Saturday, 25 July 2026

734. अंधेरे का शिकार- इब्ने सफी

कहानी खतरनाक केकड़े की
अंधेरे का शिकार- इब्ने सफी

लोकप्रिय जासूसी साहित्य के मजबूत स्तम्भ इब्ने सफी साहब ने बहुसंख्यक उपन्यासों की रचना की है और उन उपन्यासों में अविस्मरणीय पात्रों को पाठकों के मन मस्तिष्क में बैठाया है। इनके इमरान,विनोद-हमीद, अलफांसे, सिहंगी जैसे पात्र आज भी याद हैं।
इ‌नके अतिरिक्त एक और पात्र है राजेश । और राजेश सीरीज का उपन्यास पहली बार पढने को मिला है और यह उपन्यास है 'अंधेरे का शिकार ।
ध्यान रहे जनप्रिय लेखक ओमप्रकाश शर्मा जी का राजेश प्रस्तुत उपन्यास के नायक राजेश से पूर्णतः भिन्न है‌, दोनों में मात्र नाम की समानता है।

अंधेरे का शिकार - इब्ने सफी


  समीक्षा से पूर्व एक नजर कहानी की पृष्ठभूमि पर- यह कहानी है खूफिया विभाग के चीफ को खत्म करने की ।
और अब एक नजर उपन्यास के प्रथम पृष्ठ पर-
अँधेरे का शिकार
           सीक्रेट सर्विस का एक सदस्य होने की हैसियत से 'नायक' उस मिली हुई आज्ञा का पालन कर रहा था मगर सच्ची बात यह थी कि उसके दिल पर आरे चल रहे थे ।
       बात थी भी आरे चलने की क्योंकि नायक का यह एक प्रकार से स्वभाव सा हो गया था कि जोली को किसी के भी साथ देखकर उसके माथे पर शिकनें पड़ जाती थीं और यदि कभी वह जोली को राजेश के साथ देख लेता था तो उसका खून खौलने लगता था और उसका यही दिल चाहने लगता था कि वह राजेश को गोली मार दे। इसी मामले को लेकर कई बार राजेश से उसकी झड़प भी हो चुकी थी मगर राजेश के बदले खुद उसे ही अपमानित होना पड़ा था- कई बार तो वह राजेश के हाथो पिट भी चुका था मगर फिर भी अपना स्वभाव नहीं बदला था ।
     इस के साथ ही साथ यह भी मजा था कि जोली उसे किसी भी प्रकार का लिफ्ट नहीं देती थी। जब भी वह उसके सामने प्रेम प्रदर्शन करना चाहता जोली उसे फटकार कर रख देती थी मगर फिर भी वह अपनी आदत से बाज नहीं आता था ।
इस समय भी कुछ ऐसी ही परिस्थिति थी। एक मेज पर जोली और राजेश बैठे आपस में दिल खोल कर हंस बोल रहे थे और नायक दूसरी मेज पर बैठा मन ही मन जल भुन रहा था मगर दुख यह था कि वह कुछ कर नहीं सकता था । 
सीक्रेट सर्विस के चीफ पवन ने उसे दो आदेश दिये थे। एक तो यह था कि वह खामोशी के साथ राजेश और जोली पर नजर रखे और दूसरा आदेश यह था कि साथ ही साथ यह भी देखता रहे कि राजेश और जोली में दूसरा कोई तो दिलचस्पी नहीं ले रहा है।

(अंधेरे का शिकार- इब्ने सफी, प्रथम पृष्ठ से)
     खुफिया विभाग को सूचना मिली थी कि होटल में एक संदिग्ध व्यक्ति के पास एक ब्रीफकेस है जो जिसमें राष्ट्र विरोधी दस्तावेज है और इस तरह खुफिया विभाग ने होटल में अपने आदमी तैनात कर दिये ।
   सब कुछ योजना अनुसार ही हो रहा था। यहां तक की वह ब्रीफकेस भी संदिग्ध व्यक्ति से झीन लिया गया । और यहीं से कहानी में वह मोड़ आ गया जिसकी कल्पना खुफिया विभाग ने भी नहीं की थी।
"वहीं किसी विचित्र प्रकार के जानवर ने मुझ पर आक्रमण किया या और ब्रीफकेस मेरे हाथ से निकल गया था।"
"जानवर ने हमला किया था?"
"जी हाँ।"
"भला होटल में जानवर कहाँ से आ गया था ?"
"मैं पहले ही कह चुका हूँ श्रीमान जी कि फरार होने वाले मार्ग पर अन्धेरा था इसलिये मैं देख नहीं सका था कि वास्तव में वह क्या था।"
"तो फिर तुमने किसी जानवर का हवाला क्यों दिया था ?"
"इसलिये श्रीमान जी कि मुझे ऐसा ही लगा था जैसे कोई बहुत बड़ा केकड़ा मुझ पर झपट पड़ा हो ।"

