राणा वंश की एक ऐतिहासिक गाथा
राज सिंह- बंकिमचंद्र चटर्जी
राज सिंह- बंकिमचंद्र चटर्जी
बांग्ला भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार बंकिमचंद्र चटर्जी जी का साहित्य क्षेत्र में विशिष्ट नाम है। उनकी रचनाएँ अपने आप में विशिष्ट है। मेरे पास उनके कुछ उपन्यास है जिनको इन पढ रहा हूँ। । बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखित 'राज सिंह' वास्तविक घटना पर आधारित एक कल्पना और सत्य का मिश्रित उपन्यास है।
राजस्थान में रूपनगर नाम का एक नितांत छोटा सा राज्य था। वहाँ के राजा का नाम विक्रम सिंह था। यह राज्य की छोटी सी राजधानी का छोटा सा नगर था। राजा विक्रम सिंह राजपूत थे और इनकी पुत्री का नाम था चंचल कुमारी। नाम चाहे चंचल कुमारी था पर थी वह राजपूत शौर्य की धनी।
दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने उसे उसे अपने हरम में बुलाना चाहा तो चंचल कुमारी ने प्रण किया- दिल्ली न जा पाऊंगी, विष खा लूंगी। लेकिन अपनी परम सखी के कहने पर चंचल कुमारी ने राणा सांगा के वंशज राज सिंह को पत्र लिख कर सूचित किया कि वर्तमान में वह एकमात्र राजपूत क्षत्रिय है और आप मेरी रक्षा कीजिए।
अब एक तरफ औरंगज़ेब है तो दूसरी तरफ उदयपुर के राणा राज सिंह है। इन दोनों के मध्य है चंचल कुमारी। तो तय है संघर्ष तो होगा ही।
- आखिर इस संघर्ष का परिणाम क्या हुआ?
- राजकुमारी के प्रण का क्या हुआ?
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखित अर्द्ध ऐतिहासिक उपन्यास 'राज सिंह' पढे।
दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने उसे उसे अपने हरम में बुलाना चाहा तो चंचल कुमारी ने प्रण किया- दिल्ली न जा पाऊंगी, विष खा लूंगी। लेकिन अपनी परम सखी के कहने पर चंचल कुमारी ने राणा सांगा के वंशज राज सिंह को पत्र लिख कर सूचित किया कि वर्तमान में वह एकमात्र राजपूत क्षत्रिय है और आप मेरी रक्षा कीजिए।
अब एक तरफ औरंगज़ेब है तो दूसरी तरफ उदयपुर के राणा राज सिंह है। इन दोनों के मध्य है चंचल कुमारी। तो तय है संघर्ष तो होगा ही।
- आखिर इस संघर्ष का परिणाम क्या हुआ?
- राजकुमारी के प्रण का क्या हुआ?
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखित अर्द्ध ऐतिहासिक उपन्यास 'राज सिंह' पढे।