सुनील-08
आरती भंडारी की मां उसके लिये अपनी सारी सम्पत्ति एक ऐसे ट्रस्ट के रूप में छोड़ कर मरी थी जिसका कि उसके इक्कीस साल के होने पर उसके कंट्रोल में आने का प्रावधान था। फिर ज्यों ही ट्रस्ट का संचालन आरती के काबू में आया, उसमें से कुछ निश्चित रकम गायब होने लगी जिसके बारे में उसके पिता का खयाल था कि उसे कोई शैतान ब्लैकमेल कर रहा था। लोकप्रिय साहित्य में मर्डर मिस्ट्री लेखन में सुरेन्द्र मोहन पाठक अद्वितीय प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने सुनील चक्रवर्ती नामक अपने एक पात्र के माध्यम से उपन्यास जगत में पदार्पण किया। सुनील के उपन्यास मर्डर मिस्ट्री पर आधारित होते हैं। सुनील 'ब्लास्ट' नामक समाचार पत्र में खोजी पत्रकार है।
यूथ क्लब का मालिक रमाकांत सुनील का घनिष्ठ मित्र है। सुनील अपने अन्वेषण के दौरान रमाकांत की मदद लेता रहता है।
एक दिन रमाकांत अपने मित्र भंडारी के साथ सुनील से मिलता है।
“सुनील।” - परिचय कराता हुआ बोला - “इनसे मिलो, यह मिस्टर भंडारी हैं। मेरे अच्छे मित्रों में से हैं। यह यूथ क्लब की स्थापना में इनका भारी सहयोग रहा है और मिस्टर भंडारी यह सुनील है जिसका मैंने आपसे जिक्र किया था ।”
“बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर।” - भंडारी सुनील के हाथ को थाम कर बोला।












