विदेशी षड्यंत्र और वैज्ञानिकों की हत्या
मौत की परछाई- कर्नल रंजीत
कर्नल रंजीत के विचित्र संसार में आपका एक बार फिर स्वागत है। राजस्थान के संगरिया निवासी मित्र रतन चौधरी जी से प्राप्त कर्नल रंजीत के 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में यह 15 वां उपन्यास है इस से पूर्व रतन चौधरी जी से प्राप्त चौदह उपनिवेश की समीक्षा पढे चुके हैं जिनके क्रमश: नाम हैं- ' दुल्हन की चीख, पीले बिच्छू, प्रेतात्मा की डायरी, उलटी लाशें, नकली चेहरे, ट्रेन एक्सीडेंट, हत्यारे की पत्नी, खूनी बदला, चण्डीमंदिर का रहस्य, जापानी पंखा, मेजर बलवंत बांगलादेश में, विजयदुर्ग का रहस्य, उलटी खोपड़ी, कातिल मेरा नाम' और अब प्रस्तुत है पन्द्रहवें उपन्यास 'मौत की परछाई' की समीक्षा। मौत के साये
एयर इंडिया का विभान उड़ान भरने के लिए रनवे पर तैयार खड़ा था। अधिकांश यात्री अपनी-अपनी सीट पर बैठ चुके थे ।
तभी लाउडस्पीकर पर एनाउन्सर की आवाज एक बार फिर गूंज उठी, "लन्दन जाने वाला विमान उड़ान भरने के लिए तैयार खड़ा है। इस विमान से जाने वाले यात्रियों से निवेदन है कि वे फौरन अपनी-अपनी सीट पर जा बैठें। विमान रवाना होने में केवल दो मिनट शेष रह गए हैं।"
उस विमान से यात्रा करने वाले शेष यात्री जो अपने सम्बन्धियों और मित्रों से विदा ले रहे थे, लपककर विमान में पहुंच गए।
पायलेट ने विमान का इंजन स्टार्ट कर दिया। विमान के पंख तेजी से घूमने लगे ।
और फिर एअरोड्रम के कर्मचारियों ने विमान के दरवाजे से लगी सीढ़ी हटा ली । विमान का दरवाजा बंद हो गया और विमान धीरे-धीरे रनवे पर दौड़ने लगा ।
तभी एक कार एअरोड्रम की मुख्य इमारत के पास पहुंच कर रुक गई। हल्के सिलेटी रंग के सूट पर काला ओवरकोट पहने और सिर पर फेल्ट हैट लगाए एक नौजवान जल्दी उस कार से उतरा और अपना ब्रीफकेस संभालते हुए तो उस ओर दौड़ा जहां एक सेकिंड पहले लन्दन जाने वाला विमान खड़ा था । (मौत की परछाई- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)
यह तो आपने पढा उपन्यास का प्रथम पृष्ठ और अब बात करते हैं उपन्यास के कथानक की जो की मनोरंजन और रोचकता से भरपूर है।
डाॅक्टर सुदर्शन कुमार नागर अपनी मंगेतर शालीनी के साथ होटल ग्रीनलैंड में विश्व प्रसिद्ध इटालियन डांसर जुलियाना का डांस देखते जाते हैं और वहीं उनकी मृत्यु हो जाती है। उसी होटल में प्रसिद्ध जासूस मेजर बलवंत भी अपने सहयोगियों के साथ उपस्थित था ।
डाॅक्टर सुदर्शन युवा वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अमेरिका पर निर्भरता खत्म करते हुए यूरेनियम का विकल्प तैयार किया था। और उनकी हत्या कोई सामान्य बात नहीं थी।
देश के इस महान नौजवान वैज्ञानिक की रहस्यपूर्ण हत्या ने मेजर बलवंत और साथियों को बुरी तरह व्यथित कर दिया था। लेकिन एक ओर जहां उनके मन में दुख था दूसरी ओर क्रोध भी था ।
वहीं भूगर्भ शास्त्री प्रशांत भण्डारी का अपहरण उस वक्त कर लिया जाता है जब वह अपने गुरु वैज्ञानिक आशुतोष मुखर्जी के घर अपने घर लौट रहे थे। -डाक्टर सुदर्शन हमारे देश के ही नहीं बल्कि संसार के गिने-चुने वैज्ञानिकों में एक थे । (पृष्ठ...)
