युवा उम्मीदों की कहानियाँ
#कहानीवाला- संदीप डोबरियाल
संदीप डोबरियाल नाम मेरे लिए पूर्णतः अपरिचित है। पहली बार किंडल पर इनका एक कहानी संग्रह दिखाई दिया सोचा यही पढ लिया जाये।
इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ है जो युवावर्ग से संबंधित है। वे चाहे होस्टल, काॅलजे के हो या किसी कम्पनी में कार्यरत। आधुनिक सोच को परवाज देता यह कहानी संग्रह प्यार, मस्ती के साथ साथ कुछ सामाजिक समस्याओं को भी प्रस्तुत करता है। हालांकि कुछ कहानियाँ प्रतीकात्मक होने के कारण घटनाएं सी प्रतीत होती हैं, लेकिन संवेदना के स्तर पर कहीं कम नहीं है।
ज़िंदगी उलझ गई है, पतंग की डोर की तरह। एक सिरा सुलझाऊँ, तो दूसरा उलझ जाता है। अब तो सुलझाने का मन भी नहीं करता। सच कहूँ तो हिम्मत भी नहीं बची है। (कहानी पतंगें से)
अधिकांश कहानियाँ डोर की तरह उलझे जीवन की कहानियाँ है।
#कहानीवाला- संदीप डोबरियाल
संदीप डोबरियाल नाम मेरे लिए पूर्णतः अपरिचित है। पहली बार किंडल पर इनका एक कहानी संग्रह दिखाई दिया सोचा यही पढ लिया जाये।
इस संग्रह में कुल नौ कहानियाँ है जो युवावर्ग से संबंधित है। वे चाहे होस्टल, काॅलजे के हो या किसी कम्पनी में कार्यरत। आधुनिक सोच को परवाज देता यह कहानी संग्रह प्यार, मस्ती के साथ साथ कुछ सामाजिक समस्याओं को भी प्रस्तुत करता है। हालांकि कुछ कहानियाँ प्रतीकात्मक होने के कारण घटनाएं सी प्रतीत होती हैं, लेकिन संवेदना के स्तर पर कहीं कम नहीं है।
ज़िंदगी उलझ गई है, पतंग की डोर की तरह। एक सिरा सुलझाऊँ, तो दूसरा उलझ जाता है। अब तो सुलझाने का मन भी नहीं करता। सच कहूँ तो हिम्मत भी नहीं बची है। (कहानी पतंगें से)
अधिकांश कहानियाँ डोर की तरह उलझे जीवन की कहानियाँ है।












