कहानी 'राॅ' के सर्वश्रेष्ठ जासूस की
लाश गिरेगी वाईपर की- गोपाल शर्मा
नमस्ते मित्रो,
आज हम यहां चर्चा करने जा रहे हैं पवन पॉकेट बुक्स के अंतर्गत प्रकाशित छद्म लेखक गोपाल शर्मा जी के उपन्यास 'लाश गिरेगी वाईपर की। '
वाईपर सीरीज का प्रथम उपन्यास का नाम 'वाईपर' था। मैंने पढा तो था पर यहां उसकी समीक्षा न लिख पाया। अब इसी शृंखला का उपन्यास 'लाश गिरेगी वाईपर की' पढा तो समीक्षा लिखने का विचार भी मन में आया तो एक छोटी सी , अव्यवस्थित सी समीक्षा इसलिए लिख दी की अन्य पाठक इस लेखक और पात्र के विषय में जान सकें।
कभी-कभी किसी महत्वपूर्ण पुस्तक पर न लिखने का अफसोस भी रहता है। जैसे- कैच फोर (कंवल शर्मा), चक्क पीरा दा जस्सा (बलवंत सिंह), राक्षस (नीतिश सिन्हा) जैसे और भी रचनाएँ पढी पर उन पर कुछ भी न लिख सका।
चलो, भविष्य में यथासंभव कोशिश रहेगी जो पढा जाये, उस पर लिखा जाये।
अब हम बात करते हैं प्रस्तुत उपन्यास की । इस उपन्यास का घटनाक्रम शिवालिक द्वीप से संबंधित है।
"क्या तुमने शिवालिक द्वीप का नाम सुना है?" भरत ने गला साफ करने के बाद पूछा।