युवा वैज्ञानिक सुदर्शन और प्रशांत भण्डारी के कार्य यूरेनियम से संबंध थे और वैज्ञानिक विदेशी निर्भरता खत्म कर भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए प्रयासरत थे।
पुलिस विभाग के निवेदन और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को ध्यान में रखते हुये मेजर बलवंत होटल ग्रीनलैंड से ही इस केस से जुड़ चुका था।
डाक्टर सुदर्शन और डाक्टर प्रशान्त भंडारी, दोनों ही हमारे देश के विख्यात वैज्ञानिक थे। दोनों ने ही अपने-अपने क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसन्धान किए थे। क्या डाक्टर सुदर्शन की हत्या और डाक्टर प्रशान्त भंडारी के अपहरण में एक ही व्यक्ति या एक ही गिरोह का हाथ है ?"(141)
जब मेजर के सहयोगियों ने अपनी राय रखी तो मेजर को भी सही लगा और अब मेजर बलवंत का काम था उस गिरोह को खोजना हालांकि मेजर इस विषय पर अपनी राय पहली भी वक्त कर चुके थे-
"इस सिलसिले में मैं अभी तक कोई निश्चित राय नहीं बना सका हूं। वैसे यह निश्चित है कि डाक्टर सुदर्शन की रहस्यपूर्ण हत्या किसी सुनियोजित षड्यन्त्र का परिणाम है । लेकिन उस षड्यन्त्र में किन लोगों का हाथ है, इस सम्बन्ध में अभी मैं कुछ नहीं कह सकता।" (40)
अब मेजर बलवंत को अपहृत प्रशांत भंडारी को खोजना था और डाक्टर सुदर्शन के हत्यारे का पकड़ना था। इसके लिए मेजर के सामने एक तथ्य और वह था दोनों वैज्ञानिक थे और देशहित प्रयासरत थे। और इसी आधार पर मेजर का मानना था कि अपराधी कोई विदेशी है ।
अब उनको पकड़ने का जाल मेजर बलवंत को बिछाना था और इसी दौरान प्रशांत भंडारी के घर पर हुयी एक हत्या, गोली और चीख का रहस्य भी उपन्यास को रोचक बनाता है।
"सुधीर, जिस समय हम गोली की इस पहेली को सुलझा लेंगे हम हत्यारों के इतने करीब पहुंच जाएंगे कि हम जब भी चाहें हाथ बढ़ाकर उन्हें पकड़ सकें।"- (मेजर बलवंत)
और एक दिन मेजर बलवंत उस अपराधी को जा पकड़ता है जिसने भारत के विकास को रोकने की कोशिश की थी।
कहानी केवल एक कत्ल की गुत्थी नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के यूरेनियम और खनिज खोज जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अभियानों की रक्षा का बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा जुड़ा है।
यह उपन्यास हिंदी के लुगदी साहित्य (Pocket Books ) का एक बेहतरीन प्रतिनिधित्व करता है। इसका प्रभाव पाठकों में देशभक्ति की भावना जगाने और भारतीय वैज्ञानिकों के महत्व को रेखांकित करने में सफल रहा है। कर्नल रंजीत ने इस कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया है कि देश की प्रगति केवल सरहद पर नहीं, बल्कि बंद प्रयोगशालाओं में भी होती है और उसकी रक्षा करना हर नागरिक का परम कर्त्तव्य है।
हमने उपन्यास 'कातिल मेरा नाम' में कर्नल रंजीत के अपहरण के विषय में पढा था और इस उपन्यास में मालती का अपहरण होता है और वह भी मेजर बलवंत के होते हुये जिसका मेजर बलवंत को भी दुख है।
