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Friday, 31 December 2021

499. बदकिस्मत कातिल - शुभानंद

जावेद, अमर,जाॅन (JAJ) सीरीज-02
बदकिस्मत कातिल- शुभानंद

    एक ही दिन में उसके हाथों दो क़त्ल हुए- एक - उसके दुश्मन का दूसरा - उसका जिसे वो पागलपन की हद तक प्यार करता था। वह एक बदकिस्मत कातिल था। पर उसकी किस्मत कुछ ऐसी थी कि जावेद-अमर-जॉन उसे अंत तक पकड़ न सके। (किंडल से) 
बदकिस्मत कातिल - शुभानंद


    लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में शुभानंद जी एक प्रकाशक और कथाकार के रूप में चर्चित व्यक्तित्व हैं। शुभानंद जी ने 'राजन-इकबाल रिबोर्न' सीरीज के अतिरिक्त अन्य पात्रों पर भी उपन्यास रचना की है। जासूस त्रय को लेकर लिखे गये इनके उपन्यास भी काफी  चर्चा में रहे।
      लोकप्रिय साहित्य में लंबे समय पश्चात खुफिया विभाग नाम सुनाई दिया है। इनके प्रसिद्ध जासूस त्रय 'जावेद-अमर- जाॅन' (JAJ) का संबंध खुफिया विभाग से है।
  अब कहानी पर कुछ चर्चा- 

Thursday, 30 December 2021

498. जोकर जासूस -शुभानंद

JAJ और जोकर सीरीज का प्रथम उपन्यास
 जोकर जासूस- शुभानंद
   लोकप्रिय उपन्यास साहित्य के अथाह सागर में एक से एक मोती भरे हुये हैं। आप एक डुबकी लगायेगे तो आपको बहुत कुछ मिलेगा। डिजीटल समय में 'किंडल' ने यह काम और भी सरल कर दिया है। इस माह मैंने किंडल का खूब उपयोग किया है। 
   किंडल पर उपलब्ध शुभानंद जी का उपन्यास 'जोकर जासूस' पढा आज उसी की चर्चा करते हैं। 
जोकर जासूस - शुभानंद
       प्रोफेसर अर्थर स्मिथ एक विदेशी वैज्ञानिक था जिसने एक ऐसे हथियार का आविष्कार कर लिया था जिसे पाने के लिये विश्व के कई आतंकवादी संगठन व माफिया लालायित थे। खुफ़िया एजेंसीज़ व पुलिस इस आविष्कार की तह तक पहुंचना चाहती थी । इस बीच अर्थर स्मिथ की रहस्यमय हालातों में मौत हो जाती है और उसकी एक फ़ाइल जिसमे हथियार से सम्बंधित सीक्रेट कोड्स छिपे थे, कई हाथों से होते हुए जोकर नाम के जासूस के हाथ आ जाती है। फ़ाइल पाते ही जोकर अपनी ही एजेंसी से बगावत करते हुए माफिया से जा मिलता है। आविष्कार को खोजते हुए सभी दिग्गज पहुँचते हैं भारत – जहाँ सीक्रेट सर्विस के एजेंट जावेद-अमर-जॉन उनके मंसूबो पर पानी फेरने के लिए तैयार हैं। 

497. सिहरन - शुभानंद

शी....कोई है।
सिहरन- शुभानंद, हाॅरर

कई साल अमेरिका में गुजारने के बाद आकाश भारत लौटता है। अपने बचपन के दोस्त अभिषेक के हालचाल लेने के बहाने वह अपने ननिहाल लखीमपुर पहुंचता है। अभिषेक के पुश्तैनी घर में रहते हुए उसे कुछ ऐसे अनुभव होते हैं जिनसे उसे किसी अज्ञात शक्ति के वास होने का अहसास होता है और फिर कुछ ऐसी घटनाओं का सिलसिला उस घर में शुरू होता है जिनकी उन्होंने कल्पना भी न की थी। (किंडल से)

सिहरन शुभानंद

Tuesday, 21 August 2018

136. रोड़ किलर- शुभानंद

ट्रैफिक नियम उल्लंघन करने वालों का दुश्मन...
रोड़ किलर- शुभानंद, जासूसी बाल उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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             इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नियमों की अवहेलना कर देते हैं। वो ये नहीं देखते की इस अवहेलना से किसी को नुकसान भी हो सकता है। मात्र स्वयं को आगे रखने की यह कोशिश किसी की जान भी ले सकती है।
       अगर बात करें ट्रैफिक नियमों की तो भारत में बहुत से लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते और कुछ लोगों को नियमों का पता भी नहीं होता। जिनकों पता होता है वे भी जानबूझ कर नियमों की अनदेखी करते हैं। यह उपन्यास ऐसे ही नियमों के उल्लंघन करने वालों की कथा कहता है।

