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Monday, 22 December 2025

697. The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

शरारती टाॅम के साहसी कारनामें
The Adventures of Tom Sawyer- Mark Twain

  आज प्रस्तुत है एक प्रसिद्ध बाल उपन्यास की समीक्षा । एक शरारती और बहादुर बच्चे की रोमांच से भरपूर कहानी । 

"टॉम !"
कोई उत्तर नहीं ।
"ओ टॉम ! आखिय हो क्या गया है इस लड़के को ? ओ टॉम !"
बूढ़ी पाली मौसी ने अपना चश्मा नाक पर नीचे गिराकर, उसके ऊपर से कमरे में चारों ओर नजर दौड़ाई । फिय उन्होंने चश्मे को माथे पर चढ़ाकर चारों ओर देखा । चश्मे के अन्दर से शायद ही कभी उन्होंने देखने की कोशिश की हो। और सच तो यह है कि वह चश्मा आंख की कमजोरी के कारण नहीं, फैशन के लिए लिया गया था। वे थोड़ी देश तक उलझन में पड़ी खड़ी रहीं, फिर ककंश स्वर में तो नहीं, किन्तु स्वर को इतना तेज बनाकर जरूर बोलीं कि कम से कम कमरे में रखे फर्नीचर उनकी बात सुन सकें, "आज अगर मैं तुझे पकड़ पाऊं तो मैं..."
किन्तु वे अपनी बात पूरी नहीं कर सकीं, क्योंकि उन्होंने झुककर बिस्तर के नीचे झाड़ पीटना शुरू कर दिया था। किन्तु झाड़ पीटकर वे बिस्तर के नीचे से एक बिल्ली के अतिरिक्त और कुछ नहीं निकाल सकीं ।
"ओफ्, ऐसा लड़का तो मैंने कहीं देखा ही नहीं !" दरवाजे पर जाकर उन्होंने बाग में फैले टमाटर के पौधों और 'जिम्पसन' के वृक्षों के बीच भी देखा मगर कहीं भी टॉम का पता न था। सो अब स्वर को काफी ऊंचा करके चिल्लाई, "ओ टॉम !"

Sunday, 26 January 2025

627. क्ली टापू पर रोमांच- तुनका भौमिक एंडो

तीन साहसी बच्चों का रोमांचक कारनामा
क्ली टापू पर रोमांच- तुनका भौमिक एंडो

लीशा समय-चक्र से बाहर निकल आई थी। वह अपने खयालों में इतनी खोई थी कि अपने आसपास की चकाचौंध पर भी उसकी नजर नहीं गई। 15 साल की उम्र के हिसाब से लीशा की लंबाई ज्यादा थी। उसके काले बालों की चोटी बनी थी। उसने चमकीले रंग का जो स्पेस सूट पहन रखा था, वह उसके दुबले शरीर पर एकदम सही बैठ गया था। वह एक परिसर में दाखिल हुई, जहां मधुमक्खी के विशाल छत्ते की तरह मकान बने थे। परिसर में हजारों छोटे-छोटे अपार्टमेंट बने थे। वह अपने घर के दरवाजे की ओर बढ़ी। उसने दरवाजे पर अपनी हथेली रखी, दरवाजा खुल गया और वह अंदर दाखिल हुई। गोलाकार बैठक मद्धिम, नारंगी रोशनी से रोशन हो गई और लीशा का पसंदीदा संगीत बजने लगा। स्पेस सूट उतार कर लीशा ने सूती कुर्ती पहनी और आराम से कमरे में चहलकदमी करने लगी।
उसने दीवार पर लगा एक बटन दबाया और दीवार एक विशाल पर्दे में बदल गई। डिजिटल वालपेपर सक्रिय हो गया था। घर के दूसरे कमरों की तस्वीर पर्दे पर दिखने लगी। लीशा ने देखा कि घर एकदम खाली था। डिजिटल पर्दा बंद कर वह मैसेज डेस्क पर गई। उसके सामने तुरंत उसकी मां की तस्वीर आ गयी । (प्रथम पृष्ठ से)

'क्ली टापू पर रोमांच' भविष्य की कहानी है हमें आने वाले खतरे की प्रति सचेत भी करती है। अपने कलवर में चाहे यह लघु है पर इसका संदेश का दायरा विस्तृत है। आप कल्पना कीजिए उस भविष्य की जहां आधुनिक और अति आधुनिक संयंत्र, कम्प्यूटर-इंटरनेट, भव्य बिल्डिंग और युद्ध सामग्री तो हमारे पास होगी पर हम से हमारा पर्यावरण और  शुद्धता छीन ली जायेगी ।
आप कल्पना कीजिए एक ऐसे समय की जहाँ पक्षी अतीत की बात होंगे, जहां रोबोट तो होंगे, जहां टाइम ट्रेवल्स तो संभव होगा पर 'हम' सब तकनीक के अधीन होंगे।

Tuesday, 21 January 2025

623. टोडा और टाहर - ई. आर. सी. दावेदार

मानवीय संवेदना और औद्योगीकरण की कहानी
टोडा और टाहर - ई. आर. सी. दावेदार

बाल साहित्य के अंतर्गत प्रस्तुत है एक अनुदित रचना जो एक बालक और उसके जानवर मित्र की रोचक कहानी है।

 
"कौन है वहां ?" करनोज ने कड़कती आवाज में पूछा। उसका कुत्ता कूच भी गुर्राया। दोनों के कान खड़े हो गए।
बालक करनोज अपने कुत्ते के साथ आसमान की ओर उभरी एक पहाड़ी चट्टान पर खड़ा था। उनके ठीक नीचे एक गहरी डरावनी खाई थी। वे इंतजार में ही थे कि फिर वही आवाज आयी। तड़प भरी चीख अब धीमी पड़ने लगी थी। करनोज को समझते देर नहीं लगी कि दो ऊंची चट्टानों के बीच स्थित जंगल की संकरी पट्टी से वह चीख उभरकर आयी थी। करनोज अपने कुत्ते के साथ उस पहाड़ी की तीखी ढलान पर तेजी से उसी दिशा में पूरी सावधानी के साथ दौड़ पड़ा। एक कदम भी गलत पड़ जाता तो सीधा फिसलकर वह खाई में जा गिरता। उन्होंने छोटे से सीलन भरे और अंधेरे जंगल में प्रवेश किया। करनोज अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा और अंधेरे में देखने की कोशिश करने लगा। मंद रोशनी में उसे जाल में फंसा हुआ एक नन्हा नीलगिरि टाहर दिखाई पड़ा। वह आखिरी बार हल्के से मिमियाया और छटपटाना बंद करके एकदम शांत होकर गिर पड़ा। करनोज ने सोचा, वह मर गया है। फंदे के तार से उसकी गर्दन अंदर तक कट गयी थी और वहां से खून बह रहा था।
(पुस्तक अंश)

Tuesday, 31 December 2024

616. जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ- जूल्स वर्न

पृथ्वी के केन्द्र की रोमांचक यात्रा
Journey to the center of the earth-
'चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो...'- आपने यह गीत तो जरूर सुना होगा, पर आज हम बात कर रहे हैं पृथ्वी के अंदर की। जहां चले हैं चाचा-भतीजा ।
जी हां, यह कहानी है चाचा-भतीजा की जो पृथ्वी के गर्भ की यात्रा पर निकले हैं, और इस यात्रा का नाम हैं - Journey to the center of the earth.
World Trade Park Jaipur-22.07.2021

और सांसों को थमा देने वाली पृथ्वी के केंद्र तक की साहसिक यात्रा प्रोफेसर वॉन हार्डविग और उनके भतीजे हैरी को एक रहस्यमयी पांडुलिपी का पता चलता है, जो हमेशा के लिये उनके जीवन को बदल देता है।
      उस पांडुलिपी के अध्ययन के पश्चात जब वे उसमे छिपी पहेली को सुलझा लेते है तब उन्हें पता चलता है यह पांडुलिपी सोलहवीं शताब्दी के एक आइसलैंडिक दार्शनिक द्वारा लिखा गया है। दार्शनिक, जिसने पृथ्वी के केंद्र तक जाने का एक गुप्त मार्ग खोजने का दावा किया था।
क्या वाकई में ऐसा कोई मार्ग था?