- इस बार जिन लोगों से पाला पड़ रहा है वे और अपराधियों की अपेक्षा कहीं अधिक साधन-सम्पन्न, निडर और दिलेर हैं। हैं। वरना मेरी उपस्थिति में पुलिस यूनीफार्म पहनकर मालती का अपहरण करने का साहस कोई न कर पाता ।"(103)
सोफिया का चित्रण-
उपन्यास की एक पात्र है सोफिया । वह एक अलग ही लेवल की बंदी है । उसका चरित्र ऐसा कोई तैयार किया इस विषय पर कुछ कहा नहीं जा सकता पर लेखक महोदय ने एक अलग ही दुनिया बना दी सोफिया की।
उसने चौकी की पीठ से कमर टिकाकर आंखें मूंद ली ।
और आंखें मूंदते ही वह फिर सोलहवीं शताब्दी में पहुंच गई। आज से चार सौ वर्ष पूर्व बना हुआ दुर्ग अपने फिर उसी परिवेश में उसकी आंखों के आगे आ खड़ा हुआ। उसे लगा जैसे संगेमूसा की उस चौकी पर कारचोबी के काम का मखमली मोटा गद्दा बिछा हुआ हो । पीठ के पीछे और अगल-बगल सुनहरी काम की मखमली मसनदें लगी हुई हैं। सामने हाथ बांधे दासियां खड़ी हों और वह राजकुमारियों जैसी वेशभूषा में उस सुसज्जित सिंहासन पर बैठी सामने दूर तक फैले हुए सीमाहीन समुद्र की ओर देख रही हो। जिसकी उत्ताल तरंगों को रौंदते हुए मराठों की अजेय जल सेना के विशाल जलपोत गर्व से विजय पताका फहराते हुए इधर से उधर आ-जा रहे हों।(146)
उपन्यास की कुछ कमियां-
उपन्यास का यह महत्वपूर्ण और रोचक अध्याय है ।मेजर का कहना है जब हम गोली के रहस्य को हल कर लेंगे तो अपराधी को भी पकड़ लेंगे।
यहाँ गोली का रहस्य तो स्पष्ट होता है लेकिन 'चीख' के विषय पर कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि वह चीख किसकी थी।
सुदर्शन पर आक्रमण-
डाक्टर सुदर्शन पर तीन बार हमला हो चुका था पर वह वैज्ञानिक होते हुये भी इस विषय पर किसी से कोई चर्चा नहीं करता और और जिस दिन उस पर गोली चली उसी दिन वह अपनी मंगेतर संग होटल में घूमता है।
पिछले एक सप्ताह से उसे रोजाना कई-कई बार फोन कर चुका है ? जिसने आज सवर ही उसे फोन पर धमकी दी थी कि डाक्टर सुदर्शन अगर तुमने इस सौदे को मंजूर नहीं किया तो तुम्हें मौत के घाट उतार दिया जाएगा ?(पृष्ठ-)
वायुयान विस्फोट-
एक वैज्ञानिक की हत्या के लिए वायुयान तक को खत्म कर देनट जिसमें 180 यात्री थे। काफी अजीब लगता है जबकि वह वैज्ञानिक को वायुयान में खत्म भी नहीं कर पाते।
विशेषताएँ-
कर्नल रंजीत के उपन्यासों में कुछ घटनाएं निरंतर आती हैं जो इनकी विशेषताएँ भी हैं । यहां उन्हीं कुछ विशेषताओं का वर्णन प्रस्तुत है।
सुरंग और तहखानें:-
कर्नल रंजीत के उपन्यासों में प्राचीन दुर्ग, महल और ऐसे मकान मिलते हैं जिनमें तहखाने और सुरंगें होती हैं।
- इस पूरे दुर्ग के नीचे तहखानों और सुरंगों का जाल बिछा हुआ है। और इन तहखानों के नीचे भी तहखानों की एक मंजिल है।(पृष्ठ- 164)
चीख -
इनके उपन्यासों में अक्सर चीख का वर्णन मिलता है। यहाँ तो एक अध्याय का शीर्षक भी गोली और चीख है।
लकड़ी/ हाथी दांत के औजार-
कभी- कभी ऐसे वर्णन भी मिलते हैं।
उसके सीने में घुसे हुए छुरे का हाथी दांत का दस्ता स्पष्ट दिखाई दे रहा था ।(69)
मेजर बलवंत- मुख्य जासूस
