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Thursday, 23 July 2020

353. लाश का रहस्य - गुप्तदूत

किसकी थी वह लाश
लाश का रहस्य- गुप्तदूत

सब इन्सपेक्टर फिर लाश को ध्यानपूर्वक देखने लगा। लाश इतनी फूल चुकी थी कि न तो उसकी रंगत का अनुमान लगाया जा सकता था और न ही राष्ट्रीयता का। कपड़ों से कुछ अनुमान सम्भव था, लेकिन उसके शरीर पर तो बनियान और अंडर वियर ही थे, जो अब काफ़ी फट चुके थे और उनकी अब धज्जियां ही रह गई थीं। चेहरा तो पहचान योग्य था ही नहीं, बल्कि इतना भयानक हो गया था कि सिपाही तो उस पर नज़रें भी नहीं टिका सकते थे। - इसी उपन्यास में से
           लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में Ghost writing का एक विशेष दौर रहा है, और यह दौर काफी लम्बा चला है। इसी समय 'स्टार पब्लिकेशन' ने अपना एक छद्म लेखक 'गुप्तदूत' प्रस्तुत किया। गुप्तदूत के उपन्यास जासूसी और मनोरंजन से परिपूर्ण होते थे। गुप्तदूत नाम से किन-किन लेखकों ने लेखन किया है यह तो नहीं पता चला, लेकिन जो भी लिखा है वह पठनीय है।
   'गुप्तदूत' रचित उपन्यास 'लाश का रहस्य' पढने को मिला। यह एक मर्डर मिस्ट्री आधारित रचना है।

Tuesday, 22 October 2019

234. खतरनाक आदमी- गुप्तदूत

रहस्यमयी हत्याओं का सिलसिला... 
खतरनाक आदमी- गुप्तदूत       
                    गुप्तदूत नामक जासूसी उपन्यासकार का पहली बार कोई उपन्यास पढने को मिला। जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है ये छद्म लेखक रहे हैं। 'गुप्तदूत' 'नकाबपोश भेदी' 'मिस्टर' और 'अजगर' जैसे बहुत से छद्म लेखक हुए हैं। गुप्तदूत के उपन्यास 'स्टार पब्लिकेशन' के अंतर्गत 'गुप्तदूत सीरिज' श्रृंखला में प्रकाशित होते रहे हैं।          सूरज प्रकाश और युद्धवीर दो भाई थे। उनके पिता एक अनोखी वसीयत करके गये थे। वसीयत के अनुसार सूरज प्रकाश को तभी बारह लाख रूपये मिलेंगे जब उसकी पत्नी जीवित रहेगी। सूरज का यह दुर्भाग्य था की उसकी दो पत्नियों की मौत हो गयी। और अब तीसरी पत्नी की उसे चिंता थी क्योंकि चार दिन बाद वसीयत के अनुसार उसे रुपये मिलने थे और इन चार दिनो में सूरज को अपनी पत्नी की सुरक्षा करनी थी। सूरज अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए एक प्लान बनाता है, क्योंकि उसकी चिंता अपनी पत्नी की सुरक्षा की है- "क्या आपकी तीन पत्नियां हैं और आपको अपनी तीसरी पत्नी की सुरक्षा की ही चिंता है?" (पृष्ठ-07)

         लेकिन इन चार दिनो में घर में एक के बाद एक सदस्य की रहस्यमय और अजीब तरीकों से हत्या होती चली जाती है।      जासूस संजय और इंस्पेक्टर प्यारे लाल भी बहुत कोशिश के पश्चात इन सिलसेलवार हत्याओं को रोक नहीं पाते। उपन्यास के आरम्भ के पृष्ठ पर दिये गये कुछ रोचक कथन देखिएगा जो उपन्यास के रहस्यपूर्ण घटनाओं की जानकारी प्रदान करते हैं।
1.  हाथ में रबर गुड्डा।    बदन पर झालरदार लिबास।    चेहरे पर दो रंगा झिल्लीदार नकाब।    ऐसा था खतरनाक आदमी।   लेकिन क्या वह सचमुच खतरनाक आदमी था? 
2. एक मिलन कक्ष था- आनंद महल।    वह ऐय्याशी का कमरा था।    उसमें चार जंजीरें थी।    उनमें युवतियां लटका दी जाती थी।
3. तहखाना क्या था, रहस्यों का भण्डार था।    उनमें मोमबतियां जलाई जाती थी।    नंगी युवती, नंगा युवक... तहखाने के गलियारों में घूमते रहते।                   
क्यों इसका रहस्य जानने के लिए विख्यात जासूसी उपन्यासकार गुप्तदूत का रोंगटे खड़े कर देने वाला.... उपन्यास 'खतरनाक आदमी' पढिये।
      उपन्यास में जो भी हत्याएं होती हैं वे बहुत अजीब तरीके से होती है। पता नहीं कातिल सीधे काम को अजीब और टेढे ढंग से क्यों करता है। कुछ अजीब से पात्र हैं‌ जो बिना कोई विशेष लाॅजिक के उपन्यास में भटकते रहते हैं।
       उपन्यास की कहानी और घटनाएं वास्तव में दिलचस्प और रहस्यमयी है लेकिन अंत में जाकर बहुत सी घटनाओं का आपस में तारतम्य नहीं बैठता। - जैसे संध्या का कत्ल होता हैं। जो की युद्धवीर की पत्नी है। लेकिन वह युद्धवीर को छोड़ कर किसी और के साथ चली जाती है वहीं अंत में दिखा दिया की संध्या पहले सूरज प्रकाश की पत्नी थी और फिर युद्धवीर की पत्नी बन गयी। तहखाने का रहस्य भी उपन्यास को अजीब बनाने के लिए किया गया लगता है। जादूनाथ अर्थात् रबर का गुड्डे वाला दृश्य पाठक के मन में सिहरन पैदा करता है। उसकी वर्णन शैली लेखक की काबलियत दर्शाती है। उपन्यास में बहुत प्रसंग हैं जिनका वर्णन यहाँ संभव नहीं। कुछ प्रसंग प्रशंसनीय है तो कुछ अनावश्यक है। शायद उपन्यास जगत में एक दौर था जब घटनाएं इतनी उलझनपूर्ण होती थी की पाठक समझ ही नहीं पाता था की वह क्या पढ रहा है।
       उपन्यास की कहानी रहस्य के आवरण से लिपटी मर्डर मिस्ट्री पर आधारित है। एक के बाद एक कत्ल और जासूस संजय और इंस्पेक्टर प्यारे लाल की तहकीकात के पश्चात असली अपराधी का पता चलता है। उपन्यास में पात्रों के नाम, शाब्दिक और तथ्यात्मक काफी गलतियाँ है जो कहानी को भ्रमित करती हैं।
प्रस्तुत उपन्यास मर्डर मिस्ट्री पर आधारित एक रोचक कथानक है। उपन्यास कुछ ज्यादा ही उलझा हुआ है, जो कथा प्रवाह को धीमा करता है। लेकिन अंत सुकून प्रदान करता है।
उपन्यास- खतरनाक आदमी लेखक- गुप्तदूत प्रकाशक- स्टार पब्लिकेशन,
आसफ अली रोड़, नई दिल्ली।
पृष्ठ- 118
प्रथम संस्करण- 1973