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Monday, 22 December 2025

697. The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

शरारती टाॅम के साहसी कारनामें
The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

  आज प्रस्तुत है एक प्रसिद्ध बाल उपन्यास की समीक्षा । एक शरारती और बहादुर बच्चे की रोमांच से भरपूर कहानी । 

"टॉम !"
कोई उत्तर नहीं ।
"ओ टॉम ! आखिय हो क्या गया है इस लड़के को ? ओ टॉम !"
बूढ़ी पाली मौसी ने अपना चश्मा नाक पर नीचे गिराकर, उसके ऊपर से कमरे में चारों ओर नजर दौड़ाई । फिय उन्होंने चश्मे को माथे पर चढ़ाकर चारों ओर देखा । चश्मे के अन्दर से शायद ही कभी उन्होंने देखने की कोशिश की हो। और सच तो यह है कि वह चश्मा आंख की कमजोरी के कारण नहीं, फैशन के लिए लिया गया था। वे थोड़ी देश तक उलझन में पड़ी खड़ी रहीं, फिर ककंश स्वर में तो नहीं, किन्तु स्वर को इतना तेज बनाकर जरूर बोलीं कि कम से कम कमरे में रखे फर्नीचर उनकी बात सुन सकें, "आज अगर मैं तुझे पकड़ पाऊं तो मैं..."
किन्तु वे अपनी बात पूरी नहीं कर सकीं, क्योंकि उन्होंने झुककर बिस्तर के नीचे झाड़ पीटना शुरू कर दिया था। किन्तु झाड़ पीटकर वे बिस्तर के नीचे से एक बिल्ली के अतिरिक्त और कुछ नहीं निकाल सकीं ।
"ओफ्, ऐसा लड़का तो मैंने कहीं देखा ही नहीं !" दरवाजे पर जाकर उन्होंने बाग में फैले टमाटर के पौधों और 'जिम्पसन' के वृक्षों के बीच भी देखा मगर कहीं भी टॉम का पता न था। सो अब स्वर को काफी ऊंचा करके चिल्लाई, "ओ टॉम !"