Friday, 21 April 2023

561. चाल पर चाल- जेम्स हेडली चेइज़ , विकास नैनवाल

कहानी एक झूठी औरत की
चाल पर चाल- जेम्स हेडली चेइज़ 
अनुवाद- विकास नैनवाल

छः माह से खाली बैठे प्राइवेट डिटेक्टिव डेविड फेनर को जब उस खूबसूरत युवती के आने की खबर मिली तो उसे लगा था कि शायद अब उसे कोई केस मिलेगा। वह कहाँ जानता था कि वह औरत अपने साथ मुसीबतों और रहस्यों का ऐसा झंझावात लेकर आएगी कि उसका अपनी जान बचाना दूभर हो जाएगा। अब हर चाल पे उसे ऐसी चाल चलनी पड़ेगी जो उसे मौत से दूर और सच्चाई के करीब लेकर आएगा। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा था… वह हर चाल पर मौत के नजदीक और सच्चाई से दूर जाता जा रहा था… सुप्रसिद्ध क्राइम लेखक जेम्स हेडली चेइज़ के उपन्यास डॉल्स बैड न्यूज़ का विकास नैनवाल द्वारा किया उत्कृष्ट हिन्दी अनुवाद।

   विकास नैनीताल जितने अच्छे एक पाठक हैं, उतने ही अच्छे एक अनुवादक भी हैं। विकास नैनवाल जी के ब्लॉग पर लिखे इनके आर्टिकल/ समीक्षा आदि पढने को मिल जाती हैं और अक्सर में पढता भी रहता हूँ। अनुवादक के रूप में मैंने इनकी यह प्रथम रचना पढी है जो काफी रोचक है।
  प्राइवेट डिटेक्टिव डेविड फेनर अपनी असिस्टेंट पाॅला के साथ अपने ऑफिस में थे अभी एक घबरायी हुयी ने वहाँ प्रवेश किया।

   वह औसत  से थोड़ी लंबी थी और छरहरे बदन की मालकिन थी। उसकी टाँगे बहुत लंबी, हाथ और पैर पतले और उसका शरीर किसी डाली-सा तना हुआ था। उसके बादल से काले बाल उसकी हैट के नीचे से दिख रहे थे। उसने एक बेहद खूबसूरत टू-पीस ड्रेस पहनी हुई थी और इसमें वह परी चेहरा बेहद जवान और डरी हुई लग रही थी।

Monday, 25 April 2022

516. तफ्तीश - सबा खान, जेम्स हेडली चेइज

आठ कत्ल और एक सिरफिरा
तफ्तीश- जेम्स हेडली चेईज
अनुवाद-  सबा खान

वैलेरी बर्नेट एक धनकुबेर की बेटी थी। उसने क्रिस बर्नेट से विवाह किया था जिस पर वह जान छिड़कती थी। मगर एक दुर्घटना ने उन दोनों का जीवन बदल दिया। दुर्घटना में क्रिस के सिर में लगी चोट ने उसे मानसिक रूप से अस्थिर कर दिया। फिर एक दिन वह चौबीस घंटों के लिए गायब हो गया। उसी दौरान एक होटल में एक युवती की नृशंस तरीके से हत्या हो जाती है।
-क्या उस हत्या से क्रिस का कोई संबंध था?
-या फिर वह केवल परिस्थितियों का शिकार था?
- क्या वैलेरी अपने पति के लिए कुछ कर पाई?
- क्या वाकई क्रिस निर्दोष था?
             विश्व प्रसिद्ध अपराध कथा लेखक ‘जेम्स हेडली चेज़’ के फ्रेंक टेरेल सीरीज़ के प्रथम एवं प्रसिद्ध उपन्यास ‘THE SOFT CENTRE’ का मूल ‘Corgi Edition’ से अविकल अनुवाद
। (Kindle से)

Saturday, 2 January 2021

411. अनोखा सफर- राधानाथ स्वामी

एक अमरिकी युवक आध्यात्मिक भारत यात्रा
अनोखा सफर- राधानाथ स्वामी, आध्यात्मिक यात्रा वृतांत


भारत भूमि अध्यात्म की भूमि है। ऋषि-मुनियों की भूमि है। यहाँ की भूमि में कुछ तो विशेष आकर्षक है जो अभारतीय भी यहाँ खींचे चले आते हैं। और उनके आने का उद्देश्य कोई सामान्य यात्रा नहीं है, वे तो आध्यात्मिक शांति के लिए यहाँ आते हैं। इस पवित्र धरा को समझने आते हैं।
ऐसा ही अमेरिकी युवक भारत आता है और फिर यहाँ का होकर रह जाता है। 
    राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हमारे आदरणी मैम रेखा चौधरी जी को आध्यात्मिक पुस्तकों में विशेष रूचि है। उनके सानिध्य में कुछ आध्यात्मिक किताबें मैंने भी पढी हैं। इस पुस्तक से पूर्व मैंने श्री एम की आध्यात्मिक रचना 'हिमालयवासी गुरु के साये में' पढी थी और संभव यह अध्ययन आगे भी यथावत जारी रहेगा।
   
अनोखा सफर- राधानाथ स्वामी
अनोखा सफर- राधानाथ स्वामी
यह यात्रा है एक बीस वर्षीय अमेरिकी युवक रिचर्ड की। उसे यात्रा का शौक था। एक बार किसी यात्रा में,नदी के किनारे उसे एक आवाज सुनाई देती है-भारत जाओ-भारत जाओ
  इस पुकार पर वह युवक अपना घर-ऐशोआराम त्याग कर 'हिचहाइक'(रास्ते में जो भी साधन मिला उसी से लिफ्ट लेकर यात्रा करना) द्वारा तुर्की, अफगानिस्तान जैसे खतरनाक और आतंकवाद क्षेत्र से पैदल भारत की ओर गमन करता है। खैबर दर्रे से होता हुआ जब वह भारत में प्रवेश चाहता है तो उसे प्रवेश नहीं मिलता। 

