द्रविड़ और आर्य राजाओं की संघर्ष गाथा
कुमकुम- कुशवाहा कांत
लेखक अपने जीवन काल में कुछ ऐसी अविस्मरणीय, अमिट रचनाएँ लिख जाता है कि वह उसके सम्पूर्ण साहित्य का प्रतिनिधित्व करती प्रतीत होती हैं। कुछ रचनाएँ सूर्य की भांति होती है जिसके आलोक में अन्य सितारे(रचनाएं) दृष्टिगत नहीं होते।
कुशवाहा कांत मेरे प्रिय लेखक रहे हैं। इनके द्वारा लिखी गयी 35 रचनाओं में से तकरीबन बीस रचनाएँ मैंने पढ ली हैं। इनके कुछ उपन्यास अविस्मरणीय है तो कुछ विस्मरणीय भी हैं। किसी भी लेखक सभी रचनाएँ श्रेष्ठ नहीं होती लेकिन कुछ रचनाएँ श्रेष्ठतम भी होती हैं।
कुशवाहा कांत जी के 'लाल रेखा', 'विद्रोही सुभाष', 'आहुति' आदि वह रचनाएँ हैं जो इनके लेखन का प्रतिनिधित्व करती नजर आती हैं। इसी क्रम में एक और उपन्यास शामिल होता है वह है 'कुमकुम'।
आर्य और द्रविड़ राजाओं के युद्ध को आधार बना कर, इतिहास पर कल्पना का आवरण चढा कर रचा गया यह उपन्यास चाहे ऐतिहासिक नहीं है पर इतिहास के एक अध्याय का इतना रोमांचक वर्णन करता है कि सब जीवंत सा प्रतीत होता हैै।
कुमकुम- कुशवाहा कांत
लेखक अपने जीवन काल में कुछ ऐसी अविस्मरणीय, अमिट रचनाएँ लिख जाता है कि वह उसके सम्पूर्ण साहित्य का प्रतिनिधित्व करती प्रतीत होती हैं। कुछ रचनाएँ सूर्य की भांति होती है जिसके आलोक में अन्य सितारे(रचनाएं) दृष्टिगत नहीं होते।
कुशवाहा कांत मेरे प्रिय लेखक रहे हैं। इनके द्वारा लिखी गयी 35 रचनाओं में से तकरीबन बीस रचनाएँ मैंने पढ ली हैं। इनके कुछ उपन्यास अविस्मरणीय है तो कुछ विस्मरणीय भी हैं। किसी भी लेखक सभी रचनाएँ श्रेष्ठ नहीं होती लेकिन कुछ रचनाएँ श्रेष्ठतम भी होती हैं।
कुशवाहा कांत जी के 'लाल रेखा', 'विद्रोही सुभाष', 'आहुति' आदि वह रचनाएँ हैं जो इनके लेखन का प्रतिनिधित्व करती नजर आती हैं। इसी क्रम में एक और उपन्यास शामिल होता है वह है 'कुमकुम'।
आर्य और द्रविड़ राजाओं के युद्ध को आधार बना कर, इतिहास पर कल्पना का आवरण चढा कर रचा गया यह उपन्यास चाहे ऐतिहासिक नहीं है पर इतिहास के एक अध्याय का इतना रोमांचक वर्णन करता है कि सब जीवंत सा प्रतीत होता हैै।











