तथाकथित तांत्रिक की रोचक कथा
अरे, ओमप्रकाश- मनहर चौहानसाहित्य के क्षेत्र में मनहर चौहान का नाम प्रयोगशील कथाकार के रूप में लिया जा सकता है। जहां एक तरफ इन्होंने गंभीर साहित्य के क्षेत्र में लेखन किया वहीं लोकप्रिय साहित्य में भी अपनी सार्थक उपस्थित दर्शायी है। लोकप्रिय साहित्य में स्वयं के नाम मनहर चौहान के अतिरिक्त छद्म नाम 'मीना सरकार' के नाम से भी लेखन किया है। वहीं अगर प्रयोग के रूप में देखें तो मनहर चौहान जी ने 'दस घण्टे' और 'अरे, ओमप्रकाश' जैसी रचनाओं का निर्माण किया है जो साहित्यिक और लोकप्रिय साहित्य का मिश्रण हैं। 'अरे, ओमप्रकाश' एक ऐसे चालाक आदमी की कथा है जो मनुष्य के स्वभाव का फायदा उठाता है। वह चालाकी के साथ लोगों को मूर्ख बनाकर अपनी जेबें भरता है।
कहानी का संबंध सिर्फ यूरोप से है, भारत से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। समस्त पात्र भी यूरोपियन हैं। हालांकि प्रथम दृष्टि यह प्रतीत होता है यह कहानी भारत की है। कथानक का नाम 'ओमप्रकाश' अवश्य भारतीय है, क्योंकि वह अमरीकी लोगों को भारत के ज्ञान के आधार पर ही मूर्ख बनाता है। लेकिन ओमप्रकाश ने तो कभी भारत देखा ही नहीं।
"कौन ओमप्रकाश?"- यह प्रश्न सहज ही आपके मस्तिष्क में उभरा होगा। तो हमे पहले ओमप्रकाश को ही जान लेते हैं।