Monday, 24 August 2020

369. शालीमार- हसन अलमास

मौत की अंगूठी
शालीमार- हसन अलमास
The vulture is a patient Bird का हिन्दी अनुवाद

वह एक मौत की अंगूठी। जिसने भी उसे पाना चाहा, वह मौत के मुँह में समा गया। सदियों से वह अपने चाहने/पाने वालों को मौत की नींद सुलाती आयी है, और फिर भी उस अंगूठी को चाहने/ पाने की संख्या में कोई भी कमी नहीं आयी। हर कोई उस अंगूठी को पाना चाहता है।
         रवि पॉकेट बुक्स से अगस्त 2020 में जेम्स हेडली चेइज के उपन्यास 'The Valture is a patient Bird' का हिन्दी अनुवाद शालीमार शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। यह अनुवाद दिल्ली निवासी हसन अलमास साहब ने किया है। यह मात्र शाब्दिक अनुवाद नहीं है, यह शब्दों के साथ-साथ भावों का भी सार्थक अनुवाद है। अगर किसी कहानी का मात्र शब्द अनुवाद किया जाये तो वह कोई अच्छी पठनीय रचना नहीं बन पाती। अनुवाद में भाव, रस आदि का भी आनुपातिक प्रस्तुतीकरण आवश्यक है, इस दृष्टि से यह कृति सही है और अनुवाद महोदय के परिश्रम को दर्शाती है। 
Lower Kodra dam- Mount Abu
          मिस्टर आर्मो शालिक एक एजेंट था जो रुपयों के किए कुछ कानूनी और गैर कानूनी कार्य करता है। -
"...मेरे काम में मेरा पाला दौलतमंद बिगडैलों, काइयां बिजनेसमैनों और अरब के कुछ शहजादों से पड़ता है।" शालिक नर जवाब देते हुए कहा-"और वो मेरे क्लाइंट इसलिए हैं‌ कि मैं उनके कई नामुमकिन समझे जाते काम करता हूँ। "(पृष्ठ-53)
           इस बार उसके पास काम है एक बेहद खतरनाक अंगूठी को प्राप्त करना। जो की अफ्रीका के जंगलों में एक बेहद खतरनाक व्यक्ति के बेहद सुरक्षित म्यूजियम में हैं। इस काम के लिए आर्मो शालिक एक टीम तैयार करता है।
गैरी एडवर्ड्स- हेलिकाॅप्टर पायलट और कार हैंडलिंग का जानकार है।
कैनेडी जौन्स- अफ्रीका के जंगलों का जानकार।
मिस्टर ल्यू फेनल- एक्सपर्ट तिजोरी तोड़।

गे डेस्मंड- ट्रोज हाॅर्स, खतरनाक हसीना।
"... आज यहाँ मैंने आप लोगों को जिस आप्रेशन के तहत इकट्ठा किया है, उसका इकलौता मकसद है।"- शालिक शांत स्वर में बोला-" उस तारीखी अंगूठी को हासिल करना।"(पृष्ठ-41)
- उस अंगूठी में विशेष क्या है?
- वह मौत की अंगूठी क्यों कहलाती है?
- क्या, शालिक की योजना कामयाब रही?
- उस सुरक्षित म्यूजियम से अंगूठी चोरी हो पायी?
- अफ्रीका के खतरनाक जंगलों में कैसे गुजरे ?

इस सब प्रश्नों और घटनाओं को जानने के लिए हसन अलमास द्वारा अनुवादित 'शालीमार' उपन्यास पढना होगा।

Friday, 8 May 2020

311. रस्किन बाॅण्ड की कहानियाँ- रस्किन बाॅण्ड

रस्किन बॉण्ड की पांच सुपरहिट कहानियाँ

      बच्चों के प्रिय लेखक के नाम से प्रसिद्ध रस्किन बाॅण्ड का एक कहानी संग्रह kindle app पर पढा। इस संग्रहित में कुल पांच कहानियाँ है, जो उनके पूर्व के संग्रहों से ली गयी हैं।

       जावा से पलायन इस संग्रह की प्रथम कहानी है। यह कहानी जावा पर जापान के आक्रमण के समय की है। जब जावा पर जापान ने आक्रमण किया तो लेखक अपने पिता के साथ जावा से पलायन कर गया। यह कहानी पलायन और पलायन के दौरान आयी कठिनाईयों और उनसे संघर्ष करते साहसी लोगों की कहानी है। कैसे जावा से समुद्री विमान में सफर किया, कैसे विमान डूबने के पश्चात्‌ जान बचायी और कैसे एक छोटी नाव में ज्यादा लोग समुद्र में भटकते हुए किनारे तक पहुंचे।
यह कहानी एक प्रेरणा भी देती है कि मुसीबत में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

Saturday, 21 March 2020

279. खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन

जिम की साहसिक कथा......
खजाने की खोज- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
Treasure island का हिन्दी अनुवाद

बाल साहित्य की शृंखला में एक और कड़ी जुड़ गयी और वह कड़ी है राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन के उपन्यास खजाने की खोज की खोज की। यह बाल उपन्यास विद्यालय ले पुस्तकालय में है, अक्सर बच्चे इसे पढने के लिए ले जाते रहे हैं, बस एक मैं ही पुस्तकालय प्रभारी होकर इस उपन्यास को न पढ पाया था। कोरोना वायरस के चलते विद्यालय में बच्चों का अवकाश था तो यह उपन्यास उठा लिया। जब पढने बैठा तो इस रोचक कथानक में बहता चला गया।
एक छोटे से बच्चे की रोचक और साहस भरी दिलचस्प कहानी है। 

बहुत दिन पहले की बात है, मेरे पिता की एक सराय थी। अक्सर उसमें दूर-दूर के मुसाफिर आकर ठहरा करते थे। सराय का नाम था 'एडमिरल बेनवो'। एक दिन मुसफिर वहाँ आया। देखने से वह कोई जहाजी मालूम होता था।
इस बाल उपन्यास की कहानी यहीं से आरम्भ होती है। यह कहानी है जिम नामक एक साहसी युवक की और विल नामक जहाजी की। विल एक जहाजी और वह मुसीबतों के चलते एक सराय में आश्रय लेता है लेकिन मुसीबतें यहाँ भी उसका पीछा नहीं छोड़ती।
...आवाज सुनकर विल चौंक पड़ा, और उसे देखते ही उछलकर खड़ा हो गया और बोला, "कौन, ब्लैक डाॅग?"
"हां, मैं ब्लैक डाॅग ही हूँ। भला यहाँ तुमसे मिलने और कौन आ सकता है...."
(पृष्ठ-)
     इन खतरनाक लोगों के मध्य सराय के मालिक के पुत्र जिम के हाथ एक नक्शा लगता है। वह नक्शा है एक खजाने का। लेकिन जिम इतना सक्षम न था की वह इस खाजने को खोज ले।
      कप्तान स्लोमेट, जाॅन सिलवर, ट्रिनोली और डॉक्टर लिवेसे के संग जिम एक जहाज द्वारा खजाने की खोज में निकलता है। यहाँ से एक रोमांचक भरी और साहसी यात्रा आरम्भ होती है। "चलो, सीधे जहाज की ओर चलो। अब हमें यात्रा शुरू कर देनी चाहिए।" (पृष्ठ-30)
      यह यात्रा और उसके पश्चात एक टापू पर घटने वाली घटनाएं, खजाने की तलाश और खजाने के लिए जारी संघर्ष इस कथा को रोचक बना देता है।
नन्हें जिम के कारनामे उपन्यास की कथा में श्रीवृद्धि करते हैं। जिम और विल का चरित्र उपन्यास को बहुत रोचक बनाता है।
80 पृष्ठीय उपन्यास को लगभग सौ पृष्ठ तक बढाकर और भी रोचक बनाया जा सकता था, हालांकि उपन्यास अब भी रोचक है।
यह उपन्यास मुझे रोचक लगा। घटनाक्रम तीव्र है और घटनाएँ प्रभावशाली वह चाहे सराय की हो या टापू की। उपन्यास बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के लिए भी पठनीय है।

