Hindi Pulp Fiction में सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का एक विशिष्ट स्थान है। मर्डर मिस्ट्री उनका लेखन अद्वितीय है। लेकिन मर्डर मिस्ट्री के अतिरिक्त थ्रिलर उपन्यासों में जो उन्होंने कमाल किया है, जो लेखन है वह मुझे विशेष रूप से प्रभावित करता है।
निरंजन चौधरी जी द्वारा लिखा गया एक उपन्यास मैंने पढा जिसकी कहानी पाठक जी के एक उपन्यास से मिलती थी। वहीं कुछ पाठक मित्रों ने बताया की तीन उपन्यासों की एक ही कहानी है। तो मैंने वह तीसरा उपन्यास भी पढ लिया। दो उपन्यासों की कहानी पूर्णत एक जैसी है और एक में कुछ परिवर्तन है।
देवेन्द्र पराशर ने अपनी बीवी के अतीत को कभी महत्व नहीं दिया। उसकी दृष्टि में यही महत्वपूर्ण था की वह उसे अथाह प्रेम करती थी। लेकिन एक रात, उस अनोखी रात में उसकी बीवी घर से गायब हो गयी। जब देवेन्द्र पराशर उसकी तलाश में निकला तो उसके सामने अपनी बीवी माया के अतीत की ऐसी काली परतें सामने आयी की वह सहम उठा।