बहुत है। मेरे पास fly dreams publication की पांच किताबे हैं और सभी में शाब्दिक गलतियाँ देखने को मिलती हैं। इस तरफ ध्यान देना आवश्यक है। कुछ उदाहरण देखें
थुक (पृष्ठ-12), दुसरे(पृष्ठ-16), "...तो ये साच है।" (पृष्ठ-42)
"तब पण्डित जी, कहां है लड़का?" (पृष्ठ-23)
(अब पण्डित... होना था।)
"रुको अभी आरती होने तक नहीं करना है कुछ।" (पृष्ठ-23)
"कमरे में पंखे के आवाज..." (पृष्ठ-26)

मेरे विचार से 49 पृष्ठ की किताब पर 75₹ खर्च करना उचित नहीं है।

लघु उपन्यास- कुआं
लेखक- ब्रजेश कुमार
संस्करण- ‌‌ सितंबर- 2018
पृष्ठ- 49
मूल्य- ‌‌‌‌ 75₹
प्रकाशक- FlyDream Publication, Patna
Email- teamflydreams@gmail.com

190. छोटू- अरुण गौड़

कुछ संवेदनशील कहानियाँ
छोटू- अरुण गौड़

फ्लाईड्रिम्स पब्लिकेशन पटना द्वारा प्रकाशित 'छोटू' अरुण गौड़ जी का एक 'छोटा' सा कहानी संग्रह है। कहानी संग्रह चाहे छोटा है लेकिन कहानियों की संवेदना का फलक विस्तृत है।

इस संग्रह में कुल चार कहानियाँ है और चारों कहानियाँ ही बच्चों से संबंधित है। कहानियों के पात्र चाहे बच्चे हैं लेकिन कहानियों में व्याप्त भाव सभी सहृदय को प्रभावित करने में सक्षम है।

1. गुलामी का पट्टा
              इस संग्रह की प्रथम कहानी, एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण मजदूरी करने को विवश हो जाता है।
        कथा का मुख्य पात्र किशन बिहार के एक गाँव में एक चौधरी के खेत पर काम करता है। चौधरी मजदूरों का शोषण करता है और उन्हें बंधुआ मजदूर की तरह रखता है।
ज्वर पीडित किशन के मन में इस बंधन से मुक्त होने की इच्छा है।
    किशन अपनी मुक्ति के लिए क्या प्रयास करता है, वह जैसे आजाद होता है। यह सब रोचक है। एक छोटे से बच्चा का शोषण और उसकी कोमल भावनाओं को खत्म करने वाला चौधरी। फिर भी किशन के मन में स्वतंत्रता की उमंग है। 

189. तिलिस्मी खजाना- नृपेन्द्र शर्मा

अर्जुन -पण्डित का रोमांचक सफर
तिलिस्मी खजाना- नृपेन्द्र शर्मा
Fly Dream Publication
द्वारा कुछ अत्यंत रोचक किताबों की श्रृंखला जारी की गयी है। मैंने इन दिनों प्रकाशन की पांच किताबे सतत पढी, और सभी मेरे को अच्छी लगी।
रोबोटोपिया - संदीप अग्रवाल
तिलस्मी खजाना- नृपेन्द्र शर्मा
कुआं- ब्रजेश गौड
छोटू - अरुण गोड़
भूतिया हवेली- मनमोहन भाटिया

          पांचों किताबों हाॅरर, फैंटेसी, इलैक्टोनिक युग और मानवीय संवदेना जैसे विषयों पर आधारित हैं।
अब बात करते हैं नृपेन्द्र शर्मा के उपन्यास 'तिलस्मी खजाना' की। सबसे पहले उपन्यास के अंतिम आवरण पृष्ठ पर उपन्यास के बारे में जो जानकारी दी गयी है वह पढ लेते हैं।

बंद खण्डहर के दरवाजों में, तिलस्मी खजाना कर रहा है, सदियों से इंतजार।
आखिर क्या है रहस्य, खण्डहर में बिखरे नर कंकालों का?
और किसको बुला रही हैं खण्डहर से आती आवाजें?
दो वीर युवक 'अर्जुन- पण्डित' निकल पड़े हैं तिलस्मी खजाने की तलाश में।
क्या परियों का नृत्य देखने के बाद, वो उनके मायाजाल से बच पायेंगे?
और क्या राह में आने वाली मुसीबतों से लड़ पायेंगे?
और क्या भेद पायेंगे अपने बल और बुद्धि से खजाने का तिलिस्म का रहस्य....?
जानने के लिए पढें 'अर्जुन-पण्डित' की तिलिस्म, युद्ध और मोहब्बत की दास्ताँ -'तिलिस्मी खजाना'। 

Wednesday, 31 October 2018

149. वेयरवुल्फ- नितिन मिश्रा

खून का प्यासा मानव भेड़िया
वेयरवुल्फ- नितिन मिश्रा।
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एक शाॅर्ट फिल्म 'वेयरवुल्फ' के लिए फिल्म की टीम एक खतरनाक जंगल में अपनी फिल्म की शुटिंग करने के लिए पहुंची।
             अभी शुटिंग आरम्भ भी न हुयी और एक खतरनाक वेयरवुल्फ अर्थात् मानव भेडिया वास्तव में वहां आ पहुंचा।
             जो घटनाक्रम एक शाॅर्ट फिल्म में दर्शाना था वह खूनी खेल वहाँ वास्तव में खेला गया।
             क्या यह संयोग था या एक षड्यंत्र?
            
उपन्यास की कहानी वास्तव में दिल दहला देने वाली है। पाठक पृष्ठ दर पृष्ठ यही सोचता है की आखिर वास्तविकता क्या है। क्या यह षड्यंत्र है या फिर संयोग। अगर संयोग है तो बहुत भयानक संयोग है अगर षड्यंत्र है तो कौन है षड्यंत्र कर्ता।
            
                         उपन्यास का आरंभ होता है शांंतनु से। शांतनु ने अपने जीवन की सारी जमा पूंजी अपने आखरी दाँव, अपनी शाॅर्ट फिल्म 'वेयरवुल्फ' पर लगा दी। शांतनु अपनी टीम के साथ 'ब्लैक आॅर्किड वुड्स' नामक  जंगल में फिल्म की शुटिंग के लिए पहुंचा।
वेयरवुल्फ अर्थात् मानव भेड़िया पर आधारित थी यह शाॅर्ट फिल्म। लेकिन आपसी तकरार के चलते फिल्म के पात्र फिल्म में काम‌ करने के लिए मना कर देते हैं और शुटिंग स्थल से फिल्म को छोड़ कर निकलने की तैयारी करते हैं।
          इसी दौरान कहानी में‌ प्रवेश होता है मानव भेड़िये का।  सभी सदस्यों पर मानव भेड़िये के आक्रमण आरम्भ हो जाता है।  इस बार पेड़ के पीछे से निकलने वाली आकृति एक मानव भेड़िये यानी वेयरवुल्फ की थी। (पृष्ठ-24)