एक देश की सत्ता पलटने की कहानी
चण्डी मंदिर का रहस्य- कर्नल रंजीत- 1990
एकान्त और रहस्यमय था चण्डी द्वीप। बहुत पुराना मंदिर था यहां। इसी में छिपे थे एटम का रहस्य चुराने वाले और वैज्ञानिकों के हत्यारे। ये विद्रोह कराने में सफल हो गए, पर एक दिन पकड़े गए। पढ़िए रोंगटे खड़े कर देने वाला धमाका।
चण्डीमंदिर का रहस्य - कर्नल रंजीत
एक बार फिर आपका स्वागत है #svnlibrary में जहां आप पढेंगे कर्नल रंजीत के एक विदेशी अभियान को। एक छोटे से देश में किस तरह मेजर बलवंत अपने साथियों के साथ देश को गुलाम बनाने वाले अपराधियों के खतरनाक षडयंत्र को खत्म करता है।समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ/ दृश्य को पढते हैं और फिर बात करेंगे उपन्यास के रोचक कथानक की ।
दो मेहमान
ऐरीना की राजधानी मांडवी के एयरपोर्ट पर अन्य दिनों की अपेक्षा आज सिक्योरिटी की कड़ी व्यवस्था दिखाई दे रही थी। एअरपोर्ट के अन्दर और एअरपोर्ट से राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाले राजपथ पर हर पांच गज की दूरी के बाद एक सशस्त्र सैनिक खड़ा दिखाई दे रहा था।
एअरपोर्ट की इमारत और दायीं ओर का मैदान लोगों से खचाखच भरा हुआ था लेकिन इतनी गहरी खामोशी छाई हुई थी कि एक-दूसरे की सांसों की हल्की आवाज भी एक-दूसरे को सुनाई दे रही थी।
और चारों ओर छाई हुई वह खामोशी उस समय और भी गहरी हो उठी जब कारों का एक काफिला एअरपोर्ट को पार करके इमारत के एक सुरक्षित भाग में पहुंचकर रुक गया ।
उन कारों में से ऐरीना के राष्ट्रपति रघुराज पल्लव उनके मन्त्रिमंडल के सदस्य, तीनों सेनाओं के अध्यक्ष और कुछ विशिष्ट व्यक्ति, जिनमें भारत के राजदूत भी थे, उतरे और इमारत के ठीक सामने आ खड़े हुए ।
तभी आकाश की ऊंचाइयों से इंडियन एअर लाइन्स का विशेष विमान उड़ता हुआ रनवे की ओर आता दिखाई दिया।
एअरपोर्ट और उनके आसपास खड़े लोगों की नजरें उस विमान पर जा टिकी ।(प्रथम पृष्ठ- चण्डीमंदिर का रहस्य- कर्नल रंजीत)
भारतभूमि से सैकडों मील दूर एक राष्ट्र है ऐरिना । ऐरिया को आजाद हुये अभी पच्चीस वर्ष ही हुये हैं। ऐरिना की ज्यादातर आबादी उन भारतीय लोगों की है जिन्हें ब्रिटिशकाल में मजदूरी के लिए ऐरिना में ले जाया गया था । इसलिए ऐरीना आज दूसरा भारत ही नजर आता है। वहां के लोगों का पहनावा, खानपान -संस्कृति भारतीय लोगों के समान ही है।
एक गौणपात्र लोरेंस एक विचार देखें-
"मैं भूगोल, इतिहास और विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं। हूं। मुझे तो ऐसा लगता है जैसे आर्यावर्त की धरती का ही एक टुकड़ा टूटकर समुद्र में बहता हुआ आर्यावर्त से सैकड़ों मील दूर चला आया हो। और आर्यावर्त की धरती का टुकड़ा होने के नाते ही उस टुकड़े को लोग आर्याना और फिर ऐरीना के नाम से पुकारने लगे हों।" लारेन्स ने मुस्कराते हुए अपना विचार प्रकट किया ।(पृष्ठ-148)
इसी ऐरीना में तात्कालिक राष्ट्रपति रघुराज पल्लव ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विभिन्न राष्ट्रोंके सम्मानित लोगों को आमंत्रित किया । भारत की तरफ से मेजर बलवंत भी उस आयोजन में शामिल थे ।
