एक रोचक थ्रिलर
वो बेगुनाह थी- मोहन मौर्य
लोकप्रिय जासूसी साहित्य में वर्तमान समय में हर लेखक जब मर्डर मिस्ट्री को मील का पत्थर मान चुका है उस समय में एक थ्रिलर उपन्यास का आना सावन की प्रथम बरसात की फुहार की तरह है।
हम बात कर रहे हैं मोहन मौर्य जी के उपन्यास 'वो बेगुनाह थी' की। यह एक थ्रिलर उपन्यास है हालांकि उपन्यास में मर्डर होता है पर वह मूल कथा नहीं है। वैसे मोहन मौर्य का उपन्यास साहित्य में पदार्पण 'एक हसीन कत्ल' नामक मर्डर मिस्ट्री से ही हुआ था।
अब बात करते हैं उपन्यास जे कथानक की।
यह कहानी है एक युवा की जो हैदराबाद में जो काम करता है और एक लड़की की 'मैं बेगुनाह हूँ' की मार्मिक पुकार पर उसे बेगुनाह साबित करने के अभियान पर निकल पड़ता है।
मेरा नाम राहुल है, राहुल वर्मा । मूलतः मैं दिल्ली से हूँ और एक एमएनसी में जॉब कर रहा हूँ । फिलहाल जॉब के सिलसिले में वर्तमान में हैदराबाद मेरा रैन बसेरा है । मैं अपने परिवार के साथ हैदराबाद के कुकटपल्ली क्षेत्र की न्यूयार्क टाइम्स टाउनशिप की बिल्डिंग नंबर 7 के फ्लैट नंबर 304 में रहता हूँ।
राहुल वर्मा के पडोसी में दो लड़कियाँ रहती हैं। जिस में से एक खूबसूरत लड़की का नाम है रश्मि माथुर।