शाम का वक्त था।
चौराहे पर रेड लाइट होने पर भी किसी से सब्र नहीं हो रहा था।
गिनती के कुछ वाहन ही स्टॉप लाइन के पीछे रुके थे। बाकी सभी ने धीरे-धीरे आगे बढना आरम्भ कर दिया।
हवा में सनसनाते हुए एक के बाद एक तीर उड़ते हुए आये और स्टॉप लाइन से आगे निकले लोगों के जिस्म में घुसते चले गये। (पृष्ठ-05)

                       वह एक ऐसा व्यक्ति था जो नियमों की अवहेलना करने वालों को मौत के घाट उतार देता था। उस के कारण लोगों में दहशत है। लोग ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने से डरते हैं,  वह चाहे जो भी हो लेकिन उस के डर से लोगों ट्रैफिक नियमों का पालन करना आरम्भ कर दिया।
रोड़ किलर की करतूतों का शहर के लोगों पर कुछ असर जरूर पड़ा था।
काफी लोग सड़क पर ढंग से चलने लगे थे। (पृष्ठ-18)

- आखिर वह लोगों को क्यों मार रहा था?
- उसका ट्रैफिक नियमों से क्या संबंध था।?
- आखिर कौन था रोड़ किलर?
     
           यह एक छोटा सा उपन्यास है जो एक ऐसे युवक की कहानी है जो ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को मार देता है। यही से यह प्रश्न उठता ही वह कौन है और क्यों लोगों को मार रहा है। हालांकि यह रहस्य ज्यादा देर तक नहीं रहता,  एक दो पंक्तियों से ( रोड़ किलर जो गीत गुनगुनाता है) से आभास हो जाता है की वह लोगों को क्यों मार रहा है।
         लेकिन इस के बाद भी उपन्यास में यह रहस्य बना रहता है की उसके जीवन में जो घटना घटित हुयी तो कैसे जिसके कारण वह रोड़ किलर बना। उपन्यास के अंत में भी एक रोचक ट्विस्ट है, हालांकि यह ट्विस्ट पहले कई फिल्मों में प्रयुक्त हो चुका है।
       इस रोड़ किलर को खोजने के लिए राजन- इकबाल, शोभा-सलमा की चौकड़ी तैनात की जाती है और वह रोड़ किलर को खोजती है।
   
           उपन्यास अम्बाबाद शहर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। अगर देखा जाये तो यह अम्बाबाद शहर गुजरात का अहमदाबाद लगता है। क्योंकि उपन्यास में गुजराती खानपान और बोली प्रयुक्त होती है।
   
          एक अजीब/ सनकी/ सिरफिरे रोड़ किलर और जासूस चौकड़ी का यह उपन्यास रोमांच से भरपूर है।
             
निष्कर्ष-
            एक अलग विषय पर लिखा गया यह लघु उपन्यास बहुत ही रोचक है। पृष्ठ चाहे इसके  कम हैं लेकिन कथा उतनी ही रोचक है।
         उपन्यास रोचक और पठनीय है। पाठक का भरपूर मनोरंजन करने में सक्षम है।
         
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उपन्यास- रोड़ किलर (बाल उपन्यास)
ISBN-
लेखक-    शुभानंद
प्रकाशक- सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ-    ‌‌‌‌‌    
मूल्य-       50₹

