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Friday, 31 May 2019

196. वायुपुत्रों की शपथ- अमीश

शिव रचना त्रय का तृतीय भाग
वायुपुत्रों की शपथ- अमीश

वायुपुत्रों की शपथ अमीश द्वारा रचित शिव रचना त्रय का तृतीय भाग है। एक शिव रचना एक विशाल ग्रंथ है और यह उसका अंतिम भाग है।
        वायुपुत्रों की शपथ के अंतिम आवरण पृष्ठ लिखा हुआ उपन्यास अंश पहले पढ लेते हैं।
शिव अपनी शक्तियाँ जुटा रहा है। वह नागाओं की राजधानी पंचवटी पहुंचता है और अंततः बुराई का रहस्य सामने आता है। नीलकण्ठ अपने वास्तविक शत्रु के विरूद्ध धर्मयुद्ध की तैयारी करता है। एक ऐसा शत्रु जिसका नाम सुनते ही बडे़ से बड़ा योद्धा थर्रा जाता है।
एक के बाद एक होने वाले नृशंस युद्ध से भारतवर्ष की चेतना दहल उठती है। ये युद्ध भारत पर हावी होने के षड्यंत्र हैं। इसमें अनेक लोग मारे जायेंगे। लेकिन शिव असफल नहीं हो सकता, चाहे जो भी मूल्य चुकाना पड़े। अपने साहस से वह वायुपुत्रों तक पहुंचता है, जो अब तक उसे अपनाने को तैयार नहीं थे


- क्या वह सफल हो पायेगा?
- बुराई से लड़ने का उसे क्या मूल्य चुकाना होगा?


इस कथा का आरम्भ होता है। शिव के नागाओं से मिलने के बाद जहाँ उन्हें पता चलता है की 'बुराई क्या है।' और शिव उस बुराई को खत्म करने की ओर बढते हैं। यहाँ शिव का सामना उन से होता है जिन्होंने शिव को नीलकण्ठ नाम दिया।

195. नागाओं का रहस्य- अमीश

शिव रचना त्रय का द्वितीय भाग
नागाओं का रहस्य- अमीश त्रिपाठी

'मेलूहा के मृत्युंजय' ने शिव और सूर्यवंशियों की कहानी का सिरा जहाँ छोड़ा है ठीक वहीं से 'नागाओं का रहस्य' की कहानी आगे बढती है।
नागाओं ने शिव के मित्र बृहस्पति की हत्या की और अब उसकी पत्नी सत्ती की जान के पीछे पड़े हुए हैं। क्रूर हत्यारों की जाति नागाओं के इरादों का विफल करना ही शिव का एकमात्र लक्ष्य बन जाता है। प्रतिशोध की राह पर चलते हुए शिव नागवंशियों के क्षेत्र में पहुंचता है। यहाँ उसे मेलूहा के हमलवार को ढूंढना है। इस रोमांचक और खतरों से भरे सफर में दोस्त कब दुश्मन बन जाते हैं पता ही नहीं चलता।

- क्या शिव चन्द्रवंशियों और नागाओं से जुड़े सत्य तक पहुंच पाएगा?
- आखिर नागाओं का रहस्य क्या है?
- क्या शिव अपनी यात्रा में विजयी हो पायेगा?

रहस्य और रोमांच की दुनियां को जानने के लिए पढें -'नागाओं का रहस्य।'

Thursday, 30 May 2019

194. मेलूहा के मृत्युंजय- अमीश

शिव रचना त्रय का प्रथम भाग।
मेलूहा के मृत्जुंजय - अमीश त्रिपाठी

अमिश त्रिपाठी की 'शिव रचना त्रय' काफी चर्चित रही है। इस रचना त्रय के तीन भाग हैं। प्रथम 'मेलूहा के मृत्युंजय', द्वितीय 'वायुपुत्रों की शपथ' और तृतीय भाग है 'नागाओं का रहस्य'।
मेलूहा शब्द 'मोहन जोदड़ो' के निवासियों के लिए प्रयुक्त होता रहा है, हां यह भी संभव है यह शब्द सिंधु घाटी सभ्यता के लिए प्रयुक्त होता रहा हो।

               'मेलूहा के मृत्युंजय' पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं का एक अजीब सा काल्पनिक मिश्रण है। यह अजीब सा इस दृष्टि से है की लेखन ने जो कल्पनाएँ की वह भारतीय पौराणिक दृष्टिकोण से और समय के अनुसार बहुत तर्कसंगत नहीं हैं।

           यह कहानी आरम्भ होती है मानसरोवर निवासी 'गुण कबीले' के युवक शिव से। शिव जो गुण कबील का प्रमुख है। परिस्थितियाँ गुण कबीले को मेलूहा ले आती हैं। और परिस्थिति ही एक साधारण मानव शिव को पूज्य शिव बनाती है।
             शिव जो अपने क्षेत्र (मानसरोवर) का एक योद्धा है लेकिन मेलूहा में उसे नीलकण्ठ के नाम से विशेष प्रसिद्धि मिलती है। मेलूहावासियों का विश्वास है की प्रभु नीलकण्ठ का वर्णन पौराणिक गाथाओं में है और एक दिन प्रभु नीलकण्ठ उनकी मुसीबतों के निवारण के लिए अवश्य आयेंगे।