सबसे पहले उन्होंने मेजर बलवन्त को पुरस्कृत करते हुए कहा, "मेजर बलवन्त की गणना यों तो भारत के विख्यात जासूस के रूप में की जाती है लेकिन मैं इसे उचित नहीं समझता। मेजर बलवन्त ने अपना जीवन निर्धनों, निर्बलों और असहायों के लिए समर्पित कर दिया है और जिस व्यक्ति ने अपना समूचा जीवन मानवता के लिए समर्पित कर दिया तो, यह किसी एक देश की सीमा में बंधकर नहीं रह सकता। वह तो समूचे विश्व को अपना घर समझता है।" (पृष्ठ-22,23)
इसी समारोह में राष्ट्रपति महोदय की हत्या कर दी जाती है । और ऐरीना की शासन व्यवस्था उनके पुत्र देशराज पल्लव के हाथ में आती है। देशराज पल्लव की पत्नी का नाम पामेला है जो एक विदेशी महिला है।
देशराज पल्लव अपने पिता के हत्यारे को खोजने का काम मेजर बलवंत को देते हैं।
मेजर बलवंत तो हत्या के समय से ही सक्रिय थे लेकिन उन्हें नहीं मालूम था कि राष्ट्रपति की हत्या तो एक आरम्भ है क्योंकि उसके बाद ऐरीना के वैज्ञानिकों की हत्या भी हो जाती है। हत्यारे इतने शक्तिशाली हैं की वह राष्ट्रपति भवन तक में घुस कर हमला कर सकते हैं, राष्ट्रपति के सलाहकार के घर में घुस सकते हैं। राष्ट्रपति की कार पर हमला कर सकते हैं। और मेजर बलवंत को इन्हीं लोगों को खोजना था ।
वहीं राष्ट्रपति कार्यालय से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक फाइले भी गायब हो जाती हैं और हत्याएं भी । मेजर बलवंत, राष्ट्रपति और अन्य कार्मिक हैरान थे कि राष्ट्रपति भवन से फाइलें चोरी करने वाला कौन हो सकता है।
आज विश्व में एक तरफ ईरान- अमेरिका-इजराइल युद्ध, रूस- युद्ध, पाक और अफगानिस्तान हमले जारी हैं वहीं एपस्टीन फाइल ने न जाने कितने लोगों के चेहरों से पर्दा हटाया है। इन सब के पीछे आखिर क्या है ?
एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र की आंतरिक गतिविधियों को जानना चाहता है, उसके सीक्रेट जानना चाहता है और कुछ राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को खत्म करने के लिए कुचक्र भी रचते हैं। साम-दाम-दण्ड- भेद की नीति सतत चलती आ रही है। आज भी यही हो रहा है और ऐसा ही ऐरीना के साथ हो रहा था। ऐरीना को आजाद हुये मात्र पच्चीस वर्ष ही हुये थे लेकिन कुछ राष्ट्र ऐरीना की आजादी को सहन नहीं कर पा रहे थे और वह ऐरीना की प्रगति को खत्म करना चाहते थे । इसके लिए वह हर तरह के कुचक्र रच रहे थे। किसी की हत्या की तो किसी को हन्नीट्रेप में फंसा दिया ।
अब मेजर बलवंत को इन कुचक्रों को भेदना था और उस अपराधी को खोजना था जो ऐरीना में रहकर ऐरीना को खत्म करना चाहता था ।
कर्नल रंजीत के उपन्यास या कहें की जासूसी उपन्यास घटनाप्रधान ही होते हैं लेकिन प्रस्तुत उपन्यास घटनाप्रधान होते हुये भी विचारप्रधान भी है। एक उदाहरण देखें-
"पुनीत, एक एक बात हर समय याद रखना। भले ही तुम्हारा कोई व्यक्ति कितना ही घनिष्ठ और विश्वास पात्र क्यों न हो, उसे अपने ऑफिस या विभाग की कोई भी गोपनीय बात मत बताना। और अगर तुम किसी सम्बद्ध अधिकारी को कुछ गोपनीय फाइलें भेजो तो वापसी पर उन्हें गिन जरूर लेना । तुम्हारा पद एक जिम्मेदार पद है, मन्त्री तो आते हैं चले जाते हैं लेकिन मन्त्रालय की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सेक्रेटरियों पर ही होती है।"(पृष्ठ-47)
वहीं राष्ट्रपति की पत्नी का एक कथन देखिए-
पामेला ने जल्दी से कहा, "दुश्मन से डरकर घर में बैठ जाना कायरता है। आप तो राजनीति के पण्डित हैं। क्या आप यह नहीं जानते कि जब तक कोई देश युद्ध की आग में से आगे बढ़ने का रास्ता नहीं बनाता, न तो शक्तिशाली बनता है ओर न महान । अगर आपको अपने देश को विश्व में महत्व-पूर्ण स्थान दिलाना है तो आपको युद्ध करना ही पड़ेगा।" पामेला ने दृढ़ता-भरे में कहा ।(63)