उपन्यास- खजाने की खोज
मूल उपन्यास- Treasure island
लेखक- राॅबर्ट लुईस स्टीवेन्शन
अनुवादक-
प्रकाशक- उषा पब्लिशिंग हाउस, जोधपुर
संस्करण-प्रथम, 2013
मूल्य- 110₹

Sunday, 30 June 2019

211. हादसा- संजय काले

एक हादसा जिंदगी बदल सकता है।
हादसा- संजय काले, मराठी से अनुवादित

हादसा संजय काले जी द्वारा रचित मराठी उपन्यास 'कधीतरी अचानक' का हिन्दी अनुवाद है। संजय काले जी का नाम मेरे किए तो नया है, इसी नयेपन की वजह से यह उपन्यास पढा।

        हादसा एक ऐसे कुछ ऐसे लोगों की कहानी है जो एक कम्पनी में सहकर्मी, दोस्त और पड़ोसी भी हैं। इनकी जिंदगी में कुछ ऐसे हादसे होते हैं जो इनकी जिंदगी को बदल कर रख देते हैं। क्या यह मात्र हादसे हैं या किसी के गहरे षड्यंत्र, खैर यह प्रश्न तो उपन्यास पढने पर ही हल होगा।
www.svnlibrary.blogspot.in
सुबोध एक कम्पनी का प्रमुख है। अमेय, मकरंद और श्री धर उसी कम्पनी के कर्मचारी हैं।
सुबोध, अमेय का बॉस था। उनके बगलवाले बंगले में रहता था। दो घरों की कंपौड वॉल कॉमन थी।

Saturday, 29 September 2018

143. कपालकुण्डला- बंकिमचन्द्र चटर्जी

कपालकुण्डला- बंकिमचन्द्र चटर्जी

बंकिमचन्द्र चटर्जी बांग्ला भाषा के सुप्रसिद्ध रचनाकार हैं। इनकी रचनाएँ विभिन्न भाषाओं में‌ अनुदित होती रही हैं।
इनकी एक रचना है, लघु उपन्यास है -कपालकुण्डला। मेरे लिए यह शब्द 'कपालकुण्डला' सदा से ही जिज्ञासा का विषय रहा है की आखिर इस शब्द का अर्थ क्या है।
जब यह उपन्यास मेरे विद्यालय राजकीय उच्च माध्यम विद्यालय-आबू पर्वत (माउंट आबू, सिरोही) के पुस्तकालय में नजर आया तो इसे तुरंत उठा लिया।
जब पढना आरम्भ किया तो बहुत रोचक और दिलचस्प लगा।
आज से अढाई सौ साल पहले माघ महिने में एक नाव यात्रियों से लदी हुई गंगासागर से वापस आ रही थी। उन दिनों समुद्री डाकू तथा पुर्तगाली लुटेरों के डर के कारण कोई भी नाव अकेले न आती थी क्योंकि अकेल आना खतरे से खाली न था। पर वह नाव अकेले ही आ रही थी। गहरे कुहरे तथा रात के अंधकार के कारण मल्लाह दिशा भूलकर गलत रास्ते को चल पड़े और उन्हें यह न पता चला कि किस ओर जा रहे हैं।


नाव रास्ता भटकी गयी और फिर नाव से अलग होकर एक युवक जंगल में रास्ता भटक गया। यह युवक है नव कुमार, उपन्यास का नायक। अनजान व्यक्ति निश्चय ही जंगल में थोडी़ दूर जाने पर ही रास्‍ता भूल जाता है। वही दशा युवक की भी हुयी। (पृष्ठ-08)
इस भटकाव में युवक की मुलाकात एक कापालिक से होती है। गले में रुद्राक्ष की माला थी। मुख पर लंबी दाडी़ तथा सिर पर जटाओं के होने से उसकी शक्ल पहचानना मुश्किल था। (पृष्ठ-06)
उसी कापालिक साधु के माध्यम से उसे वहाँ एक लड़की‌ मिलती। उस लड़की नाम है -कपाल कुण्डला।
ऐसे सुनसान जंगल में वह उस अपूर्व सुंदरी को देखकर दंग रह गया। वह युवती भी अपनी चंचल आंखों से उसे लगातार देखे जा रही थी। (पृष्ठ-8)
यहीं से नव कुमार और कपाल कुण्डला की प्रेम‌कथा आरम्भ होती है। कापालिक साधु तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए नव कुमार की बलि देना चाहता है। लेकिन कपालकुण्डला की मदद से वह, कपालकुण्डला को साथ लेकर शैतान कापालिक के जाल से निकल भागता है।
यह तो है कहानी का एक भाग या यूं‌ कह सकते हैं यह कहानी का मध्यांतर से पूर्व का भाग है। नव कुमार का बचपन में ही रिश्ता तय हो जाता है, लेकिन उस लड़की की विपरीत परिस्थितियों के चलते वह नव कुनार को मिल नहीं पाती। जब नवकुमार को मिलती है तो तब नव कुमार कपालकुण्डला के साथ शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन जी रहा होता है।
एक तरफ नव कुमार का वैवाहिक जीवन है, एक तरफ नव कुमार की बचपन की पूर्व मंगेतर पद्मावती (लुत्फुन्निया) है और एक तरफ शैतान कापालिक है।
लुत्फुन्निया ही नव कुमार और कपालकुण्डला के बीच दूरी पैदा करना चाहती है। "कपालकुण्डला के प्रति उसके पति के मन में घृणा पैदा करके उससे संबंध विच्छेद करना तभी मेरा कार्य सफल होगा।" (पृष्ठ-41)
यह कहानी मूलतः आपसी प्रेम और विश्वास की कहानी है। प्रेम तभी सफल जोतेहै जब तक उसमें विश्वास स्थापित रहता है। जब विश्वास नहीं होता तो प्रेम भी खत्म हो जाता है।
कपालकुण्डला एक संन्यासिन का जीवन जी चुकी है। उसके लिए प्रेम महत्वपूर्ण है, विश्वास महत्वपूर्ण है। जब वैवाहिक जीवन में विश्वास नहीं तो वह वैवाहिक जीवन कैसा। नवकुमार जब कपालकुण्डला पर अविश्वास प्रकट करता है तो वह कहती है- "क्या विश्वास की केवल आपको जरूरत है मुझे नहीं हो सकती? मेरे प्रति आपके दिल में बुरे भाव पैदा होना क्या मेरा अनादर नहीं है?" (पृष्ठ-62)
यही भाव दोनों की वैवाहिक जीवन को खत्म कर देता है।

उपन्यास का आरम्भ एक नाव से होता है जो रास्ता भटक गयी, तब लगता है यह उपन्यास कोई साहसिक समुद्री यात्रा से संबंधित है, बाद में नव कुमार जंगल में भटकता है और कापालिक से मिलता है, तब लगता है यह कोई हाॅरर कथा है। उपन्यास को पढने पर पता चलता है यह एक प्रेम कथा है जो आपसी विश्वास और प्रेम की बात करती है।
उपन्यास में लुत्फुन्निया का संबंध मुगल शासक वर्ग से दिखाया गया है और मुगल शासक सलीम का वर्णन भी उपन्यास में है। यह प्रकरण मेरे विचार से उपन्यास में‌ अनावश्यक सा लगता है। इसकी जगह पद्मावती उर्फ मोती बीबी उर्फ लुत्फुन्निया का वर्णन अन्य तरीक़े से होता तो ज्यादा अच्छा था।