डोरा, सोनिया, मालती, वाणी कल्याणी- मेजर के सहयोगी जासूस
सुधीर, सुनील- मेजर के सहयोगी जासूस
डाक्टर सुदर्शन कुमार नागर- वैज्ञानिक
शालीनी- डाक्टर सुदर्शन की मंगेतर
हरी- डाक्टर सुदर्शन का नौकर
प्रशांत भण्डारी- भूगर्भ शास्त्री
उमाकांत भण्डारी- प्रशांत भण्डारी के पिता
मोहना- भण्डारी की नौकरानी
रामधारी- भण्डारी का नौकर
आशुतोष मुखर्जी- वैज्ञानिक
अरविंद मेहता- मैनेजर ग्रीनलैंड होटल
कमल कपूर- असिस्टैण्ड मैनेजर ग्रीनलैंड होटल
यूलियाना- इटालियन डांसर
सुदर्शन, विक्रम, कुमार- इंस्पेक्टर पुलिस विभाग
कल्याण, जगजीत- काॅनस्टेबल
मिस्टर पालेकर- I.G. पुलिस
मिस्टर पटवर्धन- चीफ इंटेलिजेंस विभाग मुम्बई
डाक्टर वाल्टर- अपराधी
मार्था, जेक्लिन, एंथोनी- अपराधी के साथी
सोफिया- एक विशेष पात्र
मिसेज जोजफ, मंगल- गौण पात्र
उपन्यास- मौत की परछाई
तभी लाउडस्पीकर पर एनाउन्सर की आवाज एक बार फिर गूंज उठी, "लन्दन जाने वाला विमान उड़ान भरने के लिए तैयार खड़ा है। इस विमान से जाने वाले यात्रियों से निवेदन है कि वे फौरन अपनी-अपनी सीट पर जा बैठें। विमान रवाना होने में केवल दो मिनट शेष रह गए हैं।"
उस विमान से यात्रा करने वाले शेष यात्री जो अपने सम्बन्धियों और मित्रों से विदा ले रहे थे, लपककर विमान में पहुंच गए।
पायलेट ने विमान का इंजन स्टार्ट कर दिया। विमान के पंख तेजी से घूमने लगे ।
और फिर एअरोड्रम के कर्मचारियों ने विमान के दरवाजे से लगी सीढ़ी हटा ली । विमान का दरवाजा बंद हो गया और विमान धीरे-धीरे रनवे पर दौड़ने लगा ।
तभी एक कार एअरोड्रम की मुख्य इमारत के पास पहुंच कर रुक गई। हल्के सिलेटी रंग के सूट पर काला ओवरकोट पहने और सिर पर फेल्ट हैट लगाए एक नौजवान जल्दी उस कार से उतरा और अपना ब्रीफकेस संभालते हुए तो उस ओर दौड़ा जहां एक सेकिंड पहले लन्दन जाने वाला विमान खड़ा था । (मौत की परछाई- कर्नल रंजीत, प्रथम पृष्ठ से)
यह तो आपने पढा उपन्यास का प्रथम पृष्ठ और अब बात करते हैं उपन्यास के कथानक की जो की मनोरंजन और रोचकता से भरपूर है।
डाॅक्टर सुदर्शन कुमार नागर अपनी मंगेतर शालीनी के साथ होटल ग्रीनलैंड में विश्व प्रसिद्ध इटालियन डांसर जुलियाना का डांस देखते जाते हैं और वहीं उनकी मृत्यु हो जाती है। उसी होटल में प्रसिद्ध जासूस मेजर बलवंत भी अपने सहयोगियों के साथ उपस्थित था ।
डाॅक्टर सुदर्शन युवा वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अमेरिका पर निर्भरता खत्म करते हुए यूरेनियम का विकल्प तैयार किया था। और उनकी हत्या कोई सामान्य बात नहीं थी।
देश के इस महान नौजवान वैज्ञानिक की रहस्यपूर्ण हत्या ने मेजर बलवंत और साथियों को बुरी तरह व्यथित कर दिया था। लेकिन एक ओर जहां उनके मन में दुख था दूसरी ओर क्रोध भी था ।
वहीं भूगर्भ शास्त्री प्रशांत भण्डारी का अपहरण उस वक्त कर लिया जाता है जब वह अपने गुरु वैज्ञानिक आशुतोष मुखर्जी के घर अपने घर लौट रहे थे। -डाक्टर सुदर्शन हमारे देश के ही नहीं बल्कि संसार के गिने-चुने वैज्ञानिकों में एक थे । (पृष्ठ...)