उपन्यास का अंत इतना प्रभावित नहीं करता जितनी मुझे उम्मीद थी। एक तो मुख्य अपराधी को अंतरराष्ट्रीय अपराधी दिखाया गया। (ऐसा अन्य उपन्यासों में भी है) जबकी एक देश की सत्ता को पलटना मात्र दो-तीन आदमियों का काम नहीं हो सकता ।
उपन्यास के कमजोर पक्ष-
उपन्यास के कमजोर पक्ष की बात करें तो प्रथम तो उपन्यास का शीर्षक इतना मजबूत नहीं है जितना नजर आता है। उपन्यास में चण्डीमंदिर का रहस्य कोई विशेष बात नहीं है। और विशेष है तो चण्डीमंदिर में अग्निज्वाला का उठना और उसका कोई कारण स्पष्ट नहीं किया गया।
- उपन्यास में अपराधी को पता मध्य से पूर्व ही हो जाता है। हां उसके सहयोगी या बाॅस का पता नहीं चलता।
- लेखक महोदय एक विशेष अपराधी को बचाना चाहते थे और अंत में उसे बचा लिया, अच्छा भी दिखा दिया अगर इसकी जगह उपन्यास को यथार्थवादी रखा जाता तो ज्यादा अच्छा होता। पाठक प्रभावित होते ।
मेरे द्वारा पढे गये उपन्यास में से यह पहला वह उपन्यास है जिसके अंत में उपसंहार/ मेजर का भाषण आदि नहीं है।
दो अणु वैज्ञानिकों की हत्या ।
अणु रहस्यों वाली फाइल की चोरी और हत्याओं तथा अपहरणों का लम्बा सिलसिला - पता नहीं चल पाया कि कौन था इसके पीछे। चंडी मन्दिर में अचानक क्यों हलचलें बढ़ गई थीं ?
कौन वहां क्या कर रहा था ?
मेजर बलवन्त उन दिनों अपनी टीम के साथ वहीं थे ।
अपनी जान पर खेलकर कैसे उन्होंने देशद्रोहियों की चालें नाकाम कीं, यह पढ़िये जासूसी उपन्यास लेखन के सम्राट् कर्नल रंजीत की दिल हिला देने वाली कहानी चंडी मंदिर का रहस्य में।
कर्नल रंजीत द्वारा लिखा गया 'चण्डीमंदिर का रहस्य' एक ऐरीना नामक देश में ऐरीना की सत्ता को पलटने की कहानी है। जिसे मेजर बलवंत अपने बुद्धिबल से हराते हैं। उपन्यास का कथानक सामान्य है कोई विशेष बात नहीं है। उपन्यास में पात्रों विचार रोचक और पठनीय है।
उपन्यास- चण्डी मंदिर का रहस्य
लेखक- कर्नल रंजीत
संस्करण- 1990
पृष्ठ- 190
प्रकाशक- अभिनव पॉकेट बुक्स, दिल्ली
कर्नल रंजीत के अन्य उपन्यासों की समीक्षा
नकली चेहरे ।। उलटी लाशें ।। प्रेतात्मा की डायरी ।।
पीले बिच्छू ।। आग का समंदर ।। रात के अंधेरे में ।।
भयानक बौने ।। देख लिया तेरा कानून ।। टेडा मकान ।। हत्यारा पुल ।। रेत की दीवार ।। जानी दुश्मन ।। चीखती चट्टानें ।। खून के छींटें ।। सिरकटी लाशें ।। सफेद खून ।। चांदी की मछली ।। काला चश्मा ।। बोलते सिक्के ।। 11 बजकर 12 मिनट ।। हांगकांग के हत्यारे ।। लहू और मिट्टी
।। मृत्यु भक्त ।। वह कौन था ।। सांप की बेटी ।। खामोश ! मौत आती है ।। काली आंधी ।। हत्या का रहस्य ।। अधूरी औरत ।। ट्रेन एक्सीडेंट ।। हत्यारे की पत्नी ।। खूनी बदला ।।
नकली चेहरे ।। उलटी लाशें ।। प्रेतात्मा की डायरी ।।
पीले बिच्छू ।। आग का समंदर ।। रात के अंधेरे में ।।
भयानक बौने ।। देख लिया तेरा कानून ।। टेडा मकान ।। हत्यारा पुल ।। रेत की दीवार ।। जानी दुश्मन ।। चीखती चट्टानें ।। खून के छींटें ।। सिरकटी लाशें ।। सफेद खून ।। चांदी की मछली ।। काला चश्मा ।। बोलते सिक्के ।। 11 बजकर 12 मिनट ।। हांगकांग के हत्यारे ।। लहू और मिट्टी
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