अमेजन के खतरनाक जंगलों में...
नमस्ते,
svnlibrary ब्लॉग पर किसी काॅमिक्स की यह पहली समीक्षा है। ब्लॉग पर ज्यादा समीक्षाएं उपन्यासों की हैं और उपन्यासों के अलावा विविध विधाओं की समीक्षाएं लिखी हैं पर किसी काॅमिक्स के विषय में लिखने का यह पहला अवसर है। बचपन छूटा तो काॅमिक्स का साथ भी छूट गया। कभी राज कॉमिक मेरी प्रिय हुआ करती थी। इसके अतिरिक्त बालहंस पत्रिका में छपने वाली चित्रकथा 'ठोला राम, कवि आहत' जैसी कथाएं आज भी याद आती हैं तो गुदगुदाती हैं। कभी किसी अज्ञात पत्रिका में प्रकाशित होने वाली 'इंस्पेक्टर आजाद' चित्रकथा की आधी-अधूरी याद, मन में इसलिए कसक पैदा करती है की उसे पूरा नहीं पढ पाये और ऐसी ही कसक 'बालहंस' पत्रिका की 'बिसतुईया' पैदा करती है।
समय के साथ-साथ सब काॅमिक्स/ चित्रकथाएं खत्म होती चली गयी। लेकिन जिनके मन में जुनून होता है, उनका यह जुनून समय के साथ बढता चला जाता है।
ऐसा ही जुनून था 'एनकोंडा' काॅमिक्स वालों का और जन्म लिया 'KORWA COMICS' ने और हमारे सामने आयी एक जबरदस्त काॅमिक्स 'एनकोंडा- अमेजन का दानव' ।
नमस्ते,
svnlibrary ब्लॉग पर किसी काॅमिक्स की यह पहली समीक्षा है। ब्लॉग पर ज्यादा समीक्षाएं उपन्यासों की हैं और उपन्यासों के अलावा विविध विधाओं की समीक्षाएं लिखी हैं पर किसी काॅमिक्स के विषय में लिखने का यह पहला अवसर है। बचपन छूटा तो काॅमिक्स का साथ भी छूट गया। कभी राज कॉमिक मेरी प्रिय हुआ करती थी। इसके अतिरिक्त बालहंस पत्रिका में छपने वाली चित्रकथा 'ठोला राम, कवि आहत' जैसी कथाएं आज भी याद आती हैं तो गुदगुदाती हैं। कभी किसी अज्ञात पत्रिका में प्रकाशित होने वाली 'इंस्पेक्टर आजाद' चित्रकथा की आधी-अधूरी याद, मन में इसलिए कसक पैदा करती है की उसे पूरा नहीं पढ पाये और ऐसी ही कसक 'बालहंस' पत्रिका की 'बिसतुईया' पैदा करती है।
समय के साथ-साथ सब काॅमिक्स/ चित्रकथाएं खत्म होती चली गयी। लेकिन जिनके मन में जुनून होता है, उनका यह जुनून समय के साथ बढता चला जाता है।
ऐसा ही जुनून था 'एनकोंडा' काॅमिक्स वालों का और जन्म लिया 'KORWA COMICS' ने और हमारे सामने आयी एक जबरदस्त काॅमिक्स 'एनकोंडा- अमेजन का दानव' ।