उपन्यास का समापन बहुत ही मार्मिक है जो पाठक के हृदय में एक दर्द की टीस पैदा कर जाता है। उपन्यास आकार में छोटा है। पढने में रोचक और दिलचस्प है
-----------
उपन्यास- कपाल कुण्डला
लेखक- बंकिमचन्द्र चटर्जी
प्रकाशक- सन्मार्ग प्रकाशन, 16 UB, बैग्लो रोड़, दिल्ली-07
वर्ष- 1990
पृष्ठ-


उपन्यास के कुछ अंश यहाँ पढे जा सकते हैं।

https://www.pustak.org/books/bookdetails/3559





Wednesday, 10 January 2018

92. शाॅक ट्रीटमेंट- जेम्स हेडली चेइज

इश्क में पागल एक आशिक की खूनी कथा
शाॅक ट्रीटमेंट, उपन्यास, मर्डर मिस्ट्री, उत्तम।
बद् दिमाग अपाहिज खाविंद की कमसीन, जवान और बेइंतहा खूबसूरत बीवी के नामुराद इश्क में अंधा मूढमति आशिक हो तो फिर कत्ल भला कैसे न हो?
        कुछ उपन्यास ऐसे होते हैं जिन्हें आप पढना आरम्भ करते हो तो अंतिम पृष्ठ पढे बिना छोङने का मन ही नहीं करता। ऐसा ही प्रस्तुत उपन्यास है जेम्स हेडली चेइज का शाॅक ट्रीटमेंट।
    आदि से अंत तक रोचक से भरपूर। हर कदम पर नया और नया रहस्य लिए।
गर आप आज तक अपनी जिंदगी में किसी औरत की फर्जी मुहब्बत के फेर में नहीं पङे हैं तो आपको अपने तजुर्बे के दम पर मैं यही राय दूंगा कि- किसी औरत और उसकी फर्जी मुहब्बत के चक्कर में ना ही पङें तो बेहतर है- वर्ना आपकी भी वही हालत मुमकिन है जो कि मेरी हुयी थी।
   आज जब मैं आपको यह अपनी कहानी बता रहा हूँ तो अब उन दिनों की यादें भी मुझमें कोफ्त पैदा करती हैं।
   यह कहानी है कैलिफोर्निया की पहाडियों में बसे एक छोटे से कस्बे के एक व्यक्ति टेरी रीगन की।
   टेरी रीगन के कस्बे में एक विकलांग व्यक्ति मिस्टर डेगाले  अपनी पत्नी गिल्डा के साथ रहने आता है।
विकलांग होने के कारण मिस्टर डेगाले कुछ शकी, क्रोधी और सनकी स्वभाव का हो जाता है। और उसका गुस्सा अपनी बेहद खूबसूरत और जवान पत्नी गिल्डा पर उतरता है।
   मिस्टर टेरी रीगन भी गिल्डा की खूबसूरती पर फिदा हो जाता है। गिल्डा और टेरी रीगन की मोहब्बत भी परवान चढने लगती है।
   अमीर डेगाले, खूबसूरत गिल्डा और गरीब टेरी रीगन। अजीब पात्र है तीनों।
   डेगाले की सनक से गिल्डा भी परेशान है और टेरी रीगन भी।
तब टेरी रीगन गिल्डा को पाने के लिए एक साजिश रचता है और साजिश के तहत डेगाले का कत्ल कर देता है।
अब पुलिस उस कत्ल को आत्महत्या मान कर केस को बंद कर देती है।
  पर पाठक मित्र उपन्यास अभी बाकी है। कहानी में टविस्ट तो अभी शुरु ही हुआ है। और इस घटनाक्रम के पश्चात तो कहानी में टविस्ट पर टविस्ट आते हैं।
- कभी डेगाले की मौत हत्या लगती है और कभी आत्महत्या।
- कभी डेगाले अमीर लगता है और कभी गरीब।
- कभी कातिल टेरी रीगन लगता है और कभी गिल्डा।
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- क्या डिल्डा कभी टेरी रीगन की हो पायी?
- असली कातिल कौन है?
- क्या रहस्य है इस मौत के पीछे।
ऐसे एक नहीं अनेक प्रश्नों के उत्तर इस दिलचस्प उपन्यास में ही मिलेंगे।
  उपन्यास है भी इतना रोचक की पाठक एक बार आरम्भ करेगा तो इस उपन्यास को पूरा पढकर ही खत्म करेगा।
       हालांकि इस प्रकार के चौंकाने वाले घटनाक्रम वाले उपन्यास वेदप्रकाश शर्मा जी ने भी खूब ‌लिखे हैं। पर वेदप्रकाश शर्मा जी के उपन्यास में अनावश्यक विस्तार और परस्पर वार्तालाप ज्यादा होता है। इस उपन्यास में कहीं भी अनावश्यक विस्तार नहीं है। इस उपन्यास में अभी भी इतना स्पेश बाकी है की कोई भी प्रतिभाशाली लेखक इस कहानी को एक नया रूप दे सकता है। और ऐसा एक छोटा सा प्रयास इस उपन्यास के पीछे कँवल शर्मा जी ने ' एक ही अंजाम' नामक कहानी में किया भी है।
इस उपन्यास के पीछे कँवल शर्मा की इसी उपन्यास पर आधारित एक कहानी है 'एक ही अंजाम' पर उपन्यास और कहानी का क्लाइमैक्स अलग-अलग है।
    यह उपन्यास नये लेखकों के लिए भी प्रेरणा के समान है।
   जेम्स हेडली चेइज का प्रस्तुत उपन्यास ' शाॅट ट्रीटमेंट' बहुत ही रोचक व पठनीय उपन्यास है। मेरी व्यक्तिगत राय से इस उपन्यास को अवश्य पढें।
धन्यवाद।
  इन्हीं दिनों सूरज पॉकेट बुक्स से प्रकाशित जेम्स हेडली चेइज का उपन्यास 'आखिरी दांव' (One Bright Summer Morning ) पढा जो की सबा खान जी द्वारा अनूदित था। वह भी बहुत रोचक था।
  
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उपन्यास - शाॅक ट्रीटमेंट (Shock Treatment)
लेखक- जेम्स हेडली चेइज
अनुवादक- कँवल शर्मा
प्रकाशक- रवि पॉकेट बुक्स- मेरठ
पृष्ठ-
मूल्य- 60₹

