मृत्यु से पूर्व....
अंतिम अरण्य- निर्मल वर्मा
हिन्दी साहित्य में निर्मल वर्मा एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। इनका रचना कर्म पाठक को एक अलग संसार की यात्रा करवाता है,वह संसार जो हम सब के अंदर है लेकिन हम व्यक्त नहीं कर पाते। और निर्मल वर्मा इसलिए भी जाने जाते हैं की उनका 'कहने' का ढंग बहुत अलग है।
एक ऐसे लेखक जो पात्रों की जगह वातावरण और दृश्यों के माध्यम से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से बात को व्यक्त करते हैं।
निर्मल वर्मा जी का उपन्यास 'अंतिम अरण्य' पढा।
जिसे हम अपनी ज़िन्दगी, अपना विगत और अपना अतीत कहते हैं, वह चाहे कितना यातनापूर्ण क्यों न रहा हो, उससे हमें शान्ति मिलती है।
अंतिम अरण्य- निर्मल वर्मा
हिन्दी साहित्य में निर्मल वर्मा एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। इनका रचना कर्म पाठक को एक अलग संसार की यात्रा करवाता है,वह संसार जो हम सब के अंदर है लेकिन हम व्यक्त नहीं कर पाते। और निर्मल वर्मा इसलिए भी जाने जाते हैं की उनका 'कहने' का ढंग बहुत अलग है।
| निर्मल वर्मा |
एक ऐसे लेखक जो पात्रों की जगह वातावरण और दृश्यों के माध्यम से ज्यादा प्रभावशाली ढंग से बात को व्यक्त करते हैं।
निर्मल वर्मा जी का उपन्यास 'अंतिम अरण्य' पढा।
जिसे हम अपनी ज़िन्दगी, अपना विगत और अपना अतीत कहते हैं, वह चाहे कितना यातनापूर्ण क्यों न रहा हो, उससे हमें शान्ति मिलती है।