    और पाठक मित्रो यह सच भी है क्योंकि इस उपन्यास में एक खतरनाक केकड़ा है जो अपने दुश्मनों को निर्मम मौत देता है । लेकिन कौन विश्वास करेगा की आदमी से बड़ा कोई केकड़ा हो सकता है । मदन ने अपने चीफ पवन और साथी राजेश को भी केकडे़ के विषय में बताया- "वह एक बहुत बड़ा केकड़ा मालूम हुआ था- उसने मुझे अपनी लम्बी लम्बी भुजाओं में जकड़ लिया था।"(पृष्ठ- 33)
     वहीं नायक और जोली का अपहरण हो जाता है और उनसे खुफिया विभाग के चीफ पवन के विषय में जानकारी ली जाती है। हालांकि खुफिया विभाग के सदस्य अपने चीफ पवन के विषय में नहीं जानते वहीं अपराधी वर्ग राजेश पर पवन होने का संदेह व्यक्त करता है और राजेश का कहना है वह तो प्राइवेट रूप से पवन के लिए काम करता है।।
   अब एक तरफ जहां अपराधी चीफ पवन को तलाश रहा था वहीं अपराधी जासूसवर्ग के सदस्यों को एक-एक कर के अपहृत कर रहा था। 
वहीं राजेश अपने बॉडीगार्ड मेकफ के साथ अपने सदस्यों को तलाश ही रहा था वहीं उसे अपराधी का पता भी लगाना था और इसलिए वह दिन रात संघर्षरत था ।
   वहीं संयोग से उसे एक व्यक्ति का साथ मिला और राजेश का पलड़ा भारी होता गया। 
"और अब तुमको मुझे इन कठिनाइयों से निकालना है।"
"आखिर वह लोग चाहते क्या हैं ?"- राजेश ने पूछा
"वह पवन को तलाश करके मार डालना चाहते हैं" लिजी ने कहा ।

और इसी लिजी के सहयोग से राजेश धीरे-धीरे अपने कार्य में सफल होता गया और अपराधियों को बेनकाब कर दिया।
संवाद:- 
"यह तुम्हारे सौन्दर्य की प्रशंसा कर रही है-" मेकफ ने कहा-"वैसे तुमने भी एक बार कहा था कि- कन्फ्युशस का कहना है कि जब कोई औरत किसी मर्द के सौन्दर्य की प्रशंसा उसके मुख पर करे तो उस मर्द को यह समझ लेना चाहिये कि वह औरत उसे अन्धे कुएं में ढकेलना चाहती है।"
निष्कर्ष:- इब्ने सफी साहब द्वारा लिखित 'अंधेरे का शिकार' राजेश सीरीज का उपन्यास है। जिसमें खुफिया विभाग के चीफ को खत्म करने की कोशिश करते अपराधियों की कहानी है। कहानी अत्यंत सामान्य है। 
राजेश सीरीज का मेरे द्वारा पढा गया यह प्रथम उपन्यास है लेकिन न तो कहानी में कुछ विशेष है न ही कथानायक में कोई विशेष बात है। हां, उपन्यास में केकड़े की भूमिका अच्छी है पर तर्कसंगत वह भी नहीं है‌।
  उपन्यास में संयोग से ही कहानी आगे बढती है। जो एक जासूसी कथा के लिए तो बिलकुल सही नहीं है।।
इब्ने सफी साहब का यह उपन्यास बस एक बार पठनीय है।

उपन्यास- अंधेरे का शिकार
लेखक-    इब्ने सफी
पृष्ठ-        148
प्रकाशन-  जासूसी दुनिया प्रकाशन, इलाहाबाद
अंक -       295

1 comment:

  1. पहली दफा उनके राजेश नाम के किरदार के विषय में पता चला। वैसे मैंने सुना था उनके किरदारों के नाम हिंदी अनुवाद के दौरान बदल दिए जाते थे? हार्पर वालों ने असल नाम के साथ उनके उपन्यास निकाले थे। ऐसे में हो सकता है राजेश का नाम भी कुछ और हो। उपन्यास का शीर्षक तो उत्सुकता जगाने वाला है फिर भले ही उपन्यास खुद साधारण हो।

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