Saturday, 30 December 2017

89. एक कैदी की करामात- अलेक्जेंडर ड्यूमा

एक ‌मासूम युवक की त्रासदी भरी कहानी।
बाल उपन्यास, रोचक- पठनीय
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             एलेक्जेंडर डयूमा का यह बाल उपन्यास बहुत ही रोचक है। 
यह एक एडमंड दांते नामक युवक की कहानी है जो एक पानी के जहाज पर काम करता है। यह एडमंड दांते नामक युवक बहुत ही सीधा है और हर किसी पर विश्वास कर लेता है इसी विश्वास के परिणाम स्वरूप उसे उस जुर्म की सजा हो जाती है जिसका उसे पता तक नहीं होता। 
  एडमंड को राजद्रोही माना जाता है, उसके पास से एक खत मिलता है।
     एक सिपाही ने जहाज से एडमंड के कमरे से मिला कागज मेयर के हाथ में रख दिया।........कागज देखते- देखते मेयर के माथे पर पसीना आ गया। (पृष्ठ-17)
   एडमंड दांते का बाप, उसकी मंगेतर और उसके जहाज का मालिक उसका इंतजार करते हैं लेकिन शहर का मेयर उसे एक टापू पर स्थित जेल में बंद करवा देता है।
        समुद्र के अंदर एक टापू है और उसी टापू पर एक जेल है। एडमंड दांते को उसी जेल में कैद रखा जाता है।
     उस जेल में एडमंड को  एक ऐसा व्यक्ति मिलता है जो उसे अमीर बना देता है। 
नन्हीं बहन प्रीती
नन्हीं बहन प्रीती
- एडमंड को जेल की सजा क्यों होती है?
- मेयर उस पत्र से क्यों घबरा जाता है?
- एडमंड जेल से बाहर कैसे निकला?
- एडमंड को जेल में मिला व्यक्ति कौन था?
- एडमंड अमीर कैसे बना?
- एडमंड ने अपने दुश्मनों से बदला कैसे लिया?
     जैसे एक नहीं अनेक प्रश्न है जो इस बाल उपन्यास को पढकर ही प्राप्त होंगे।

Thursday, 28 December 2017

86. आखिरी दांव- जेम्स हेडली चेइस

एक खतरनाक अपराधी का आखिरी दांव...
आखिरी दांव- जेम्स हेडली चेइज, थ्रिलर उपन्यास, रोचक, पठनीय।
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        जेम्स हेडली चेइज जासूसी उपन्यास जगत के वह सितारे थे जिनकी चमक दूर दूर तक थी। यही कारण है की इनके उपन्यास जितने लोकप्रिय अंग्रेजी में थे, स्वयं के देश में थे, तात्कालिक समय में थे, उतने ही लोकप्रिय आज हैं, विभिन्न देशों‌ में भी और विभिन्न भाषाओं में हैं।
        प्रस्तुत उपन्यास आखिरी दांव मूलत: अंग्रेजी उपन्यास One Bright Summer Morning का हिंदी अनुवाद है और यह अनुवाद किया है प्रसिद्ध अनुवादक सब्बा खान जी ने।
    उपन्यास जितना रोचक है अनुवाद उतना ही शानदार है।
      वे चार थे। वे एक राह के राही बनकर सफर पर निकले थे। उन्हें अपनी तकदीर संवारनी थी। अपने-अपने  अंधेरों की सियाही को दौलत की रौशनी से चमकाना था और फिर दौलत हासिल करने की उस खतरनाक राह पर उन्होंने खेला एक बड़ा और आखिरी दांव।
यह कहानी है क्रेमर नामक एक ऐसे अपराधी की जिसने बहुत धन कमा कर अपराध जगत से किनारा कर लिया और आराम‌ की जिंदगी जीने लगा। ज़रायम की दुनिया से किनाराकशी करने के बाद क्रेमर सही मायनों में एक इज्जतदार सामाजिक व्यक्ति बन गया था। (पृष्ठ-27) लेकिन उसके दिमाग में अक्सर अपराध जगत से संबंधित कुछ न कुछ चलता रहता था। ज़रायम की दुनियां में वापस  कदम न रखने के अपने पक्के इरादे के बावजूद, क्रेमर अपने खाली समय में वक्तगुजारी के लिए अक्‍सर शानदार बैंक-डकैतियां किसी अपहरण की फुलप्रूफ स्कीम बनाते बैठा रहता था। (पृष्ठ-28)
                  
                    एक दिन किस्मत ने क्रेमर को ऐसी स्थिति में ला पटका की वह अर्श से फर्श पर आ गया। अपनी शाही जिंदगी को बनाये रखने के लिए अब उसके लिए जरूरी था की वह कुछ ऐसा करता जिससे उसके पास पुन: दौलत एकत्र हो जाये।
                    क्रेमर ने अपने एक पुराने अपराधी मित्र मो जेगेटी, चिटा क्रेन एव रिफ क्रेन नामक भाई-बहन के साथ मिलकर एक ऐसा प्लान अपराधी जाल बुना जिसके बल पर उन्होंने विश्वास था की वो चार करोड़ डालर्स की रकम एकत्र कर लेंगे।
      ‌लेकिन पुलिस अधिकारी डेनिसन‌ जो लंबे समय से क्रेमर का इंतजार कर रहा था।  क्रेमर को थामने के लिए मैंने इक्कीस सालों तक इंतजार किया है।वह बड़ी मछली है, जो उस वक्त जाल से फिसल गयी थी और अब अगर वह वापस जुर्म की दुनियां में कदम रख रही है तो यह मेरी खुशकिस्मती है। (पृष्ठ-45)
    
        क्रेमर ने एक अभेद्य जाल बनाया और उस जाल में फंसा वान वाइलाई। वान वाइलाई शहर का एक प्रतिष्ठित अमीर आदमी था। वान वाइलाई की बेटी का अपहरण कर उससे चार करोड़ डॉलर की फिरौती मांगी गयी। लेकिन वान वाइलाई इतनी आसानी से रुपये देने वाला नहीं था। "अगर यह हरामखोर समझते हैं‌ कि मेरे चार करोङ डॉलर लेकर हवा हो जायेंगे, तो ये ख्वाबों में जी रहे हैं।" (पृष्ठ-122,23)
- क्या क्रेमर का प्लान कामयाब रहा?
- क्या क्रेमर को चार करोड़ डॉलर मिल पाये?
- आखिर क्रेमर और साथियों का प्लान क्या था?
- डेनिसन अपने उददेशे में सफल हो पाया?
- वान वाइलाई ने क्या धनराशि दे दी?
- बहन- भाई की जोड़ी ने आखिर क्या गुल खिलाया?

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उपन्यास में चार अपराधी हैं लेकिन चारों का स्वभाव बिलकुल अलग-अलग है। जहाँ क्रेमर और मो जगेटी अपराध जगत में दोबारा कदम रखते हैं वहीं चिटा और रिफ बहुत ही हरामी किस्म के इंसान हैं।
        क्रेमर का अपराध जगत में पुनः प्रवेश उसकी एक मजबूरी है लेकिन वह आज भी स्वयं को उतना ही सशक्त मानता है जितना पहले था लेकिन‌ मो जगेटी स्वयं को परिस्थितियों पर छोड़ देता है।
      अगर देखा जाये तो मो जगेटी का किरदार एक अपराधी का होते हुए भी एक कोमल ह्रदय व्यक्ति का है। वह अपनी माँ के सानिध्य से दूर नहीं जा सकता, वह विक्टर डरमोट की पता पर अत्याचार नहीं देख सकता और डरमोट के छोटे बच्चे से भी स्नेह रखता है।
   वहीं चिटा और रिट दोनों भाई बहन निकृष्ट मानसिकता के व्यक्ति हैं। वे किसी को भी मारते हुए नहीं हिचकते। उपन्यास में मो जगेटी से अनायास ही एक भावुकता का बंधन बन जाता है।
        उपन्यास में‌ समय- समय पर काफी मोड़ आते हैं‌ जो सहज ही पाठक को आकृष्ट करते हैं।
- मिस वाइलाई का अपहरण कर्ता रिफ क्रेन से प्यार हो जाना उपन्यास में एक रोचक प्रसंग है।
उपन्यास का समापन पृष्ठ दर पृष्ठ रोचक और घुमावदार है। कहा‌नी अंत में जाते-जाते काफी बदलती रहती है जिससे उपन्यास में रोचकता सहज और स्वाभाविक बनी रहती है।
                                 उपन्यास मनोरंजन है लेकिन उपन्यास में चिटा और रिफ का आगमन एक फिल्मी तरीके से होता है वह किस्सा उपन्यास में‌ अनावश्यक लगता है। एक ठिगने आदमी से लड़ाई और फिर उस ठिगने आदमी की उपन्यास में‌ कहीं कोई भूमिका भी नहीं है। दोनों कभी न जान पाये की वह ठिगना कौन था। (पृष्ठ-58) यह बात पाठक भी नहीं जान पाता।

