राजमहल के षड्यंत्र की कहानी
विजय दुर्ग का रहस्य- कर्नल रंजीत
लोकप्रिय कथा साहित्य में प्रतिशोध और रहस्यमयी- विचित्र कथाओं के लिए कर्नल रंजीत का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। उलझे कथानक, ज्यादा पात्र और शृंखलाबद्ध हत्याएं उनके उपन्यासों की विशेषता रही है।
मैं इन दिनों सतत् कर्नल रंजीत के उपन्यास पढ रहा हूँ और मनोरंजन की एक अलग ही दुनिया में विचरण कर रहा हूँ। मनोरंजन की इस अनोखी दुनिया में आप भी मेरे साथ-साथ घूम लीजिए- विजयदुर्ग का रहस्य उपन्यास में। सस्पेंस, रोमांच, साहसपूर्ण घटनाओं के जादूगर कर्नल रंजीत का रोंगटे खड़े कर देने वाली अनूठी कहानी से पूर्ण चौंका देने वाला नया विशेषांक
विजयदुर्ग का रहस्य
उपन्यास के मुख्य आकर्षण
- पतंग के आकार के दिल दहलाने वाले जैट विमान।
- कांच की गोली से राजमहल में धमाका ।
- तालों में बंद लाश का गायब हो जाना ।
- मेजर बलवंत और सोनिया के बेजान शरीर हिलाने - डुलाने पर भी न हिले ।
- मंदिर में पूजा करती हुई महिला सहसा लापता ।
- प्रेम में असफलता और राज घराने की पुश्तैनी दुश्मनी कितना भयानक रूप धारण कर गई यह जानने के लिए पढ़िए 'विजयदुर्ग का रहस्य' ।(अंतिम आवरण पृष्ठ से)
मेजर की बांग्ला यात्रा और मुक्तिवाहिनी का संघर्ष
मेजर बलवंत बांगलादेश में- कर्नल रंजीत
बंगला देश में, मानवता को लज्जित करने वाले पाकिस्तानी तानाशाहों के घोर अत्याचारों तथा भीषण गोला-बारी के बीच, भारतीय जासूस मेजर बलवंत के अत्यन्त साहसिक कार्यों और हैरत में डाल देने वाले जासूसी के चमत्कारों से भरपूर उपन्यास
नमस्ते पाठक मित्रो,
कर्नल रंजीत के उपन्यासों की समीक्षा में हम संगरिया (राजस्थान) निवासी मित्र रतन चौधरी जी से पढने के लिए प्राप्त हुये 15 उपन्यासों की समीक्षा के क्रम में आज हम पढ रहे हैं 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास की समीक्षा ।
पूर्व में हम 'पीले बिच्छू' नामक उपन्यास पढ चुके हैं जिसमें मेजर बलवंत बांगला देश जाते हैं और प्रस्तुत उपन्यास में भी वह बांगलादेश जाते हैं पर दोनों उपन्यासों की यात्रा में एक बड़ा अंतर है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।
पहले हम 'मेजर बलवंत बांगलादेश में' उपन्यास के प्रथम पृष्ठ का अवलोकन करते हैं। प्रथम अध्याय का नाम है- मनुष्य का भाग्य ।