युवा वैज्ञानिक सुदर्शन और प्रशांत भण्डारी के कार्य यूरेनियम से संबंध थे और वैज्ञानिक विदेशी निर्भरता खत्म कर भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए प्रयासरत थे।
पुलिस विभाग के निवेदन और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को ध्यान में रखते हुये मेजर बलवंत होटल ग्रीनलैंड से ही इस केस से जुड़ चुका था।
डाक्टर सुदर्शन और डाक्टर प्रशान्त भंडारी, दोनों ही हमारे देश के विख्यात वैज्ञानिक थे। दोनों ने ही अपने-अपने क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण अनुसन्धान किए थे। क्या डाक्टर सुदर्शन की हत्या और डाक्टर प्रशान्त भंडारी के अपहरण में एक ही व्यक्ति या एक ही गिरोह का हाथ है ?"(141)
जब मेजर के सहयोगियों ने अपनी राय रखी तो मेजर को भी सही लगा और अब मेजर बलवंत का काम था उस गिरोह को खोजना हालांकि मेजर इस विषय पर अपनी राय पहली भी वक्त कर चुके थे-
"इस सिलसिले में मैं अभी तक कोई निश्चित राय नहीं बना सका हूं। वैसे यह निश्चित है कि डाक्टर सुदर्शन की रहस्यपूर्ण हत्या किसी सुनियोजित षड्यन्त्र का परिणाम है । लेकिन उस षड्यन्त्र में किन लोगों का हाथ है, इस सम्बन्ध में अभी मैं कुछ नहीं कह सकता।" (40)
अब मेजर बलवंत को अपहृत प्रशांत भंडारी को खोजना था और डाक्टर सुदर्शन के हत्यारे का पकड़ना था। इसके लिए मेजर के सामने एक तथ्य और वह था दोनों वैज्ञानिक थे और देशहित प्रयासरत थे। और इसी आधार पर मेजर का मानना था कि अपराधी कोई विदेशी है ।
अब उनको पकड़ने का जाल मेजर बलवंत को बिछाना था और इसी दौरान प्रशांत भंडारी के घर पर हुयी एक हत्या, गोली और चीख का रहस्य भी उपन्यास को रोचक बनाता है।
"सुधीर, जिस समय हम गोली की इस पहेली को सुलझा लेंगे हम हत्यारों के इतने करीब पहुंच जाएंगे कि हम जब भी चाहें हाथ बढ़ाकर उन्हें पकड़ सकें।"- (मेजर बलवंत)
और एक दिन मेजर बलवंत उस अपराधी को जा पकड़ता है जिसने भारत के विकास को रोकने की कोशिश की थी।
कहानी केवल एक कत्ल की गुत्थी नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के यूरेनियम और खनिज खोज जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अभियानों की रक्षा का बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा जुड़ा है।
यह उपन्यास हिंदी के लुगदी साहित्य (Pocket Books ) का एक बेहतरीन प्रतिनिधित्व करता है। इसका प्रभाव पाठकों में देशभक्ति की भावना जगाने और भारतीय वैज्ञानिकों के महत्व को रेखांकित करने में सफल रहा है। कर्नल रंजीत ने इस कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया है कि देश की प्रगति केवल सरहद पर नहीं, बल्कि बंद प्रयोगशालाओं में भी होती है और उसकी रक्षा करना हर नागरिक का परम कर्त्तव्य है।
उपन्यास की अब कुछ और बातें
मालती का अपहरण-हमने उपन्यास 'कातिल मेरा नाम' में कर्नल रंजीत के अपहरण के विषय में पढा था और इस उपन्यास में मालती का अपहरण होता है और वह भी मेजर बलवंत के होते हुये जिसका मेजर बलवंत को भी दुख है।
- इस बार जिन लोगों से पाला पड़ रहा है वे और अपराधियों की अपेक्षा कहीं अधिक साधन-सम्पन्न, निडर और दिलेर हैं। हैं। वरना मेरी उपस्थिति में पुलिस यूनीफार्म पहनकर मालती का अपहरण करने का साहस कोई न कर पाता ।"(103)
सोफिया का चित्रण-
उपन्यास की एक पात्र है सोफिया । वह एक अलग ही लेवल की बंदी है । उसका चरित्र ऐसा कोई तैयार किया इस विषय पर कुछ कहा नहीं जा सकता पर लेखक महोदय ने एक अलग ही दुनिया बना दी सोफिया की।
उसने चौकी की पीठ से कमर टिकाकर आंखें मूंद ली ।
