प्यार बस प्यार ही नहीं एक वादा भी है....
क्या अब भी प्यार है मुझसे?- रविन्दर सिंह, उपन्यास
रविन्दर सिंह साहित्य में प्रेम रचनाओं के लिए जाने जाते हैं।
'क्या अब भी प्यार है मुझसे?' इनके अंग्रेजी उपन्यास.... का हिन्दी अनुवाद है। यह उपन्यास आबू रोड़ (सिरोही) रेल्वे स्टेशन से दिनांक 04.02.2020 को खरीदा था, इसके कुछभाग तो यात्रा के दौरान ट्रेन में ही पढ लिया था और बाकी पढने में कुछ समय लगा।
उपन्यास शीर्षक में प्रश्न चिह्न है। यह प्रश्न चिह्न उपन्यास के घटनाक्रम को परिभाषित करता है की आखिर कब, क्यों और किन परिस्थितियों में एक प्रिय को दूसरे से यह पूछना पड़ा की 'क्या अब भी प्यार है मुझसे?' और उसे प्रति उत्तर क्या मिला?
यह सब इस उपन्यास को पढने पर ही पता चलता है।
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Pic by- NB08022020
यह कहानी है पंजाब के राजवीर और पूर्वोतर की लावण्या की। जहां दोनों का राज्य अलग है वहीं दोनों की सभ्यता और संस्कृति ही नहीं शारीरिक बनावट भी अलग है।
एक परम्पराओं के अनुकरण करने वाले परिवार को यह कभी भी स्वीकृत नहीं की उनके परिवार का सदस्य अन्य संस्कृति का हो।
राजवीर के पिता भी यही कहते हैं-"प्यार दे चक्कराँ विच अन्हा होया पया है मुण्डा तेरा।"- राजवीर के पिता ने उसकी माँ से कहा।
लावण्या है शिलौंग की सदाबहार पहाड़ियों की रहने वाली और राजवीर है शाही शहर पटियाला से। भले ही दोनों की परिस्थितियों में धरती आसमान का अंतर है, फिर भी उन्हें मुंबई से चण्डीगढ़ जाने वाली फ्लाइट पर साथ बैठे-बैठे, बातों ही बातों में प्यार हो जाता है। कम से कम दोनों में से एक को तो- दूसरे को लगेगा एक उड़ान से कुछ ज्यादा समय.....
जब प्यार हो जाता है, तो कई सारी समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं। इसलिए, अगर राजवीर लावण्या का साथ चाहता है, तो उसे अपनों के कड़े विरोध का सामना करना ही पड़ेगा।
इसी बीच किस्मत एक ऐसा खेल खेलती है कि उनकी रोमांस भरी जिंदगी एक बेहद मुश्किल कगार पर आकर खड़ी हो जाती है। खासकर राजवीर के लिए, जो इस परिस्थिति का गुनाहगार भी है और उद्धारक भी। लावण्या की ओर उसके प्यार की कड़ी परीक्षा है। और यह पता नहीं कि आगे क्या होगा।
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