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Saturday, 23 October 2021

467. अंतिम अरण्य- निर्मल वर्मा

मृत्यु से पूर्व....
अंतिम अरण्य- निर्मल वर्मा
             हिन्दी साहित्य में निर्मल वर्मा एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। इनका रचना कर्म पाठक को एक अलग संसार की यात्रा करवाता है,वह संसार जो हम सब के अंदर है लेकिन‌ हम व्यक्त नहीं कर पाते। और निर्मल वर्मा इसलिए भी जाने जाते हैं‌ की उनका 'कहने' का ढंग बहुत अलग है। 
निर्मल वर्मा

  एक ऐसे लेखक जो पात्रों की जगह वातावरण और दृश्यों के माध्यम से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से बात को व्यक्त करते हैं।
    निर्मल वर्मा जी का उपन्यास 'अंतिम अरण्य' पढा।
जिसे हम अपनी ज़िन्दगी, अपना विगत और अपना अतीत कहते हैं, वह चाहे कितना यातनापूर्ण क्यों न रहा हो, उससे हमें शान्ति मिलती है। 

Sunday, 7 February 2021

418. वे दिन- निर्मल वर्मा

कहां गये वो दिन...
वे दिन- निर्मल वर्मा, उपन्यास

हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर निर्मल वर्मा को पढने का अर्थ है उनके पात्रों में स्वयं को ढाल लेना, उन में जी लेना।
   शिमला में जन्में निर्मल वर्मा कथाकार और पत्रकार रहे हैं। उनकी रचनाओं को पढने से यह तो स्पष्ट होता है कि वे ठण्डे दिनों की बात अवश्य करते हैं, क्या यह उन पर शिमला का ही प्रभाव है। निर्मल वर्मा चेकोस्लोवाकिया रह चुके हैं, इसका प्रभाव 'वे दिन' रचना में दृष्टिगत होता है।
  मैंने सबसे पहले निर्मल वर्मा जी की रचना 'परिंदे' पढी थी। अवसाद से ग्रस्त पात्रों की मार्मिक रचना थी। उसके बाद लंबे समय पश्चात उपन्यास 'वे दिन' पढा। दोनों में बहुत समानता भी है और अंतर भी। 

वे दिन- निर्मल वर्मा
वे दिन- निर्मल वर्मा
   वे दिन उपन्यास चेकोस्लोवाकिया में रह रहे एक भारतीय विद्यार्थी की कथा है। क्रिसमस के दिनों में जब काॅलेज- यूनिवर्सिटियां बंद हो जाती हैं, तब भी कुछ प्रवासी विद्यार्थी होस्टल में रहते हैं। इन्हीं में से एक है भारतीय विद्यार्थी इंदी।
   एक आस्ट्रिया महिला रायना जो की अपने पति से अलग रहती है। वह अपने पुत्र मीता के साथ चेकोस्लोवाकिया के शहर प्राग में घूमने आती है।