अनुवादक-
           प्रस्तुत उपन्यास का अनुवाद चर्चित अनुवादक सब्बा खान जी ने किया है। इनका उपन्यास उपन्यास को सहज और सरल बना देता है। यह इनकी व्यक्तिगत विशेषता है।
         उपन्यास मात्र शब्दानुवाद ही नहीं है यह भावानुवाद भी है। कहीं कोई क्लिष्ट शब्द प्रयुक्त नहीं हैं। उपन्यास पढते वक्त कहीं भी यह महसूस नहीं होता है की हम‌ एक अनुवाद पढ रहे हैं।
      भाषा शैली  की कोमलता, सजीवता और धार प्रवाह उपन्यास को पठनीय बनाने में विशेष योगदान रखते हैं।
अनुवादक सब्बा खान जी धन्यवाद की पात्र हैं।
निष्कर्ष-
            उपन्यास की कहानी एक जुर्म की दुनियां से किनारा कर चुके अपराधी की पुन: जुर्म की दुनियां में आगमन की‌ कहानी है। कहानी अपने प्रथम पृष्ठ से ही रहस्य समेटे हुये है और ऐसे ही आगे बढती है।
    उपन्यास की भाषा शैली सब्बा खान जी के अनुवाद से बहुत अच्छी बनी है।
       उपन्यास रोचक और पठनीय है।
         
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उपन्यास-   आखिरी दांव
मूल नाम-   One Bright Summer Morning
लेखक-      जेम्स हेडली चेइज
अनुवादक-  सब्बा खान
प्रकाशक-   सूरज पॉकेट बुक्स
पृष्ठ-    219
मूल्य-  150₹
        



Friday, 17 November 2017

82. मेरी जीवन यात्रा- अब्दुल कलाम

कलाम की कहानी, उन्ही की जुबानी।
मेरी जीवन यात्रा, आत्मकथा, पठनीय।
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  एक साधारण परिवार के सामान्य से बच्चे से वैज्ञानिक और वैज्ञानिक से राष्ट्रपति बनने  का सफर वास्तव में पढने योग्य है। कलाम की आत्मकथा उनके कई अच्छे-बुरे संघर्षों का चित्रण करती है जो कि पाठक को आगे बढने की प्रेरणा भी देती है।
कलाम लिखते हैं- " मेरे जीवन की यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण अनुभव है, जिन्हें मैंने अपने बचपन से अब तक सँजोया है और अपने जीवन के 80 से अधिक वर्षों में प्राप्त किया है।"
                 इस पुस्तक में क्या है, -" मेरी अन्य पुस्तकों की तरह ' मेरी जीवन यात्रा' में मुख्य केन्द्र कुछ छोटी तथा अनजान सी घटनाएं थी, जो मेरे जीवन में घटित हुयी। अपने माता- पिता से जुङी अनेक घटनाओं की व्याख्या मैंने इस पुस्तक में की है।"
         संपूर्ण किताब को छोटे- छोटे 12 खण्डों में विभक्त किया है, यह किताब की रोचकता भी है। इस आत्मकथा में अधिकतर घटनाएं कलाम जी के बचपन और उनके परिवार का चित्रण करती नजर आती है। 
   कलाम जी के जीवन में अनेक अवरोधक पैदा हुए लेकिन कलाम जी ने कभी हार नहीं स्वीकार की।
जहाँ आजकल शिक्षित वर्ग ईश्वर के अस्तित्व का पूर्णत नकार देते हैं वहीं कलाम उस अदृश्य सत्ता से प्रभावित होकर लिखते हैं, - " हम सबके जीवन में दिव्य शक्ति विद्यमान है, जो हमें नकारात्मक क्षणों में तथा दुःख के पलों से उबरने की शक्ति देती है।" (पृष्ठ-21)
   आठ बरस का कमाऊ लङका नामक खण्ड में कलाम साहब के बचपन के संघर्ष का वर्णन है। मात्र आठ वर्ष की उम्र में कलाम साहब सुबह उठकर घर-घर
अखबार पहुंचाते थे और ट्युशन और विद्यालय भी जाते थे।
छोटी सी उम्र में कठिन मेहनत और उस पर भी कभी उनके चेहरे पर कभी निराशा नहीं झलकी।
     अपने शहर के प्रेम- साम्प्रदायिक सौहार्दपूर्ण वातावरण का चित्रण संकट मोचक तीन व्यक्ति नामक खण्ड में करते हैं।
         शहर के तीन नामी व्यक्ति और वह भी तीनों अलग- अलग धर्म से संबंधित थे पर शहर के अमन-चैन उन तीनों के लिए प्राथमिक था। और सच्चा धर्म भी वही है जो मनुष्य को सच्ची शांति प्रदान करे। इस वातावरण का कलाम के जीवन पर गहरा असर रहा
" अगर मेरे धर्म की बात की जाये तो निश्चित रूप से मेरे भाग्य ने मुझे विज्ञान और तकनीक क्षेत्र में पहुंचाया था, उसकी बुनियाद रामेश्वरम् से बनी थी। मैं हमेशा से ही विज्ञान में विश्वास करने वाला था, लेकिन इसके साथ ही मेरा आध्यात्मिक विश्वास था, जो कि युवावस्था में हि स्थापित हो चुका था।........मुझे ज्ञान की प्राप्ति कुरान, गीता तथा बाइबिल से मिली। इनके मिलाप से ही मेरे जीवन व संस्कारों का मिलाप मुझे अपनी जन्मभूमि से मिला था  और इस शहर के अनूठे संस्कारों ने मेरा पूर्ण विकास किया। (पृष्ठ 53)
     यह पुस्तक जो की कलाम जी के परिवार का मुख्यतः परिचय देती है। इसमें इनके परिवार को जानने- समझने का काफी अच्छा अवसर मिलता है। इसी पुस्तक का एक खण्ड है मेरी माँ और मेरी बहन
  इस खण्ड का आरम्भ इन पक्तियों से होता है
" सागर की लहरें, सुनहरी रेत, यात्रियों की आस्था,
   रामेश्वरम् की मस्जिद वाली गली, सब आपस में मिलकर एक हो जाती हैं,
वह है मेरी माँ।"
  द्वितीय विश्व युद्ध के उन कठिन दिनों का वर्णन भी मिलता है जब पूरे परिवार को राशन तय कोटे के अनुसार ही मिलता था लेकिन कलाम जी की ममतामयी माँ स्वयं भूखी रहकर अपने बच्चों को भरपेट खाना खिलाती थी।
और वहीं बहन जौहरा का वर्णन भी है जिसने कलाम जी की शिक्षा के लिए अपने आभूषण तक बेच दिये।
       कलाम जी का पुस्तक प्रेम तो सर्वविदित है, उन्होने जितना अच्छा पढा है उतना अच्छा लिखा भी है। 
" ...पुस्तकों से मेरा घनिष्ठ संबंध रहा है। वे मेरे अच्छे मित्रों की तरह है।"(पृष्ठ -87)
इस खण्ड में कलाम जी ने अपनी प्रिय पुस्तकों का भी जिक्र किया है।
प्रेरणादायक कथन-
- हमारे अंदर का दृढ विश्वास तथा हमारे अंदर के विचार है, जो हमारे कार्यों को प्रभावित करते हैं।
- मेरा मानना है की एक ही सत्ता (ईश्वर) है जो हर किसी सुनती है।(पृष्ठ 70)
- जो शिक्षक अपने विद्यार्थी की प्रगति का ध्यान रखता है, वही हमारा सर्वश्रेष्ठ मित्र होता है। (पृष्ठ-82)
- निराशा के भाव समाप्त होने के बाद इंसान की सोच में बदलाव आता है और उसके दृष्टिकोण में भी बदलाव आता है। (पृष्ठ 99)
- हम सिर्फ राजनीतिक घटनाओं को ही देश-निर्माण समझते हैं, परंतु बलिदान, परिश्रम तथा निर्भयता ही सही अर्थों में देश बनाती है। (पृष्ठ-106)
- विज्ञान एक आनंद और जुनून है।
         डाॅ. अब्दुल कलाम जी ने स्वयं के बारे में बहुत सुंदर शब्दों में बहुत ही अच्छी बात कही है, - कठिन परिश्रम, अध्ययन करना सीखना, सद्भाव तथा क्षमा कर देना- ये सब मेरी जिंदगी में मील के पत्थर हैं।
     पुस्तक में कई जगह करुण प्रसंग भी हैं जो कलाम जी को ताउम्र याद रहे और किसी भी पाठक को प्रभावित करने में सक्षम हैं।
अगर किसी भी पाठक को कलाम जी के जीवन को समझना है तो यह पुस्तक उनके परिवार और बचपन का अच्छा चित्रण करती है।
इस पुस्तक का अधिकांश चित्रण इनके परिवार से ही संबंधित है और कुछ अंश इनके वैज्ञानिक जीवन से  भी हैं लेकिन‌ पुस्तक में कलाम जी के राष्ट्रपति कार्यकाल का नाम मात्र वर्णन ही मिलता है।
पुस्तक भी भाषा शैली बहुत ही सरल और सरस है जो किसी भी पाठक को सहज ही समझ में आ जाती है। कहीं भी भारी भरकम या तकनीकी शब्दावली का प्रयोग नहीं किया गया।
हालांकि यह पुस्तक मूलतः अंग्रेजी में थी और यह इसका हिंदी अनुवाद है।
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पुस्तक-  मेरी जीवन यात्रा
ISBN -978-93-5048-797-6
लेखक - ए.पी. जे. अब्दुल कलाम आजाद
( 15.10.1931- 27.07.2015)
मूल पुस्तक- My journey
अनुवादक- महेन्द्र यादव
प्रकाशन- प्रभात पेपरबैक्स
www.prabhatbooks.com
संस्करण- 2017
पृष्ठ- 143
मूल्य- 150₹

