Saturday, 18 July 2026

733. लाल झरना- आरिफ मारहर्वी

होटल में खून
लाल झरना- आरिफ मारहर्वी

जून - 1972
हिंदी जासूसी उपन्यास साहित्य में आरिफ मारहर्वी साहब का नाम बडे़ अदब से लगभग लिया जाता है। आरिफ साहब ने पत्रिकाओं के दौर में जासूसी उपन्यास लिख कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करवायी थी‌, उन्होंने न केवल अपने वास्तविक नाम बल्कि Ghost writing में भी नाम कमाया और फिल्म क्षेत्र में भी अपनी कहानियों के कारण जाने गये। 
     आरिफ मारहर्वी साहब का एक छोटा सा जासूसी उपन्यास 'लाल झरना' पढा जो एक रोचक मर्डर मिस्ट्री है।

लाल झरना- आरिफ माहरर्वी

लाल झरना इस पहाड़ी क्षेत्र का एक मनोरम पर्यटन स्थल था, मगर यहाँ पर पर्यटन के लिए आने वाले अधिकांश लोग ज्यादा से ज्यादा साढ़े चार बजे तक यह जगह छोड़ देते थे, क्योंकि वापसी के लिए उन्हें अति कठिन मार्गों से गुजरना पड़ता था, और अन्धेरा हो जाने के कारण कई दुर्घटनायें भी हो चुकी थीं । (उपन्यास अंश)

   यह तो था लाल झरने का छोटा सा परिचय और कहानी का एक महत्वपूर्ण भाग इस झरने पर ही संपादित होता है और इसी कारण से उपन्यास कट नामकरण लाल झरना हो गया है। हालांकि उपन्यास नाम तर्कसंगत नहीं है, कथा अनुरुप नहीं है। 
अब समीक्षा से पूर्व हम उपन्यास के प्रथम पृष्ठ पर एक नजर डालते हैं।
            रतन ने ब्राण्डी का आखरी घूंट भरकर कोट की आस्तीन से होंठ साफ किए । मेज पर से अपना मोटा सा सिगार उठाकर सुलगाया । उसका इतना गहरा कश लिया कि यदि कोई सामान्य दिल गुर्दे का व्यक्ति सिगार का इतना गहरा कश ले लेता तो उसके फेंफड़े ही फट जाते। किन्तु रतन के चेहरे पर लेशमात्र भी असुविधा के चिन्ह न दिखाई दिए ।
          फिर वह दीवार की ओर बढ़ा और दीवार पर लटकी हुई बन्दूक उतारकर उसे खोला और उसकी नाल दरवाजे की रौशनी की ओर करके एक आँख बन्द करके दूसरी आँख उसने नाल से लगादी । फिर नाल के सुराख में से ही उसे एक चेहरा दिखाई दिया और उसने योंही नाल आँख से लगाए-लगाए सिगार को अधरों के बायें कोने में सरकाकर तीखे स्वर में कहा -
'क्या बात है रामसिंह ?'
'सरकार ।' रामसिंह भीतर आता हुआ बोला- 'क्या आप आज फिर शिकार पर जा रहे हैं।'
'हाँ जा रहे हैं क्यों...?'(लाल झरना, आरिफ माहरर्वी)
        रतन सिंह अपने क्षेत्र के जमींदार हैं, युवा है लेकिन हैं बिलकुल अकेले। बूढा नौकर रामसिंह ही उनका अभिभावक है। और अब तो रतन बूढे नौकर की बात भी नहीं सुनता। क्योंकि रतन का जीवन एक घटना ने बदल दिया था और वहीं घटना इसके जीवन की महत्वपूर्ण घटना थी। 
   वहीं लाल झरने पर रीता से हुयी मुलाकात रतन को बिलकुल ही बदल देती है। इतना बदल देती है कि रतन के नौकर भी इस बदलाव पर चकित हैं।
'यह मैं क्या देख रहा हूँ काका ?'
'ऐं'..।' रार्मासह चौंक पड़ा। फिर काँपते हुए स्वर में बोला- 'कायाकल्प, आश्चर्यमयी कायाकल्प ।'(पृष्ठ -61)
     वहीं होटल शांग्रीला में उपन्यास नायक CBI एजेंट कैसर हयात के साथ एक अजीब घटना घटित होती है। कैसर पर एक औरत को छेड़ने का आरोप लगता है और लोग कैसर को पीटने की कोशिश करते हैं। इसी होटल शांग्रीला में मिस्टर राजन अपनी पत्नी के साथ ठहरे हुये हैं।
एक रात जिसमें रतन का व्यवहार बदल जाता है।
उसी रात कैसर पर गलत आरोप लगता ।
और ठीक उसी रात होटल शांग्रीला में एक कत्ल होता है ।
  - किसका कत्ल हुआ ?
  - किसने कत्ल किया ?
  -  कत्ल क्यों हुआ ?
 हालांकि किसी भी कथा में यह महत्वपूर्ण तथ्य होते हैं लेकिन प्रस्तुत उपन्यास में कुछ तथ्य पाठक को पता हैं और उपन्यास जासूस को उनकी खोज करनी है और कुछ तथ्य पाठक को खोजने हैं। 
इसी खोज में कहानी आगे बढती है और एक विचार बिंदू पर खत्म हो जाती है। यह विचार उभरता है जासूस कैसर हयात के मन में कि किसी कातिल ठहराये, क्या यह हत्या सही थी ?
आखिर कोई हत्या सही तो नहीं ठहरायी जा सकती और वह भी CBI का एक अधिकारी ऐसा कर भी नहीं सकता । खैर, यह तो एक विचार था।
कथानायक का एक संवाद - '
'मेरा असली नाम है कैसर हयात और मेरा सम्बन्ध सी. बी. आई. से है।'
 निष्कर्ष:- आरिफ मारहर्वी साहब द्वारा रचित लाल झरना एक मर्डर मिस्ट्री रचना है। कहानी चाहे छोटी है और कहानी स्मरणीय भी नहीं है लेकिन कथानक एक बार पढा जा सकता है। उपन्यास कहीं से भी पाठक को नीरस प्रतीत नहीं होगा।

उपन्यास-  लाल झरना
लेखक -   आरिफ मारहर्वी
संस्करण-  जून- 1972
पृष्ठ-         138
प्रकाशक- पी.पी. बी. जर्नल्स,दिल्ली 
पत्रिका-  जासूसी पंजा सीरीज

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