काव्या- किसलय की प्रेम कहानी
आपका रसिया- ओमप्रकाश राय 'यायावर'
'CORONA-19 वायरस' के चलते कुछ लेखक और प्रकाशक वर्ग ने पाठकों को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध करवायी ताकी पाठकवर्ग आराम से घर भी बैठा रहे और साथ में उसका मनोरंजन भी होता रहे। इस प्रयास के लिए धन्यवाद।
ओमप्रकाश राय 'यायावर' ने भी अपनी सद्यप्रकाशित उपन्यास 'आपका रसिया' की PDF पाठकवर्ग के लिए उपलब्ध करवायी।
'आपका रसिया' एक प्रेम कथा है, जो मार्मिकता और भावुकता के सागर में पाठक को डूबने पर विवश करती नजर आती है। लेकिन इस सागर की विशालता के कारण पाठक इस सागर में तैरता- तैरता उकता भी जाता है।
यह कहानी है किसलय और काव्या की जो पहली बार एक ट्रेन में मिलते हैं। फिर फेसबुक पर मिलते हैं और फिर प्रत्यक्ष मिलते हैं और यह धीरे-धीरे मिलना कब प्यार में बदल जाता है पता ही नहीं चलता। और प्यार का अर्थ है त्याग और समर्पण।
कहानी जब प्यार की है तो यह है प्यार की परिभाषाएं और प्यार के किसलय- काव्या के संवाद भी पढने को मिलेंगे।
जहाँ कारण हो वहाँ भला प्यार कैसा, प्यार तो अकारण होता है, प्यार तो अकाल और असमय होता है, असंस्कृत होता है, अभय होता है- अलक्ष्य, असीम, अनंत:, अधीर, अदृश्य, अजर, नि:शब्द, निर्बंध, निर्वाध, निराकार, युगसृष्टा और लज्जा रहित होता है।
काव्या- प्यार करना चाहिए या नहीं
किसलय- इसमें करने जैसी कोई बात नहीं होती, यह तो अलौकिक तत्व है, जो अपने आप प्रकट हो जाता है।....
आपका रसिया- ओमप्रकाश राय 'यायावर'
'CORONA-19 वायरस' के चलते कुछ लेखक और प्रकाशक वर्ग ने पाठकों को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध करवायी ताकी पाठकवर्ग आराम से घर भी बैठा रहे और साथ में उसका मनोरंजन भी होता रहे। इस प्रयास के लिए धन्यवाद।
ओमप्रकाश राय 'यायावर' ने भी अपनी सद्यप्रकाशित उपन्यास 'आपका रसिया' की PDF पाठकवर्ग के लिए उपलब्ध करवायी।
'आपका रसिया' एक प्रेम कथा है, जो मार्मिकता और भावुकता के सागर में पाठक को डूबने पर विवश करती नजर आती है। लेकिन इस सागर की विशालता के कारण पाठक इस सागर में तैरता- तैरता उकता भी जाता है।
यह कहानी है किसलय और काव्या की जो पहली बार एक ट्रेन में मिलते हैं। फिर फेसबुक पर मिलते हैं और फिर प्रत्यक्ष मिलते हैं और यह धीरे-धीरे मिलना कब प्यार में बदल जाता है पता ही नहीं चलता। और प्यार का अर्थ है त्याग और समर्पण।
कहानी जब प्यार की है तो यह है प्यार की परिभाषाएं और प्यार के किसलय- काव्या के संवाद भी पढने को मिलेंगे।
जहाँ कारण हो वहाँ भला प्यार कैसा, प्यार तो अकारण होता है, प्यार तो अकाल और असमय होता है, असंस्कृत होता है, अभय होता है- अलक्ष्य, असीम, अनंत:, अधीर, अदृश्य, अजर, नि:शब्द, निर्बंध, निर्वाध, निराकार, युगसृष्टा और लज्जा रहित होता है।
काव्या- प्यार करना चाहिए या नहीं
किसलय- इसमें करने जैसी कोई बात नहीं होती, यह तो अलौकिक तत्व है, जो अपने आप प्रकट हो जाता है।....
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