Friday, 30 December 2016

11. दो स्टेट्स - चेतन भगत

 एक नकारात्मक उपन्यास की कथा

चेतन भगत के उपन्यास '2स्टेट्स' में एक प्रेमकथा है। दो IIT करने वाले विद्यार्थी एक प्रेम सूत्र में बंध जाते हैं, लेकिन इस प्रेम को शादी तक पहुंचाने में जो समस्या आती है वह इस उपन्यास की मूल कथा है।
  दिल्ली के एक पंजाबी परिवार का लङका और तमिलनाडु के एक ब्राह्मण परिवार की कन्या। दो अलग-अलग राज्य, दो अलग-अलग संस्कृतियां इन दोनों को आधार बनाया है उपन्यासकार ने।
   उपन्यास '2स्टेट्स' के अंतिम पृष्ठ पर लिखे कथन इस कथा को बयान करते हैं। 

     "दुनियां भर में लव मैरिज का फंडा बहुत सिंपल होता है।
लङका लङकी को प्यार करता है, लङकी लङके को प्यार करती है। दोनों शादी कर लेते हैं।
लेकिन इंडिया में कुछ और स्टेप्स होती है-
लङका लङकी को प्यार करता है, लङकी लङके को प्यार करती है।
लङकी की फैमिली को लङके को प्यार करना होता है।
लङके की फैमिली को लङकी को प्यार करना होता है।
लङकी की फैमिली को लङके की फैमिली को प्यार करना होता है।
लङके की फैमिली को लङकी की फैमिली से प्यार करना होता है।
लङका लङकी अब भी एक दूसरे को प्यार करते हैं। दोनों शादी कर लेते हैं।
   2 स्टेट्स में आपका स्वागत है। यह क्रिश और अनन्या की कहानी है, जो भारत के दो अलग-अलग हिस्सों से हैं। दोनों एक-दूसरे को बेहद प्यार करते हैं और शादी करना चाहते है। जाहिर है, उनके पैरेंट्स को उनकी शादी से एतराज है। अपनी लव स्टोरी को लव मैरिज में बदलने के लिए दोनों को एक बहुत मुश्किल लङाई लङनी पङती है, क्योंकि लङना और बगावत करना तो आसान है, लेकिन किसी को राजी करना कठिन है।
क्या वे दोनों कामयाब हो सकेंगे।
   यह किस्सा है उपन्यास '2 स्टेट्स' का।

Sunday, 25 December 2016

9. फाइव पाॅइंट समवन- चेतन भगत

Five point someone - CHETAN BHAGAT
                .................................  .
'फाइव पाॅइंट समवन' चेतन भगत का  उपन्यास है। चेतन भगत अंग्रेजी के लेखक हैं और उनके उपन्यास युवावर्ग में काफी लोकप्रिय हैं। क्योंकि उनके उपन्यासों की कहानियां युवावर्ग पर ही केन्द्रित  होती हैं।
       प्रस्तुत उपन्यास 'five point someone' भी छात्रवर्ग की कहानी है, जिस पर राजुमार हिरानी की आमिर खान कृत फिल्म 'three idiots' बन चुकी है, हालाकि फिल्म व उपन्यास की मूल कहानी  वही है पर बाकी घटनाओं में बहुत विभिन्नता है। फिल्म में जितनी रोचकता है उपन्यास में उतनी नहीं।
   कहानी है IIT करने वाले तीन मित्रो रेहान, आलोक व हरि की। पूरी कहानी का सूत्रधार स्वयं आलोक है।
इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नालॉजी के तीन फाईव पाॅइंटर विद्यार्थी जो इंस्टीट्यूट के कठोर वातावरण से किस प्रकार जूझते हैं व साबित करते है की रट्टा मारकर अच्छे अंक लाना वास्तविक सफलता नहीं है॥ 
 काॅलेज में पहुंचे तीनों मित्र IIT काॅलेज को एक मौज-मस्ती का काॅलेज मानकर आते है लेकिन IIT इंस्टीटयूट के कठोर वातावरण में स्वयं को स्थापित नहीं कर पाते।
  काॅलेज जीवन ही विद्यार्थी के मौज-मस्ती का समय होता है और उस पर IIT जैसा सख्त इंस्टीट्यूट आपके जीवन को निर्दयता से कुचल देता है।