और आंखें मूंदते ही वह फिर सोलहवीं शताब्दी में पहुंच गई। आज से चार सौ वर्ष पूर्व बना हुआ दुर्ग अपने फिर उसी परिवेश में उसकी आंखों के आगे आ खड़ा हुआ। उसे लगा जैसे संगेमूसा की उस चौकी पर कारचोबी के काम का मखमली मोटा गद्दा बिछा हुआ हो । पीठ के पीछे और अगल-बगल सुनहरी काम की मखमली मसनदें लगी हुई हैं। सामने हाथ बांधे दासियां खड़ी हों और वह राजकुमारियों जैसी वेशभूषा में उस सुसज्जित सिंहासन पर बैठी सामने दूर तक फैले हुए सीमाहीन समुद्र की ओर देख रही हो। जिसकी उत्ताल तरंगों को रौंदते हुए मराठों की अजेय जल सेना के विशाल जलपोत गर्व से विजय पताका फहराते हुए इधर से उधर आ-जा रहे हों।(146)
उपन्यास की कुछ कमियां-
गोली और चीख-
उपन्यास का यह महत्वपूर्ण और रोचक अध्याय है ।मेजर का कहना है जब हम गोली के रहस्य को हल कर लेंगे तो अपराधी को भी पकड़ लेंगे। यहाँ गोली का रहस्य तो स्पष्ट होता है लेकिन 'चीख' के विषय पर कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि वह चीख किसकी थी।
सुदर्शन पर आक्रमण-
डाक्टर सुदर्शन पर तीन बार हमला हो चुका था पर वह वैज्ञानिक होते हुये भी इस विषय पर किसी से कोई चर्चा नहीं करता और और जिस दिन उस पर गोली चली उसी दिन वह अपनी मंगेतर संग होटल में घूमता है।
पिछले एक सप्ताह से उसे रोजाना कई-कई बार फोन कर चुका है ? जिसने आज सवर ही उसे फोन पर धमकी दी थी कि डाक्टर सुदर्शन अगर तुमने इस सौदे को मंजूर नहीं किया तो तुम्हें मौत के घाट उतार दिया जाएगा ?(पृष्ठ-)
वायुयान विस्फोट-
एक वैज्ञानिक की हत्या के लिए वायुयान तक को खत्म कर देनट जिसमें 180 यात्री थे। काफी अजीब लगता है जबकि वह वैज्ञानिक को वायुयान में खत्म भी नहीं कर पाते।
विशेषताएँ-
कर्नल रंजीत के उपन्यासों में कुछ घटनाएं निरंतर आती हैं जो इनकी विशेषताएँ भी हैं । यहां उन्हीं कुछ विशेषताओं का वर्णन प्रस्तुत है।
सुरंग और तहखानें:-
कर्नल रंजीत के उपन्यासों में प्राचीन दुर्ग, महल और ऐसे मकान मिलते हैं जिनमें तहखाने और सुरंगें होती हैं।
- इस पूरे दुर्ग के नीचे तहखानों और सुरंगों का जाल बिछा हुआ है। और इन तहखानों के नीचे भी तहखानों की एक मंजिल है।(पृष्ठ- 164)
चीख -
इनके उपन्यासों में अक्सर चीख का वर्णन मिलता है। यहाँ तो एक अध्याय का शीर्षक भी गोली और चीख है।
लकड़ी/ हाथी दांत के औजार-
कभी- कभी ऐसे वर्णन भी मिलते हैं।
उसके सीने में घुसे हुए छुरे का हाथी दांत का दस्ता स्पष्ट दिखाई दे रहा था ।(69)
पात्र परिचय:-
उपन्यास में आये पात्रों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है।मेजर बलवंत- मुख्य जासूस
डोरा, सोनिया, मालती, वाणी कल्याणी- मेजर के सहयोगी जासूस
सुधीर, सुनील- मेजर के सहयोगी जासूस
डाक्टर सुदर्शन कुमार नागर- वैज्ञानिक
शालीनी- डाक्टर सुदर्शन की मंगेतर
हरी- डाक्टर सुदर्शन का नौकर
प्रशांत भण्डारी- भूगर्भ शास्त्री
उमाकांत भण्डारी- प्रशांत भण्डारी के पिता
मोहना- भण्डारी की नौकरानी
रामधारी- भण्डारी का नौकर
आशुतोष मुखर्जी- वैज्ञानिक
अरविंद मेहता- मैनेजर ग्रीनलैंड होटल
कमल कपूर- असिस्टैण्ड मैनेजर ग्रीनलैंड होटल
यूलियाना- इटालियन डांसर
सुदर्शन, विक्रम, कुमार- इंस्पेक्टर पुलिस विभाग
कल्याण, जगजीत- काॅनस्टेबल
मिस्टर पालेकर- I.G. पुलिस
मिस्टर पटवर्धन- चीफ इंटेलिजेंस विभाग मुम्बई
डाक्टर वाल्टर- अपराधी
मार्था, जेक्लिन, एंथोनी- अपराधी के साथी
सोफिया- एक विशेष पात्र
मिसेज जोजफ, मंगल- गौण पात्र
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