   विशेष-   यह राजन -इकबाल Reborn Series का चौथा उपन्यास है।
         

Tuesday, 6 March 2018

101. चालीसा का रहस्य- डाॅ. रुनझुन सक्सेना

हनुमान चालीसा और मर्डर मिस्ट्री का अनोखा संयोग।
चालीसा का रहस्य- रुनझुन सक्सेना, जासूसी उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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  लोकप्रिय उपन्यास साहित्य में जहां परम्परागत आधार पर उपन्यास लेखन की अंधानुकरण परम्परा रही है, वहीं कुछ लेखकों ने नये प्रयोग भी किये हैं। हालांकि ऐसे प्रयोग बहुत कम देखने को मिलते हैं । ऐसा ही एक प्रयोग किया है डाॅ. रुनझुन सक्सेना शुभानंद ने अपने प्रथम उपन्यास 'चालीसा का रहस्य' में। 
      उपन्यास में हनुमान चालीसा को आधार बना कर कैसे एक रहस्य को सुलझाया जाता है यह वास्तव में पठनीय है। लेखिका का यह प्रयोग कामयाब भी रहा है। हनुमान चालीसा के छंदों को एक नये रूप में प्रस्तुत करना प्रशंसनीय कार्य है।
               डाॅ. अंजना एक मशहूर शोधकर्ता होने ले साथ -साथ एक सुशिक्षित प्रोफेसर एवं अत्यंत प्रतिभाशाली गाइड भी थी। (पृष्ठ-5) और एक दिन दिल का दौरा पङा और उसके कुछ दिन उनकी मृत्यु हो गयी। सभी को डाॅ. अंजना की मृत्यु संदिग्ध लगी।
      डाॅ. अंजना का एक सुयोग्य शिष्य संजीव जो की डाॅ. अंजना के सानिध्य में P.HD. कर रहा होता है। जब संजीव डाॅ. अंजना की मृत्यु के पश्चात अपने थीसिस के पेपर लेने अंजना के घर जाता है वहाँ से उसे एक रहस्यम बक्सा मिलता है और उस बक्से के साथ एक हनुमान चालीसा की छोटी सी पत्रिका।
       लेकिन न तो वह बक्सा कोई सामान्य था और न वह हनुमान चालीसा। वह कोई साधारण बक्सा न था। वह एक विशेष पद्धति से खुलने वाला एक बक्सा था। 
और जब वह बक्सा खुला तो कई रहस्य सामने आये।

- क्या डाॅ. अंजना की मृत्यु स्वाभाविक थी या अस्वाभाविक?
- क्या था उस बक्से में?
- वह बक्सा कैसे खुला? (उपन्यास का यह एक सस्पेंश भाग है)
- संजीव की थीसिस का क्या हुआ?
- डाॅ. अंजना के कातिल कौन थे?
- डाॅ. अंजना की हत्या क्यों हुयी, कैसे हुयी?
- हत्यारा कैसे पकङा गया?
- क्या रहस्य था हनुमान चालीसा में?
    ऐसे एक नहीं अनेक प्रश्नों के उत्तर डाॅ. रुनझुन सक्सेना शुभानंद द्वारा लिखे गये उपन्यास 'हनुमान चालीसा' को पढकर ही‌ मिलेंगे।
         
          उपन्यास कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। जहाँ एक तरफ यह उपन्यास मर्डर मिस्ट्री है और उस मर्डर मिस्ट्री को हल करने वाले युवा हैं, वहीं उपन्यास में मेडिकल क्षेत्र की बहुत सी जानकारी भी उपन्यास में उपलब्ध है। इनके साथ-साथ हनुमान चालीसा की व्याख्या भी बहुत सुंदर ढंग से दी गयी।
           अगर बात सिर्फ हनुमान चालीसा की व्याख्या की करें तो यह व्याख्या मात्र धार्मिक दृष्टिकोण से न देकर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से दी गयी है। इसमें राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण आदि को प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
उदाहरण देखें- "...नायक भगवान राम हैं। वह शरीर है, जो कि तुम हो।.....माँ सीता ' आत्मा' है जो तुम्हारे सुक्ष्म शरीर (Astral body) का प्राण है.........इसी तरह लक्ष्मण तुम्हारी 'चेतना' या यूँ कहो कि 'विवेक' और 'इच्छा शक्ति' का रूप है।..।" (पृष्ठ-45)
          इसी प्रकार हनुमान चालीसा भी एक सामान्य पत्रिका न होकर हमारे मन को जानने का एक रास्ता है।
- हनुमान चालीसा तुम्हे तुम्हारे अंतस को जानने का रास्ता दिखाती है और हमारे सभी प्रश्नों के उत्तर भी वहीं छिपे होते हैं। बस जरूरत  सिर्फ यह जानने की है कि कैसे कोई अपने अंतस को पहचानकर उसके भीतर गहरे में छिपे गूढ ज्ञान को जानकर सारे उत्तर ढूँढने में सफल हो सकता है।"-(पृष्ठ-42)

गलती-